Sarkaar Nirmal shah Qadri

Sarkaar Nirmal shah Qadri paranormal healer

एक सार्वजनिक सूचनामैं किसी भी प्रकार की तांत्रिक वशीकरण, काला जादू, प्रेम-सम्बंधी उपाय, अनुष्ठानिक समाधान या इसी प्रकार ...
05/07/2026

एक सार्वजनिक सूचना

मैं किसी भी प्रकार की तांत्रिक वशीकरण, काला जादू, प्रेम-सम्बंधी उपाय, अनुष्ठानिक समाधान या इसी प्रकार की व्यक्तिगत लाभ अथवा किसी को प्रभावित/नियंत्रित करने वाली सेवाएँ नहीं करता हूँ और न ही उनका प्रचार करता हूँ। कृपया ऐसे अनुरोधों के लिए मुझसे संपर्क न करें। ⛔️

यह भी मेरे जानकारी में आया है कि कुछ लोग मेरे फोटो, भिडीयो का दुरुपयोग कर फर्जी अकाउंट, फर्जी फोन नंबर तथा भ्रामक विज्ञापनों के माध्यम से मेरे नाम पर तांत्रिक वशीकरण, काला जादू, प्रेम-सम्बंधी उपाय, अनुष्ठानिक समाधान और इसी प्रकार की सेवाएँ देने का झूठा दावा कर रहे हैं।

ये सभी दावे पूर्णतः असत्य हैं।
कृपया उन फर्जी नंबरों पर संपर्क न करें और ऐसे धोखाधड़ी वाले पेजों की तुरंत रिपोर्ट करें! 🚫
मेरा मार्ग साधना, आत्म-साक्षात्कार और आंतरिक जागरण का मार्ग है। मेरी शिक्षाएँ केवल उन सच्चे साधकों के लिए समर्पित हैं जो अपने वास्तविक स्वरूप की अनुभूति करना चाहते हैं।

A Public Notice

I do NOT perform or promote any ritualistic services for personal gain or manipulation such as ta***ic vashikaran, black magic, love spells, ritual solutions, and similar services. ⛔️ Do NOT ‼️ contact me for such requests.

It has also come to my attention that some individuals are misusing my photographs and creating fake accounts, fake phone numbers, and misleading advertisements claiming to offer ta***ic vashikaran, black magic, love spells, ritual solutions, and similar services in my name.

These claims are completely false.

Please DO NOT contact those fake numbers and report those fraudulent pages immediately! 🚫

My path is one of sadhana, self-realization, and inner awakening. My teachings are dedicated solely to guiding sincere seekers toward the realization of their true nature.

10/02/2026
29/12/2025

एक ठोकर ने सतगुरु की हिला दिया गहरी नींद से निर्मल को जगा है दिया

29/12/2025

बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम

इ़स्म-ए-हू और साँस
आरिफ़ों के नज़दीक वह राज़ है
जहाँ ज़िक्र ज़बान से उतरकर
नफ़्स-ए-हयात (साँस) में हलूल कर जाता है।
यहाँ न ज़बर है, न गिनती, न आवाज़—
सिर्फ़ “बूद” (होना)।

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साँस क्या है?

आरिफ़ कहते हैं:
साँस अल्लाह की अमानत है।
जो आती है तो “हू” कहती है,
जो जाती है तो “हू” में लौट जाती है।

क़ुरआन की तरफ़ इशारा:

وَنَفَخْتُ فِيهِ مِن رُّوحِي
अर्थात:
साँस महज़ हवा नहीं,
यह नफ़्ख़-ए-इलाही का सिलसिला है।

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इ़स्म-ए-हू: साँस की पहचान

शैख़-ए-अकबर इब्न-ए-अरबीؒ फ़रमाते हैं:
النَّفَسُ هو تجلّي الهوية

तरजुमा:
साँस दरअसल हुवियत (हू-होना) का ज़ुहूर है।

यानी:
साँस आए → “हू” ज़ाहिर
साँस जाए → “हू” में महव

यह ज़िक्र किया नहीं जाता—
यह चल रहा होता है।

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रूमीؒ: साँस में बसा हुआ “हू”

मौलाना रूमी फ़रमाते हैं:
با هر نفَس، هو می‌دمد
تو غافلی، او می‌زند

अर्थ:
हर साँस के साथ “हू” दमकता है,
तू ग़ाफ़िल है—वह धड़क रहा है।

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लोक-वाणी (हिंदी/पंजाबी भाव):

साँस न टूटे हू दा धागा,
यह राज़ मुरशिद दिखलावे।

यानी:
जब साँस टूटती नहीं
और “हू” जुदा नहीं होता,
तो दसवाँ द्वार ख़ुद खुल जाता है।

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दसवाँ द्वार और साँस

यह नुक्ता बहुत बारीक है:

📌 नौ द्वारों में साँस बेक़ाबू रहती है
📌 दसवें द्वार में साँस भी ख़ामोश हो जाती है

यहाँ:
साँस रुकती नहीं,
मगर उसका एहसास मिट जाता है।

यही वह लम्हा है जहाँ—
न अंदर
न बाहर
बस “हू”…

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