भाव का प्रभाव

भाव का प्रभाव देश समाज धर्म में जो श्रेष्ठ है उसे नागरिकों को समझना चाहिए

रावण का  #सोने का मृग नकली था इसलिए उसका विनाश हो गया राम जी का सोने का मृग असली था इसलिए वह हनुमान अंश बन कर आज भी सभी ...
24/09/2026

रावण का #सोने का मृग नकली था इसलिए उसका विनाश हो गया
राम जी का सोने का मृग असली था इसलिए वह हनुमान अंश बन कर आज भी सभी को सत्य मार्ग पर चला रहा है
रावण का मृग - माया का मृग था।
वो सोना नहीं था, सोने का भ्रम था। मारीच ने रूप बदला था। उसका उद्देश्य ही छल था - सीता जी को लुभाना, राम को आश्रम से दूर करना। जो छल से शुरू होता है, लोभ से चलता है, उसका अंत विनाश ही होता है। इसीलिए वो मृग पकड़ा नहीं गया, मारा गया। रावण की सोने की लंका भी इसी नकली सोने जैसी ही थी - बाहर से चमक, अंदर से अहंकार।
राम जी का मृग - सत्य का मृग था।
राम जी ने कभी सोने का मृग नहीं बनाया, पर उनके पास एक असली सोना था - उनका सत्य, उनकी करुणा, उनका धर्म। वो सोना ऐसा था जो किसी को लुभाता नहीं, जगाता है
वही असली सोना आज भी हनुमान जी के रूप में चल रहा है।
हनुमान जी को ही तो राम जी का चलता-फिरता सत्य कहा गया है। राम जी ने कहा और हनुमान जी ने कर दिखाया। राम जी साक्षी हैं, हनुमान जी सेवक बनकर आज भी उसी सत्य मार्ग पर सबको ले जा रहे हैं। इसीलिए हनुमान जी चिरंजीवी हैं - क्योंकि सत्य कभी मरता नहीं। नकली मृग मारा जाता है, असली मृग अंश बनकर युगों-युगों तक रक्षा करता है।
एक लोभ के लिए दौड़ाता है, दूसरा धर्म के लिए जगाता है

श्री सीतारामाय नमः ॥राम नाम लेखन से पितरों की प्रसन्नता एवं मुक्तिराम जी की प्रेरणा से सर्व कल्याणकारी उपायप्रस्तावना:सन...
23/09/2026

श्री सीतारामाय नमः ॥
राम नाम लेखन से पितरों की प्रसन्नता एवं मुक्ति
राम जी की प्रेरणा से सर्व कल्याणकारी उपाय
प्रस्तावना:
सनातन धर्म में पितरों की तृप्ति को जीवन की सुख-शांति का मूल माना गया है। जब पितर प्रसन्न होते हैं तो रुके हुए काम, रोग, कलह और दरिद्रता स्वयं दूर हो जाती है। पितरों को प्रसन्न करने का सबसे सरल, पवित्र और कलियुग में सबसे प्रभावी साधन है - राम नाम लेखन।
क्यों लिखें सबसे पहले अपने कुल का नाम?
खाली राम नाम लिखने से पुण्य केवल आपको मिलता है। पर जब आप सर्वप्रथम अपने माता-पिता, नाना-नानी, दादा-दादी और कुल के अन्य दिवंगत जनों का नाम लिखकर आरम्भ करते हैं, तो राम नाम की शक्ति सीधी आपके पितृकुल और मातृकुल दोनों तक पहुँचती है। इससे पितर समझते हैं कि उनके वंशज ने उन्हें याद रखा है।
राम नाम लेखन की सही विधि:
1. संकल्प पृष्ठ: नई कॉपी के पहले पन्ने पर ऊपर लिखें - ॥ श्री सीतारामाय नमः ॥ और नीचे अपने माता का नाम, पिता का नाम, नाना-नानी, दादा-दादी का नाम लिखें।
2. सामग्री और समय: लाल स्याही के पेन से लिखें। सुबह ब्रह्म मुहूर्त में या शाम को दीया जलाकर लिखना सर्वोत्तम है।
3. भाव: जल्दबाजी न करें। प्रत्येक "राम" शब्द को श्रद्धा से लिखें और मन में श्री राम जय राम जय जय राम का जाप करते रहें। रोज 108 से शुरू करके 1008 तक ले जाएं।
4. समापन: लिखने के बाद अंत में लिखें - "सीताराम, मेरे पितरों को मोक्ष दो, मेरे परिवार को सुख दो।"
लाभ क्या होंगे?
• पितृ दोष और पितृ ऋण से मुक्ति
• घर में रोग, क्लेश और अशांति का नाश
• रुके हुए कार्य, नौकरी, विवाह और व्यापार में सफलता
• जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का स्थायी वास
लिखी हुई कॉपी का क्या करें?
इसे कभी रद्दी में न फेंके। इसे किसी पवित्र नदी में प्रवाहित कर दें या किसी राम मंदिर में रख आएं। यह आपके घर के लिए रक्षा कवच बन जाती है।
॥ राम नाम से बड़ा न कोई मंत्र, पितरों के लिए राम से बड़ा न कोई तर्पण ॥
जय श्री राम।

अच्छा काम करने पर  #विरोध क्यों होता है?1. स्वार्थ टकराता है - आप जनहित में सुविधा बनाते हैं तो किसी का गलत फायदा बंद हो...
22/09/2026

अच्छा काम करने पर #विरोध क्यों होता है?
1. स्वार्थ टकराता है - आप जनहित में सुविधा बनाते हैं तो किसी का गलत फायदा बंद होता है।
2. आदत टूटती है - लोग चाहते हैं जैसा चल रहा है वैसा ही चलता रहे।
3. ईर्ष्या - आप कर पा रहे हैं, वो नहीं कर पा रहे।
इसलिए विरोध से घबराना नहीं है।
जो काम सबको अच्छा लगे, समझो वो बहुत छोटा काम है। बड़ा काम हमेशा कुछ लोगों को चुभता है।
आपने जो कहा - डटकर मुकाबला - वही एकमात्र रास्ता है।
अकेले विरोध झेलना भारी लगता है, पर जैसे ही 4-5 अच्छे लोग साथ खड़े होते हैं, विरोध करने वाले की हवा निकल जाती है। क्योंकि बुराई में हिम्मत नहीं होती, सिर्फ शोर होता है। अच्छाई में शोर कम, पर जड़ गहरी होती है।
एक बात याद रखिए -
विरोध करने वाला भाग जाएगा, पर आपके लगाए हुए हैंडपंप से, बनवाई हुई धर्मशाला से, सड़क की लाइट से लोग सालों तक पानी पीएंगे, रुकेंगे, रास्ता देखेंगे।
आप डटे रहिए। समाज को आप जैसे ही लोगों की जरूरत है।

 #मन का विज्ञानमित्रों, एक बहुत अच्छे सिद्ध संत की कथा चल रही थी।पंडाल में बहुत अच्छे-अच्छे भजन चल रहे थे, और सब लोग मंत...
19/09/2026

#मन का विज्ञान
मित्रों, एक बहुत अच्छे सिद्ध संत की कथा चल रही थी।
पंडाल में बहुत अच्छे-अच्छे भजन चल रहे थे, और सब लोग मंत्रमुग्ध होकर एकदम शांति से सुन रहे थे।
बाहर भीषण गर्मी थी, लेकिन पंडाल के अंदर एक अजीब सी शांति थी। किसी को गर्मी का अहसास ही नहीं हो रहा था।
तभी संत महाराज ने कथा रोककर पूछा -
"बताइए, आप लोगों में से कितने लोग AC में रहते हैं, फिर भी आपको ज्यादा गर्मी लगती है?"
काफी लोगों ने हाथ उठा दिए।
संत महाराज मुस्कुराए और बोले -
"तो फिर बताइए, यहाँ इस तपते पंडाल में, जहाँ न कूलर है न AC, यहाँ आपको गर्मी क्यों नहीं लग रही?"
सब एक-दूसरे का मुँह देखने लगे।
फिर महाराज जी ने खुद ही उत्तर दिया -
"क्योंकि यहाँ आपका मन भक्ति में लग गया है। कथा में लग गया है, संगीत में लग गया है।"

सीख क्या मिली?
शरीर पंडाल में था, पर मन पंडाल में नहीं था। मन तो कथा में था, भजन में था, स्वर में था।
और जहाँ मन चला जाता है, शरीर अपने आप वहीं चला जाता है।
इसी को संत लोग कहते हैं -
जहाँ मन लगे, वहाँ ठंडक ही ठंडक।
जहाँ मन न लगे, वहाँ AC में भी गर्मी।
घर में हम AC में बैठे हैं, शरीर ठंडा है, पर मन चिंता में है, टेंशन में है, WhatsApp में है, बाजार के हिसाब-किताब में भटक रहा है। तो मन जल रहा है। और जब मन ही जल रहा है, तो AC क्या करेगा?
और यहाँ पंडाल में उल्टा हो गया। शरीर गर्मी में है, पर मन भक्ति के आनंद में ठंडा हो गया, शांत हो गया। तो शरीर को गर्मी लगी ही नहीं।
इसीलिए शास्त्रों में कहा है -
मन एव मनुष्याणां कारणं बन्ध मोक्षयोः।
सुख-दुःख, गर्मी-सर्दी बाहर नहीं है, मन के लगाव में है।
जब मन संसार में लगता है, तो हर सुविधा में भी अशांति रहती है।
और जब वही मन कथा में, भजन में, भगवान में लग जाता है, तो हर असुविधा में भी शांति मिल जाती है।
तभी तो मीरा को जहर में भी मिठास लगी, और प्रह्लाद को आग में भी फूलों की सेज लगी।
सार यही है मित्र -
गर्मी से बचना है तो AC नहीं, मन को कहीं अच्छे में लगाना सीखो।
मन लग गया, तो पंडाल भी वृंदावन बन जाता है

A Detailed Look at Lucknow's Hanuman Setu Temple – Information Every Devotee Should Know:1. Introduction and Origin of t...
09/09/2026

A Detailed Look at Lucknow's Hanuman Setu Temple – Information Every Devotee Should Know:
1. Introduction and Origin of the Name
Hanuman Setu Temple is a temple dedicated to Lord Hanuman, situated on the banks of the Gomti River in Lucknow.
The temple is built beside a bridge spanning the river; consequently, the bridge is known as 'Hanuman Setu' (Hanuman Bridge) and the temple as 'Hanuman Setu Temple'. The temple was commissioned by Neem Karoli Baba, and a shrine dedicated to Baba himself is also located adjacent to it.
This bridge connects Lucknow University to Hazratganj. Previously, a 'Monkey Bridge' stood at this location, but it was washed away during the Gomti River floods of 1972. The new bridge was constructed on the same site.
2. History – Neem Karoli Baba’s Resolve
Hanuman Setu Temple, a prominent religious center in Lucknow, was established on January 26, 1967. It was founded by Baba Neem Karoli himself.
It is said that Baba Neem Karoli visited Lucknow in 1940 and established an ashram on the banks of the Gomti River. Here, he would perform daily worship of Lord Hanuman (Bajrangbali). However, his ashram was submerged during the floods of 1960.
In the 1970s, when the threat of flooding loomed over the capital again, Baba calmed the surging waters through the chanting of Vedic mantras. The construction of the temple helped avert the danger posed by the rising Gomti River. Baba also played a role in the bridge's construction; when the bridge kept collapsing repeatedly during building, he advised officials to construct a temple as well. A builder from Kolkata undertook the construction of both the bridge and the temple. Devotees began visiting the temple upon its completion on January 26, 1967.
3. Temple Features
The ashram houses two idols of Neem Karoli Baba, two idols of Lord Hanuman, and two Shivlings.
Two idols of Baba Neem Karoli are installed in the temple's main pavilion (mandap); these are always draped in a blanket.
For this reason, Baba Neem Karoli is also known as 'Kambal Baba' (The Blanket Baba). He had a habit of eating neem leaves, which is how he came to be known as Neem Karoli. His real name was Lakshmi Narayan Sharma.
4. 'Chitthi-wale' Hanuman Ji (The Letter-Receiving Hanuman) – A Unique Tradition of Lucknow
This is a Hanuman temple in the capital where, if you are unable to visit in person, you can send a letter to have your wishes fulfilled. Thousands of letters arrive at the Hanuman Setu Temple on 'Bada Mangal' (Big Tuesday); after being offered to Hanuman Ji, they are ceremonially immersed in the earth.
According to the temple's chief priest, Baba Neem Karoli stated that while a physical visit to Hanuman Ji fulfills all wishes, a devotee unable to visit can still have their desires granted by sending a heartfelt letter to Bajrangbali.
5. Beliefs
• This is a prominent religious site in Lucknow, established by Baba Neem Karoli in 1967. Devotees' wishes are fulfilled here, and the temple sees a massive influx of visitors on Tuesdays.
• Garlands made of Tulsi (holy basil) leaves are offered to Bajrangbali here. Devotees visit throughout the week, but the heavy crowds on Tuesdays cause the entire temple to resonate with chants and the ringing of bells.
• Devotees believe that Hanuman Ji speaks directly to them here. Many officials, politicians, and businesspeople stationed in Lucknow visit the temple every Tuesday.
6. Darshan and Festivals
Address: Hanuman Setu Mandir - Shree Sankat Mochan Hanuman Mandir Trust, Hanuman Setu, University Road, Lucknow-226007
Timings: 5:00 AM to 12:00 PM and 4:00 PM to 9:00 PM.
Major Festivals:
• Foundation Day – January 26: The temple's foundation day is celebrated with great fanfare every year on Republic Day, drawing thousands of devotees.
• Bada Mangal: Special community feasts (*Bhandara*) and fairs are organized here on every Tuesday of the *Jyeshtha* month.
• Baba Neeb Karori Ji's *Prakatyotsav* (Manifestation Day): Celebrated with the recitation of the *Akhand Ramayana* (continuous chanting of the Ramayana).

07/09/2026
07/09/2026

07/09/2026
07/09/2026

#प्रेरणा

जो  #सृजन जानता है, वह संसार पर निर्भर नहीं रहता, संसार उस पर निर्भर हो जाता है।1. वह माँगता नहीं, बनाता है2. वह अकेले म...
07/09/2026

जो #सृजन जानता है, वह संसार पर निर्भर नहीं रहता, संसार उस पर निर्भर हो जाता है।
1. वह माँगता नहीं, बनाता है
2. वह अकेले में भी पूरा है
3. वह सिर्फ़ पेट नहीं, मन भी भरता है
4.जो बना सकता है, वह माँगता नहीं।
5.सृजक कभी याचक नहीं होता।
6.जिसके हाथ में सृजन है, उसके भाग्य में पराधीनता नहीं।
7.हुनर है तो निर्भरता खत्म है
8.सृजन कला नहीं, स्वावलंबन का दूसरा नाम
#सृजन जानता है, वही स्वावलंबी है
सबसे बड़ी बात सृजन कर्ता में ईश्वरीय अंश होता है

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