06/10/2024
"बहू रानी सुनंदा बिटिया को भी अपने साथ रसोई में रखा कर, देख देख कर वो भी कुछ सीख जाएगी। इस वर्ष बारह की हो जायेगी। मेरी पोती इस से एक दो साल बड़ी है, रोटी सब्जी बना लेती है।" घर में काम करने वाली कांता ने अपनी मालकिन यशोदा से कहा।
"क्या बोलूं कांता मौसी मैं तो बहुत कोशिश करती हूं पर इस बाप बेटी के कान पर जूं नहीं रेंगती।"
"बहू रानी ये तुम्हारी जिम्मेवारी है, माना कि अब सब ऐश आराम है। कल का क्या भरोसा जाने कब जिंदगी में कौन सा मोड़ आ जाए कोई नहीं जानता।" कांता ने धीरे से कहा
"कांता तुम्हे घर के काम में हाथ बटाने के लिए रखा है, ना कि परिवार के मामले में दखल देने के लिए। मेरी बिटिया राज करेगी राज , किसी राजकुमार से उसकी शादी करवाऊंगा। तेरे जैसे चार पांच नौकर उसके आस पास घूमेंगे। खबरदार अगर मेरी बेटी के बारे में कोई सलाह दी तो।" अचानक से सुनंदा के पिता प्रताप की कड़कदार आवाज़ कांता के कानों में पड़ी। वो बेचारी वही सिर झुका के बोली
"जी मालिक।"
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