अंशुल जैन विजयपुरा

अंशुल जैन विजयपुरा anshul jain vijaypura

एक होटल में बहुत ज्यादा भीड़ रहती थी जिसका फायदा उठाकर एक आदमी रोजाना कचोरी खाकर बिना पैसे दिए ही चला जाता था ।। मैं रोज...
27/08/2024

एक होटल में बहुत ज्यादा भीड़ रहती थी जिसका फायदा उठाकर एक आदमी रोजाना कचोरी खाकर बिना पैसे दिए ही चला जाता था ।। मैं रोज उस आदमी को देखता लेकिन होटल के मालिक को कभी नहीं बताया।।
✍️एक दिन सोचा चलो होटल के मालिक को बता ही देता हूं जैसे ही मैने उस होटल के मालिक को उस आदमी के बारे में बताया तो वो बोला की आप पहले ग्राहक नहीं हो जिसने हमें ये बात बताई है और भी बहुत से ग्राहक हमें यह बात बता चुके हैं।।
✍️मालिक की बात सुनकर मैंने पूछा कि आप उसे रोकते क्यों नहीं तो मलिक ने जवाब दिया कि एक बार हमने उस व्यक्ति का पीछा किया फिर हमें पता लगा कि वह एक भिखारी है और कचोरी खाने के बाद सीधा भगवान के मंदिर में जाता है।।
✍️जब हमने चुपके से भगवान के मंदिर में जाकर देखा तो वह व्यक्ति दुआ मांग रहा था कि है भगवान !कल उस होटल में आज से भी ज्यादा भीड़ भेजना ताकि भीड़ में मैं कचोरी खाके निकल सकूं।।
✍️फिर हमें एहसास हुआ की होटल हमारी मेहनत से नहीं उसकी दुआओं की बदौलत चलता है।।
दोस्तों जीवन में कभी-कभी हम अपनी सफलता पर घमंड करने लगते हैं लेकिन हमें पता नहीं होता कि वह सफलता हमें किसकी दुआओं की बदौलत मिली है।।

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