09/04/2026
जगन्नाथ पुरी के मंदिर का इतिहास राजा इंद्रद्युम्न के स्वप्न से जुड़ा है, जिन्होंने नीलमाधव (विष्णु रूप) की तलाश में विद्यापति को भेजा था। भगवान ने शबर वनवासी परिवार में दर्शन दिए, लेकिन अंतर्ध्यान हो गए। भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की प्रतिमाएं लकड़ी से बनी हैं, जो राजा को मिली दिव्य लकड़ी से निर्मित हुईं। मुख्य कथा कृष्ण के देहावसान और उनकी अधूरी इच्छा के साथ जुड़ी है।जगन्नाथ पुरी से जुड़ी प्रमुख कथाएं और मान्यताएं:कृष्ण से जगन्नाथ तक का रूपांतरण: महाभारत युद्ध के बाद जब श्रीकृष्ण ने शरीर त्याग दिया, तो उनके पार्थिव अवशेषों का अंतिम संस्कार किया गया। मान्यता है कि उनका हृदय (ब्रह्म पदार्थ) आज भी जगन्नाथ जी की मूर्ति के अंदर सुरक्षित है।राजा इंद्रद्युम्न का स्वप्न: राजा इंद्रद्युम्न भगवान विष्णु के भक्त थे और उन्होंने भगवान नीलमाधव के दर्शन के लिए तपस्या की थी।लकड़ी की प्रतिमाएं: मान्यता है कि भगवान की प्रतिमाएं लकड़ी की हैं क्योंकि इंद्रद्युम्न को एक ऐसी लकड़ी मिली जो सागर में बहकर आई थी, और भगवान की आज्ञा से उसी से मूर्ति बनाई गई।तीसरी सीढ़ी का रहस्य: जगन्नाथ मंदिर की 22 सीढ़ियों में से तीसरी सीढ़ी को 'यमशिला' माना जाता है, जहाँ यमराज का वास है। पौराणिक कथा के अनुसार, यहाँ पैर न रखने की मान्यता है ताकि यमलोक से बचा जा सके।गणेश जी का स्वरूप: मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ ने भक्त गणपति भट्ट को गणेश जी के रूप में दर्शन दिए, जिसके बाद से मूर्ति का स्वरूप अलग है।15 दिनों की बीमारी: हर वर्ष स्नान पूर्णिमा के बाद भगवान जगन्नाथ 15 दिनों के लिए बीमार पड़ते हैं, और इस दौरान मंदिर के कपाट बंद रहते हैं।यह मंदिर भारत के चार प्रमुख धामों में से एक है।