14/07/2025
मोहम्मद तारिक़ खां साहब के २००२ में गुमशुदा होने के बाद, उनके परिवार (कानूनी उत्तराधिकारीयो) को मुश्किल वक्त में ना तो किसी सगे चाचा ने संभाला, न ही सौतेले चाचा ने, न किसी अन्य रिश्तेदार ने | यहां पर शरीया फर्ज भूल गए थे सारे रिश्तेदार |
ऐसे में आज उनके कानूनी उत्तराधिकारियों (बेटा, बेटी और बीवी) को पिछले ६ वर्षों से गांव से दुबारा जुड़ने के बाद जो भी परेशानियां पेश आ रही है, उससे ये पता लगता है, आगे पंचायत या प्रशासन का ही रास्ता बचता है |
इसलिए जमीन में खेती करवाने में बाधा डालना बंद करें और जहां बेचने की बात चल रही है, अफवाहें ना उड़ाएं | ज्ञात हो कि मरहूम अब्दुल वहाब खान साहब के रिहाइश घर को गांव के कुछ रिश्तेदारों ने मिलकर जमींदोज कर दिया गया था , इसलिए अब तारिक़ खान साहब का परिवार गांव में रह नहीं सकता और सिर्फ आना जाना करता है |
इसलिए रिश्तेदारों से अनुरोध है कि सहयोग करें | जितना तारिक़ खान साहब के परिवार बीते २ दशकों से ज्यादा सहा है, उसकी आप कल्पना भी नहीं कर सकते |
पैसों और रुतबों की ताकत में अंधे हो चुके रिश्तेदारों को विनम्र निवेदन |