15/11/2024
माँ का आँचल, माँ का दुपट्टा
माँ का आँचल, माँ का दुपट्टा,
जैसे प्यार से भरा हुआ एक गहना सच्चा।
उसकी छाया में मिलती है शांति और सुकून,
हर मुश्किल में ढाल बन जाता, हर आँसू को पोंछता।
जब बचपन में खेलते-खेलते मैं गिर जाती थी,
माँ के आँचल से मेरा दर्द भी सिमट जाता था।
उसकी नरम सरसराहट से महसूस होती ममता,
हर डर माँ के दुपट्टे में छिपकर चला जाता था।
वो दुपट्टा जिसने मेरी हर खुशी को बाँधा,
मेरे सपनों को सजाने में कोई कसर न छोड़ी।
उसकी कोर से बंधी दुआएँ, हर कदम पर साथ,
हर आशीर्वाद में माँ का प्यार होता बेशुमार।
कभी पूजा में सिर पर ओढ़ा,
तो कभी खेल में मेरी गुड़िया का आभूषण बना।
माँ का दुपट्टा मेरे लिए एक अमूल्य खज़ाना,
जिसमें बसी हैं कहानियाँ प्यार भरी, अनमोल और पुरानी।
आज भी जब दिल उदास हो जाता है,
माँ के आँचल की याद हर ग़म को भुला जाता है।
वो दुपट्टा सिर्फ कपड़े का टुकड़ा नहीं,
माँ का प्यार, उसकी ममता का सजीव प्रतीक है वही।
माँ का आँचल, माँ का दुपट्टा,
हर बेटी के जीवन का सबसे सुंदर सपना सच्चा।
उसकी छाँव में हमेशा महकते रहना चाहूँ,
माँ के प्यार की छुअन से सँवरते रहना चाहूँ।