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जिस्म बेचने वाली                  - गुमनाम मुसाफ़िर पाठ - 1                                                             ...
26/06/2025

जिस्म बेचने वाली
- गुमनाम मुसाफ़िर
पाठ - 1 अक्का- "लीला चल तयार हो जा।"

लीला- "अरे आज नही अक्का, आज मुझे छुट्टी दे दे, बोहोत सिरदर्द हो रहा हैं।"

अक्का- "अरे तो तुझे कोनसा काम करना हैं, बस पड़ी रहना बिस्तर पे ग्राहक खुद ही काम करके निकल जायेगा, चल तयार हो जा अब।"

लीला ने धड़ाम से दरवाज़ा खोला अक्का दरवाज़े पे ही खड़ी थी, अक्का को देखते हुए वो बोली ! "कुछ तो शर्म और लिहाज़ कर लिया कर अक्का बोलने से पहले।"

अक्का- "अरे भाड़ में गयी शर्म और लिहाज़, इतना बड़ा कोठा यूँ ही नही बना लिया मैंने शर्म और लिहाज़ करती तो अब भी पड़ी रहती मैं सड़क के किसी किनारे, चल तयार हो नीचे ग्राहक खड़ा हैं और हाँ अब मुझे कोई बहाना नही चाहिए।"

लीला ने फिरसे धड़ाम से दरवाज़ा बंद किया और तयार होने लगी। उसका सिर दर्द से फटा जा रहा था पर फिर भी वो बेमन से अपने मुँह पे मेकप पोतने लगी। उसने ब्राउन कलर की सारी पहनी जिसमे वो बोहोत खूबसूरत लग रही थी। सीढ़ियों से नीचे उतरती लीला को देख उसकी सखियाँ आपस में

खूसफुसाने लगी।
"लो आ गयी मैडम, हम्ह।"

"सूरत और जिस्म तो काफ़ी खूबसूरत मिला हैं इसे, काश किस्मत भी इतनी ही खूबसूरत होती तो लीला की लीला कहि और चल रही होती।" खुसफुसाते हुए वे आपस में हस पड़े। अक्का ने लीला को नज़रों से इशारा किया। लीला ने जब उस दिशा में देखा तो, वहाँ एक बाइस (22) साल लड़का खड़ा था।

लीला उसे देखते हुए कहा- "ये....।"??

अक्का ने लीला की ओर ध्यान न देते हुए उस लड़के से कहा- "क्यों रे छोरे, पसंद आया तुझे हमारे कोठे का गुलाब।"?

वो लड़का लीला को देख के मंत्रमुग्ध हो गया। मुस्कुरा भी रहा था और अपनी हँसी को रोक भी रहा था।
अक्का- "कोठे की एक भी लड़की पसंद नही आई इसे, और देख तो तुझे देखकर कैसे मुस्कुरा रहा हैं।"

लीला उस लड़के को देख के हैरान थी, उसके मन में विचार उठ रहे थे। "वैसे खूबसूरत तो हैं, पर उर्म... छोड़ ना तुझे उससे क्या??"

अक्का- "ओय छोरे, सिर्फ देखता ही रहेगा कि कुछ करने का भी इरादा हैं..?? चल अपनी जेब ढीली कर और ले जा इसे कमरे में।"

दूसरी ओर खड़ी लड़कियों में से एक ने कहा- "लगता तो नही कुछ कर पायेगा।" उसके साथ खड़ी सारी लड़कियां और अक्का भी हंस पड़ी।

एक और लड़की ने कहा- "अरे...रे..रे दूध के दांत तो गिरने देता फिर आ जाता यहाँ।" एक और हंसी का ठहाका गुंजा।

उनकी ओर ध्यान न देते हुए उस लड़के ने अक्व को पैसे दिए। लीला ने उस लड़के को नज़रो से उपर चलने का इशारा किया। वो लड़का सहमे हुए क़दमों से लीला के पास आने उनका हा पकड़ लिया, उसका हाथ था उसी जॉक मारी जार बोली- डॉट

वो दोनों सीढ़ियों से उपर की ओर जाने लगे तो, एक लड़की ने कहा- "ओय लीला इसे अपनी लीला में मत फसा लेना।"

क्रमश.....

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