जैन सर्विसेज अकोला

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20/08/2025

गुड्डू भाई युवा है.. सामाजिक कार्यक्रमो में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेते हैं.. अभी राजनीति में पैर जमा रहे हैं और कहने में कोई हर्ज नही की अच्छा खासा मुकाम वहां भी बनाया है.
कल मैने जन्मदिन की शुभकामनाएं गुड्डू भाई को नही दी.. देख रहा था कि कोई न कोई अब राजनीतिक बिसात पर सलूम्बर नगराध्यक्ष के लिए गुड्डू भाई का नाम आगे बढ़ायेगा मगर सब शुभकामनाएं कोरी ही थी.
चुनाव नतीजे आते ही मैने अपील की थी कि हमारे समाज के जो जो लोग चुनकर आये हैं वे चाहे किसी भी पार्टी से हो मगर प्रयास यह करे को नगरपालिका पर हमारा कोई व्यक्ति आसीन हो.. अभी भी मैं आव्हान करता हु की जितना भी समय बचा है उतने समय के लिए हमारे सब लोग एक हो जाये.. आपस मे कुछ प्यार कम हो तो बढ़ा ले और गुड्डू को नगराध्यक्ष बना ले.. पार्टी का स्टैंड फिलहाल कही बाहर रखे क्योकि पार्टी कोई भी हो वह कार्यकर्ता की निष्ठा नही देखती बल्कि अपने वोटो का समीकरण देखती है.. कितनी भी योग्य कार्यकर्ता हो अगर वोटिंग में अन्य समाज के लोगो का बहुमत हो तो वह उस समाज के व्यक्ति को ही आगे करेंगी.. कोई कितना भी पुराना समर्पित कार्यकर्ता हो उसे टिकिट नही देंगी.. इसका सब से बड़ा उदाहरण अभी अकोला का है.. कॉंग्रेस का दिग्गज व्यक्ति मदन भरगढ़ जो कि महापौर तक रहा उसे इतने सालों में कॉंग्रेस ने कभी भी विधायक के लिए तिकीत नही दी.. अभी तो उस व्यक्ति को टिकट दिया है जो कि मदन भरगढ़ के आगे पीछे घूमता था, एक छोटा सा कार्यकर्ता था.. मदन भाई बरसो से कॉंग्रेस की सेवा करते रहे मगर विधायक की टिकिट नही ला सके और साजिद को टिकट दी गयी क्योकि मुस्लिम के वोट बहुत अधिक थे.. साजिद चुनकर भी आ गया.. तो हमारे समाज के सभी लोगो से निवेदन है कि सब एक हो कर पार्टी मोह छोड़कर गुड्डू भाई को बड़ी जिम्मेदारी दे.. यदि कोई अन्य व्यक्ति नगराध्यक्ष बन सकता है अन्य लोग उसकी मदद करे.. मगर हर हालत में अपना कोई भी व्यक्ति सलूम्बर नगर पालिका में सर्वोच्च पद पर उसे बैठाए.. ध्यान रहे कि पार्टी की चिंता न करे क्योकि पार्टी जो आप को टिकट दे रही है वह हमारे समाज के जातिगत समीकरण को देख कर दे रही.. सो सब मिल कर कुछ करे यही निवेदन.. ओर हा गुडडू भाई को जन्मदिन की बहुत बहुत शुभकामनाएं, बधाई.

ओर बड़ो के लिए मन मे हमेशा सम्मान रखने वाले हँसमुख मिलनसार स्वभाव के हमारे युवा राकेश भिमावत को भी जन्मदिन की शुभकामनाएं🙏🙏👍😊

20/08/2025

आजकल एक बहुत ही अच्छा रिवाज, बहुत ही मीठी परम्परा को हम बिसरा चुके हैं.. शादी से पहले दूल्हा दुल्हन को समाज के लगभग सभी घरों से भोजन का निमंत्रण जाता था.. एक दिन में बीस बीस घरों में भोजन मैने किया है.. अब भोजन क्या होंगा इतने घरों में.. बस गए पानी पिया ओर 50 पैसे और 1 रुपए का सिक्का हाथ मे ले दूसरे घर की ओर रवाना.. उन दिनों बड़ी कोफ्त होती थी मगर अब जब उस बारे में सोचते हैं तो लगता है कि यह कितनी अदभुत परम्परा थी.. हर घर से पहचान, हर घर से प्यार.. कोई जब 1 रुपये देने वाला घर हाथ मे 50 पैसे थमाता था तो माँ उस के लिए कहती थी.. अतरो पइसा वारो वाई भी म्हारे सोरा ई आठ आना आलिया🤣🤣🤣

20/08/2025

इस बात से मुझे याद आया कि एक बार मेवल में कुछ कार्यकम था और पूरे समाज को निमंत्रण था कि समाज पधारे.. उस दिन मैं सलूम्बर में ही था सो किसी ने मुझे पूछा की तुम भी चलो.. मैने कहा आने में कोई हर्ज नही मगर जिनका कार्यक्रम है उन से मेरी कोई पहचान नही, रिश्तेदारी नही.. सो मैं नही आऊंगा तो मुझे समझाया गया कि पूरे समाज को निमंत्रण है जाना जरूरी है मगर मुझे नही जाना था सो मैने साफ साफ मना किया फिर भी वह परिचित माने नही.. बोले मेरी गाड़ी है और मुझे चलाते आती नही, तुम चलाओ ओर चलो.. मैं जबरन गया.. वहां पहुच कर जो माजरा देखा मेरी आँखें फ़टी की फटी रह गयी.. कोई ट्रक भर पानी भरने के स्टील बड़े वाले हंडे वहां रखे हुए थे ओर सब लोग अपना अपना नाम लिखा कर वह हंडे ले कर निकल रहे थे.. उन्होंने मुझे भी हंडा दिया तो मैने मना कर दिया कि मैं आप के कार्यक्रम के लिए नही आया हु.. मैं तो मात्र एक ड्राइवर हु सो मै नही लूंगा.. अब जहा लेने वालों की होड़ लगी थी और एक अकेला मैं उन्हें मना कर रहा था.. वहां के दो तीन बुजुर्ग आये और बोले हम से कुछ गलती हो गयी तो क्षमा करें और बताये की क्या बात है जो आप हमारा उपहार नही ले रहे है.. मैने कहा आप से कोई गलती नही हुई है मगर मैं जब आप के लिए आया ही नही तो आप का गिफ्ट कैसे ले सकता हु.. वे सब माने ही नही.. जो लेने को खड़े पँक्ति में उन्हें छोड़ सब मेरी मनुहार करने लगे कि आप को गिफ्ट लेना ही पड़ेंगा.. मैं मजबूरी में गिफ्ट ले आया.. वापसी में रास्ते मे मेरे साथी ने कहा आप को तो जरा भी अक्ल नही है.. जब सब ले रहे हैं तो हमे लेने में क्या दिक्कत है..! मैं कुछ न बोला और चुप रहा.. इतना बड़ा स्टील का हंडा जब मैं ले कर घर पहुचा तो मेरी आई मुझे प्रशंसा की नजरों से देखते हुए बोली का सारा तू भी ग्यो थे वटे..?

अभी चंद दिनों पहले झाड़ोल में चांदी के सिक्के बंटे.. एम व्यक्ति ने कई बार मुझे कहा चलो चलते हैं, सिक्का ले कर आएंगे.. मुझे ऐसा कोई निमंत्रण नही सो मैं नही गया.. वह व्यक्ति मुझे अब मंदबुद्धि समझता है🤣🤣🤣🤣🤣

20/08/2025

इन चीजों का समाज ने कभी आदेश नही दिया.. ये हम ने अपने मन से शुरू की.. शुरुआत स्वयं से करनी होंगी.. रही बात लोगो की कंजूस बोलेंगे तो बोलने दो न.. एक दिन ही बोलेंगे ओर फिर जब बात उनकी स्वयं की आएंगी तो वे कहेंगे कि उस ने तो नही किया, मैं क्यो करू..? अभी अकोला में मेरे जैनेन्द्र की ढूंढ का भोजन था.. 800 लोगो का भोजन.. सब कह रहे थे कि बफे रखो मगर मैने साफ मना कर दिया.. मैं पंगत में बैठकर भोजन के पक्ष में हु.. वही हुआ.. बढ़िया शांति के साथ भोजन हुआ.. मेरी एक ओर शर्त थी कि मेरे भोजन में कोई भी पशु पदार्थ नही होंगा.. तो बिल्कुल नही था.. सलूम्बर में भी नही था.. सलूम्बर मे कोई कह रहा था कि तेल में बने लड्डू समाज खाएंगी नही.. मुझे हैरानी हुई कि मेरे द्वारा भोजन समाज क्यो नही स्वीकारेगी..? मगर कुछ नही हुआ.. सभी ने आशीर्वाद देते हुए बड़े ही प्रेम से नोहरे में भोजन किया.. सो रहा किसी की नही देखनी है.. हमे ही शुरुआत करनी है.. कोई गिफ्ट देता है तो लो न मगर उसे कभी गिफ्ट मत दो.. फिर यह सिलसिला रुक जाएगा.. हल्दी में कोई बुलाये तो जाओ मत न.. वह समझ जायेगा कि यह विरोधी है

20/08/2025

*मैं हमेशा ही यह कहता आया हु ओर आज और कहता हूं कि प्रभु ने हमे दिमाग, आंखे, कान ओर सोचने समझने की शक्ति के साथ भेजा है.. सो शास्त्र को पढ़ना तो है मगर उस मे से वही धारण करना है जो तार्किक हो.. जो सत्य की कसौटी पर खरा उतरता हो.. शास्त्र सिर्फ रूढ़िवादी ओर परम्परा की दिशा से ही सत्य हो सकते क्योंकि वहां जन्म से ही मन मे भय पैदा किया जाता है कि इस के विरुद्ध कहेंगे तो नरक में तलना पक्का है.. डर की वजह से हम सच समझ कर भी उस का समर्थन नही करते.. पाप लगेगा यह सोच कर देखती आंखों से साधुओं की बदमाशी को अन्य लोगो से नही कहेंगे क्योकि साधु निंदा हो जाएंगी.. तो मूल बात यह कि जो शास्त्र में लिखा है वही जीवन की राह है तो फिर ऊपर वाले हमारे भीतर ही ये पूरा सेटअप फिट कर के क्यो नही भेजा..? जैसे मोबाइल में कुछ फीचर इन्क्ल्यूड आते हैं वैसा भगवान ने हमारे साथ क्यो नही किया..? वजह साफ है कि बुद्धि दी है सो सोच विचार कर के आगे बढ़ना है.. कोई बात हमे सिर्फ इसलिए नही मान लेनी है कि वह हमारे यहां पहले से चलती आ रही है.. हमारी धार्मिक किताबो में लिखी है.. शास्त्र आंख बंद कर मानने की चीज नही है बल्कि आंख खोल कर पढ़कर समझकर मानने की चीज है.. जो शास्त्र हमे डराते है वे सच्चे शास्त्र नही हो सकते.. डर बता कर उसका पालन करना यह घोर झूठ है.. डर इसलिए बताया जाता है ताकि मनुष्य वही करे जो लिखा है.. ओर शास्त्रों को परिभाषित कौंन करेंगा..? शास्त्र किसे कहते हैं..? कालांतर में मेरा लिखा भी क्या शास्त्र कहलायेगा..? सो फूंक फंक कर कदम रखने है.. शास्त्रों को पढ़ना तो है मगर तर्क के साथ.. जो शास्त्र तर्क का विरोध करे वह कभी शास्त्र नही हो सकता.. रमेश तोरावत जैन, अकोला.*

20/08/2025

सन 1980 ओर 1990 का समय इस हालत के लिए जिम्मेदार है.. हम ने उन दिनों कई लड़कियों की हत्या की है.. नाम नही बताऊंगा मगर कुछ लोगो को तो मैं निजी रूप से जानता हूं जिन्होंने लड़कियों को जन्म से पहले ही पेट मे मार दिया.. ये जो भ्रूण हत्या हम ने की है उसी से अनुपात बिगड़ा है वरना हम ने जब शादी की तब यह भी नही समझता था कि शादी क्यो करते हैं.. 15 की उम्र में शादी इसलिए होती थी कि लड़की के पिता को चिंता रहती थी कि अच्छा लड़का कही हाथ से निकल न जाये.. फिर हालात बदले ओर धीरे धीरे उम्र बढ़ने लगी और इस कदर बढ़ने लगीं की वह अब लड़का या लड़की नही बलक्ज आदमी और औरत कहलाने लगें.
तो कैसे निकले इस समस्या से बाहर.. बस एक ही इलाज है कि कम से कम 500 लड़कियों की व्यवस्था हो.. हमारे पास तो है नही सो यह सब बाहर से ही आएंगी.. तो हम सामाजिक लेवल पर एक टीम बनाये.. दो महीने तीन महीने बस यही काम करे कि लड़कियों को ढूंढे.. ब्राह्मण, मारवाड़ी, अनाथ आश्रम आदि जगह से जो भी कन्या हो उसे हमारे बीच स्थान दे.. एक बार यह 500 लड़कियों का कोटा पूरा हो गया तो फिर उस के बाद हालात वही पहले जैसे होंगे.. मेरे ससुर जी मुझे उस समय 5 हजार रुपये दिए थे.. अगर ये लड़कियों की कमी पूरी हो जाती है तो बेटी का बाप फिर बेटी को कुछ भेंट देंगा ही देंगा

20/08/2025

ओर इसका सब से बड़ा उदाहरण मैं स्वयं हु.. कई बेवफुक किस्म के लोग मेरे लेख, निबंध, कहानियों को पढ़ते तो बराबर है मगर उसकी शिकायते मेरे रिश्तेदारों से करते हैं कि इनको रोको न.. इतना नही लिखना चाहिए.. लोग हँस रहे हैं.. रिश्तेदारों ने मुझे बताया तो मैने पूछा कि क्या गलत लिखा है बताओ तो बोले गलत तो कुछ नही है मगर फलाना फलाना बोल रहा था सो आप को बता दिया तो मैने कहा अब कोई फलाना फलाना बोले तो उसे कहना मेरा लिखा पढ़े नही.. अब कोई कुछ नही कहता.. ओर कोई कुछ बोले भी क्यो..? हमारे घर मे कोई रोटी दे कर जा रहा है सो हम डरे..? तो कोई डरने का नहो..मन कि बात छुपाने का नही.. बढ़िया रील बनाओ.. खूब खुश रहो और रील दुनिया को भेज के उन्हें भी खुश करो😆😆😆

20/08/2025

इस कदर पुरुष प्रधान है कि हर जगह पुरुष ही पुरूष है.. अब पुरुष ही है तो सारे नियम कायदे ऐसे रचे गए कि महिलाओं को दोयम दर्जा मिलता आया है.. ओर तो ओर सारी प्रमुख किताबे सारे बड़े शास्त्रों के रचयिता भी पुरुष.. ओर पुरुषों ने पूजा में लिख दिया कि संसार विष बेल नारी ओर मजे की बात सब महिलाएं भी बड़े ही आनंद के साथ जिनालय में जोर जोर से यही पंक्तियां बड़े ही भक्तिभाव से गाती भी है.. मैने एक महिला जो कि यह गा रही थी उस से पूछा कि क्या उन्हें पता है को वह क्या बोल रही है तो बोली भगवान की पूजा कर रही हु.. मैने फिर पूछा कि इसका मतलब क्या है तो बोली पता नही मगर बहुत मजा आ रहा है.. मैने अपना माथा पिट लिया.. अभी में पुरूष प्रधान संस्कृति का बखान करने लगु ओर महिलाओं के प्रति अन्याय को लिखने लगु तो पूरा एक लेख बन जायेगा.. बस एक पँक्ति में यू समझ लीजिए नारी को दुनिया के सभी धर्मों ने दबा कर रखा है.. ओर नारी हमेशा चुप रहतीं है.. देख सकते हैं यहां पर भी कोई नही बोल रहा है

20/08/2025

इस के लिए कही बहुत गहरे में जाने की जरूरत नही है.. प्रकृति ने हमे भी धरती पर भेजा है तो जीने के लिए हमे भी भोजन की आवश्यकता होंगी.. प्रकृति ने हमारे लिए पेड़ पौधे फल फ्रूट्स बनाये जो कि हमारे शरीर की रचना के हिसाब से उपयुक्त है.. हमे वही ग्रहण करना है मगर उस मे भी जीव है सो पाप तो यहां भी है और इसीलिए जैन दर्शन कहता है कि कम से कम में जीवन निर्वाह करो तकी हिंसा कम से कम हो.. पानी की एक बूंद में लाखों जीव है मगर उस के बिना जीवन नही है.. यह हिंसा हम टाल नही सकते.. मगर मूक पशुओ से दूध लूटने वाले अपराध से हम बच सकते हैं.. वह भोजन और पानी की तरह जरूरी नही है

20/08/2025

जानवर प्रकृति प्रदत्त गुणों का ही पालन करते हैं.. स्वभाव से विपरीत नही चलते हैं और इसीलिए उनकी अपनी कोई पोलिस नही है.. उनकी कोई जेल नही है.. वे दूसरे जीवो को कैद कर के नही रखते.. वे दूसरे की माँ का दूध चोर कर नही पीते.. उनका सिस्टम प्रकृति के अनुकूल है.. जलवायु परिवर्तन के लिए मनुष्य दोषी है.. जानवरो ने प्रकृति का संतुलन कभी नही बिगाड़ा

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