14/11/2025
सानिध्य_Vlog #सुविचार ।।
न कश्चित कस्यचित मित्रं न कश्चित कस्यचित रिपु:। व्यवहारेण जायन्ते, मित्राणि रिप्वस्तथा।।
अर्थ: कोई भी व्यक्ति किसी का मित्र नहीं होता है, न ही कोई व्यक्ति किसी का शत्रु होता है। मित्रता और शत्रुता व्यवहार से उत्पन्न होती है। इस श्लोक के माध्यम से यह सिखाया जाता है कि कैसे हमारे व्यवहार से रिश्ते और भावनाएं प्रभावित होती हैं।
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