Yasin baloch Rj04

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04/12/2025

बात कड़वी जरूर है पर सच्ची है

उधार दीजिए मगर सोच-समझकर अपने ही पैसे भिखारी बनकर मांगने पड़ते हैं

और अगला सेठ बनकर तारीख पर तारीख देता है...!
✍️꧁Yasin_baloch_Rj04꧂

┄┉❈❥ًً❀(«🌹⁦🫀🌹»)❀❥❈┉┄ *वक़्त बरबाद न करे दिखावे मे,**पूरी जिंदगी निकल जायेगी पछतावे मे...*✍️꧁Yasin_baloch_Rj04꧂*♡ ㅤ    ❍...
04/12/2025

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*वक़्त बरबाद न करे दिखावे मे,*
*पूरी जिंदगी निकल जायेगी पछतावे मे...*
✍️꧁Yasin_baloch_Rj04꧂

*♡ ㅤ ❍ㅤ ⎙ ⌲*
*ˡᶦᵏᵉ ᶜᵒᵐᵐᵉⁿᵗ ˢᵃᵛᵉ ˢʰᵃʳᵉ ❍━━━━━━━ლ━━━━━━━❍*
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05/08/2025
*ختم ہو چکا ہے محفلوں میں بیٹھنے کا شوق ❤‍🩹🥹* *جب سے مشکلوں میں خود کو "اکیلا" پایا ____💔🥲* Do U Agree           👉🏻 *Yes...
28/07/2025

*ختم ہو چکا ہے محفلوں میں بیٹھنے کا شوق ❤‍🩹🥹*
*جب سے مشکلوں میں خود کو "اکیلا" پایا ____💔🥲*

Do U Agree
👉🏻 *Yes🥲 👉🏻 No🙏🏻*

*•♪•Yasin_baloch_Rj04 ✍🏻🩷💫*

*🌸 कविता - बलोच और बलोचनी🌸*-------------------------------भोली भाली एक बलोचनी  ,इसी बात पर रूठी ।दिलवाई क्यों नहीं बलोच,...
26/07/2025

*🌸 कविता - बलोच और बलोचनी🌸*
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भोली भाली एक बलोचनी ,इसी बात पर रूठी ।
दिलवाई क्यों नहीं बलोच, हीरे जड़ी अंगूठी ।।

शादी के पहले दिन से ही ,तुझ पर नेह लुटाया ।
सेवा पूरी करी चाव से ,मन क्रम वचन निभाया ।

दो दो बच्चे पैदा करके ,तेरा वंश बढ़ाया ।
ऐसा तू निर्मोही बालम,क्यों उपहार न लाया ।

सेवा सास ससुर की भी मैं ,पूरी करती आयी ।
सही समय खाना देकर ,उनको खाना खिलायी ।

गाय भैंस की धार निकालूं ,देती चारा पानी ।
छोटा सा उपहार न लेकर ,आया तू अज्ञानी ।

पीहर से लेकर आई जो ,बिछुआ कंगन बाली ।
चैन गले की एक अंगूठी , मामा जी ने डाली ।

बहना तेरी एक अंगूठी , नेग सगन ले भागी ।
मेरी उंगली खाली खाली ,किस्मत उसकी जागी ।
वादे रोज अनोखे करता, गढ़े कहानी झूठी ।।
दिलवाता क्यों नहीं बलोच ,हीरे जड़ी अंगूठी ।।

तेरी सारी बात ठीक हैं ,मेरी भी मजबूरी ।
तुझको बहकाता आया हूं ,वादे किए खजूरी ।

छोटा एक किसान समझ तू , पैदा होती थोड़ी ।
भावों पर अंकुश सरकारी ,हाथ न आए कौड़ी ।

मंडी के सौदागर बैठे ,इसका लाभ उठाने ।
अपनी सूखी अंतड़िया वो,खाते रोज मखाने ।

खाद बीज इतने महंगे हैं , सारा धन लुट जाता ।
ऊपर से डीजल का खर्चा , मेरा दर्द बढ़ाता ।

बच्चों की भी ड्रेस फीस का , काम अभी है बाकी ।
तेरे सम्मुख सारा लेखा ,मान नहीं चालाकी ।

देख पड़ोसन के आभूषण , मान न मुझको दोषी ।
बड़ी बड़ी खेती वाले हैं ,अपने सभी पड़ोसी ।

कर्ज़ सदा छाती पर रहता ,खाली रहती मूठी ।।
भोली भाली एक बलोचनी ,इसी बात पर ,रूठी ।।

जान गई तेरी पीड़ा मैं ,मुझको भान नहीं था ।
खर्ज चलाता कैसे घर का ,ये अनुमान नहीं था ।

हिम्मत नहीं हार जाना मैं,तेरे साथ खड़ी हूं ।
तेरे संघर्षों के पथ की , मैं भी एक कड़ी हूं ।

बच्चों को शिक्षित करने में,तेरा साथ निभाऊं ।
देख पड़ोसन के आभूषण ,कभी नहीं ललचाऊं ।

यदि सच्चा तप कर्म हमारा ,बच्चे खूब पड़ेंगे ।
पढ़ने में या खेलकूद में , ये प्रतिमान गढ़ेंगे ।

यही दुआ है अल्लाह से , इतना नाम कमाएं ।
खेलों में यदि रुचि होवे तो, ओलंपिक तक जाएं ।

'हलधर' मुझको क्षमा दान दे , प्रश्न तीक्ष्ण जो दागे ।
एक अंगूठी की क्या कीमत , स्वर्ण पदक के आगे ।

पश्चाताप किया है मैंने ,छोड़ी मांग अनूठी ।।
भोली भाली एक बलोचनी ,इसी बात पर ,रूठी ।।

Yasin_baloch_Rj04- ✍️✍️✍️

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25/07/2025

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