29/12/2025
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देख लीजिए,
इस्लाम से आदवत रखने वाले
मिलिटेंट नास्तिक/लिबरल
किस तरह ये
मुफ्ती स्माइल नदवी के पीछे पड़ गए हैं…
ऐसा लगता है
कि जैसे उन्होंने पहले से तय कर लिया हो
कि किसे निशाना बनाना है
और कैसे बनाना है…
ये कोई अचानक गुस्से में की गई
प्रतिक्रिया नहीं है,
बल्कि पूरी तरह से सोची-समझी
और संगठित हमला है…
इन लोगों का तरीका
बिल्कुल संगठित आततायियों जैसा है,
सब एक साथ बोलते हैं,
एक जैसी भाषा इस्तेमाल करते हैं
और एक ही डायरेक्शन में हमला करते हैं,
इनका मक़सद चर्चा करना
या बात समझना नहीं होता,
बल्कि सामने वाले को दबाना और डराना होता है…
ये लोग आज भी
योजनाबद्ध तरीके से नैरेटिव को कंट्रोल करते हैं,
और ये तय करते हैं
कि क्या सही माना जाएगा और क्या ग़लत,
जैसे हीं इनके नैरेटिव के विरुद्ध कुछ सामने आता है…
या ये अपने नैरेटिव में पिछड़ते नजर आते हैं…
संगठित हमला करने लगते हैं…
इन्हें अच्छी तरह पता है
कि सोशल मीडिया, सिस्टम
और संस्थानों का इस्तेमाल कैसे किया जाए…
कैसे सामने वाले के विचार को कुचल दिया जाए…
जो भी इनसे अलग सोच रखता है,
उसे या तो बदनाम कर दिया जाता है,
या उस पर दबाव बनाया जाता है,
या फिर उसे चुप करा देने की कोशिश की जाती है…
इनका रवैया
किसी खुले संवाद
या ईमानदार बहस का नहीं है,
यहाँ सवालों के जवाब देने के बजाय
शोर मचाया जाता है,
तर्क के बजाय डर पैदा किया जाता है,
कई लोग एक साथ घेर लेते हैं,
ताकि सामने वाला अकेला और असहाय महसूस करे…
असल में ये लोग एक
भीड़ की तरह हमला करते हैं…
फर्क सिर्फ़ इतना है
कि ये भीड़ पत्थर नहीं फेंकती,
बल्कि किसी की इज़्ज़त,
करियर, सामाजिक व धार्मिक पहचान पर हमला करती है,
इनके हमले बाहर से दिखते नहीं,
लेकिन अंदर तक नुकसान पहुँचाने की कोशिश रहती है…
ये मानसिक मॉब लिंचिंग है…
जो शारीरिक मॉब लिंचिंग से भी ज़्यादा ख़तरनाक है,
क्योंकि यहाँ चोट शरीर पर नहीं,
ज़िंदगी, भविष्य व मानसिक स्थिति पर पड़ती है,
इनकी मंशा साफ होती है
कि मुसलमान इस्लाम को भूलकर भी फॉलो न करें…
कोई भी व्यक्ति इस्लाम की बात करे तो
तो उसपर संगठित हमला करो…
ऐसे बहुत कम आलिम होते हैं जो हक़ बयानी करते हैं…
ये समय मुफ़्ती साहब के साथ खड़े होने का है…
मुफ़्ती साहब को
इन मुल्हिद व इस्लाम से आदवत रखने वालों द्वारा
किए जा रहे मानसिक मॉब लिंचिंग से हमें बचाना होगा…
अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त से दुआ करें…
कि मुफ़्ती साहब को हिम्मत दे
और इस्लाम से आदवत रखने वालों के सर से बचाये रखे…
आमीन!
-Md Iqbal