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आईपीएल 2026 का रोमांच अपने शुरुआती दौर में ही जबरदस्त मुकाबलों के साथ देखने को मिल रहा है और इसी कड़ी में 31 मार्च को मु...
30/03/2026

आईपीएल 2026 का रोमांच अपने शुरुआती दौर में ही जबरदस्त मुकाबलों के साथ देखने को मिल रहा है और इसी कड़ी में 31 मार्च को मुल्लांपुर के महाराजा यादविंद्र सिंह स्टेडियम में पंजाब किंग्स और गुजरात टाइटंस के बीच होने वाला मुकाबला खासा दिलचस्प माना जा रहा है। यह सिर्फ एक साधारण लीग मैच नहीं बल्कि दोनों टीमों के लिए अपने अभियान की दिशा तय करने वाला अहम टकराव है। पंजाब किंग्स इस बार एक नए आत्मविश्वास और अधूरी ख्वाहिश को पूरा करने के इरादे से मैदान में उतर रही है, क्योंकि पिछले सीजन यानी आईपीएल 2025 में टीम फाइनल तक पहुंचकर भी खिताब अपने नाम नहीं कर सकी थी और रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर से हारकर उसे संतोष करना पड़ा था। ऐसे में इस बार टीम का लक्ष्य सिर्फ प्लेऑफ या फाइनल नहीं बल्कि ट्रॉफी उठाना है, और उसकी शुरुआत जीत के साथ करना टीम के लिए बेहद जरूरी हो जाता है।
दूसरी तरफ गुजरात टाइटंस की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं है। 2022 में अपने पहले ही सीजन में खिताब जीतने वाली यह टीम पिछले संस्करण में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाई और प्लेऑफ से बाहर हो गई थी। अब टीम एक बार फिर से खुद को साबित करने के लिए उतरी है और इस बार नेतृत्व युवा कप्तान शुभमन गिल के हाथों में है, जिन्होंने पिछले कुछ समय में बल्लेबाजी के साथ-साथ कप्तानी में भी अपनी परिपक्वता दिखाई है। हालांकि टी20 इंटरनेशनल टीम से बाहर होने के बाद गिल पर व्यक्तिगत स्तर पर भी दबाव है कि वह अपने प्रदर्शन से चयनकर्ताओं को जवाब दें। उनका स्ट्राइक रेट पहले चर्चा का विषय रहा है, लेकिन पिछले सीजन में उन्होंने अपनी बल्लेबाजी में आक्रामकता जोड़कर यह दिखा दिया कि वह परिस्थिति के अनुसार खुद को ढाल सकते हैं।
अगर दोनों टीमों के बीच अब तक के रिकॉर्ड पर नजर डालें तो मुकाबला पूरी तरह संतुलित नजर आता है। आईपीएल इतिहास में दोनों के बीच अब तक 6 मुकाबले खेले गए हैं, जिनमें से 3-3 मैच दोनों टीमों ने जीते हैं। पिछले सीजन में जब दोनों आमने-सामने आए थे, तब पंजाब किंग्स ने 11 रन से बाजी मारी थी। इससे यह साफ है कि दोनों टीमों के बीच टक्कर हमेशा कड़ी होती है और इस बार भी मुकाबला रोमांच से भरपूर रहने की पूरी उम्मीद है।
मुल्लांपुर के इस स्टेडियम की पिच भी इस मुकाबले को और दिलचस्प बनाती है। यहां की सतह पारंपरिक मिट्टी की बजाय रेत आधारित है, जिससे तेज गेंदबाजों को अतिरिक्त उछाल और गति मिलती है। हालांकि यह पूरी तरह गेंदबाजों के पक्ष में नहीं होती, क्योंकि बल्लेबाज भी अगर शुरुआत में टिक जाएं तो बड़े शॉट खेलने में सक्षम होते हैं। यानी इस पिच पर संतुलन देखने को मिलता है और मैच के दौरान परिस्थितियां तेजी से बदल सकती हैं, जो दर्शकों के लिए रोमांच को और बढ़ा देता है।
खिलाड़ियों की बात करें तो पंजाब किंग्स की बल्लेबाजी काफी हद तक कप्तान श्रेयस अय्यर पर निर्भर करती है, जिन्होंने पिछले सीजन में 175 से ज्यादा के स्ट्राइक रेट से रन बनाकर अपनी उपयोगिता साबित की थी। उनके अलावा प्रभसिमरन सिंह जैसे युवा बल्लेबाज भी शानदार फॉर्म में हैं और तेजी से रन बनाने की क्षमता रखते हैं। मध्यक्रम में निहाल वढेरा, शशांक सिंह और अन्य भारतीय खिलाड़ी टीम की मजबूती हैं। गेंदबाजी में अर्शदीप सिंह टीम के प्रमुख हथियार हैं, जो खासकर डेथ ओवरों में मैच का रुख बदलने की क्षमता रखते हैं।
वहीं गुजरात टाइटंस की ताकत उसका संतुलित स्क्वाड है, जिसमें अनुभवी और युवा खिलाड़ियों का अच्छा मिश्रण है। शुभमन गिल और साइ सुदर्शन की सलामी जोड़ी टीम को मजबूत शुरुआत देने में सक्षम है, जबकि मध्यक्रम में जोस बटलर, ग्लेन फिलिप्स जैसे आक्रामक बल्लेबाज किसी भी गेंदबाजी आक्रमण को ध्वस्त कर सकते हैं। गेंदबाजी में राशिद खान की अगुवाई में स्पिन आक्रमण काफी खतरनाक है, वहीं तेज गेंदबाजी में प्रसिद्ध कृष्णा, मोहम्मद सिराज और कैगिसो रबाडा जैसे गेंदबाज विपक्षी बल्लेबाजों के लिए चुनौती पेश करते हैं।
इस मुकाबले में एक दिलचस्प पहलू यह भी रहेगा कि दोनों कप्तान—श्रेयस अय्यर और शुभमन गिल—खुद को साबित करने के लिए अतिरिक्त दबाव में होंगे। श्रेयस ने आईपीएल में अपनी कप्तानी से पहले ही प्रभावित किया है, जबकि गिल के लिए यह एक ऐसा मंच है जहां वह अपने नेतृत्व और बल्लेबाजी दोनों से आलोचकों को जवाब दे सकते हैं।
कुल मिलाकर यह मुकाबला सिर्फ दो टीमों के बीच नहीं बल्कि रणनीति, आत्मविश्वास और प्रदर्शन की एक बड़ी परीक्षा है। पंजाब अपने घरेलू मैदान पर जीत के साथ शुरुआत कर “घर की बादशाहत” साबित करना चाहेगी, जबकि गुजरात टाइटंस जीत के साथ यह संदेश देना चाहेगी कि पिछला सीजन सिर्फ एक झटका था, असली ताकत अभी बाकी है। ऐसे में क्रिकेट प्रेमियों को एक रोमांचक और कांटे की टक्कर वाला मैच देखने को मिल सकता है, जहां आखिरी ओवर तक नतीजा तय होना मुश्किल होगा।

30/03/2026

विधायक एच.एन. सिंह पटेल द्वारा आज अंजानशहीद (पक्का पोखरा) पर आरसीसी सड़क का भव्य उद्घाटन किया गया। कार्यक्रम में स्थानीय नागरिकों की बड़ी उपस्थिति रही। इस सड़क निर्माण से क्षेत्र में आवागमन सुगम होगा और विकास को नई गति मिलेगी। लोगों ने इस पहल के लिए विधायक का आभार व्यक्त किया।

30/03/2026
हिंदू धर्म को अगर सच में समझना है तो उसे बाहर के दिखावे, रीति-रिवाज या समाज में फैली गलत धारणाओं से नहीं, बल्कि उसके मूल...
30/03/2026

हिंदू धर्म को अगर सच में समझना है तो उसे बाहर के दिखावे, रीति-रिवाज या समाज में फैली गलत धारणाओं से नहीं, बल्कि उसके मूल सिद्धांतों से समझना होगा। जब हम जड़ तक जाते हैं तो साफ दिखता है कि वहाँ “पाखंड” के लिए कोई जगह ही नहीं है—क्योंकि पूरा दर्शन ही सत्य, अनुभव और आत्मबोध पर आधारित है।
सबसे पहले समझिए कि हिंदू धर्म कोई एक व्यक्ति द्वारा बनाया गया “रूल बुक” नहीं है, बल्कि हजारों सालों में ऋषियों के अनुभव (Realization) से निकला ज्ञान है। इसीलिए इसे “सनातन धर्म” कहा जाता है—यानी जो हमेशा से है और हमेशा रहेगा।
अब इसके मूल सिद्धांतों को सरल और गहराई से समझते हैं—
1. सत्य (Truth) ही परम है
वेद और उपनिषद का मूल संदेश है—“सत्यं वद, धर्मं चर” यानी सत्य बोलो और धर्म के रास्ते पर चलो।
यहाँ कोई दिखावा नहीं, कोई बाहरी नाटक नहीं—सिर्फ सच्चाई।
पाखंड वहीं होता है जहाँ झूठ और दिखावा हो, लेकिन यहाँ तो आधार ही सत्य है।
2. आत्मा और ब्रह्म का सिद्धांत
उपनिषद कहते हैं—“अहं ब्रह्मास्मि” (मैं ही ब्रह्म हूँ) और “तत्त्वमसि” (तू वही है)।
मतलब हर इंसान के अंदर वही दिव्यता है।
जब हर व्यक्ति में भगवान है, तो दिखावे की पूजा या दूसरों को नीचा दिखाने की कोई जरूरत ही नहीं रहती।
पाखंड तब पैदा होता है जब इंसान बाहर दिखाने लगे, अंदर खाली हो—यहाँ तो ध्यान अंदर की यात्रा पर है।
3. कर्म का नियम (Law of Karma)
गीता का सिद्धांत है—जो करोगे वही पाओगे।
यहाँ कोई शॉर्टकट नहीं, कोई दिखावे से फल नहीं मिलेगा।
अगर कोई पूजा करके दिखावा करता है लेकिन कर्म गलत हैं, तो उसे फल नहीं मिलेगा।
इसलिए पाखंड यहाँ टिक ही नहीं सकता।
4. स्वधर्म (अपना कर्तव्य)
भगवद गीता कहती है—“स्वधर्मे निधनं श्रेयः” यानी अपने कर्तव्य को निभाना सबसे बड़ा धर्म है।
यहाँ धर्म का मतलब पूजा-पाठ नहीं, बल्कि सही कर्म करना है—ईमानदारी से।
पाखंड तब होता है जब आदमी बाहर धार्मिक दिखे लेकिन अंदर कर्तव्य से भागे—यहाँ उल्टा सिखाया गया है।
5. अनुभव आधारित ज्ञान (Not Blind Faith)
हिंदू धर्म कहता है—“खुद अनुभव करो, जानो, समझो”
यह अंधविश्वास नहीं सिखाता, बल्कि प्रश्न पूछने की आज़ादी देता है।
नचिकेता, अर्जुन—सबने सवाल किए और जवाब पाए।
जहाँ सवाल करने की आज़ादी हो, वहाँ पाखंड टिक नहीं सकता।
6. अनेकता में एकता (Unity in Diversity)
यह धर्म कहता है—“एकं सद्विप्रा बहुधा वदन्ति” यानी सत्य एक है, लेकिन उसे अलग-अलग तरीके से समझा जाता है।
इसलिए यहाँ अलग-अलग पूजा पद्धतियाँ हैं, लेकिन लक्ष्य एक ही है।
पाखंड वहाँ होता है जहाँ “सिर्फ मेरा ही सही है”—यहाँ ऐसा नहीं है।
अब सबसे महत्वपूर्ण बात समझिए—
आज जो लोग हिंदू धर्म को “पाखंड” कहते हैं, वे अक्सर इन मूल सिद्धांतों को नहीं जानते। वे सिर्फ समाज में चल रही कुछ गलत प्रथाओं को देखते हैं—जैसे अंधविश्वास, ढोंग, या दिखावा—और उसे ही धर्म मान लेते हैं।
लेकिन सच्चाई यह है कि—
👉 वो “धर्म” नहीं, बल्कि धर्म के नाम पर किया गया गलत प्रयोग है।
जैसे एक साफ पानी के स्रोत में अगर कोई गंदगी डाल दे, तो पानी गंदा दिखेगा—लेकिन स्रोत गंदा नहीं होता।
ठीक वैसे ही—
हिंदू धर्म का मूल पूरी तरह वैज्ञानिक, आध्यात्मिक और सत्य पर आधारित है।
पाखंड उसमें नहीं है, बल्कि तब आता है जब इंसान ज्ञान छोड़कर सिर्फ दिखावा करने लगता है।

आज़मगढ़ का इतिहास जितना पुराना है, उतना ही जटिल और बहुस्तरीय भी है। जब हम “पहले हिंदू नेता” की बात करते हैं, तो यह समझना...
29/03/2026

आज़मगढ़ का इतिहास जितना पुराना है, उतना ही जटिल और बहुस्तरीय भी है। जब हम “पहले हिंदू नेता” की बात करते हैं, तो यह समझना ज़रूरी हो जाता है कि उस समय की सामाजिक और राजनीतिक संरचना आज जैसी स्पष्ट नहीं थी। उस दौर में “नेता” शब्द का प्रयोग आधुनिक अर्थों में नहीं होता था, बल्कि सत्ता, प्रभाव और सामाजिक प्रतिष्ठा के आधार पर व्यक्तियों की पहचान होती थी।
आज़मगढ़ की स्थापना 17वीं शताब्दी में मानी जाती है, जब 1665 के आसपास आज़म खान ने इस शहर को बसाया। आज़म खान के पिता विक्रमजीत थे, जिनका इतिहास इस पूरे क्षेत्र को समझने की कुंजी है। विक्रमजीत मूल रूप से एक गौतम राजपूत थे, अर्थात वे जन्म से हिंदू थे। उस समय उत्तर भारत में मुगल शासन का प्रभाव था और कई स्थानीय राजपूत परिवारों ने राजनीतिक, सामाजिक या प्रशासनिक कारणों से इस्लाम स्वीकार किया। विक्रमजीत का धर्म परिवर्तन भी इसी व्यापक ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में देखा जाता है।
विक्रमजीत के बारे में यह माना जाता है कि वे अपने समय के एक प्रभावशाली स्थानीय सरदार थे। उनके पास भूमि, सैन्य शक्ति और सामाजिक प्रतिष्ठा थी। जब उन्होंने इस्लाम स्वीकार किया, तो उनका नाम परिवर्तित हुआ और उनके परिवार ने नई पहचान के साथ सत्ता में अपनी स्थिति बनाए रखी। उनके पुत्र आज़म खान ने उसी विरासत को आगे बढ़ाते हुए आज़मगढ़ नगर की स्थापना की, जो आगे चलकर एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक और सांस्कृतिक केंद्र बना।
अब यदि हम “पहले हिंदू नेता” की बात करें, तो यहाँ एक महत्वपूर्ण तथ्य सामने आता है कि आज़मगढ़ की स्थापना से पहले यह क्षेत्र विभिन्न छोटे-छोटे राजपूत और अन्य जातीय समूहों के अधीन था। इन समूहों के अपने-अपने मुखिया होते थे, जिन्हें आज के संदर्भ में स्थानीय नेता कहा जा सकता है। लेकिन किसी एक व्यक्ति का नाम इतिहास में इस रूप में दर्ज नहीं है कि वह “आज़मगढ़ का पहला हिंदू नेता” था। इसका कारण यह है कि उस समय लिखित इतिहास सीमित था और स्थानीय नेतृत्व अधिकतर वंशानुगत तथा क्षेत्रीय स्तर तक सीमित था।
प्राचीन और मध्यकालीन काल में यह क्षेत्र ऋषियों, मुनियों और बाद में स्वतंत्रता सेनानियों की भूमि रहा। यहाँ की पहचान किसी एक नेता से नहीं, बल्कि सामूहिक सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा से बनी। यही कारण है कि “पहले हिंदू नेता” की कोई स्पष्ट, आधिकारिक सूची या नाम उपलब्ध नहीं है।
आधुनिक काल में आते-आते, जब लोकतांत्रिक राजनीति का विकास हुआ, तब आज़मगढ़ ने कई प्रमुख हिंदू नेताओं को जन्म दिया। उदाहरण के लिए रमाकांत यादव एक प्रभावशाली नेता रहे हैं, जिन्होंने इस क्षेत्र की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसी तरह मुलायम सिंह यादव का भी आज़मगढ़ और पूर्वांचल की राजनीति में गहरा प्रभाव रहा है, भले ही उनकी पहचान एक व्यापक सामाजिक-राजनीतिक नेता के रूप में रही हो।
इन आधुनिक नेताओं की तुलना में अगर हम विक्रमजीत के समय को देखें, तो वहाँ नेतृत्व की परिभाषा अलग थी। विक्रमजीत को एक तरह से उस क्षेत्र का प्रारंभिक प्रभावशाली हिंदू चेहरा माना जा सकता है, लेकिन उनका धर्म परिवर्तन और उसके बाद की परिस्थितियाँ यह स्पष्ट करती हैं कि इतिहास में पहचान स्थिर नहीं होती, बल्कि समय के साथ बदलती रहती है।
इस पूरे संदर्भ से यह निष्कर्ष निकलता है कि आज़मगढ़ में “पहले हिंदू नेता” का कोई एक निश्चित नाम बताना ऐतिहासिक रूप से संभव नहीं है। हाँ, विक्रमजीत जैसे व्यक्तित्व उस संक्रमण काल के प्रतीक जरूर हैं, जहाँ हिंदू सामाजिक संरचना से निकलकर एक नया राजनीतिक और धार्मिक स्वरूप सामने आया। वहीं आधुनिक युग में लोकतांत्रिक व्यवस्था ने स्पष्ट रूप से नेताओं की पहचान और उनकी भूमिका को परिभाषित किया, जिससे हमें रमाकांत यादव और मुलायम सिंह यादव जैसे नाम स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं।
इस प्रकार, आज़मगढ़ का इतिहास किसी एक व्यक्ति की कहानी नहीं, बल्कि परिवर्तन, संघर्ष और सांस्कृतिक समन्वय की एक लंबी यात्रा है, जिसमें विक्रमजीत जैसे पात्र एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में उभरते हैं।

उत्तर प्रदेश के विकास की कहानी में एक नया अध्याय उस समय जुड़ गया, जब नरेंद्र मोदी ने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के प्रथम च...
29/03/2026

उत्तर प्रदेश के विकास की कहानी में एक नया अध्याय उस समय जुड़ गया, जब नरेंद्र मोदी ने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के प्रथम चरण का उद्घाटन किया। यह सिर्फ एक एयरपोर्ट का उद्घाटन नहीं था, बल्कि यह उस बदलते भारत की तस्वीर थी, जो अब इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। नोएडा के जेवर क्षेत्र में बना यह एयरपोर्ट आज देश की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में शामिल हो चुका है, जिसने न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे देश के विकास को नई दिशा देने का काम किया है।
करीब 5,000 हेक्टेयर में फैला यह विशाल एयरपोर्ट प्रोजेक्ट ₹30,000 करोड़ से अधिक की लागत से तैयार हो रहा है। इसका निर्माण चार चरणों में किया जाना है, जिसमें पहले चरण पर लगभग ₹10,000 से ₹12,000 करोड़ की लागत आई है और यह अब संचालन के लिए तैयार हो चुका है। पहले चरण में एक रनवे तैयार किया गया है, जबकि पूरी परियोजना पूरी होने के बाद यहां कुल छह रनवे होंगे। शुरुआती चरण में यह एयरपोर्ट लगभग 1.2 करोड़ यात्रियों को प्रतिवर्ष संभालने में सक्षम होगा, जिसे भविष्य में बढ़ाकर 7 से 8 करोड़ यात्रियों तक किया जा सकता है।
यह एयरपोर्ट भारत का एक प्रमुख ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट है, जिसे अत्याधुनिक तकनीक और मल्टी-फेज विकास योजना के साथ तैयार किया गया है। इसका सबसे बड़ा उद्देश्य दिल्ली-एनसीआर के मौजूदा एयरपोर्ट पर बढ़ते दबाव को कम करना और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विकास को गति देना है। इसके साथ ही यह क्षेत्रीय रोजगार, व्यापार और निवेश के नए अवसर भी पैदा करेगा।
उद्घाटन समारोह के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक परिस्थितियों पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में पिछले एक महीने से चल रहे युद्ध ने पूरी दुनिया को चिंतित कर दिया है। इस संघर्ष के कारण कई देशों में खाद्य सामग्री, पेट्रोल, डीजल, गैस और उर्वरकों की कमी जैसी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो गई हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि भारत भी इस चुनौती से अछूता नहीं है, लेकिन देश अपनी पूरी क्षमता और दृढ़ता के साथ इस संकट का सामना कर रहा है।
प्रधानमंत्री ने देशवासियों को धन्यवाद देते हुए कहा कि जनता की ताकत ही भारत की सबसे बड़ी पूंजी है। इसी विश्वास के सहारे देश इन कठिन परिस्थितियों में भी मजबूती से खड़ा है। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि सरकार हर संभव कदम उठा रही है ताकि इस वैश्विक संकट का असर आम लोगों और किसानों पर कम से कम पड़े।
कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने यह भी कहा कि उनके लिए यह क्षण विशेष है, क्योंकि उन्हें इस एयरपोर्ट का शिलान्यास करने का भी अवसर मिला था और अब उद्घाटन करने का भी सौभाग्य प्राप्त हुआ। उन्होंने कहा कि आज उत्तर प्रदेश देश का सबसे अधिक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों वाला राज्य बन गया है, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है।
उन्होंने पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जनता को विशेष बधाई देते हुए कहा कि यह एयरपोर्ट केवल विमानों के उड़ान भरने का केंद्र नहीं होगा, बल्कि यह पूरे क्षेत्र के विकास को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा। यहां से उड़ने वाली हर फ्लाइट केवल यात्रियों को ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की प्रगति और संभावनाओं को भी दुनिया से जोड़ेगी।
प्रधानमंत्री ने विपक्षी दलों, विशेष रूप से समाजवादी पार्टी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पहले के समय में नोएडा को “लूट का एटीएम” बना दिया गया था, लेकिन आज वही नोएडा विकास और आधुनिकता का प्रतीक बन रहा है। उन्होंने याद दिलाया कि इस एयरपोर्ट को 2003 में ही मंजूरी मिल गई थी, लेकिन कई वर्षों तक यह परियोजना फाइलों में ही दबी रही। न तो कांग्रेस और न ही समाजवादी पार्टी ने इसे जमीन पर उतारने की दिशा में ठोस कदम उठाए।
उन्होंने कहा कि जब केंद्र और राज्य दोनों में भाजपा-एनडीए की सरकार बनी, तब इस परियोजना को गति मिली और आज यह हकीकत बनकर सामने है। यह “डबल इंजन सरकार” के समन्वय और प्रतिबद्धता का उदाहरण है।
प्रधानमंत्री ने देश में तेजी से बढ़ती हवाई कनेक्टिविटी का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि 2014 से पहले देश में केवल 74 एयरपोर्ट थे, जबकि आज इनकी संख्या 160 से अधिक हो चुकी है। अब हवाई यात्रा केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि छोटे शहरों और कस्बों तक भी पहुंच रही है।
उन्होंने “उड़ान योजना” का उल्लेख करते हुए कहा कि इस योजना के तहत एक करोड़ से अधिक लोग सस्ती दरों पर हवाई यात्रा कर चुके हैं। पहले यह माना जाता था कि हवाई यात्रा केवल अमीरों के लिए है, लेकिन अब यह आम लोगों की पहुंच में आ गई है। यह बदलाव भारत के बदलते स्वरूप को दर्शाता है।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को अत्याधुनिक सुविधाओं के साथ एक आधुनिक एविएशन हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां डिजिटल प्रोसेसिंग सिस्टम, तेज सुरक्षा जांच, आधुनिक टर्मिनल और यात्रियों की सुविधा के लिए कई नई तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है। इसके साथ ही इसे एक बड़े कार्गो हब के रूप में भी विकसित किया जा रहा है, जिससे निर्यात-आयात गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
पर्यावरण के दृष्टिकोण से भी इस एयरपोर्ट को विशेष बनाया गया है। इसमें ग्रीन एनर्जी, सोलर पावर और सतत विकास के मानकों का विशेष ध्यान रखा गया है। यह न केवल आधुनिक सुविधाओं से लैस है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।
केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू ने भी इस अवसर पर एयरपोर्ट की खासियतों को साझा किया। उन्होंने बताया कि इस एयरपोर्ट का डिजाइन भारतीय संस्कृति और परंपरा से प्रेरित है। टर्मिनल भवन में पारंपरिक हवेलियों की शैली, मेहराब और आंगन जैसे तत्वों को शामिल किया गया है।
उन्होंने कहा कि गंगा घाट की थीम पर आधारित मल्टी-लेवल संरचना, सीढ़ीनुमा डिजाइन और विशेष प्रकाश व्यवस्था यात्रियों को एक आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करेगी। इसके साथ ही देशभर के पारंपरिक हस्तशिल्प को भी एयरपोर्ट के सौंदर्यीकरण में शामिल किया गया है, जिससे भारतीय कला और संस्कृति को वैश्विक मंच मिलेगा।
यह एयरपोर्ट केवल एक परिवहन केंद्र नहीं है, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक पहचान और आधुनिकता का संगम भी है। यहां आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ पारंपरिक मूल्यों का जो मेल देखने को मिलता है, वह इसे अन्य एयरपोर्ट्स से अलग बनाता है।
कार्यक्रम में आनंदीबेन पटेल, योगी आदित्यनाथ, केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक समेत कई वरिष्ठ नेता उपस्थित रहे।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट आज केवल एक परियोजना नहीं, बल्कि एक सपने के साकार होने की कहानी है। यह उस भारत का प्रतीक है, जो अब केवल सोचता नहीं, बल्कि तेजी से उसे पूरा भी करता है। यह एयरपोर्ट आने वाले समय में न केवल यात्रियों को नई सुविधाएं देगा, बल्कि पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था, रोजगार और विकास को नई दिशा देगा।
इस नई उड़ान के साथ उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरा भारत एक नई ऊंचाई की ओर बढ़ रहा है, जहां विकास, तकनीक और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है।

भारत के पूर्व राष्ट्रपति ए. पी. जे. अब्दुल कलाम का नाम सुनते ही हमारे मन में एक ऐसे महान व्यक्तित्व की छवि उभरती है, जो ...
28/03/2026

भारत के पूर्व राष्ट्रपति ए. पी. जे. अब्दुल कलाम का नाम सुनते ही हमारे मन में एक ऐसे महान व्यक्तित्व की छवि उभरती है, जो न केवल विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में अग्रणी थे, बल्कि मानवीय मूल्यों के भी सच्चे प्रतीक थे। उनका जीवन हमें यह सिखाता है कि सच्ची महानता केवल बड़े पद, उपलब्धियों या प्रसिद्धि में नहीं होती, बल्कि इस बात में होती है कि हम दूसरों के साथ कैसा व्यवहार करते हैं। एक बार की बात है, जब डॉ. कलाम भारत के राष्ट्रपति थे। उन्हें एक बड़े और प्रतिष्ठित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था। कार्यक्रम बहुत भव्य था, चारों ओर रोशनी, सजावट और उत्साह का माहौल था। सभी लोग डॉ. कलाम के आगमन का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। जैसे ही वे मंच पर पहुंचे, पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। डॉ. कलाम ने अपने संबोधन में युवाओं को प्रेरित किया, देश के विकास की बात की और जीवन में आगे बढ़ने के लिए सकारात्मक सोच अपनाने का संदेश दिया। उनके शब्द सरल थे, लेकिन उनमें गहराई और प्रेरणा की शक्ति थी। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद लोग धीरे-धीरे वहां से जाने लगे। अधिकांश लोग उस भव्य आयोजन की चर्चा करते हुए बाहर निकल रहे थे। इसी बीच एक ऐसा क्षण आया, जिसने उस पूरे कार्यक्रम का असली अर्थ बदल दिया। डॉ. कलाम मंच से नीचे उतरे और बाहर की ओर बढ़ने लगे। तभी उनकी नजर एक साधारण कर्मचारी पर पड़ी, जो चुपचाप कुर्सियां समेट रहा था। वह बिना किसी अपेक्षा के अपना काम कर रहा था, जैसे यह उसका रोज का कर्तव्य हो। डॉ. कलाम ने उसे देखा और बिना किसी झिझक के उसके पास चले गए। उनके चेहरे पर वही सरल और आत्मीय मुस्कान थी, जो हर किसी को अपना बना लेती थी। उन्होंने उस कर्मचारी से कहा, “आपका बहुत धन्यवाद, आपने इतनी अच्छी व्यवस्था संभाली।” यह सुनकर वह कर्मचारी कुछ पल के लिए बिल्कुल चौंक गया। उसने शायद कभी सोचा भी नहीं था कि देश का राष्ट्रपति उससे इस तरह बात करेगा। उसकी आंखों में जो भाव उभरे, वे केवल खुशी के नहीं थे, बल्कि आत्मसम्मान और गर्व के थे। उसे पहली बार महसूस हुआ कि उसका काम भी महत्वपूर्ण है, कि उसकी मेहनत को भी कोई समझता है और उसकी कद्र करता है। यह दृश्य वहां मौजूद अन्य लोगों के लिए भी बेहद प्रेरणादायक था। उन्होंने देखा कि एक इतने बड़े पद पर आसीन व्यक्ति भी एक साधारण कर्मचारी के प्रति इतना सम्मान और विनम्रता दिखा रहा है। यह उनके लिए एक बड़ी सीख थी कि सच्ची महानता क्या होती है। डॉ. कलाम ने इसके बाद वहां उपस्थित लोगों से कहा कि किसी भी व्यक्ति का काम छोटा या बड़ा नहीं होता। हर काम का अपना महत्व होता है और हर व्यक्ति समाज के लिए जरूरी होता है। उन्होंने समझाया कि यदि हम किसी के काम को छोटा समझते हैं, तो हम उसकी मेहनत और उसके योगदान का अपमान करते हैं। समाज में अक्सर यह देखा जाता है कि लोग केवल बड़े पदों पर बैठे लोगों का ही सम्मान करते हैं। जो लोग साधारण काम करते हैं, उन्हें अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। लेकिन यह सोच पूरी तरह गलत है। एक सफाईकर्मी, एक ड्राइवर, एक सहायक या एक कर्मचारी—सभी अपने-अपने स्तर पर समाज को चलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यदि कोई एक भी व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी को सही तरीके से न निभाए, तो पूरी व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। इसलिए हर व्यक्ति का योगदान महत्वपूर्ण है और हर व्यक्ति सम्मान का अधिकारी है। यही वह सोच है, जो एक समाज को मजबूत और संतुलित बनाती है। इस घटना से यह भी स्पष्ट होता है कि सम्मान देना कोई कठिन काम नहीं है। इसके लिए न तो धन की आवश्यकता होती है और न ही किसी विशेष शक्ति की। केवल एक सच्चा दिल और दूसरों के प्रति संवेदनशीलता ही काफी होती है। एक छोटा सा “धन्यवाद” किसी के जीवन में बहुत बड़ा बदलाव ला सकता है। उस कर्मचारी के साथ भी यही हुआ। उस दिन के बाद उसने अपने काम को और अधिक लगन और समर्पण के साथ करना शुरू कर दिया। क्योंकि अब उसे यह महसूस हो गया था कि उसका काम केवल एक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि एक ऐसा योगदान है जिसकी कद्र होती है। यह भावना किसी भी व्यक्ति को आगे बढ़ने और बेहतर बनने के लिए प्रेरित करती है। यह कहानी हमें आत्मचिंतन करने के लिए भी प्रेरित करती है। हमें यह सोचना चाहिए कि क्या हम अपने आसपास के लोगों के साथ सही व्यवहार करते हैं? क्या हम उन लोगों को धन्यवाद देते हैं, जो हमारे जीवन को आसान बनाते हैं? क्या हम हर व्यक्ति के काम का सम्मान करते हैं? अक्सर हम अपनी व्यस्त जिंदगी में इन बातों को नजरअंदाज कर देते हैं। हम केवल अपने काम और अपनी सफलता पर ध्यान देते हैं और दूसरों के योगदान को भूल जाते हैं। लेकिन यदि हम वास्तव में एक बेहतर समाज बनाना चाहते हैं, तो हमें अपनी सोच में बदलाव लाना होगा। हमें यह समझना होगा कि हर व्यक्ति अपने जीवन में संघर्ष कर रहा है, मेहनत कर रहा है और अपने कर्तव्यों को निभा रहा है। इसलिए हमें हर किसी के प्रति सम्मान और सहानुभूति का भाव रखना चाहिए। यही एक सच्चे और सभ्य समाज की पहचान होती है। डॉ. कलाम का जीवन हमें यह सिखाता है कि सच्ची महानता विनम्रता में होती है। उन्होंने कभी अपने पद का अहंकार नहीं किया, बल्कि हमेशा एक सामान्य इंसान की तरह जीवन जिया। यही कारण है कि वे आज भी करोड़ों लोगों के दिलों में बसे हुए हैं। अंत में, यह कहना गलत नहीं होगा कि एक छोटी सी सराहना किसी के जीवन में बड़ा परिवर्तन ला सकती है। यदि हम सभी अपने जीवन में यह छोटी सी आदत अपना लें कि हम हर व्यक्ति को उसके काम के लिए सम्मान दें, तो समाज में सकारात्मक बदलाव निश्चित रूप से आएगा। जब हम दूसरों को सम्मान देते हैं, तो हम न केवल उनके आत्मसम्मान को बढ़ाते हैं, बल्कि अपने अंदर भी एक बेहतर इंसान बनने की भावना को विकसित करते हैं। यही वह सच्ची सफलता है, जो किसी भी पद या धन से कहीं अधिक मूल्यवान होती है।

वित्त वर्ष 2024-25 में देश के राष्ट्रीय राजनीतिक दलों को मिले चंदे के आंकड़ों ने भारतीय राजनीति की वित्तीय तस्वीर को एक ...
26/03/2026

वित्त वर्ष 2024-25 में देश के राष्ट्रीय राजनीतिक दलों को मिले चंदे के आंकड़ों ने भारतीय राजनीति की वित्तीय तस्वीर को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। कुल 6648.563 करोड़ रुपये के चंदे में से 91 प्रतिशत से अधिक हिस्सा अकेले भारतीय जनता पार्टी के खाते में जाना यह संकेत देता है कि देश की राजनीति में आर्थिक संसाधनों का वितरण बेहद असमान हो चुका है। भाजपा को इस दौरान 6074.015 करोड़ रुपये का चंदा मिला, जो कि अन्य सभी राष्ट्रीय दलों के कुल चंदे से कई गुना अधिक है। वहीं कांग्रेस 517.394 करोड़ रुपये के साथ दूसरे स्थान पर रही, लेकिन दोनों के बीच का अंतर इतना बड़ा है कि यह लगभग 12 गुना तक पहुंच जाता है।
यह अंतर केवल आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि राजनीतिक दलों के बीच आर्थिक शक्ति का संतुलन तेजी से एक तरफ झुकता जा रहा है। खास बात यह है कि भाजपा को दान देने वालों की संख्या 5522 रही, जबकि कांग्रेस को 2501 दानदाताओं से चंदा मिला। यानी दानदाताओं की संख्या में अंतर उतना अधिक नहीं है, जितना कि चंदे की राशि में दिखाई देता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि भाजपा को मिलने वाला चंदा बड़े दानकर्ताओं, विशेषकर कॉरपोरेट सेक्टर से आ रहा है।
देशभर में राजनीतिक चंदे का बड़ा हिस्सा कॉरपोरेट जगत से आता रहा है और इस वर्ष भी यह प्रवृत्ति और मजबूत हुई है। कुल चंदे में 92.18 प्रतिशत हिस्सा कॉरपोरेट दान का रहा, जो 6128.787 करोड़ रुपये है। इसके मुकाबले व्यक्तिगत दानदाताओं से केवल 505.66 करोड़ रुपये ही प्राप्त हुए। भाजपा को अकेले 5717.167 करोड़ रुपये कॉरपोरेट दान मिला, जो अन्य सभी दलों को मिले कुल कॉरपोरेट चंदे से कई गुना अधिक है। कांग्रेस को 383.8605 करोड़ रुपये कॉरपोरेट दान के रूप में मिले, जबकि व्यक्तिगत दान से उसे 132.3885 करोड़ रुपये प्राप्त हुए।
यदि क्षेत्रीय योगदान की बात करें तो राजधानी दिल्ली राजनीतिक चंदे का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरी है। यहां से 2639.48 करोड़ रुपये का चंदा राष्ट्रीय दलों को मिला। इसके बाद महाराष्ट्र 2438.86 करोड़ रुपये के साथ दूसरे स्थान पर रहा, जबकि गुजरात 309.17 करोड़ रुपये के साथ तीसरे स्थान पर रहा। यह आंकड़े यह भी बताते हैं कि देश के प्रमुख आर्थिक केंद्र ही राजनीतिक फंडिंग के बड़े स्रोत बने हुए हैं।
वित्त वर्ष 2023-24 की तुलना में इस बार चंदे में 4104.285 करोड़ रुपये यानी 161 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। भाजपा के चंदे में 171 प्रतिशत का इजाफा हुआ, जो पिछले वर्ष के 2243.947 करोड़ रुपये से बढ़कर 6074.015 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। कांग्रेस के चंदे में भी 84 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि आम आदमी पार्टी ने 244 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की। माकपा का चंदा भी दोगुने से अधिक बढ़ा है। हालांकि इन बढ़ोतरी के बावजूद भाजपा और अन्य दलों के बीच का अंतर लगातार बढ़ता जा रहा है।
एक और दिलचस्प पहलू बहुजन समाज पार्टी का है, जिसने पिछले 19 वर्षों की तरह इस बार भी यह घोषित किया है कि उसे 20 हजार रुपये से अधिक का कोई चंदा प्राप्त नहीं हुआ। चुनाव आयोग को दिए गए विवरण में बसपा ने इस श्रेणी के चंदे को शून्य दिखाया है, जो इसे अन्य दलों से अलग बनाता है।
इन आंकड़ों के सामने आने के बाद यह सवाल और गहरा हो गया है कि क्या भारतीय लोकतंत्र में आर्थिक संसाधनों का यह असमान वितरण राजनीतिक प्रतिस्पर्धा को प्रभावित कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब किसी एक दल के पास अत्यधिक वित्तीय संसाधन होते हैं, तो चुनावी प्रचार, संगठन विस्तार और जनसंपर्क में उसे स्पष्ट बढ़त मिलती है। ऐसे में यह बहस तेज हो गई है कि राजनीतिक चंदे की पारदर्शिता और संतुलन बनाए रखने के लिए क्या नए नियमों और सख्त निगरानी की आवश्यकता है।

योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में गैस सिलेंडर और पेट्रोल-डीजल को लेकर फैल रही अफवाहों पर सख्त रुख अपनाते हुए लोगों से संयम और...
26/03/2026

योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में गैस सिलेंडर और पेट्रोल-डीजल को लेकर फैल रही अफवाहों पर सख्त रुख अपनाते हुए लोगों से संयम और समझदारी से काम लेने की अपील की है। गोरखपुर में गीडा क्षेत्र स्थित सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क के उद्घाटन के दौरान उन्होंने साफ कहा कि प्रदेश में एलपीजी सिलेंडर और पेट्रोलियम पदार्थों की कोई कमी नहीं है और आपूर्ति पूरी तरह सामान्य रूप से जारी है। उन्होंने लोगों से कहा कि वे बिना जरूरत के लाइन लगाने या अतिरिक्त खरीदारी करने से बचें, क्योंकि इससे अनावश्यक भीड़ और अव्यवस्था पैदा होती है।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि गैस एजेंसियों के माध्यम से होम डिलीवरी की व्यवस्था पहले की तरह सुचारु रूप से चल रही है और उपभोक्ताओं को तय प्रक्रिया के अनुसार बुकिंग कराने पर सिलेंडर उनके घर तक पहुंचाया जाएगा। उन्होंने कहा कि कुछ असामाजिक तत्व जानबूझकर गलत सूचनाएं फैलाकर लोगों में भय और भ्रम पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि कृत्रिम संकट की स्थिति बन सके। ऐसे में जनता की जिम्मेदारी है कि वह किसी भी अपुष्ट खबर पर भरोसा न करे और केवल आधिकारिक स्रोतों की जानकारी पर ही विश्वास करे।
योगी आदित्यनाथ ने यह भी कहा कि वैश्विक परिस्थितियों के चलते कई देशों में अस्थिरता और संसाधनों को लेकर दबाव की स्थिति बन रही है, लेकिन भारत में हालात पूरी तरह नियंत्रण में हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार हर स्थिति पर नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर समय रहते उचित कदम उठाए जाएंगे, जिससे आम लोगों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि लोग अफवाहों के प्रभाव में आकर जरूरत से ज्यादा पेट्रोल-डीजल या गैस सिलेंडर खरीदने लगेंगे, तो इससे बाजार में कृत्रिम कमी का माहौल बन सकता है, जो स्थिति को और बिगाड़ देगा। इसलिए हर नागरिक का यह कर्तव्य है कि वह केवल उतनी ही खरीदारी करे जितनी वास्तविक जरूरत हो, ताकि सभी को समान रूप से संसाधन उपलब्ध हो सकें।
मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे धैर्य बनाए रखें, सरकार और प्रशासन पर विश्वास रखें और किसी भी प्रकार के दुष्प्रचार का हिस्सा बनने से बचें। उन्होंने कहा कि कठिन समय में अनुशासन और सहयोग ही सबसे बड़ी ताकत होती है, और यही भावना प्रदेश को हर चुनौती से पार दिलाएगी।

आज़मगढ़ जिले में कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वाले पशु तस्करों के खिलाफ पुलिस की सतर्कता एक बार फिर देखने को मिली, जब म...
26/03/2026

आज़मगढ़ जिले में कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वाले पशु तस्करों के खिलाफ पुलिस की सतर्कता एक बार फिर देखने को मिली, जब मुबारकपुर थाना क्षेत्र में बीती 25 और 26 मार्च की मध्य रात्रि पुलिस और तस्करों के बीच आमना-सामना हो गया। यह मुठभेड़ उस समय हुई जब पुलिस क्षेत्र में गश्त कर रही थी और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर बनाए हुए थी। इसी दौरान बाइक सवार दो व्यक्तियों को रोकने का प्रयास किया गया, लेकिन पुलिस के इशारे को नजरअंदाज करते हुए दोनों संदिग्ध तेजी से भागने लगे, जिससे पुलिस का शक और गहरा हो गया।
पुलिस ने जब पीछा तेज किया और घेराबंदी की कोशिश की, तो आरोपियों ने खुद को घिरता देख अचानक फायरिंग शुरू कर दी। आधी रात के सन्नाटे में चली गोलियों से इलाके में हड़कंप मच गया, लेकिन पुलिस ने संयम और सतर्कता के साथ स्थिति को संभालते हुए आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की। इस जवाबी फायरिंग में दोनों तस्करों के दाहिने पैर में गोली लगी, जिससे वे मौके पर ही घायल होकर गिर पड़े और भागने में असमर्थ हो गए।
घायल अवस्था में दोनों को तत्काल हिरासत में लेकर इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया, जहां उनका उपचार जारी है। पुलिस ने मौके से एक अवैध तमंचा, जिंदा कारतूस और एक चोरी की बाइक बरामद की है, जिसका इस्तेमाल ये तस्कर आपराधिक गतिविधियों में कर रहे थे। शुरुआती जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि दोनों आरोपी लंबे समय से पशु तस्करी के नेटवर्क से जुड़े हुए थे और क्षेत्र में सक्रिय थे।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई नियमित गश्त और सतर्कता का परिणाम है, जिससे एक बड़े आपराधिक नेटवर्क का सुराग मिल सकता है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और उनके अन्य साथियों की तलाश के लिए दबिश दी जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस गिरोह के तार किन-किन जिलों और राज्यों तक फैले हुए हैं।
घटना के बाद क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है, ताकि किसी भी तरह की आपराधिक गतिविधि पर तुरंत अंकुश लगाया जा सके। स्थानीय लोगों ने भी पुलिस की इस कार्रवाई की सराहना की है, क्योंकि इससे क्षेत्र में कानून का डर और सुरक्षा का विश्वास दोनों मजबूत हुआ है।
पुलिस प्रशासन ने साफ किया है कि अपराध और तस्करी के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और किसी भी हाल में कानून हाथ में लेने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। यह मुठभेड़ इस बात का संकेत है कि पुलिस पूरी मुस्तैदी के साथ क्षेत्र में सक्रिय है और अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए प्रतिबद्ध है।

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