24/09/2026
रावण का #सोने का मृग नकली था इसलिए उसका विनाश हो गया
राम जी का सोने का मृग असली था इसलिए वह हनुमान अंश बन कर आज भी सभी को सत्य मार्ग पर चला रहा है
रावण का मृग - माया का मृग था।
वो सोना नहीं था, सोने का भ्रम था। मारीच ने रूप बदला था। उसका उद्देश्य ही छल था - सीता जी को लुभाना, राम को आश्रम से दूर करना। जो छल से शुरू होता है, लोभ से चलता है, उसका अंत विनाश ही होता है। इसीलिए वो मृग पकड़ा नहीं गया, मारा गया। रावण की सोने की लंका भी इसी नकली सोने जैसी ही थी - बाहर से चमक, अंदर से अहंकार।
राम जी का मृग - सत्य का मृग था।
राम जी ने कभी सोने का मृग नहीं बनाया, पर उनके पास एक असली सोना था - उनका सत्य, उनकी करुणा, उनका धर्म। वो सोना ऐसा था जो किसी को लुभाता नहीं, जगाता है
वही असली सोना आज भी हनुमान जी के रूप में चल रहा है।
हनुमान जी को ही तो राम जी का चलता-फिरता सत्य कहा गया है। राम जी ने कहा और हनुमान जी ने कर दिखाया। राम जी साक्षी हैं, हनुमान जी सेवक बनकर आज भी उसी सत्य मार्ग पर सबको ले जा रहे हैं। इसीलिए हनुमान जी चिरंजीवी हैं - क्योंकि सत्य कभी मरता नहीं। नकली मृग मारा जाता है, असली मृग अंश बनकर युगों-युगों तक रक्षा करता है।
एक लोभ के लिए दौड़ाता है, दूसरा धर्म के लिए जगाता है