01/10/2024
*🕉️ शारदीय नवरात्र 🕉️*
*03 अक्टूबर 2024 गुरुवार*
शारदीय नवरात्र आश्विन माह, शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू हो जाते हैं। इस बार शारदीय नवरात्र 03 अक्टूबर 2024, गुरुवार से प्रारंभ हो रहे हैं//
*नवरात्रि कलश स्थापना मुहूर्त-:*
🔸घट (कलश) स्थापना मुहूर्त-:
* आश्विन नवरात्र, घटस्थापना 03 अक्टूबर 2024, गुरुवार, सुबह 06:15 से सुबह 08:45 तक की जा सकती है। सुबह 06:15 से सुबह 07:45 तक शुभ का चौघड़िया भी विद्यमान रहेगा//
🔸घटस्थापना अभिजीत मुहूर्त-:
* दोपहर 11:55 से 12:36 तक शुभ अभिजीत मुहूर्त रहेगा अतः इस समय के दौरान भी घट(कलश) स्थापना की जा सकती है//
* घट (कलश) स्थापना के यह दो मुहूर्त है अतः आप अपनी सुविधा के अनुसार कोई से भी मुहूर्त पर घट स्थापना कर सकते हैं//
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*⚛️नवरात्रि की तिथि-:*
प्रतिपदा (मां शैलपुत्री):03 अक्टूबर
द्वितीया (मां ब्रह्मचारिणी):04अक्टूबर
तृतीया (मां चंद्रघंटा):05अक्टूबर
चतुर्थी (मां कुष्मांडा):06अक्टूबर
पंचमी (मां स्कंदमाता):07अक्टूबर
षष्ठी (मां कात्यायनी): 08 अक्टूबर
सप्तमी (मां कालरात्रि):09 अक्टूबर
अष्टमी (मां महागौरी): 10 अक्टूबर
नवमी (मां सिद्धिदात्री): 11 अक्टूबर
*{ दशहरा 12 अक्टूबर 2024 }*
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*⚛️नवरात्रि के लिए पूजा सामग्री-:*
माँ दुर्गा की प्रतिमा अथवा चित्र, लाल चुनरी, अशोक या आम की पत्तियाँ (बंदरवार के लिए), चावल, दुर्गा सप्तशती की किताब, लाल कलावा, गंगा जल, चंदन, नारियल, कपूर, जौ के बीच, मिट्टी का बर्तन, गुलाल, सुपारी, पान के पत्ते, लौंग, इलायची इत्यादि//
*⚛️नवरात्रि पूजा विधि-:*
सुबह प्रातः जल्दी उठें और स्नान के उपरांत घर व घर के मंदिर को फूल-अशोक व आम के पत्तों की बंदरवार से सजाएं, ऊपर दी गई पूजा सामग्री को एकत्रित करें. पूजा की थाल सजाएं/ मां दुर्गा की प्रतिमा को लाल रंग के वस्त्र जैसे चुनरी की साड़ी इत्यादि रखें/ मिट्टी के बर्तन में जौ के बीज बोएं और नवमी तक प्रति दिन पानी का छिड़काव करें/ पूर्ण विधि के अनुसार शुभ मुहूर्त में कलश को स्थापित करें, इसमें पहले कलश को गंगा जल से भरें, उसके मुख पर अशोक या आम की पत्तियाँ लगाएं और ऊपर नारियल रखें, कलश को लाल कपड़े से लपेटें और कलावा के माध्यम से उसे बांधें, अब इसे मिट्टी के बर्तन के पास रख दें/ फूल, कपूर, अगरबत्ती, ज्योत के साथ पंचोपचार पूजा करें। नौ दिनों तक मां दुर्गा से संबंधित मंत्र का जाप करें/दुर्गा चालीसा- दुर्गा, सप्तशती का पाठ करें और माता का स्वागत करें/ उनसे सुख-समृद्धि की कामना करें/ अष्टमी या नवमी को दुर्गा पूजा के बाद नौ कन्याओं का पूजन करें और उन्हें तरह-तरह के व्यंजनों (पूड़ी, चना, हलवा) का भोग लगाएं. आखिरी दिन दुर्गा के पूजा के बाद घट विसर्जन करें इसमें मां की आरती गाए, उन्हें फूल, चावल चढ़ाएं और बेदी से कलश को उठाएं//
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*प. शिव शंकर दत्त शुक्ला 9219462544*