30/06/2026
जंतर-मंतर का यह मंज़र उन तमाम लोगों के लिए एक ख़ामोश लेकिन करारा जवाब है, जो हर रोज़ हिंदू-मुस्लिम के नाम पर नफ़रत फैलाने की कोशिश करते हैं।
यहाँ एक मुस्लिम चाचा ने अभिजीत दीपके को गले से लगाया, उनके सिर को मोहब्बत से चूमा और अपने अपनापन का ऐसा एहसास दिया, जिसने हर देखने वाले का दिल छू लिया।
याद रखिए, सियासत शायद नफ़रत के सहारे की जा सकती है, लेकिन मुल्क सिर्फ़ मोहब्बत, इंसानियत और भाईचारे से चलता है।
नफ़रत दिलों को बाँटती है, जबकि मोहब्बत दिलों को जोड़ती है। यही हमारे हिंदुस्तान की असली रिवायत, असली पहचान और सबसे बड़ी ताक़त है।
काश, यह मंज़र हर उस शख़्स तक पहुँचे, जो मज़हब के नाम पर नफ़रत फैलाने की कोशिश करता है।