17/05/2026
वैज्ञानिकों का कहना है कि सुपर अल-नीनो अब सिर्फ इतिहास की चेतावनी नहीं रह गया है. 1877-78 में दुनिया ने जिस सबसे शक्तिशाली अल-नीनो का सामना किया. उसने वैश्विक सूखा, फसलें नष्ट होना, अकाल और बीमारियों का भयानक सिलसिला शुरू कर दिया था. आज 2026 में फिर वही स्थिति बन रही है.
प्रशांत महासागर तेजी से गर्म हो रहा है. समुद्र की गहराई में तापमान इतना बढ़ रहा है कि कुछ पूर्वानुमान 1877 वाले रिकॉर्ड को भी तोड़ने की बात कर रहे हैं. लेकिन इस बार अंतर यह है कि 1877 में दुनिया ठंडी थी, जबकि 2026 पहले से ही गर्म है. यानी ज्यादा आपदों और तबाही की आशंका.
1876 से 1878 के बीच अल-नीनो ने पूरी दुनिया को तबाह कर दिया. भारत, चीन, ब्राजील और अफ्रीका के बड़े हिस्सों में भयंकर सूखा पड़ा. मानसून पूरी तरह फेल हो गया. फसलें सूख गईं. पशु मर गए और लाखों-करोड़ों लोग भूख से तड़प-तड़प कर मारे गए. अनुमानों के अनुसार उस समय दुनिया की आबादी का 2-3 प्रतिशत यानी 3 से 6 करोड़ लोगों की मौत हुई. कई विशेषज्ञों का अनुमान 5 करोड़ मौतों का है...