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15/10/2024
26/01/2024
आश्रम निर्माण के लिए भूमि पूजन किया गयाआश्रम निर्माण में किसी भी चीज का दान करें - डा. विजय ग्रोवरअबोहर 16 जनवरी। मानवता...
19/01/2022

आश्रम निर्माण के लिए भूमि पूजन किया गया

आश्रम निर्माण में किसी भी चीज का दान करें - डा. विजय ग्रोवर

अबोहर 16 जनवरी।
मानवता की भलाई के सेवा कार्यो से जानी जाती सुप्रसिद्ध समाजसेवी संस्था मानव सेवा समिति द्वारा अपने सेवा कार्यों को और गती देने के लिए तथा मंदबुद्धि लोगों की देखभाल की सेवा करने के लिए गांव धर्म पुरा में आश्रम का निर्माण शुरू किया जा रहा है, जिसके लिए आज भूमि पूजन किया गया।

जानकारी देते हुए संस्था के प्रमुख सेवादार सुभाष मानव ने बताया कि संस्था द्वारा किए जा रहे लगभग 48 किस्म के सेवा कार्यों में से सबसे महत्वपूर्ण सेवा कार्य मंदबुद्धि लोगों की देखभाल की सेवा करना है, संस्था द्वारा अब तक अनेक मंदबुद्धि पुरुषों और महिलाओं की देखभाल की सेवा करने उपरांत उन्हें उनकी मंजिल तक पहुंचाया गया है लेकिन कोरोना के कारण पिछले कुछ समय से इस सेवा मे बाधा आ चुकी है क्योंकि इस तरह के लोगों की देखभाल करने के लिए संस्था का अपना कोई आश्रम नहीं था जिसके कारण लगभग डेढ़ वर्ष से ये सेवा बंद की हुई है। संस्था को आश्रम बनाने के लिए गांव धर्म पुरा निवासी कृशन लाल सरपंच द्वारा अपनी जमीन दान की गई है, इस जमीन की रजिस्ट्री और इंतकाल संस्था के नाम पर दर्ज हो चुका है। इस जमीन पर आश्रम का निर्माण करने के लिए आज विधि पूर्वक भूमि पूजन कार्यक्रम किया गया है, इस अवसर पर डा. विजय ग्रोवर कार्यकारी प्रिंसिपल डीऐवी कालज आफ एजूकेशन अबोहर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए, इनके साथ इनकी धर्मपत्नी किरण ग्रोवर एसोसिएट प्रोफेसर डीऐवी कालज, बेटी चेष्टा ग्रोवर और बहन नीलम रानी रिटायर्ड सैंटर हैड टीचर भी कार्यक्रम में शामिल हुए। डा. विजय ग्रोवर द्वारा कार्यक्रम में शामिल लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि ये आश्रम मानवता की भलाई के लिए वरदान साबित होगा, इसके निर्माण में सभी को अपनी-अपनी क्षमता के अनुसार सहयोग करना चाहिए और हरेक व्यक्ति किसी ना किसी रूप में आश्रम निर्माण में दान करे चाहे वो निर्माण में इस्तेमाल किए जाने वाला कोई मटीरियल हो या धनराशि हो या फिर अपने-अपने परिश्रम से भी सहयोग करें। उन्होंने आश्रम निर्माण में सहयोग करते हुए अपनी तरफ से 51,000/-रुपये का चैक संस्था को भेंट किया। कार्यक्रम में शामिल भट्ठा युनियन की तरफ से प्रधान बिंदर ने कहा कि उनकी युनियन में शामिल हरेक भट्ठे से 1100 ईटों का सहयोग किया जाएगा। कार्यक्रम में शामिल वर्श कंस्ट्रक्शन कंपनी के संचालक विनित झांम द्वारा 5100/-रुपये का सहयोग दिया गया और गांव धरमपुरा तथा संस्था के सेवादारों द्वारा भी सहयोग राशि भेंट की गई। आज के इस कार्यक्रम के मंच का संचालन भगवंत भठेजा प्रिंसिपल सीड फार्म पक्का स्कुल द्वारा किया गया। मुख्य अतिथि द्वारा संस्था के प्रमुख सेवादार सुभाष मानव की माता बागां बाई से आशीर्वाद लेकर अपनी बहन नीलम रानी और बागां बाई के हाथों से आश्रम की नींव खोदने के कस्सी द्वारा टक लगाया।इस कार्यक्रम में संस्था के लगभग चार दरजन सेवादार शामिल थे जिन्होंने मुख्य अतिथि डा. विजय ग्रोवर को और जमीन दानी कृशन लाल को संस्था का यादगार चिन्ह भेंट किया और सभी दानी सज्जनों का इस सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।

मानव सेवा समिति (रजि.)
9501101527,7658001527

धर्मपुरा के पूर्व सरपंच और अनिल सिंहमार के भाई नितुल सिंहमार का निधन, पिछले कुछ समय से थे अस्वस्थ, अमृतसर में चल रहा था ...
24/05/2021

धर्मपुरा के पूर्व सरपंच और अनिल सिंहमार के भाई नितुल सिंहमार का निधन, पिछले कुछ समय से थे अस्वस्थ, अमृतसर में चल रहा था ईलाज

नितुल बहुत अच्छे स्वभाव के युवा थे, पोस्टिव थिंक इनकी पहचान थी, अभी भी विश्वास नहीं हो रहा कि वो इस संसार को अलविदा कह गए हैं

भारत जब भी अपने आजाद होने पर गर्व महसूस करता है तो उसका सर उन महापुरुषों के लिए हमेशा झुकता है जिन्होंने देश प्रेम की रा...
23/03/2021

भारत जब भी अपने आजाद होने पर गर्व महसूस करता है तो उसका सर उन महापुरुषों के लिए हमेशा झुकता है जिन्होंने देश प्रेम की राह में अपना सब कुछ न्यौछावर कर दिया।

देश के स्वतंत्रता संग्राम में हजारों ऐसे नौजवान भी थे जिन्होंने ताकत के बल पर आजादी दिलाने की ठानी और क्रांतिकारी कहलाए। भारत में जब भी क्रांतिकारियों का नाम लिया जाता है तो सबसे पहला नाम शहीद भगत सिंह का ही आता है।

शहीद भगत सिंह ने ही देश के नौजवानों में ऊर्जा का ऐसा गुबार भरा कि विदेशी हकूमत को इनसे डर लगने लगा। हाथ जोड़कर निवेदन करने की जगह लोहे से लोहा लेने की आग के साथ आजादी की लड़ाई में कूदने वाले भगत सिंह की दिलेरी की कहानियां आज भी हमारे अंदर देशभक्ति का जोश भड़काती हैं।

भगतसिंह का जन्म 27 सितम्बर, 1907 को पंजाब के जिला लायलपुर में बंगा गांव (पाकिस्तान) में हुआ था। भगतसिंह के पिता सरदार किशन सिंह एवं उनके दो चाचा अजीतसिंह तथा स्वर्णसिंह अंग्रेजी हकूमत के खिलाफ होने के कारण जेल में बन्द थे। यह एक विचित्र संयोग ही था कि जिस दिन भगतसिंह पैदा हुए उनके पिता एवं चाचा को जेल से रिहा किया गया। इस शुभ घड़ी के अवसर पर भगतसिंह के घर में खुशी और भी बढ़ गई थी। यही सब देखते हुए भगतसिंह की दादी ने बच्चे का नाम ‘भागां वाला’ (अच्छे भाग्य वाला) रखा। बाद में उन्हें भगतसिंह कहा जाने लगा।

देश के सबसे बड़े क्रांतिकारी और अंग्रेजी हुकूमत की जड़ों को अपने साहस से झकझोर देने वाले भगत सिंह ने नौजवानों के दिलों में आजादी का जुनून भरा था। महात्मा गांधी ने जब 1922 में चौरीचौरा कांड के बाद असहयोग आंदोलन को खत्म करने की घोषणा की तो भगत सिंह का अहिंसावादी विचारधारा से मोहभंग हो गया। उन्होंने 1926 में देश की आजादी के लिए नौजवान भारत सभा की स्थापना की।

23 मार्च 1931 की रात भगत सिंह को सुखदेव और राजगुरु के साथ लाहौर षडयंत्र के आरोप में अंग्रेजी सरकार ने फांसी दे दी। यह माना जाता है कि मृत्युदंड के लिए 24 मार्च की सुबह ही तय थी, मगर जनाक्रोश से डरी सरकार ने 23-24 मार्च की मध्यरात्रि ही उन्हें फांसी दे दी। इस तरह 23 मार्च को भारत के तीन महान सपूत आजादी की बलिवेदी पर शहीद हो गए।

शहीदी दिवस पर जानें भगत सिंह के महान विचार:
बम और पिस्तौल से क्रांति नहीं आती, क्रांति की तलवार विचारों की सान पर तेज होती है।
निष्ठुर आलोचना और स्वतंत्र विचार, ये दोनों क्रांतिकारी सोच के दो अहम लक्षण हैं।
राख का हर एक कण मेरी गर्मी से गतिमान है. मैं एक ऐसा पागल हूं जो जेल में आजाद है।
प्रेमी पागल और कवि एक ही चीज से बने होते हैं और देशभक्तों को अक्सर लोग पागल कहते हैं।
जिंदगी तो सिर्फ अपने कंधों पर जी जाती है, दूसरों के कंधे पर तो सिर्फ जनाजे उठाए जाते हैं।
व्यक्तियों को कुचलकर भी आप उनके विचार नहीं मार सकते हैं।
निष्ठुर आलोचना और स्वतंत्र विचार ये क्रांतिकारी सोच के दो अहम लक्षण हैं।
‘आम तौर पर लोग चीजें जैसी हैं उसी के अभ्यस्त हो जाते हैं। बदलाव के विचार से ही उनकी कंपकंपी छूटने लगती है। इसी निष्क्रियता की भावना को क्रांतिकारी भावना से बदलने की दरकार है।’
‘वे मुझे कत्ल कर सकते हैं, मेरे विचारों को नहीं। वे मेरे शरीर को कुचल सकते हैं लेकिन मेरे जज्बे को नहीं।’
अगर बहरों को अपनी बात सुनानी है तो आवाज को जोरदार होना होगा. जब हमने बम फेंका तो हमारा उद्देश्य किसी को मारना नहीं था। हमने अंग्रेजी हुकूमत पर बम गिराया था। अंग्रेजों को भारत छोड़ना और उसे आजाद करना चाहिए।’

जय हिन्द
28/09/2020

जय हिन्द

 #ਚੰਦਰ_ਸ਼ੇਖਰ_ਆਜ਼ਾਦ  #ਚੰਦਰ_ਸ਼ੇਖਰ_ਆਜ਼ਾਦ ਜ਼ਿੰਦਾਬਾਦ ਜਨਮ ਦਿਨ 23 ਜੁਲਾਈ 1906 🙏 ਆਜ਼ਾਦ ਜੀਵਾਗਾਂ ਤੇ ਅਜ਼ਾਦ ਹੀ ਮਰਾਂਗਾਂ ।।आज़ाद था आज़ाद ह...
23/07/2020

#ਚੰਦਰ_ਸ਼ੇਖਰ_ਆਜ਼ਾਦ
#ਚੰਦਰ_ਸ਼ੇਖਰ_ਆਜ਼ਾਦ ਜ਼ਿੰਦਾਬਾਦ ਜਨਮ ਦਿਨ 23 ਜੁਲਾਈ 1906 🙏 ਆਜ਼ਾਦ ਜੀਵਾਗਾਂ ਤੇ ਅਜ਼ਾਦ ਹੀ ਮਰਾਂਗਾਂ ।।

आज़ाद था आज़ाद हूँ आज़ाद ही रहूँगा
भारत मां के दो वीर सपूत लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक और चंद्रशेखर आजाद को उनकी जन्म-जयंती पर शत-शत नमन।

Chandra Shekhar Azad: महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद की पुण्यतिथि पर जानें उनके ये प्रेरणादायक विचार
चंद्रशेखर आजाद की वीरता की गाथा देशवासियों के लिए प्रेरणा का एक स्रोत है.

महान क्रांतिकारी और स्वतंत्रता सैनानी चंद्रशेखर आजाद (Chandra Shekhar Azad) की आज पुण्यतिथि है. आज ही के दिन चंद्रशेखर आजाद ने देश की आजादी के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए थे. उनकी वीरता की गाथा देशवासियों के लिए प्रेरणा का एक स्रोत है. 1920 में 14 वर्ष की आयु में चंद्रशेखर आजाद (Chandra Shekhar Azad) गांधी जी के असहयोग आंदोलन से जुड़े थे, जिसके बाद वे गिरफ्तार हुए और जज के समक्ष प्रस्तुत किए गए. जहां उन्होंने अपना नाम 'आजाद', पिता का नाम 'स्वतंत्रता' और 'जेल' को उनका निवास बताया. आजाद को 15 कोड़ों की सजा दी गई थी. चंद्रशेखर आजाद के विचारों ने युवाओं को स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने के लिए काफी प्रेरित किया था. उनके विचार आज भी लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा हैं. आइये जानते हैं चंद्रशेखर आजाद के विचारों के बारे में..


1. 'दुश्मन की गोलियों का, हम सामना करेंगे, आजाद ही रहे हैं, आजाद ही रहेंगे.'

2. 'मेरा नाम आजाद है, मेरे पिता का नाम स्वतंत्रता और मेरा घर जेल है.'

3. 'यदि कोई युवा मातृभूमि की सेवा नहीं करता है, तो उसका जीवन व्यर्थ है.'

4. 'अगर आपके लहू में रोष नहीं है, तो ये पानी है जो आपकी रगों में बह रहा है. ऐसी जवानी का क्या मतलब अगर वो मातृभूमि के काम ना आए.'

5. 'दूसरों को खुद से आगे बढ़ते हुए मत देखो. प्रतिदिन अपने खुद के कीर्तिमान तोड़ो, क्योंकि सफलता आपकी अपने आप से एक लड़ाई है.'

6. 'मैं ऐसे धर्म को मानता हूं, जो स्वतंत्रता, समानता और भाईचारा सिखाता है.'

7. 'चिंगारी आजादी की सुलगती मेरे जिस्‍म में हैं. इंकलाब की ज्वालाएं लिपटी मेरे बदन में हैं. मौत जहां जन्नत हो यह बात मेरे वतन में है. कुर्बानी का जज्बा जिंदा मेरे कफन में है.

23/07/2016

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