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🛑🛑रजिस्ट्री से नहीं बनते घर-जमीन के मालिक, ये डॉक्यूमेंट दिलाता है मालिकाना हक, खरीदने से पहले कर लें चेक❓❓✔️रजिस्ट्री भ...
25/08/2024

🛑🛑रजिस्ट्री से नहीं बनते घर-जमीन के मालिक, ये डॉक्यूमेंट दिलाता है मालिकाना हक, खरीदने से पहले कर लें चेक❓❓
✔️रजिस्ट्री भले ही घर-जमीन के संबंध में बुहत महत्वपूर्ण दस्तावेज हो लेकिन यह आपको प्रॉपर्टी पर मालिकाना हक दिलाना सुनिश्चित नहीं करता.
✔️अक्सर लोग रजिस्ट्री कराने के बाद निश्चिंत हो जाते हैं. वह प्रॉपर्टी खरीदते समय भी सबसे ज्यादा फोकस रजिस्ट्री के कागजों पर ही रखते हैं.
✔️हालांकि, म्यूटेशन कराना भी उतना ही जरूरी है जितना रजिस्ट्री. म्यूटेशन का मतलब नामांतरण है.
✔️अगर आपको लगता है कि रजिस्ट्री करा लेने भर से ही प्रॉपर्टी आपकी हो जाएगी तो आप गलतफहमी में हैं.
✔️भविष्य में किसी भी तरह की परेशानी से बचने के लिए जरूरी है कि आप उसका नामंतरण यानी म्यूटेशन जरूर चेक कर लें.
✔️आपको ये भी पता होना चाहिए कि केवल सेल डीड से नामांतरण नहीं हो जाता है.
🛑बिना नामांतरण के संपत्ति नहीं होती आपके नाम
सेल डीड और नामांतरण दो अलग-अलग चीजें हैं. आमतौर पर लोग सेल और नामांतरण को एक ही समझ लेते हैं. ऐसा समझा जाता है कि रजिस्ट्री करवा ली और संपत्ति अपने नाम हो गई जबकि यह ठीक नहीं है.
किसी भी संपत्ति का जब तक नामांतरण नहीं किया जाता है तब तक कोई भी व्यक्ति अपनी नहीं मान सकता भले ही उसने रजिस्ट्री करवा ली हो. फिर भी संपत्ति उसकी नहीं मानी जाती क्योंकि नामांतरण तो किसी दूसरे व्यक्ति के पास होता है.
🛑कैसे करवाएं नामांतरण
भारत में अचल संपत्ति मुख्य रूप से तीन प्रकार की होती है.
पहली खेती की जमीन, दूसरी आवासीय जमीन, तीसरी औद्योगिक जमीन इस जमीन के साथ मकान भी सम्मिलित हैं.
इन तीनों ही प्रकार की जमीनों का नामांतरण अलग-अलग प्रकार से अलग-अलग स्थानों पर किया जाता है.
जब भी कभी किसी संपत्ति को सेल डीड के माध्यम से खरीदा जाए या फिर किसी अन्य साधन से अर्जित किया जाए तब उस दस्तावेज के साथ संबंधित कार्यालय पर उपस्थित होकर संपत्ति का नामांतरण करवा लेना चाहिए.
🛑कहां से मिलती है पूरी जानकारी
जो जमीन खेती की जमीन के रूप में दर्ज होती है ऐसी जमीन का नामांतरण उस पटवारी हल्के के पटवारी द्वारा किया जाता है.
आवासीय भूमि का नामांतरण कैसे किया जाए.
आवासीय भूमि से संबंधित सभी दस्तावेजों का रिकॉर्ड उस क्षेत्र की नगर निगम, नगर पालिका, नगर परिषद या फिर गांव के मामले में ग्राम पंचायत के पास होता है.
वहीं औद्योगिक जमीन का रिकॉर्ड औद्योगिक विकास केंद्र जो प्रत्येक जिले में होता है उसके समक्ष रखा जाता है ऐसे औद्योगिक विकास केंद्र में जाकर यह जांच करना चाहिए.....................................................
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🛑🛑संपत्ति के सह-स्वामित्व का क्या अर्थ है?🛑🛑सह-स्वामित्व बेहतर क्यों है?👉सह-स्वामित्व या संयुक्त स्वामित्व का अर्थ है कि...
25/08/2024

🛑🛑संपत्ति के सह-स्वामित्व का क्या अर्थ है?
🛑🛑सह-स्वामित्व बेहतर क्यों है?
👉सह-स्वामित्व या संयुक्त स्वामित्व का अर्थ है कि दो या दो से अधिक व्यक्ति एक ही संपत्ति के लिए शीर्षक रखते हैं।
🛑सह-स्वामित्व के प्रकार क्या हैं?
✅सामान्य में किरायेदार:
जब दो या दो से अधिक लोग संपत्ति खरीदते हैं लेकिन संपत्ति में प्रत्येक के हिस्से का विशेष रूप से उल्लेख नहीं करते हैं, तो 'किरायेदारी-इन-आम' मौजूद है। सभी सह-मालिक पूरी संपत्ति का उपयोग कर सकते हैं और प्रत्येक सह-मालिक को संपत्ति में बराबर हिस्सा माना जाता है।
✅संयुक्त किरायेदारी:
संयुक्त किरायेदारी सह-स्वामित्व का एक रूप है जहां संपत्ति के बराबर शेयरों में एक ही समय में दो या दो से अधिक व्यक्तियों का स्वामित्व होता है। इस प्रकार की किरायेदारी सह-मालिकों के लिए संपत्ति के स्वामित्व के अधिकार प्रदान करती है जो अन्य सह-मालिकों से बाहर निकलती हैं।
✅पूर्णता से किरायेदारी:
यह संयुक्त किरायेदारी का एक विशेष रूप है जब संयुक्त किरायेदार अर्थात् पति और पत्नी हैं - प्रत्येक के पास आधा हिस्सा है।
🛑🛑सह-मालिक द्वारा संपत्ति के हस्तांतरण से संबंधित कानून क्या हैं?
✅संपत्ति अधिनियम 1882 के हस्तांतरण की धारा 44 सह-मालिक द्वारा हस्तांतरण के साथ संबंधित है और यह इस प्रकार के लेनदेन में ट्रांसफ्री के अधिकारों से भी संबंधित है।
✅इस अधिनियम के मुताबिक, प्रत्येक संयुक्त या सह-मालिक की पूरी संपत्ति पर मालिकाना अधिकार होता है। इसलिए, किसी भी बिक्री को शामिल सभी सह-मालिकों की सहमति से किया जाना चाहिए। यदि, हालांकि, समझौते में विशिष्ट स्थितियां हैं जो संपत्ति के कुछ हिस्सों / हिस्सों के सह-मालिकों को विशेष अधिकार देती हैं, तो सह-मालिक अपना हिस्सा बेच सकता है जिसे वह चुनता है।
🛑🛑सह-मालिक के अधिकार क्या हैं?
सह-मालिक स्वामित्व के तीन अनिवार्यताओं के हकदार है:
कब्जे का अधिकार उपयोग करने का अधिकार यदि संपत्ति में स्पष्ट रूप से बताया गया है, तो संपत्ति के अपने हिस्से का निपटान करने का अधिकार।
🛑🛑सह-स्वामित्व बेहतर क्यों है?
✅यदि आप विवाहित जोड़े हैं, तो अपने पति / पत्नी के साथ घर बनाने के लिए कई फायदे हैं।
✅दोनों कर लाभ प्राप्त कर सकते हैं। संयुक्त स्वामित्व के मामले में, पति, साथ ही पत्नी व्यक्तिगत रूप से आयकर अधिनियम की धारा 24 के तहत कटौती का दावा करने में सक्षम होंगे।
✅प्रत्येक व्यक्ति के लिए उपलब्ध कटौती प्रिंसिपल धारा के अधीन 80 सी के लिए 1.5 लाख और ब्याज घटक धारा के अधीन 24 (बी) के लिए 2 लाख है।
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🔴🔴साइबर क्राइम होने पर तुरंत यहां करें शिकायत, मुसीबत से बच जाएंगे, तरीका जान लें🔴राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्ट...
25/08/2024

🔴🔴साइबर क्राइम होने पर तुरंत यहां करें शिकायत, मुसीबत से बच जाएंगे, तरीका जान लें
🔴राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत कैसे करें?
✔️यदि आपके साथ किसी भी तरह का फ्रॉड होता है तो आप 1930 पर कॉल करके शिकायत कर सकते हैं।
✔️इसके अलावा https://cybercrime.gov.in/ पर जाकर लिखित शिकायत कर सकते हैं।
✔️इस साइट पर जाने के बाद होमपेज पर दिख रहे शिकायत दर्ज करें के बटन पर क्लिक करें। अगले पेज पर नियम और शर्तें पढ़ें और स्वीकार करें।
'✔️अन्य साइबर अपराध की रिपोर्ट करें' बटन पर क्लिक करें।
'नागरिक लॉगिन' विकल्प चुनें और नाम, ईमेल और फोन नंबर जैसी जानकारी दें।
✔️अपने रजिस्टर्ड फोन नंबर पर भेजे गए ओटीपी को दर्ज करें, कैप्चा भरें और सबमिट बटन पर क्लिक करें।
अगले पेज पर, उस साइबर अपराध के बारे में जानकारी प्रदान करें जिसकी आप रिपोर्ट करना चाहते हैं।
✔️इस फॉर्म को चार भागो में विभाजित किया गया है-सामान्य जानकारी, पीड़ित जानकारी, साइबर अपराध की जानकारी और प्रीव्यू।
✔️प्रत्येक भाग में मांगी गई आवश्यक जानकारी दें।
जानकारी को ठीक से देखने के बाद 'सबमिट' बटन पर क्लिक करें।
अब एक नए पेज पर क्राइम की पूरी जानकारी जैसे स्क्रीनशॉट, मोबाइल नंबर या अन्य फाइलें अपलोड करें और सेव एंड नेक्स्ट' पर क्लिक करें।
✔️जानकारी वेरिफाइड करें और 'सबमिट' बटन पर क्लिक करें।
आपको एक कंफर्मेशन मैसेज प्राप्त होगा कि आपकी शिकायत दर्ज कर ली गई है।
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11/04/2024

🛑🛑रजिस्ट्री से नहीं बनते घर-जमीन के मालिक, ये डॉक्यूमेंट दिलाता है मालिकाना हक, खरीदने से पहले कर लें चेक❓❓
✔️रजिस्ट्री भले ही घर-जमीन के संबंध में बुहत महत्वपूर्ण दस्तावेज हो लेकिन यह आपको प्रॉपर्टी पर मालिकाना हक दिलाना सुनिश्चित नहीं करता.
✔️अक्सर लोग रजिस्ट्री कराने के बाद निश्चिंत हो जाते हैं. वह प्रॉपर्टी खरीदते समय भी सबसे ज्यादा फोकस रजिस्ट्री के कागजों पर ही रखते हैं.
✔️हालांकि, म्यूटेशन कराना भी उतना ही जरूरी है जितना रजिस्ट्री. म्यूटेशन का मतलब नामांतरण है.
✔️अगर आपको लगता है कि रजिस्ट्री करा लेने भर से ही प्रॉपर्टी आपकी हो जाएगी तो आप गलतफहमी में हैं.
✔️भविष्य में किसी भी तरह की परेशानी से बचने के लिए जरूरी है कि आप उसका नामंतरण यानी म्यूटेशन जरूर चेक कर लें.
✔️आपको ये भी पता होना चाहिए कि केवल सेल डीड से नामांतरण नहीं हो जाता है.

🛑बिना नामांतरण के संपत्ति नहीं होती आपके नाम
सेल डीड और नामांतरण दो अलग-अलग चीजें हैं. आमतौर पर लोग सेल और नामांतरण को एक ही समझ लेते हैं. ऐसा समझा जाता है कि रजिस्ट्री करवा ली और संपत्ति अपने नाम हो गई जबकि यह ठीक नहीं है.
किसी भी संपत्ति का जब तक नामांतरण नहीं किया जाता है तब तक कोई भी व्यक्ति अपनी नहीं मान सकता भले ही उसने रजिस्ट्री करवा ली हो. फिर भी संपत्ति उसकी नहीं मानी जाती क्योंकि नामांतरण तो किसी दूसरे व्यक्ति के पास होता है.
🛑कैसे करवाएं नामांतरण
भारत में अचल संपत्ति मुख्य रूप से तीन प्रकार की होती है.
पहली खेती की जमीन, दूसरी आवासीय जमीन, तीसरी औद्योगिक जमीन इस जमीन के साथ मकान भी सम्मिलित हैं.
इन तीनों ही प्रकार की जमीनों का नामांतरण अलग-अलग प्रकार से अलग-अलग स्थानों पर किया जाता है.

जब भी कभी किसी संपत्ति को सेल डीड के माध्यम से खरीदा जाए या फिर किसी अन्य साधन से अर्जित किया जाए तब उस दस्तावेज के साथ संबंधित कार्यालय पर उपस्थित होकर संपत्ति का नामांतरण करवा लेना चाहिए.

🛑कहां से मिलती है पूरी जानकारी
जो जमीन खेती की जमीन के रूप में दर्ज होती है ऐसी जमीन का नामांतरण उस पटवारी हल्के के पटवारी द्वारा किया जाता है.
आवासीय भूमि का नामांतरण कैसे किया जाए.
आवासीय भूमि से संबंधित सभी दस्तावेजों का रिकॉर्ड उस क्षेत्र की नगर निगम, नगर पालिका, नगर परिषद या फिर गांव के मामले में ग्राम पंचायत के पास होता है.

वहीं औद्योगिक जमीन का रिकॉर्ड औद्योगिक विकास केंद्र जो प्रत्येक जिले में होता है उसके समक्ष रखा जाता है ऐसे औद्योगिक विकास केंद्र में जाकर यह जांच करना चाहिए.....................................................
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🔴🔴एक से ज्यादा लोगों के बीच कैसे बांटी जाती है प्रॉपर्टी✔️अगर प्रॉपर्टी परिवार के लोगों के बीच बांटनी हो तो बंटवारानामा ...
08/03/2024

🔴🔴एक से ज्यादा लोगों के बीच कैसे बांटी जाती है प्रॉपर्टी

✔️अगर प्रॉपर्टी परिवार के लोगों के बीच बांटनी हो तो बंटवारानामा बनवाया जाता है। इस दस्तावेज के जरिए कानूनी तौर पर प्रॉपर्टी के सभी वारिसों को हिस्सा दिया जाता है और वह इसके मालिक बन जाते हैं। लागू होने वाले कानून के तहत हर सह-मालिक को उसका हिस्सा दिया जाता है। बंटवारे के बाद हर प्रॉपर्टी को नया टाइटल मिलता है और हर सह-मालिक दूसरे के हिस्से में अपना हित छोड़ देता है। कम शब्दों में कहें तो यह एेसी प्रक्रिया है, जिसमें संपत्ति का सरेंडर और अधिकारों का ट्रांसफर शामिल है। जिस शख्स को जो हिस्सा मिलता है, वही उसका नया मालिक बन जाता है और अपनी मर्जी से वह उस संपत्ति के साथ जो चाहे व्यवहार कर सकता है यानी उसे बेचने, ट्रांसफर, एक्सचेंज या गिफ्ट के तौर पर देने का अधिकार उसी के पास आ जाता है।

✔️आपसी सहमति: आपसी सहमति के मामले में बंटवारानामा प्रॉपर्टी के सह-मालिकों के बीच होता है। लेकिन इसे कानूनी शक्ल देने के लिए बंटवारानामा इलाके के सब-रजिस्ट्रार दफ्तर में रजिस्टर्ड कराना पड़ता है। एक से ज्यादा लोग भी प्रॉपर्टी के मालिक हो सकते हैं और उन सभी के पास संपत्ति का इस्तेमाल करने का समान या निश्चित प्रतिशत होता है। जॉइंट ओनरशिप या संयुक्त स्वामित्व का एक अहम पहलू गैर-विभाजित शेयर है। हालांकि प्रॉपर्टी में सभी सह-मालिक समान होते हैं या कुछ हिस्से के मालिक। उनका शेयर निश्चित सीमाओं के साथ पता नहीं लगाया जा सकता। इसलिए शेयर गैर-विभाजित रहते हैं। लेकिन अगर सह-मालिकों का प्रॉपर्टी के बंटवारे पर एक नजरिया नहीं है तो फिर इसके लिए अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ता है। इसके बाद स्टैंप पेपर पर स्पष्ट तरीके से हर शख्स का हिस्सा और बंटवारे की तारीख लिखी जानी चाहिए। यह नया बंटवारानामा भी सब-रजिस्ट्रार दफ्तर में रजिस्टर्ड किया जाना चाहिए, ताकि उसे कानूनी शक्ल दी जा सके।

✔️जॉइंट ओनरशिप का मतलब समान शेयर नहीं होता: अगर कोई शख्स किसी अन्य के साथ संयुक्त रूप से प्रॉपर्टी का मालिक है तो इसका मतलब यह नहीं कि संपत्ति में उसका आधा हिस्सा है। यह प्रॉपर्टी में निवेश पर निर्भर करता है, जिसकी जानकारी बैनामे में होती है। लेकिन एेसी जानकारी न होने पर कानून यह मानकर चलता है कि सभी मालिकों का हिस्सा बराबर है और टाइटल भी गैर-विभाजित है।

✔️संपत्ति विरासत होती है: चूंकि सह-मालिकों को संपत्ति में हिस्सा विरासत के तौर पर मिला है, जो एक से दूसरे को दिया जा सकता है। एेसे में हर सह-मालिक के निवेश का हिस्सा साफ बताया जाना चाहिए। इसका मकसद ट्रांसफर, विरासत या टैक्स में होने वाली किसी भी तरह की परेशानी से बचना है। हर किसी को यह भी ध्यान में रखना चाहिए कि प्रॉपर्टी का बंटवारा विरासत के कानूनों से जुड़ा है। हिंदू, मुस्लिम और ईसाइयों के अलग और मुश्किल प्रॉपर्टी कानून होते हैं। अगर पिता खुद की कमाई हुई संपत्ति छोड़कर मर जाता है तो उसका बेटा प्रॉपर्टी का मालिक बन जाएगा। लेकिन पोता उसे पुरखों की बताकर दावा नहीं ठोक सकता, क्योंकि प्रॉपर्टी हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के तहत मिली है

नोट- क़ानून में ऐकसेप्शन हो सकते हैं , अधिक विश्लेषण के लिए तथ्य और स्थिति की समीक्षा सम्बंधित अधिकारी से करवाना अनिवार्य है ।

05/03/2024

🛑पैतृक संपत्ति में कितना होता हक ❓
✔️सबसे पहली बात यदि दादा, पिता एवं भाई पैतृक संपत्ति में हिस्सेदार हैं तो आपको भी पैतृक संपत्ति में हिस्सा अवश्य दिया जाना चाहिए. पैतृक संपत्ति में हिस्से का अधिकार जन्म के साथ ही मिल जाता है. यदि पैतृक संपत्ति का बंटवारा होता है अथवा उस संपत्ति को बेचा जाता है तो बेटियों को भी उसमें बराबर अधिकार मिलता है.
✔️हिंदू कानून के मुताबिक संपत्तियां दो तरह की होती हैं-

पैतृक संपत्ति और खुद कमाई हुई.
पैतृक संपत्ति वह संपत्ति होती है, जो आपके लिए पूर्वज छोड़कर जाते हैं, चार पीढ़ियों तक. अगर आम भाषा में कहा जाए तो जो संपत्ति या जमीन आपके बुजुर्ग छोड़कर जाते हैं, उसे पैतृक संपत्ति कहा जाता है.

🛑अगर न मिले हिस्सा तो क्या करें ❓
✔️यदि दादा, पिता व भाई पैतृक संपत्ति में हिस्सा देने से इन्कार कर दें तो आप अपने अधिकार के लिए कानूनी नोटिस (legal notice) भेज सकते हैं. आप संपत्ति पर अपना दावा पेश करते हुए सिविल कोर्ट में मुकदमा दायर कर सकते हैं.
✔️मामले के विचाराधीन होने के दौरान प्रापर्टी को बेचा न जाए यह सुनिश्चित करने के लिए आप उस मामले में कोर्ट से रोक लगाने की मांग कर सकते हैं. मामले में अगर आपकी सहमति के बिना ही संपत्ति बेच दी गई है तो आपको उस खरीदार को केस में पार्टी के तौर पर जोड़कर अपने हिस्से का दावा ठोकना होगा.

🛑पैतृक संपत्ति में बेटियों का कितना होता है हक ❓
हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) कानून, 2005 पैतृक संपत्ति में बेटों के साथ ही बेटियों को भी बराबर अधिकार दिया गया है.
आपको जानकारी दे दें कि कानून में संशोधन से पूर्व केवल परिवार के पुरूषों को ही उत्तराधिकारी का दर्जा दिया जाता था. बेटियों को भी उत्तराधिकारी का दर्जा दिए जाने के लिए आज से करीब 17 वर्ष पूर्व हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम -1956 के प्रावधान- 6 में संशोधन किया गया था.....................................................
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नोट- क़ानून में ऐकसेप्शन हो सकते हैं , अधिक विश्लेषण के लिए तथ्य और स्थिति की समीक्षा सम्बंधित अधिकारी से करवाना अनिवार्य है ।

21/01/2024

🔴जमीन का रेट कैसे पता करे❓️

🔴जमीन बेचने के लिए क्या क्या डॉक्यूमेंट चाहिए❓️❓️

✅️समस्त दस्तावेजों की प्रतिलिपि: जब आप अपनी जमीन को बेचने के लिए रजिस्ट्रेशन करते हैं, तो आपको समस्त दस्तावेजों की प्रतिलिपि जमा करनी होती है। इसमें आपके पास जमीन के दस्तावेज, आय प्रमाण पत्र, पैन कार्ड, बैंक खाते की जानकारी और आधार कार्ड जैसे दस्तावेज शामिल होते हैं।

✅️जमीन का संपत्ति पंजीकरण: जब आप अपनी जमीन को बेचने के लिए रजिस्ट्रेशन करते हैं, तो आपको जमीन का संपत्ति पंकरण करना होता है। जब आप अपनी जमीन का संपत्ति पंजीकरण करते हैं, तो आपको एक प्रमाणपत्र मिलता है जो आपकी जमीन के मालिक होने का सबूत होता है।

✅️जमाबंदी रसीद: यह एक दस्तावेज होता है जो आपको स्थानीय पंचायत या नगर निगम से प्राप्त करना होता है। इसमें आपकी जमीन की स्थिति और उसमें कोई भी अवैध गतिविधियों के बारे में जानकारी होती है।

नियमित जमाबंदी का नोट: इस दस्तावेज के माध्यम से, आप अपनी जमीन के संपत्ति स्थिति को नियमित रूप से निरीक्षण करवा सकते हैं।

✅️नकदी क्रमांक रसीद: जब आप अपनी जमीन को बेचने के लिए रजिस्ट्रेशन करते हैं, तो आपको नकदी क्रमांक रसीद जमा करनी होती है। इस रसीद के माध्यम से, आप जमीन के बिक्री से प्राप्त होने वाली राशि का प्रमाण कर सकते हैं।
🔴जमीन का रेट कैसे पता करे❓️
जब आप कोई जमीन खरीद या बेच रहे हैं तो उस जमीन पर सरकार की तरफ से स्टाम्प या रजिस्ट्री फी देनी होती है जो कि सरकारी वैल्यू के हिसाब से लगता है इसका रेट और जमीन का रेट पता करने के लिए आपको सरकार की ऑफिसियल वेबसाइट ई निबंधन पोर्टल पर जाना होगा

✅️ई निबंधन पोर्टल ओपन करने के बाद आपको स्टांप कंप्यूटर ऑप्शन पर क्लिक करना है

इसके बाद आपके सामने एक नया ओपन होगा इसमें

✅️आपको डिस्टिक नेम, और Deed Type को सेलेक्ट करना है
और पूछी के जनकारी को सही सही भरना है जैसे कि अंचल नाम, मौजा नाम, लैंड टाइप

✅️और कितना डिसमिल का जमीन का रेट पता करना चाहते हैं उतना Area के ऑप्शन में लिखें और ऐड के ऑप्शन पर क्लिक कर दें इसके बाद आपके सामने जमीन का रेट 1 डिसमिल का कितना है वह यहाँ दिखाई देगा

✅️और साथ ही साथ स्टांप एवं रजिस्ट्री का भी रेट दिखाई देगा इस तरह से आप जमीन का सरकारी रेट पता कर सकते हैं

🔴जमीन बेचने के लिए कितने दिन लगते हैं
जब आप अपनी जमीन के बिक्री के लिए रजिस्ट्रेशन करते हैं, तो इसका प्रक्रिया लगभग 30-45 दिन का होता है। इसमें जमीन की सटीक संपत्ति स्थिति और कोई अवैध गतिविधियों का पता लगाने के लिए कुछ समय लग सकता है।

🔴जमीन बेचने के लिए सटीक दर कैसे तय की जाती है❓️
जमीन की बिक्री के लिए सटीक दर को तय करने के लिए विक्रेता के पास जमीन की स्थिति, आकार, स्थान, बाजार मूल्य और अन्य फैक्टर्स का विश्लेषण किया जाता है। वह फिर उसे जमीन की बिक्री के लिए एक सटीक दर तय करता है।

🔴जमीन बेचने से पहले जरुरी सलाह

✅️अपनी जमीन की सटीक संपत्ति स्थिति का पता लगाएं।
अपनी जमीन की संपत्ति पंजीकरण करवाएं।

✅️अपनी जमीन की समीक्षा करवाएं और जमीन का मूल्य तय करें।

✅️जमीन की स्थान से संबंधित सभी नियमों का पालन करें।
विक्रेता के साथ सटीक दर तय करें।

✅️सभी दस्तावेजों को सटीकता से भरें।

✅️विक्रेता द्वारा जमीन की सटीक जानकारी का सत्यापन करें।....................................................
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21/01/2024

🔴🔴पैतृक संपत्ति को अपने नाम कैसे करें❓जानिए क्या है प्रक्रिया❓

Acestral Property: संपत्ति से जुड़ी प्रक्रियाओं को लेकर लोगों में सामान्य जानकारी का अभाव होता है. उन्हें पता नहीं होता कि कैसे संपत्ति को अपने नाम कराएं. पैतृक संपत्ति को अपने नाम कराने के लिए क्या प्रक्रिया है इसकी जानकारी भी होना बेहद जरूरी है. पैतृक संपत्ति हस्तांतरण की प्रक्रिया अलग-अलग चीजों के आधार पर होती है. यह संपत्ति पर दावे,उत्तराधिकारियों की संख्या के साथ-साथ अन्य बातों पर भी निर्भर करती है.

🔴अपनी इस पोस्ट में हम पैतृक संपत्ति के हस्तांतरण की सामान्य प्रक्रिया बताएंगे-
देना होगा उत्तराधिकार का सबूत-
पैतृक संपत्ति पर अगर आप अपना दावा करते हैं तो आपको संपत्ति पर अपने अधिकार से जुड़े जायज सबूतों को पेश करना होगा. जिससे आपका उत्तराधिकार का दावा सही साबित हो सके.
उस संपत्ति के मालिक ने अगर वसीयत बनाकर उसमें संपत्ति के उत्तराधिकारियों नाम उल्लेख कर दिए हैं तो फिर यह प्रक्रिया ज्यादा जटिल नहीं होती है.
हालांकि अगर वसीयत पैतृक संपत्ति संबंधी नियमों के विपरीत बनाई गई है तो उसे न्यायालय में चुनौती दी जा सकती है.

🔴वसीयत ना होने पर क्या करें-
अगर पैतृक संपत्ति हस्तांतरण के लिए बकायदा वसीयत नहीं बनाई गई है तो संपत्ति हस्तांतरण में थोड़ी दिक्कत आ सकती है.
अक्सर ऐसा देखा जाता है कि वसीयत ना होने पर में विवाद की स्थिति बन जाती है. हालांकि अगर संपत्ति के वैध उत्तराधिकारी आपसी तालमेल के साथ उसका बंटवारा कर लें तो यह कोई बड़ी समस्या नहीं है.
इसके लिए संपत्ति के मालिकाना हक के कागजात सबूत के तौर पर पेश करके सब रजिस्ट्रार कार्यालय में पंजीकरण कराना होगा.
इसके अलावा वसीयत ना होने की स्थिति में एक ऐसा हलफनामा बनाना होगा, जिसमें कानूनी उत्तराधिकारियों का अनापत्ति सर्टिफिकेट(नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) लगाया जाता है. संपत्ति हस्तांतरण में के दौरान अगर धनराशि आदि का लेनदेन हुआ है तो उसकी जानकारी देना भी जरूरी है.

🔴अन्य आवश्यक प्रक्रिया भी करें पूरी-
ऊपर लिखी प्रक्रियाओं के अलावा संपत्ति के पंजीकरण के बाद एक अन्य महत्वपूर्ण प्रक्रिया है दाखिल-खारिज की प्रक्रिया.
जब भी किसी अचल संपत्ति का मालिक बदलना है तो इसे राजस्व विभाग के आंकड़ों मे दर्ज कराने के लिए दाखिल-खारिज की प्रक्रिया आवश्यक है.
अलग-अलग राज्यों में दाखिल-खारिज में होने वाले सरकारी खर्च अलग-अलग हैं.
इसके अलावा संपत्ति पर अगर होम लोन ली गई हो या संपत्ति किसी को लीज पर दी गई हो तो उससे जुड़ी प्रक्रियाओं से भी गुजरना पड़ता है.....................................................
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19/08/2023

प्रॉपर्टी म्यूटेशन नहीं कराया तो हो सकती हैं ये परेशानियां

🛑क्या होती है प्रॉपर्टी म्यूटेशन?

✅एक शहर का नगर निगम प्रॉपर्टी टैक्स की देयता को ठीक करने के लिए प्रॉपर्टी ओनरशिप ट्रांसफर्स का रिकॉर्ड रखता है और यही दस्तावेज इसे सुनिश्चित करने का जरिया है।

✅प्रॉपर्टी म्यूटेशन से पता चलता है कि संपत्ति एक शख्स से दूसरे को ट्रांसफर कर दी गई है और यह प्रशासन को टैक्सपेयर्स की जिम्मेदारियां तय करने में भी मदद करता है। हालांकि यह कोई कानूनी दस्तावेज नहीं है, लेकिन अगर भविष्य में आप प्रॉपर्टी बेचते हैं तो यह काम आता है।

✅हिंदी भाषा में प्रॉपर्टी म्यूटेशन को दाखिल-खरीज कहा जाता है।
🛑प्रॉपर्टी म्यूटेशन के लिए कैसे अप्लाई करें और इसमें कितनी लागत आती है?
विभिन्न राज्यों में मांगे जाने वाले दस्तावेज अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन पूरे भारत में इन तीन परिस्थितियों में ही आप प्रॉपर्टी म्यूटेशन फाइल कर सकते हैं:
✅अगर आपने प्रॉपर्टी खरीदी है: इस मामले में जो दस्तावेज आपको प्रॉपर्टी म्यूटेशन के लिए जमा कराने हैं, उनमें सेल डीड की कॉपी, प्रॉपर्टी म्यूटेशन की एप्लिकेशन, जिस पर 3 रुपये की कोर्ट फीस स्टैंप चिपकी हो, 100 रुपयेके स्टैंप पेपर पर एक हर्जाना बॉन्ड, 10 रुपये के स्टैंप पेपर पर एक एफिडेविट और लेटेस्ट प्रॉपर्टी टैक्स क्लीयरेंस पेपर्स।

✅मालिक के मरने पर प्रॉपर्टी का म्यूटेशन, अगर आप उत्तराधिकारी हैं तो: इस मामले में आवेदक को डेथ सर्टिफिकेट की कॉपी, वसीयत की कॉपी, 100 रुपये के स्टैंप पेपर पर हर्जाना बॉन्ड, 10 रुपये के स्टैंप पेपर पर एफिडेविट जो नोटरी से अटेस्टेड हो और लेटेस्ट प्रॉपर्टी टैक्स क्लीयरेंस पेपर्स।

✅अगर आपने पावर आफ अटॉर्नी के जरिए प्रॉपर्टी खरीदी है: इस मामले में आपको पावर आफ अटॉर्नी के कागजातों की कॉपी, वसीयत की कॉपी, 100 रुपये के स्टैंप पेपर पर हर्जाना बॉन्ड, 10 रुपये के स्टैंप पेपर पर एक एफिडेविट, लेटेस्ट प्रॉपर्टी टैक्स क्लीयरेंस पेपर्स और एक एप्लिकेशन, जिस पर 3 रुपये की कोर्ट फीस स्टैंप चिपकी हो।

👉जानकारी उपयोगी लगे तो बाक़ी लोगों को भी जानकारी दें 😀

कई बार देखा जाता है कि आप होम लोन के लिए अप्लाई करते हैं लेकिन आपकी प्रोफाइल नहीं न होने के कारण आपकी लोन एप्लीकेशन रिजे...
30/04/2021

कई बार देखा जाता है कि आप होम लोन के लिए अप्लाई करते हैं लेकिन आपकी प्रोफाइल नहीं न होने के कारण आपकी लोन एप्लीकेशन रिजेक्ट हो जाती है। ऐसे में ज्वाइंट होम लोन आपकी इस परेशानी का हल कर सकता है। ज्वाइंट होम लोन के लिए अप्लाई करने से आपके लोन के अप्रूव होने के चांस बढ़ जाते हैं। इसकी वजह यह है कि जॉइंट लोन में कर्ज चुकाने की जिम्मेदारी दो या अधिक व्यक्ति पर आ जाती है, जिससे लोन के डूबने का खतरा कम हो जाता है। हम आपको ज्वाइंट होम लोन से जुड़ी खास बातें बता रहे हैं।

आसानी से मिलता है लोन
कई बार कम इनकम, कर्ज और आय का अनुपात (सही फिक्स ऑब्लिगेशन टू इनकम रेश्यो) या सही क्रेडिट स्कोर न होने के कारण लोन लेने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसी स्थिति में किसी दूसरे व्यक्ति को आवेदक के तौर पर अपने साथ जोड़कर लोन लेने के लिए योग्यता में इजाफा होता है।

जब आप एक ऐसे व्यक्ति के साथ मिलकर ज्वॉइंट होम लोन लेते हैं, जिसका क्रेडिट स्कोर मजबूत है और उसकी भुगतान करने की क्षमता अच्छी है, तो लोन लेने में आसानी रहती है। इसके अलावा ज्वाइंट होम लोन लेने पर आपको ज्यादा लोन मिल सकता है, क्योंकि बैंक दोनों आवेदकों की इनकम को ध्यान में रखकर लोन देगा।

मिलती है ज्यादा इनकम टैक्स छूट
ज्यादातर घर खरीदारों को होम लोन पर इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80C और 24b के भीतर मिलने वाले टैक्स बेनीफिट की जानकारी होती है। लोन लेने वाला व्यक्ति सेक्शन 24b के तहत ब्याज को हर साल 2 लाख रुपए तक डिडक्शन की तरह ले सकता है जबकि प्रिंसिपल अमाउंट पर सेक्शन 80C के भीतर साल में अधिकतम 1.5 लाख रुपए तक का डिडक्शन मिलता है। ज्वाइंट होम लोन के लिए आवेदन करने से दोनों कर्ज ले रहे व्यक्ति अलग-अलग इनकम टैक्स बेनीफिट का फायदा ले सकेंगे। हालांकि दोनों साथ में एप्लीकेंट के साथ मालिक भी हों, तभी वे टैक्स बेनीफिट अलग से ले सकेंगे।

अगर महिला को-एप्लीकेंट को कम ब्याज पर मिलता है लोन
बहुत से कर्जदाता महिला को-एप्लीकेंट के लिए होम लोन की अलग ब्याज दर देते हैं। ये दर आम तौर पर रेट से लगभग 0.05 फीसदी (5 बेसिस प्वॉइंट्स) कम होती है। इस छूट का फायदा लेने के लिए महिला को प्रॉपर्टी का खुद या ज्वॉइंट तौर पर मालकिन होना चाहिए। ज्यादातर बैंक महिला को को-एप्लीकेंट तभी मानते हैं, जब वह प्रॉपर्टी की मालकिन या साथ में मालकिन हो।

कौन-कौन ले सकता है जॉइंट लोन?
अगर परिवार में दो लोग कमाने वाले हैं और जो प्रॉपर्टी आपने खरीदी है, उसमें भाई-बहन को छोड़कर परिवार के अन्य सदस्यों जैसे कि मां-बेटा, मां-बेटी, पिता-बेटा, पिता-बेटी या फिर वाइफ-हसबैंड का नाम है तो बैंक आपको ज्वाइंट लोन अकाउंट खोलने के लिए कह सकता है। अधिकतर बैंक भाई-बहन के साथ ज्वाइंट होम लोन नहीं देते। जबकि माता-पिता, पति या पत्नी के साथ ज्वाइंट होम लोन आसानी से मिल जाता है।

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