11/12/2020
10 लाख का दहेज़,5 लाख का खाना घड़ी पहनायी,अंगूठी पहनाई मंडे का खाना फिर सब सुसरालियो को कपड़े देना !!
बारात को खिलाना फिर बारात को जाते हुए भी साथ में खाना भेजना,बेटी हो गई कोई सज़ा हो गई। और यह सब जब से शुरू होता है जबसे बातचीत यानी रिश्ता लगता है फिर कभी ननद आ रही है, जेठानी आ रही है कभी चाची सास आ रही है मौसी सास आ रही है टोली बना बना कर आते हैं और बेटी की मां चेहरे पे हलकी सी मुस्कराहट लिए सब को आला से आला खाना पेश करती है सबका अच्छी तरह से वेलकम करती है फिर जाते टाइम सब लोगो को 500-500 रूपे भी दिए जाते है फिर मंगनी हो रही है विवाह तय हो रहा है फिर बारात के आदमी तय हो रहे हैं 500 लाए या 800,बाप का एक एक बाल कर्ज में डूब जाता है और बाप जब घर आता है शाम को तो बेटी सर दबाने बैठ जाती है कि मेरे बाप का बाल बाल मेरी वजह से कर्ज में डूबा है भगवान के वास्ते इन गंदे रस्म रिवाजों को खत्म करें,ताकि हर बाप अपनी बेटी को इज़्ज़त से विदा कर सके।🙏🏼🙏🏼🙏🏼🙏🏼