13/06/2018
रेलवे की आर्थिक स्थिति में लगातार आ रही गिरावट के मद्देनजर रेलवे बोर्ड में 11000 अतिरिक्त पदों को समाप्त करने का निर्णय किया है ऐसा माना जा रहा है कि इस कदम से न केवल रेलवे को वित्तीय लाभ होगा बल्कि आमजन को अधिक सहूलियत मिल सकेंगी।
लेकिन बेरोजगारी के इस दौर में रोजगार के अवसरों में यह कटौती करने से अन्य विभागों भी ऐसा करने को प्रेरित हो गये तो यह एक बड़ी समस्या बन सकती है।
रेलवे की वित्तीय गिरावट को समझने के लिए उसका गहनता से विश्लेषण करना आवश्यक है।
यह सत्य है कि अतिरिक्त पदों के कारण अनावश्यक वित्तीय बोझ था परंतु 11000 पदों को खत्म करने मात्र से वित्तीय स्थिति में सुधार हो जाएगा इसकी संभावनायें बहुत कम हैं। तेरह लाख से अधिक कर्मचारियों वाले इस उपक्रम में यह सुधार ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो सकता है अच्छा होता कि अन्य समस्याओं और उनके उपायों पर भी गौर किया जाता।
पहला, रेलवे के वित्तीय घाटे के लिए कई कारण जिम्मेदार हैं मसलन फ्री सेवा यात्रा करने वाले पर लगाम लगाना एक जरूरी तत्व है। आज रेलगाड़ियों में निगरानी की स्थिति बदतर है इसी का लाभ उठाकर तमाम लोग रोजाना बिना टिकट यात्रा करते हैं जिससे न केवल रेलगाड़ियों की स्थिति खराब होती है बल्कि रेलवे को अभीष्ट राजस्व नहीं मिल पाता और यात्रियों को हुई असुविधा की क्षतिपूर्ति मुश्किल होती है।लिहाजा ट्रेनो मे टिकट चैकिंग की नयी प्रणाली विकसित करने की आवश्यक्ता है।
दूसरा, भारत में स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत स्वच्छता के दायरे को लगातार बढ़ाया जा रहा है लेकिन एक सबसे महत्वपूर्ण स्थान रेलगाड़ी और रेलवे स्टेशन दोनों में इसका कुछ खास प्रभाव नहीं दिख रहा है। ट्रेनों और रेलवे स्टेशन में गंदगी भरी पड़ी रहती है शौचालय हफ्तों, महीनो साफ नही होते है ऐसी स्थिति से निपटने हेतु स्वच्छ भारत अभियान मे इस क्षेत्र का भी समावेश करना आवश्यक है।
तीसरा, प्रत्येक यात्री यह अपेक्षा रखता है कि उसे यात्रा के दौरान कम से कम औसत दर्जे की सहूलियते मिलनी चाहिये परंतु इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जाता फटी वर्थ , टूटी खिड़की, निष्क्रीय चार्जिग प्लग ,भोजन की खराब गुणवत्ता, शौचालय की बदतर स्थिति जैसे तमाम कारण है जिसके कारण लोगों में रेल असुविधा के प्रति रोष रहता है।
चौथा, ट्रेनों की लेटलतीफी से लोगों को तमाम नुकसान होते हैं कई लोगों की जिंदगी का महत्वपूर्ण फैसला होता है जैसे नौकरी के लिए जाना, इंटरव्यू देने जाना, फ्लाइट पकड़ना या परीक्षा देने जाना जैसे संवेदनशील मौकों पर तब गहरा आघात महसूस होता है जब ट्रेन लेट हो जाती है। और फिर इसकी भरपाई एवं जिम्मेदारी रेलवे नहीं लेता लिहाजा लेटलतीफी के मामले में रेलवे को जमकर कोसा जाता है अच्छा होगा कि रेलवे ट्रेक की मरम्मत कर एवं मार्ग दोहरीकरण के विकल्पों से ट्रेन की समयानुसार सेवा बहाल की जाती और राजस्व बढ़ाया जाता।
पांचवा, ट्रेनों मे सुरक्षा की गारंटी कोई नही देता हमेशा से ट्रेनों में चोरी की घटनाएं आम रही है प्रतिदिन ट्रेनों में हजारों चोरियां होती है जिससे लोग परेशान होते हैं। क्योकि पूरी ट्रेन मात्र 2-4 सिपाहियों के भरोसे रहती है ऐसे समय में आवश्यक है कि रेलवे में सुरक्षा गार्ड के पदों पर भर्ती की जाए ताकि रोजगार और यात्री सुरक्षा के प्रति रेलवे की प्रतिबद्धता जाहिर हो।
छठा, डिजिटल इंडिया कार्यक्रम का दायरा रेल परिवहन में भी बढ़ाना होगा ट्रेन की टिकट के लिए एकल खिड़की पर लगने वाली लंबी कतार को कम करने हेतु ऑनलाइन टिकट व्यवस्था शुरू किया जाना चाहिए जिसे ट्रेन रनिंग स्टेटस के सर्वर से जोड़कर ऐसी युक्ति विकसित की जानी चाहिए ताकि आसानी से टिकट प्राप्त किया जा सके।
कुल मिलाकर सरकार का यह फैसला आंशिक रूप से उचित प्रतीत होता है पर ट्रेनों की स्थिति आज आमूलचूल बदलाव की मांग कर रही है यहां समझने वाली बात है कि रेलवे को अपने खर्चे में कमी करने की अपेक्षा यात्रियों को आकर्षित कर उनके वसूल राजस्व से स्थिति सुधारने का प्रयत्न करना चाहिए साथ ही बेरोजगारी के इस दौर में अच्छा होगा कि 11000 पदो के निरस्त्रीकरण के बाद रेलवे सेवा और सुरक्षा निगरानी के लिए नए पद सृजित किए जाएं