27/02/2026
गुर्जरों का गोत्र उत्पत्ति सिद्धांत -
1- उपाधि के नाम पर (गोरसी, मीरो,नून ,रावत,
चंदन,गुजान,अहमान, देबड़े, दीप, कसाने, खटाने,
गुजराल, अधाना,अन्नान, गुरसुर, दोराता) प्रथम
शताब्दी
से तृतीय शताब्दी के बीच ,
2- हूण-( हूण, बारहट, लोहमोड, पंवार, ख़ूबड, दौड़े,
हर हूण)
3- चेची- ( चेची ,नेकाडी, चौहान अजमेर वाले,)
4- खटाना- (खटाना,डोई, डोयला सम्भवतः)
5- स्थान सूचक - कपीसा से कपासिया ,नागर,
खतलान - खोटन से खटाणा ,लाहौर से लोर,रेव,
वन गूजर , फागी से फागणा, भढानक से भढाणा
जागल देश से जांगल इत्यादि
6- बगड़ावत -गोत्र चौहान, रावल,
7- गुर्जर प्रतिहार- सोलंकी, चंदेल, पढियार- परिहार,
बडगूजर, परमार, इत्यादि
8- बढ़ गूजर- सिसोदिया, पंवार, तंवर ,यादव (ये
मालवा में हैं ) सिकरवार ,खटाना (समथर के
राजा) ,घुरैया (महाराज श्योपत सिंह के वंशज)
9- व्यवसाय सूचक-किसान कुल से कुर्मी चंदेल ,कुर्मी
घुरैया, हुन ,विहुन्न, परिहार, प्रतिहार,मोरे ,दूधिया,
बक्करवाल,
10-बद्दप्पन बाले-खूबड,लोहमोड, इत्यादि
11 अतिरिक्त बचे गुर्जरों के किसी भी गोत्र का ऋषि
गोत्र से संबंध ही नही है सिर्फ रिश्ता है तो वो है
दौड़े गुर्जरों ,और कुर्मी जिनको गुर्जरों ,पासी,से
काट दिया गया उनमे 1100 के बाद ऋषिक गोत्र
मिलने लगे थे ।
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तीसरा सबसे बड़ा बटवारा सूर्यवंशी और चंद्र वंशी के नाम पर 700-800 ईस्वी में किया गया।।इससे पहले सर्व धर्मार्थ थे राजा !!!
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चौथा सबसे प्रमुख्य बटवारा हुआ जिसमें कुछ वीरों की उत्पत्ति वाजपेयी, विप्र, खजर ,से कराई गई कुछ की लड़कियों से विवाह किये !!
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सबसे साजिशन बटवारा अग्निकुंड उत्पत्ति सिद्धान्त जिसको महान दिग्गज चंद्रवरदाई और धनपाल ने जाने कितने साल बाद बताया था !!
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कुछ लोगों को उत्पत्ति छिपाने के लिए रुपये दिए गए और लिखने वाले ने खजर गुर्जर से न लिखते हुए खजर ब्राह्मण से उत्पत्ति लिख दी है !!
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डॉ. दशरथ शर्मा के दिये हर एक संदर्भ को उपयोग करने से भी दिमाग खुद को गद्दार ही कहेगा !!
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डॉ दसरथ शर्मा खजर नामक ब्राह्मण विदेशी जाति को नही बता पाए, जिससे चौहानो की उत्पत्ति है लेकन खजर गुर्जर थे ये सेकड़ो कह गए!!
सारगर्भित विचार आमंत्रित हैं !!
जय जय वीरों की !!!
Veer Gurjar History.....
वीर गुर्जर इतिहास की जानकारी !!!!