27/04/2026
गोंडा में दर्दनाक घटना: 77% अंक आने पर भी छात्रा ने उठाया खौफनाक कदम गोंडा उत्तर प्रदेश
गोंडा जिले के देहात कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत भीटी भदवाल गांव से एक बेहद मार्मिक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। हाईस्कूल परीक्षा परिणाम से निराश एक छात्रा ने जहरीला पदार्थ खाकर आत्मह*त्या कर ली। इस घटना ने पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ा दी है और परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
मृतका की पहचान 21 वर्षीय रूपा गुप्ता के रूप में हुई है, जो श्री कुंज बिहारी स्मारक इंटर कॉलेज, सुभागपुर पंडरी कृपाल की छात्रा थी। रूपा ने हाल ही में घोषित हाईस्कूल परीक्षा में 600 में से 464 अंक प्राप्त किए थे, जो लगभग 77.33 प्रतिशत है। कई विषयों में उसे ए और बी ग्रेड भी मिले थे, लेकिन वह अपने तय लक्ष्य 80 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल नहीं कर सकीं, जिससे वह गहरे मानसिक तनाव में चली गईं।
परिजनों के अनुसार, परिणाम आने के बाद से ही रूपा काफी उदास रहने लगी थीं। उन्होंने अपनी मां से कहा था, “मम्मी मैं फेल हो गई हूं, अब नहीं पढ़ूंगी।” जबकि हकीकत यह थी कि उसने अच्छे अंक हासिल किए थे और आगे इंटरमीडिएट तक पढ़ाई कर नौकरी करने का सपना देख रही थी।
गुरुवार देर रात रूपा ने घर के बरामदे में जहरीला पदार्थ खा लिया। इसी दौरान उनकी भाभी ने उन्हें गिरते हुए देखा और तुरंत परिवार के अन्य सदस्यों को सूचना दी। आनन-फानन में परिजन उसे गोंडा मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे, लेकिन रास्ते में ही उसकी हालत बिगड़ती चली गई। बताया जाता है कि रास्ते में रूपा ने अपनी भाभी से हाथ जोड़कर माफी भी मांगी। अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
रूपा अपने तीन भाइयों में सबसे छोटी थी। डेढ़ वर्ष की उम्र में ही उसके पिता राधेश्याम गुप्ता का निधन हो गया था। इसके बाद मां सुमिरता और भाइयों ने मिलकर उसका पालन-पोषण और पढ़ाई कराई। परिवार ने बड़ी उम्मीदों के साथ उसे पढ़ाया-लिखाया था।
इस घटना से परिवार में चल रही खुशियां भी मातम में बदल गईं। 26 अप्रैल को रूपा के भाई का गौना कार्यक्रम होना था, जिसकी तैयारियां जोरों पर थीं, लेकिन इस हादसे ने पूरे घर को गम में डुबो दिया।
सूचना मिलते ही देहात कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पंचनामा भर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। कोतवाल शमशेर बहादुर सिंह ने बताया कि प्रथम दृष्टया मामला परीक्षा परिणाम से निराश होकर आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है, हालांकि पुलिस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है।
यह घटना एक गंभीर सामाजिक संदेश भी देती है कि परीक्षा के अंकों को जीवन का अंतिम सत्य मान लेना कितना खतरनाक हो सकता है। जरूरत है कि परिवार और समाज मिलकर बच्चों को मानसिक रूप से मजबूत बनाएं और उन्हें यह समझाएं कि असली सफलता जीवन में आगे बढ़ते रहने में है, न कि केवल अंकों में।