06/08/2026
“सरकार के पास सबको नौकरी देने के लिए पैसे नहीं हैं।”: उत्तर प्रदेश सरकार (2024)
लेकिन बीमारू राज्यों की चुनौतियों से जूझ रहे उत्तर प्रदेश में यही सरकार पिछले 8 वर्षों में विज्ञापनों पर 6,812 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है, यानी औसतन प्रतिदिन लगभग 2 करोड़ 30 लाख रुपये प्रचार पर खर्च किए गए।
सवाल यह है कि जब प्रचार के लिए प्रतिदिन करोड़ों रुपये उपलब्ध हैं, तो युवाओं को रोजगार देने, वर्षों से खाली पड़े सरकारी पदों पर भर्ती करने, शिक्षा, स्वास्थ्य, पुरानी पेंशन और अन्य बुनियादी सुविधाओं पर निवेश करने के लिए पैसे क्यों नहीं हैं?
मुख्यमंत्री MYogiAdityanath जी, विज्ञापनों से कमाई गई इमेज क्षणभंगुर होती है। जंतर-मंतर पर भाजपा सरकार की नीतियों से पीड़ित छात्र-छात्राओं (Gen-Z) का आंदोलन इसका जीता-जागता उदाहरण है।