Singer Sattu Maan

Singer Sattu Maan song writer n singer

Jai Hind
16/06/2022

Jai Hind

सरदार भगतसिंह की #वीर_माता_विद्यावती_कौर_जी की आज पुण्यतिथि है।
इतिहास इस बात का साक्षी है कि #देश, धर्म और #समाज की सेवा में अपना जीवन अर्पण करने वालों के मन पर ऐसे संस्कार उनकी माताओं ने ही डाले हैं। भारत के स्वाधीनता संग्राम में हंसते हुए फांसी चढ़ने वाले वीरों में #भगतसिंह का नाम प्रमुख है। उस वीर की माता थीं श्रीमती विद्यावती कौर।

#विद्यावती_जी का पूरा जीवन अनेक विडम्बनाओं और झंझावातों के बीच बीता। सरदार किशनसिंह से विवाह के बाद जब वे ससुराल आयीं, तो यहां का वातावरण देशभक्ति से परिपूर्ण था। उनके देवर सरदार #अजीतसिंह देश से बाहर रहकर स्वाधीनता की अलख जगा रहे थे। स्वाधीनता प्राप्ति से कुछ समय पूर्व ही वे भारत लौटे; पर देश को विभाजित होते देख उनके मन को इतनी चोट लगी कि उन्होंने 15 अगस्त, #1947 को सांस ऊपर खींचकर देह त्याग दी। उनके दूसरे देवर सरदार स्वर्णसिंह भी जेल की यातनाएं सहते हुए #बलिदान हुए। उनके पति किशनसिंह का भी एक पैर घर में, तो दूसरा जेल और कचहरी में रहता था। विद्यावती जी के बड़े पुत्र जगतसिंह की 11 वर्ष की आयु में सन्निपात से मृत्यु हुई। भगतसिंह 23 वर्ष की आयु में फांसी चढ़ गये, तो उससे छोटे कुलतार सिंह और #कुलवीर सिंह भी कई वर्ष जेल में रहे।
इन जेलयात्राओं और मुकदमेबाजी से खेती चैपट हो गयी तथा घर की चैखटें तक बिक गयीं। इसी बीच घर में डाका भी पड़ गया। एक बार चोर उनके बैलों की जोड़ी ही चुरा ले गये, तो बाढ़ के पानी से गांव का जर्जर मकान भी बह गया। ईष्र्यालु पड़ोसियों ने उनकी पकी फसल जला दी। 1939-40 में सरदार #किशनसिंह जी को लकवा मार गया। उन्हें खुद चार बार सांप ने काटा; पर उच्च मनोबल की धनी माताजी हर बार घरेलू उपचार और झाड़फंूक से ठीक हो गयीं। भगतसिंह, सुखदेव और #राजगुरु की फांसी का समाचार सुनकर उन्होंने दिल पर पत्थर रख लिया क्योंकि भगतसिंह ने उनसे एक बार कहा था कि तुम रोना नहीं, वरना लोग क्या कहेंगे कि भगतसिंह की मां रो रही है।
भगतसिंह पर #उज्जैन के विख्यात लेखक श्री #श्रीकृष्ण ‘सरल’ ने एक महाकाव्य लिखा। नौ मार्च, 1965 को इसके विमोचन के लिए माताजी जब उज्जैन आयीं, तो उनके स्वागत को सारा नगर उमड़ पड़ा। उन्हें खुले रथ में कार्यक्रम स्थल तक ले जाया गया। सड़क पर लोगों ने फूल बिछा दिये। इतना ही नहीं, तो छज्जों पर खड़े लोग भी उन पर पुष्पवर्षा करते रहे। पुस्तक के #विमोचन के बाद सरल जी ने अपने अंगूठे से माताजी के भाल पर रक्त तिलक किया। माताजी ने वही अंगूठा एक पुस्तक पर लगाकर उसे नीलाम कर दिया। उससे 3,331 रु. प्राप्त हुए। माताजी को सैकड़ों लोगों ने मालाएं और राशि भेंट की। इस प्रकार प्राप्त 11,000 रु. माताजी ने दिल्ली में इलाज करा रहे भगतसिंह के साथी #बटुकेश्वर दत्त को भिजवा दिये। समारोह के बाद लोग उन मालाओं के फूल चुनकर अपने घर ले गये। जहां माताजी बैठी थीं, वहां की धूल लोगों ने सिर पर लगाई। सैकड़ों माताओं ने अपने बच्चों को माताजी के पैरों पर रखा, जिससे वे भी भगतसिंह जैसे वीर बन सकें। 1947 के बाद गांधीवादी सत्याग्रहियों को अनेक शासकीय सुविधाएं मिलीं; पर क्रांतिकारी प्रायः उपेक्षित ही रह गये। उनमें से कई गुमनामी में बहुत कष्ट का जीवन बिता रहे थे। माताजी उन सबको अपना पुत्र ही मानती थीं। वे उनकी खोज खबर लेकर उनसे मिलने जाती थीं तथा सरकार की ओर से उन्हें मिलने वाली पेंशन की राशि चुपचाप वहां तकिये के नीचे रख देती थीं।
इस प्रकार एक सार्थक और सुदीर्घ जीवन जीकर माताजी ने दिल्ली के एक अस्पताल में एक जून, 1975 को अंतिम सांस ली। उस समय उनके मन में यह सुखद अनुभूति थी कि अब भगतसिंह से उनके बिछोह की अवधि सदा के लिए समाप्त हो रही है।
वीर माता की इच्छा थी कि जहाँ इन क्रांतिकारियों का “पुत्रों समाधि है “वहीं पर हमारा दाह संस्कार करें “ आज #फ़िरोज़पुर में (हुसैनिवाला) में पंजाब माता समाधि है । लोग आकर अपना श्रद्धासुमन चढ़ाते हैं।💐
कितने कष्ट सहे माता ने , युग समान व सदी गयी।
अमृत पुत्रों के रहते फिर ,भारत माता त्रस्त ना हो॥

08/10/2021
Good morning....
18/11/2020

Good morning....

31/10/2020

हरे कृष्ण,

मादा बिच्छू की मृत्यु बहुत बहुत बहुत ही दु:खदायी रूप में होती है!! नीचे दिया गया चित्र एक मादा बिच्छु का है , इसकी अस्थिमज्जा पर मौजूद ये इसके बच्चे हैं, ये सभी बच्चे जन्म लेते ही अपनी मां की पीठ पर बैठ जाते हैं और अपनी भूख मिटाने हेतु तुरंत ही अपनी माँ के शरीर को ही खाना प्रारम्भ कर देते हैं, और तब तक खाते हैं जब तक कि उसकी केवल अस्थियां ही शेष ना रह जाए। वो तड़पती है , कराहती है , लेकिन ये पीछा नहीं छोड़ते , और ये उसे पलभर में नहीं मार देते बल्कि कई दिनों तक यह मौत से बदतर असहनीय पीड़ा को झेलती हुई दम तोड़ती है।
मादा बिच्छु की मौत होने पश्चात् ही ये सभी उसकी पीठ से नीचे उतरते हैं !!!

लख चौरासी के कुचक्र में ऐसी असंख्य योनियां हैं , जिनकी स्थितियां अज्ञात हैं , कदाचित् इसीलिए भवसागर को अगम और अपार कहा गया है।
ऋषिमत के मुताबिक यह भी मनुष्य योनि में किए गये कर्मों का ही भुगतान है।

अर्थात्
इन्सान इस मनुष्य जीवन में जो कर्म करेगा , नाना प्रकार की असंख्य योनियों में इन कर्मों के आधार से ही उसे दुःख सुख मिलते रहेंगे।
यह तय है !!!

चलती चक्की देखकर दिया कबीरा रोय
दोय पाटन के बीच में, साबुत बचा ना कोय।

साथियों,

मनुष्य जन्म बड़ी मुश्किल से मिला है...
ये जो गलियों में आवारा जानवर घूम रहे हैं न ... इन्हें भी कभी मनुष्य जन्म मिला था... इनमें से कोई डॉक्टर था... कोई इंजीनियर.. कोई कुछ और...

इनके गुरु भी इन्हें हरिनाम का भजन करने को कहते थे तो हँस कर जवाब देते थे कि... अभी हमारे पास टाइम नहीं है...

वो मनुष्य जन्म हार गए ... भगवान का भजन व धन्यवाद नहीं किया... पशु योनि में आ गए...

अब देखो टाइम ही टाइम है.... बेचारे गली - गली आवारा घूमते हैं... कोई धुत्कारता है... कोई फटकारता है...कर्म बहुत रूला डालते हैं ... किसी को नहीं छोड़ते अब नहीं समझेंगे तो कब समझेंगे...??

हरिनाम का भजन कर्मफलों को भी धो डालता हैं...

हमें चाहिए कि....
हरिनाम जाप जरूर करें...

सदैव जपें और खुश रहे
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे

Kya khushiyan milengi unko jinke sapne toot jate hain...Kya jodenge rishta kisi se wo jinke apne ruth jate hain
20/10/2020

Kya khushiyan milengi unko jinke sapne toot jate hain...
Kya jodenge rishta kisi se wo jinke apne ruth jate hain

19/05/2020
जस्सी,,,,,मेरी भानजी
10/04/2020

जस्सी,,,,,मेरी भानजी

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