दिल को छू लेने वाली कहानियां

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दिल को छू लेने वाली कहानियां vinod Kumar saw

01/12/2024

Kumar saw

एक 12 साल के लड़के ने अपनी माँ से पूछा, "माँ, मेरे 13वें जन्मदिन पर मुझे क्या उपहार दोगी?"
माँ ने मुस्कुराते हुए कहा, "जब तेरा 13वां जन्मदिन आएगा, तो अलमारी के ऊपर देख लेना। उसमें तेरा गिफ्ट रखा होगा। अभी बता दूंगी, तो गिफ्ट का मजा नहीं रहेगा।"
कुछ दिनों बाद, लड़का अचानक गंभीर रूप से बीमार पड़ गया। माँ-पिताजी उसे अस्पताल ले गए। डॉक्टरों ने जांच के बाद बताया कि लड़के के दिल में छेद है और वह ज्यादा से ज्यादा चार महीने ही जीवित रह पाएगा।
लड़के का इलाज शुरू हुआ। परिवार ने हर संभव कोशिश की। वक्त बीतता गया, और एक साल बाद लड़का ठीक होकर घर लौटा। लेकिन घर पहुंचते ही उसने पाया कि उसकी माँ अब इस दुनिया में नहीं रही।
लड़का रोने लगा। उसे माँ की वह बात याद आई कि उसका उपहार अलमारी के ऊपर रखा है। उसने जल्दी से अलमारी खोली और एक डिब्बा निकाला। डिब्बे में एक चिट्ठी और कुछ खास सामान रखा था। उसने कांपते हाथों से चिट्ठी खोली और पढ़ने लगा:
"मेरे प्यारे बेटे, अगर तुम ये चिट्ठी पढ़ रहे हो, तो इसका मतलब है कि तुम स्वस्थ हो और ठीक हो गए हो। जब डॉक्टर ने मुझे बताया था कि तुम्हारे दिल में छेद है, तो मेरी दुनिया उजड़ गई थी। मैंने उसी दिन तय कर लिया था कि मैं तुम्हें अपना दिल दूंगी।
याद है, एक दिन तुमने मुझसे पूछा था कि तुम्हारे 13वें जन्मदिन पर तुम्हें क्या गिफ्ट मिलेगा? बेटा, मेरा दिल ही तुम्हारा गिफ्ट है। इसे संभालकर रखना। यह मेरा आखिरी प्यार और आशीर्वाद है। तुम्हें हमेशा खुश और सलामत देखना मेरी सबसे बड़ी ख्वाहिश है।
हैप्पी बर्थडे, मेरे लाल।
तुम्हारी माँ।"*
लड़का फूट-फूटकर रोने लगा। उसे अब एहसास हुआ कि उसकी माँ ने उसे बचाने के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी थी।
यह कहानी केवल एक माँ के प्यार की नहीं, बल्कि उसकी निस्वार्थ भावना और त्याग की है। आज की दुनिया में, मुश्किलों का हल ढूंढने वाले लोग कम हो गए हैं, और शायद इसलिए, अब घर से कोई माँ के पैर छूकर नहीं निकलता। माँ का प्यार दुनिया में सबसे अनमोल और निस्वार्थ होता है। 🌹
"माँ का दिल सिर्फ धड़कता नहीं, बल्कि अपने बच्चों की खातिर हर बलिदान देने को तैयार रहता है।"
सच्चे मन से 🔱🚩" हर हर महादेव '' लिखने वाले की सारी इछा पूरी होगी !

Ram Ram

04/11/2024

पत्नी का शक!
शादी के 3 साल हुए थे और 1 दिन पत्नी के मन में ख्याल आया, क्या होगा अगर मैं अपने पति को छोड़कर चली जाऊं?
पति का रिएक्शन क्या होगा? फिर वह क्या करेगा?

इसी विचार के चलते पति की परीक्षा लेने के लिए उसने एक चिट्ठी लिखी.. उसमें लिखा, "आपके साथ रहकर बोर हो गई हूं। मुझे अब इस गृहस्थी से कोई लगाव नहीं है। मैं तुम्हारे साथ एक पल भी नहीं रह सकती, इसलिए मैं तुम्हें और इस घर को छोड़ कर जा रही हूं।"

उसने वो चिट्ठी टेबल पर रखी और खुद बेड के नीचे जाकर छुप गई!

थोड़ी देर बाद पति ऑफिस से घर लौटा। उसे घर में अपनी पत्नी कहीं नहीं दिखी।
फिर उसकी नजर टेबल पर रखी चिट्ठी पर पड़ी। चिट्ठी को उठाकर उसने पढ़ी। थोड़ी देर तक बिल्कुल शांत रहा, कुछ नहीं बोला।

फिर उसने उसी चिट्ठी में पीछे कुछ लिखा और अपने मोबाइल में गाने बजा कर जोर-जोर से नाचने लगा!

फिर उसने अपने कपड़े बदले और अपनी एक फ्रेंड को फोन लगाया और कहने लगा... "मैं आज आजाद हो गया हूं!!
मेरी बीवी को आखिरकार ये एहसास हो गया कि वह मेरे काबिल नहीं है.. इसलिए वह खुद ही मुझे छोड़कर हमेशा के लिए चली गई है और मैं अब आजाद हो गया हूं। तुमसे अभी सामने वाले बगीचे में मिलना चाहता हूं। फटाफट वहां आकर मुझे मिलो..."

ऐसा कहकर पति घर के बाहर निकल गया!

दोनों आंखों में आंसू की धारा लिए पत्नी बेड के नीचे से बाहर निकली।
उसके हाथ थरथर कांप रहे थे.. कांपते हाथों से उसने टेबल पर रखी वो चिट्ठी उठाई और पढ़ी जिसमें पति ने लिखा था...

"अरे पगलेट! तुम्हें तो ठीक से छुपना भी नहीं आता! बेड के नीचे से तुम्हारे पैर दिख रहे हैं।
तुम जल्दी से गरमा गरम चाय बनाओ, मैं सामने की दुकान से बिस्किट लेकर आता हूं।"

"मेरे जीवन में खुशी तुम्हारे आने से है। आधी खुशी तुझे सताने में है और आधी तुझे मनाने में।
आखिर लास्ट में तो हम दोनों ही साथ रहेंगे ना!

कभी हम झगड़े, एक दूसरे की टांग खींचे। एक दूसरे को बुरा-भला कहे, फिर भी एक-दूसरे पर दादागिरी करने के लिए लास्ट में तो हम दोनों ही रहेंगे ना!

जो बोलना है बोलो, जो करना है करो। जब चश्मे गुम जाएंगे तब एक-दूसरे के चश्मे ढूंढने के लिए लास्ट में तो हम दोनों ही रहेंगे ना!

कभी मैं रूठूं तो तुम मुझे मनाना, कभी तुम रूठो तो मैं तुझे मना लूंगा.. एक-दूसरे को लाड लड़ाने के लिए आखिर में तो हम दोनों ही होंगे ना!

जब नजर कम आएगा, सुनाई भी कम देगा तब एक-दूसरे में एक-दूसरे को ढूंढने के लिए हम दोनों ही होंगे ना!

जब घुटनों में दर्द बढ़ जाएगा, कहीं आना-जाना भी बंद हो जाएगा तब एक-दूसरे के नाखून काटने के लिए तो हम दोनों ही होंगे ना!

'मेरे रिपोर्ट तो बिल्कुल क्लियर है, आई एम ऑल राइट।' बोल कर एक-दूसरे को चिढ़ाने के लिए आखिर तो हम दोनों ही होंगे ना!

जब हम दोनों का साथ छूटेगा, अंतिम विदाई होगी.. तब एक-दूसरे को माफ करने के लिए आखिर हम दोनों ही होंगे ना!

आखिर में सिर्फ हम और सिर्फ हम दोनों ही होंगे ना!!!"

कहानी खत्म होते-होते बीवी का रो-रो कर बुरा हाल हो गया।
उसे पता चल गया कि उसका पति उससे कितना ज्यादा प्यार करता है।
दोस्तो कहानी पसन्द आई हो तो एक लाइक और अपने दोस्तों से शेयर करना मत भूलना !

04/11/2024

. # #◆सबेरे वाली गाड़ी◆ # #
पत्नी के अंतिम संस्कार व तेरहवीं के बाद रिटायर्ड पोस्टमैन मनोहर गाँव छोड़कर मुम्बई में अपने पुत्र सुनील के बड़े से मकान में आये हुए हैं। सुनील बहुत मनुहार के बाद यहाँ ला पाया है। यद्यपि वह पहले भी कई बार प्रयास कर चुका था किंतु अम्मा ही बाबूजी को यह कह कर रोक देती थी कि 'कहाँ वहाँ बेटे बहू की ज़िंदगी में दखल देने चलेंगे। यहीं ठीक है। सारी जिंदगी यहीं गुजरी है और जो थोड़ी सी बची है उसे भी यहीं रह कर काट लेंगे। ठीक है न!'

बस बाबूजी की इच्छा मर जाती। पर इस बार कोई साक्षात अवरोध नहीं था और पत्नी की स्मृतियों में बेटे के स्नेह से अधिक ताकत नहीं थी इसलिए मनोहर बम्बई आ ही गए हैं।

सुनील एक बड़ी कंस्ट्रक्शन कम्पनी में इंजीनियर है। उसने आलीशान घर व गाड़ी ले रखी है।

घर में घुसते ही मनोहर ठिठक कर रुक गए। गुदगुदी मैट पर पैर रखे ही नहीं जा रहे हैं उनके। दरवाजे पर उन्हें रुका देख कर सुनील बोला - "आइये बाबूजी, अंदर आइये।"
- "बेटा, मेरे गन्दे पैरों से यह चटाई गन्दी तो नहीं हो जाएगी।"
- "बाबूजी, आप उसकी चिंता न करें। आइये यहाँ सोफे पर बैठ जाइए।"

सहमें हुए कदमों में चलते हुए मनोहर जैसे ही सोफे पर बैठे तो उनकी चीख निकल गयी - अरे रे! मर गया रे!

उनके बैठते ही नरम औऱ गुदगुदा सोफा की गद्दी अन्दर तक धँस गयी थी। इससे मनोहर चिहुँक कर चीख पड़े थे।

चाय पीने के बाद सुनील ने मनोहर से कहा - "बाबूजी, आइये आपको घर दिखा दूँ अपना।"

- "जरूर बेटा, चलो।"
- "बाबू जी, यह है लॉबी जहाँ हम लोग चाय पी रहे थे। यहाँ पर कोई भी अतिथि आता है तो चाय नाश्ता और गपशप होती है। यह डाइनिंग हाल है। यहाँ पर हम लोग खाना खाते हैं। बाबूजी, यह रसोई है और इसी से जुड़ा हुआ यह भण्डार घर है। यहाँ रसोई से सम्बंधित सामग्री रखी जाती हैं। यह बच्चों का कमरा है।"

- "तो बच्चे क्या अपने माँबाप के साथ नहीं रहते?"
- बाबूजी, यह शहर है और शहरों में मुंबई है। यहाँ बच्चे को जन्म से ही अकेले सोने की आदत डालनी पड़ती है। माँ तो बस समय समय पर उसे दूध पिला देती है और उसके शेष कार्य आया (बेबीसिटर) आकर कर जाती है।"

थोड़ा ठहर कर सुनील में आगे कहा,"बाबूजी यह आपकी बहू और मेरे सोने का कमरा है... और इस कोने पर यह गेस्ट रूम है। कोई अतिथि आ जाय तो यहीं ठहरता है। यह छोटा सा कमरा पेट्स के लिए है। कभी कोई कुत्ता आदि पाला गया तो उसके लिए व्यवस्था कर रखी है।"

सीढियां चढ़ कर ऊपर पहुँचे सुनील ने लम्बी चौड़ी छत के एक कोने में बने एक टीन की छत वाले कमरे को खोल कर दिखाते हुए कहा - "बाबूजी यह है घर का स्टोर रूम (कबाड़खाना )। घर की सब टूटी फूटी और बेकार वस्तुएं यहीं पर एकत्र कर दी जाती हैं। और दीवाली- होली पर इसकी सफाई कर दी जाती है। ऊपर ही यह एक बाथरूम और टॉइलट भी बना हुआ है।"

मनोहर ने देखा कि इसी कबाड़ख़ाने के अंदर एक फोल्डिंग चारपाई पर बिस्तर लगा हुआ है और उसी पर उनका झोला रखा हुआ है। मनोहर ने पलट कर सुनील की तरफ देखा किन्तु वह नीचे जा चुका था।

मनोहर चारपाई में बैठ कर सोचने लगे कि 'कैसा यह मकान है जहाँ भविष्य में पाले जाने वाले पशु के लिए कमरे का विधान कर लिया जाता है किंतु बूढ़े माँबाप के लिए नहीं। इनके लिए तो कबाड़ का कमरा ही उचित आवास बना है। नहीं.. अभी मैं कबाड़ नहीं हुआ हूँ। सुनील की माँ की सोच बिल्कुल सही था। मुझे यहाँ नहीं आना चाहिए था।'

अगली सुबह जब सुनील मनोहर के लिए चाय लेकर ऊपर गया तो कक्ष को खाली पाया। बाबू जी का झोला भी नहीं था वहाँ। उसने टॉयलेट व बाथरूम भी देख लिये किन्तु बाबूजी वहाँ भी नहीं थे। वह झट से उतर कर नीचे आया तो पाया कि मेन गेट खुला हुआ है। उधर मनोहर टिकिट लेकर गाँव वापसी के लिए सबेरे वाली गाड़ी में बैठ चुके थे। उन्होंने कुर्ते की जेब में हाथ डाल कर देखा कि उनके 'अपने घर' की चाभी मौजूद थी। उन्होंने उसे कस कर मुट्ठी में पकड़ लिया। चलती हुई गाड़ीमें उनके चेहरे को छू रही हवा उनके इस निर्णय को और मजबूत बना रही थी।
== समाप्त ==

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