कहानी with Surbhi

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Pahadi culture 🌷🦋

माँ का आँचल, माँ का दुपट्टामाँ का आँचल, माँ का दुपट्टा,जैसे प्यार से भरा हुआ एक गहना सच्चा।उसकी छाया में मिलती है शांति ...
15/11/2024

माँ का आँचल, माँ का दुपट्टा

माँ का आँचल, माँ का दुपट्टा,
जैसे प्यार से भरा हुआ एक गहना सच्चा।
उसकी छाया में मिलती है शांति और सुकून,
हर मुश्किल में ढाल बन जाता, हर आँसू को पोंछता।

जब बचपन में खेलते-खेलते मैं गिर जाती थी,
माँ के आँचल से मेरा दर्द भी सिमट जाता था।
उसकी नरम सरसराहट से महसूस होती ममता,
हर डर माँ के दुपट्टे में छिपकर चला जाता था।

वो दुपट्टा जिसने मेरी हर खुशी को बाँधा,
मेरे सपनों को सजाने में कोई कसर न छोड़ी।
उसकी कोर से बंधी दुआएँ, हर कदम पर साथ,
हर आशीर्वाद में माँ का प्यार होता बेशुमार।

कभी पूजा में सिर पर ओढ़ा,
तो कभी खेल में मेरी गुड़िया का आभूषण बना।
माँ का दुपट्टा मेरे लिए एक अमूल्य खज़ाना,
जिसमें बसी हैं कहानियाँ प्यार भरी, अनमोल और पुरानी।

आज भी जब दिल उदास हो जाता है,
माँ के आँचल की याद हर ग़म को भुला जाता है।
वो दुपट्टा सिर्फ कपड़े का टुकड़ा नहीं,
माँ का प्यार, उसकी ममता का सजीव प्रतीक है वही।

माँ का आँचल, माँ का दुपट्टा,
हर बेटी के जीवन का सबसे सुंदर सपना सच्चा।
उसकी छाँव में हमेशा महकते रहना चाहूँ,
माँ के प्यार की छुअन से सँवरते रहना चाहूँ।

गुप्त रूप से ज़मीन खरीदें। चुपचाप उस ज़मीन पर बढ़िया से घर बनाएँ। फिर पूरे प्रचार के साथ गृह प्रवेश पार्टी करें। गुप्त र...
09/11/2024

गुप्त रूप से ज़मीन खरीदें। चुपचाप उस ज़मीन पर बढ़िया से घर बनाएँ। फिर पूरे प्रचार के साथ गृह प्रवेश पार्टी करें। गुप्त रूप से डेट करें। निजी तौर पर प्रपोज़ करें। फिर भीड़ के सामने शादी करें।
अपने विरोधियों को सिर्फ़ अपनी वास्तविकता दिखाएँ, कभी अपना विजन न दिखाएँ, वरना आपमें फूट पड़ जाएगी।
शतरंज के खेल में, आप बोलते नहीं हैं। आप सिर्फ़ काम करते हैं। शतरंज खेलते समय आप सिर्फ़ चेकमेट कहने के लिए बोलते हैं। जीवन शतरंज की तरह है। अपने इरादों को प्रसारित न करें। चुपचाप काम करें।
हासिल करते रहें। आपकी उपलब्धियाँ ही आपका चेकमेट हैं।

09/11/2024

प्यार को शब्दों की जरूरत नहीं होती.......

❤️ #सीख #रिश्ते #प्रेरणादायक

उत्तराखंड, जिसे देवभूमि के नाम से भी जाना जाता है, भारत का एक अत्यंत सुंदर और धार्मिक राज्य है। यह राज्य अपनी अद्वितीय स...
09/11/2024

उत्तराखंड, जिसे देवभूमि के नाम से भी जाना जाता है, भारत का एक अत्यंत सुंदर और धार्मिक राज्य है। यह राज्य अपनी अद्वितीय सांस्कृतिक धरोहर, प्राकृतिक सौंदर्य और पर्वतीय पर्यटन स्थलों के लिए प्रसिद्ध है। उत्तराखंड का गठन 9 नवंबर 2000 को उत्तर प्रदेश से अलग होकर एक नए राज्य के रूप में हुआ। इसकी राजधानी देहरादून है, जबकि गैरसैण को भी ग्रीष्मकालीन राजधानी का दर्जा प्राप्त है। गंगा, यमुना, अलकनंदा और भागीरथी जैसी महत्वपूर्ण नदियों का उद्गम स्थल उत्तराखंड ही है, जिससे इस राज्य का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व और भी बढ़ जाता है।

यहां की वादियों में स्थित केदारनाथ, बद्रीनाथ, यमुनोत्री और गंगोत्री जैसे पवित्र धाम, हर साल लाखों श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। इन धामों की यात्रा, जिसे चारधाम यात्रा के नाम से जाना जाता है, धार्मिक पर्यटन का मुख्य आकर्षण है। इसके अलावा, राज्य के कुमाऊं और गढ़वाल क्षेत्रों की पारंपरिक संस्कृति, लोक नृत्य, और संगीत यहां के लोगों की जीवनशैली का अभिन्न अंग हैं।

उत्तराखंड की समृद्ध जैव विविधता भी इसे एक अनोखा राज्य बनाती है। यहां जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क और नंदा देवी बायोस्फीयर जैसे संरक्षित क्षेत्र हैं, जहां दुर्लभ वन्यजीवों और पक्षियों की कई प्रजातियां पाई जाती हैं। इसके अलावा, उत्तराखंड का वन क्षेत्र लगभग 64% है, जो पर्यावरण संतुलन में भी सहायक है।

नवीनतम तथ्य की बात करें, तो उत्तराखंड ने 2023 में अपने पर्यावरण और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए "ईको विलेज" परियोजना की शुरुआत की है। इस परियोजना के तहत पहाड़ी क्षेत्रों में स्थित गांवों को टिकाऊ और पर्यावरण-मित्र पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके अलावा, राज्य में ग्रामीण महिलाओं को सशक्त करने और हस्तशिल्प को बढ़ावा देने के लिए कई नई योजनाएं लागू की जा रही हैं।

उत्तराखंड का यह स्थापना दिवस हमें इस बात की याद दिलाता है कि कैसे यह राज्य अपनी प्राकृतिक संपदा और सांस्कृतिक विरासत को संजोए हुए प्रगति के पथ पर अग्रसर है।

08/11/2024

वफ़ादारी की परिभाषा.....







07/11/2024

"प्यार को समझाने के लिए शब्दों की जरूरत नहीं होती।"
love needs no words to explain......

❤️
#प्रेरणादायक #सीख ❤️ 😍

07/11/2024

कड़वा सच...
कुता मार खाकर भी वफादार हैं.,
मगर इंसान प्यार पाकर,
भी ग़द्दार हैं..।

#सीख
❤️

#प्रेरणादायक

मिट्टी के बिना आलू कैसे उगाएँ1. एरोपोनिक्स को समझना:* एरोपोनिक्स पौधों को हवा में लटका देता है और उनकी जड़ों को पोषक तत्...
07/11/2024

मिट्टी के बिना आलू कैसे उगाएँ
1. एरोपोनिक्स को समझना:
* एरोपोनिक्स पौधों को हवा में लटका देता है और उनकी जड़ों को पोषक तत्वों के घोल से भिगो देता है।
* मिट्टी आधारित तरीकों की तुलना में तेज़ विकास, अधिक उपज और स्वच्छ वातावरण प्रदान करता है।
2. आवश्यक सामग्री:
* एरोपोनिक सिस्टम, आलू के कंद या कटिंग, पोषक तत्व घोल, pH परीक्षण किट, pH घोल, नेट पॉट।
3. खेती के लिए कदम:
* एरोपोनिक सिस्टम सेट करें।
* नेट पॉट में कंद या कटिंग लगाएँ।
* पोषक तत्व घोल तैयार करें और pH समायोजित करें।
* धुंध और विकास की निगरानी करें।
* जब पौधे फूलने लगें और फिर से मुरझाने लगें, तब कटाई करें।
4. एरोपोनिक खेती के लाभ:
* रोग का जोखिम कम होता है।
* अधिक उपज।
* स्थान दक्षता।
* पानी दक्षता।
* एरोपोनिक आलू की खेती टिकाऊ और कुशलता से विकास को अनुकूलित करती है, जिससे कृषि में अधिक खाद्य-सुरक्षित भविष्य का मार्ग प्रशस्त होता है।

पहाड़ी इलाकों में उगाई जाने वाली सब्जियाँ अपने अनोखे स्वाद और पोषक तत्वों के लिए जानी जाती हैं। उत्तराखंड और हिमालयी क्षे...
06/11/2024

पहाड़ी इलाकों में उगाई जाने वाली सब्जियाँ अपने अनोखे स्वाद और पोषक तत्वों के लिए जानी जाती हैं। उत्तराखंड और हिमालयी क्षेत्रों में कुछ विशेष पहाड़ी सब्जियाँ और उनके नाम इस प्रकार हैं:

1-गहत (कुल्थी): यह एक प्रकार की दाल है, जिसे गहत की सब्जी या दाल के रूप में बनाया जाता है। इसे पथरी की समस्या में बहुत लाभकारी माना जाता है।

2-झंगोरा: यह पहाड़ी क्षेत्र में उगाई जाने वाली एक प्रकार की फसल है, जिसका उपयोग खिचड़ी या पुलाव बनाने में होता है।

3-बिच्छू घास (कण्डाली): इसे कंडाली का साग भी कहा जाता है। यह एक विशेष प्रकार की पत्तेदार सब्जी है, जिसे सावधानी से पकाया जाता है और यह बहुत पौष्टिक होती है।

4-लिंगड़ा: यह पहाड़ों में मिलने वाली एक जंगली सब्जी है, जिसे आमतौर पर ताजे सलाद, अचार या सब्जी के रूप में तैयार किया जाता है।

5-फानू: यह कई पहाड़ी दालों और अनाजों का मिश्रण होता है, जिसे सब्जी के रूप में भी तैयार किया जा सकता है और इसका स्वाद बहुत खास होता है।

6-चोलाई (चौलाई): इसे हरी पत्तेदार सब्जी के रूप में पकाया जाता है और यह सेहत के लिए बहुत लाभकारी होती है। चौलाई के साग में आयरन और विटामिन प्रचुर मात्रा में होते हैं।

7-पहाड़ी आलू: पहाड़ी क्षेत्रों में उगने वाले आलू आकार में छोटे होते हैं, लेकिन इनका स्वाद बहुत अच्छा होता है और इन्हें विभिन्न व्यंजनों में प्रयोग किया जाता है।

ये सब्जियाँ पहाड़ी खानपान की विविधता को दर्शाती हैं और स्वास्थ्य के लिए भी बहुत फायदेमंद होती हैं।

Address

GIC Road
Pithoragarh
262501

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