07/06/2026
ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. सनी गर्ग ने एक 34 वर्षीय कॉर्पोरेट प्रोफेशनल की केस स्टडी साझा की है, जो सालाना 40 लाख रुपये कमाता है और गुरुग्राम में बीएमडब्ल्यू कार चलाता है। इसके बावजूद, वह युवक खुद को मानसिक रूप से 'गरीब' महसूस करता है और अनिद्रा का शिकार है।
डॉ. गर्ग ने इसे युवाओं की 'आधुनिक गरीबी' (मॉडर्न पॉवर्टी) बताया है। उन्होंने इस मानसिक स्थिति के पीछे के मुख्य तथ्य स्पष्ट किए हैं:
1. तुलना: युवक अपनी तुलना लिंक्डइन पर करोड़ों का स्टार्टअप बेचने वाले कम उम्र के युवाओं से करता है।
2. बढ़ती उम्मीदें: आय बढ़ने के साथ अपेक्षाएं कई गुना बढ़ गई हैं, जिससे उसे पीछे छूट जाने का डर सताता है और पैनिक अटैक आते हैं।
3. संतोष की कमी: जीवन में 'काफी है' (संतोष) की कोई सीमा तय नहीं है।
4. अंधी दौड़: बिना किसी स्पष्ट दिशा या लक्ष्य के, वह सिर्फ दूसरों की देखा-देखी पैसों के लिए भाग रहा है।
काउंसलिंग के दौरान मरीज ने स्वीकार किया कि वह जीवन का हर काम सिर्फ पैसों के लिए करता है। डॉक्टर के अनुसार, जब जीवन की हर गतिविधि का पैमाना पैसा बन जाता है, तो इंसान मशीन बन जाता है। यह मामला युवाओं में पैसों की कमी नहीं, बल्कि 'पहचान के संकट' को उजागर करता है।