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अब चूहौ की ‘बिल’ जबलपुर तक — ICU में चूहों का जमावड़ा, सरकार बेख़बरजबलपुर के विक्टोरियल ज़िला अस्पताल के ICU वार्ड में ज...
16/12/2025

अब चूहौ की ‘बिल’ जबलपुर तक — ICU में चूहों का जमावड़ा, सरकार बेख़बर

जबलपुर के विक्टोरियल ज़िला अस्पताल के ICU वार्ड में जो नज़ारा सामने आया, वह इलाज से ज़्यादा इंतज़ाम की लाश दिखाता है। हड्डी विभाग के ICU में चूहों का जमावड़ा देखा गया — और यह कोई अफ़वाह नहीं, बल्कि भर्ती मरीज़ों के परिजनों द्वारा बनाया गया वीडियो है, जो अब सोशल मीडिया पर घूम रहा है।

विडंबना देखिए — चूहे मरीज़ों से हालचाल पूछते नज़र आ रहे हैं, उनके बिस्तरों के आसपास चहलक़दमी कर रहे हैं, मानो कह रहे हों:
“डॉक्टर नहीं आए तो क्या हुआ, हम तो आ गए!”

मरीज़ और परिजन मजबूरन मुस्कुरा रहे हैं — शायद इसलिए कि जब इंसान ग़ायब हो जाए, तो जानवरों की मौजूदगी भी राहत लगने लगती है।

ICU में जूते उतारकर जाना, अस्पताल के कपड़े पहनना, हाथ सैनिटाइज़ करना — ये सारी पाबंदियाँ संक्रमण रोकने के लिए होती हैं। लेकिन बेचारे चूहे शायद नहा–धोकर, एंटीबैक्टीरियल लगाकर, पूरी मेडिकल एप्रूवल के साथ ICU में दाख़िल हो रहे हैं!

ज़ाहिर है, विपक्ष को मौका मिल गया। कांग्रेस नेता सज्जन सिंह वर्मा ने सरकार को आड़े हाथों लिया और सवालों की झड़ी लगा दी। लेकिन प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री शुक्ल जी?
वह तो अपने क्षेत्र रीवा में सौग़ातें बाँटने में व्यस्त हैं।

शुक्ल जी, आप सिर्फ़ रीवा के नहीं — पूरे मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री हैं।

याद दिला दें —

- इंदौर के MY अस्पताल में चूहों ने नवजात शिशुओं को कुतर दिया
- भोपाल के हमीदिया अस्पताल में नवजात जल गए
- छिंदवाड़ा में ज़हरीले कफ़ सिरप से मासूम बच्चों की मौत हो गई

और अब जबलपुर के ICU में चूहे राज कर रहे हैं।

मोहन सरकार कर्ज़ लेकर सरकार चला रही है —
कर्ज़ पर विज्ञापन, कर्ज़ पर पोस्टर, कर्ज़ पर पंपलेट।
अरे भाई, कुछ पैसा स्वास्थ्य विभाग पर भी खर्च कर लीजिए।

पंपलेट बाज़ी से प्रदेश नहीं चलता,
रीवड़ियाँ बाँटने से ICU साफ़ नहीं होते,
और भाषणों से चूहे बाहर नहीं निकलते।

स्वास्थ्य मंत्री जी,
अपनी विधानसभा से बाहर भी नज़र डालिए।
नवजात शिशुओं की साँसें
और ICU में पड़े मरीज़ों की ज़िंदगियाँ
आपके ध्यान की मोहताज हैं।

सरकार से भीख नहीं, ज़िम्मेदारी माँगी जा रही है।
___________________
*मोहम्मद नसीम भोपाल मेट्रोRH24 न्यूज,APCR,*

भोपाल से भाजपा के सांसद  #आलोक शर्मा  और विधायक  #रामेश्वर शर्मा मुसलमानों का गरबा में शामिल होने का कड़ा विरोध कर रहे थ...
27/09/2025

भोपाल से भाजपा के सांसद #आलोक शर्मा और विधायक #रामेश्वर शर्मा मुसलमानों का गरबा में शामिल होने का कड़ा विरोध कर रहे थे! मेरा ख्याल है कि हिंदू भाइयों को पहले भाजपा वालों की जांच करना चाहिए।

*एयरपोर्ट चूहा कांड: “साफ-सुथरे इंदौर” की असली हकीकत* भोपाल/इंदौर।क्लीन सिटी के नाम पर देशभर में शान बघारने वाला इंदौर अ...
26/09/2025

*एयरपोर्ट चूहा कांड: “साफ-सुथरे इंदौर” की असली हकीकत*

भोपाल/इंदौर।
क्लीन सिटी के नाम पर देशभर में शान बघारने वाला इंदौर अब चूहा कांड से सुर्खियों में है। एयरपोर्ट पर यात्री को चूहा काटने की घटना ने सफाई और सिस्टम दोनों की पोल खोल दी है। *यह पहली बार नहीं*
कुछ महीने पहले इंदौर एमवाय हॉस्पिटल में नवजात शिशुओं को चूहों ने काट खाया था। उस घटना ने पूरे प्रदेश को हिलाकर रख दिया था।

*इससे पहले भी इंदौर में कई जगहों पर चूहों का आतंक सामने आ चुका है।*

अब एयरपोर्ट पर यात्री को चूहा काटने का मामला उजागर।
फिर भी “नंबर वन”
जब अस्पतालों से लेकर एयरपोर्ट तक इंसानों पर चूहे हावी हों, तो सवाल उठना लाजिमी है—
आखिर किस आधार पर इंदौर को बार-बार नंबर वन क्लीन सिटी का तमगा दिया गया?
क्या यह अवॉर्ड हकीकत पर है या “कागज़ी चमक” और बिल पास कराने की बाज़ीगरी पर?
*कार्रवाई का नाटक?*
एयरपोर्ट मेडिकल रूम के डॉक्टर हटाए गए।
सफाई और पेस्ट कंट्रोल एजेंसी को नोटिस, जुर्माना।
मेडिकल सर्विस देने वाले अमलतास ग्रुप पर चेतावनी।
लेकिन असली सवाल वही—
क्या चूहे हटेंगे, या सिर्फ नए बिल (ठेके) बनेंगे?
बिलबाजी का खेल
अब *“चूहा मिटाओ अभियान” चलेगा* । लेकिन क्या इसमें भी वही खेल नहीं होगा?
*बिल ढूंढे जाएंगे, चूहों से ज्यादा अफसर और ठेकेदार घुसकर बिल पास कराएंगे।*
जनता को मिलेगा सिर्फ प्रचारऔर असल में चूहे और सिस्टम दोनों जस के तस।
इंदौर की चमचमाती छवि के पीछे की सच्चाई यही है—
यहां चूहे सिर्फ गलियों और एयरपोर्ट में नहीं, सिस्टम के हर बिल में पल रहे हैं।
जब तक असली “बिलबाज” बाहर नहीं निकलते, इंदौर नंबर वन नहीं, लापरवाही और भ्रष्टाचार का अड्डा ही कहलाएगा।
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Mohammed Naseem Bhopal metro RH News24

*फरार टीआई और एएसआई पर 2-2 लाख का इनाम — पर पुलिस ही पुलिस को क्यों नहीं पकड़ पा रही?* भोपाल। मध्यप्रदेश के गुना जिले मे...
25/09/2025

*फरार टीआई और एएसआई पर 2-2 लाख का इनाम — पर पुलिस ही पुलिस को क्यों नहीं पकड़ पा रही?*

भोपाल। मध्यप्रदेश के गुना जिले में पुलिस कस्टडी में हुई देवा पारदी की संदिग्ध मौत ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट की नाराज़गी के बाद *CBI* ने आखिरकार फरार टीआई संजीत सिंह और एएसआई उत्तम सिंह कुशवाहा पर दो-दो लाख रुपए का इनाम घोषित किया।

लेकिन बड़ा सवाल यह है कि—
क्या CBI सिर्फ कोर्ट के दबाव में दिखावा कर रही है?
जब आम आदमी फरार होता है तो पुलिस घर-द्वार खंगाल देती है, फिर पुलिस वाले फरार क्यों सुरक्षित हैं?
*क्या सिस्टम खुद अपने लोगों को बचा रहा है?*

इनाम की घोषणा हुई, पर गिरफ्तारी कब होगी — यही जनता का सबसे बड़ा सवाल है। Mohammed Naseem Bhopal metro RH News 24

25/09/2025
11/09/2025

भोपाल: गंगा-जमनी तहज़ीब को तोड़ने की साज़िश, पथराव की घटना पर उठे गंभीर सवाल

भोपाल हमेशा से अपनी गंगा-जमनी तहज़ीब, अमन और भाईचारे के लिए जाना जाता है। यहाँ के त्योहार चाहे हिंदू हों या मुस्लिम, दोनों मिलकर एक-दूसरे की खुशियों में शरीक होते आए हैं। लेकिन हाल की घटना ने यह सवाल ज़रूर खड़ा कर दिया है कि आख़िर कौन लोग हैं जो इस मोहब्बत और सौहार्द की फिज़ा को ज़हर से भरने की साज़िश कर रहे हैं?

दरअसल, गणेश प्रतिमा विसर्जन जुलूस दो दिन पहले ही शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न हो चुका था। इसके बावजूद एक विशेष जगह से झांकी निकालकर जब जुलूस गुज़रा, तभी अचानक पथराव की घटना हुई। यही नहीं, डी,आई जी बंगला चौराहे पर भी इस जुलूस को रोकने और माहौल बिगाड़ने की कोशिश की गई। अब बड़ा सवाल यह है कि —
वे कौन लोग थे जिन्होंने अचानक दो दिन बाद इस जुलूस को वहाँ से गुज़रवाया?
किन लोगों ने भीड़ में शामिल होकर पथराव किया?
और इसका असली मक़सद क्या था?

यह स्पष्ट है कि यह घटना महज़ एक हादसा नहीं बल्कि एक सोची-समझी साज़िश का हिस्सा है।
आज की राजनीति में सबसे आसान रास्ता यही माना जाने लगा है कि हिंदू–मुस्लिम के बीच दरार डालो और अपनी सस्ती राजनीति चमकाओ। नेताओं के बयानों ने भी आग में घी डालने का काम किया है।

लेकिन असली नुकसान किसका हो रहा है?
उन गरीब परिवारों का, जिनके घर के युवाओं पर झूठे आरोप मढ़ दिए जाते हैं।
उन बेकसूर लोगों का, जिन्हें प्रशासन दबाव में आकर बलि का बकरा बना देता है।

यह घटना साफ़ तौर पर भोपाल की गंगा-जमनी तहज़ीब पर हमला है। यह किसी एक धर्म या समाज के खिलाफ़ नहीं, बल्कि शहर की एकता और शांति के खिलाफ़ रची गई साज़िश है।

सरकार और प्रशासन को चाहिए कि—

साज़िश रचने वालों की पहचान कर उन्हें सख़्त सज़ा दी जाए।

केवल सतही कार्रवाई कर बेकसूर लोगों को न फँसाया जाए।

राजनीतिक लाभ के लिए हिंदू–मुस्लिम कार्ड खेलने वालों को बेनक़ाब किया जाए।

भोपाल की जनता सब समझती है। उन्हें मालूम है कि कौन अमन पसंद है और कौन दंगा पसंद। यही वजह है कि भोपाल आज भी मोहब्बत और भाईचारे का शहर कहलाता है। Mohammed Naseemभोपाल मेट्रो और RH 24 न्यूज़

भोपाल की सच्चाई अब सामनेभास्कर और अन्य , समाचार पत्रों के अनुसार,गणेश प्रतिमा खंडित होने का शोर पूरी तरह झूठ और साज़िश न...
11/09/2025

भोपाल की सच्चाई अब सामने

भास्कर और अन्य , समाचार पत्रों के अनुसार,गणेश प्रतिमा खंडित होने का शोर पूरी तरह झूठ और साज़िश निकला।
सीसीटीवी फुटेज, गवाहों और लोकेशन ट्रेस से साबित हुआ कि जिन पर आरोप लगाए गए थे, वे निर्दोष थे।
असल में यह साज़िश भोपाल की फिज़ा बिगाड़ने और लोगों को दंगों की आग में झोंकने की थी।
अब पुलिस ने उन्हीं लोगों पर तलाश कररही है जिन्होंने झूठ फैलाकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश की थी।
यह बताता है कि अभी भी पुलिस का इक़बाल जिंदा है और कानून अपने रखवालों के हाथों में मज़बूत है।

लेकिन बड़ा सवाल यह है—
बिना जांच पड़ताल किए भोपाल के बीजेपी विधायकों ने आग भड़काने वाले बयान क्यों दिये?
हिंदू उत्सव समिति के अध्यक्ष राजेश तिवारी ने दंगा भड़काने और “भोपाल में कर्फ्यू लगवा देंगे” जैसी धमकी क्यों दी?
क्या इन पर कार्रवाई होगी?
भोपाल की अमनपसंद जनता को यह समझना होगा कि जब दंगा होता है तो नुकसान सबका होता है।
घायल का धर्म नहीं होता, वह सिर्फ इंसान होता है।
जला हुआ घर हिंदू-मुस्लिम का नहीं होता, वह इंसान का घर होता है।
अब समय आ गया है कि भोपाल की जनता इन घिनौनी और गंदी राजनीति करने वाले कीड़े-मकोड़ों को पहचानकर मसल दे।
साथ ही उन ईमानदार पुलिस और प्रशासनिक अफसरों का सम्मान व समर्थन करें, जिन्होंने सच को सामने लाने का साहस दिखाया। मोहम्मद नसीम भोपाल मेट्रो ,&RH 24 न्यूज़

11/09/2025

*||ए.पी.सी.आर. भोपाल यूनिट का पुलिस महानिदेशक को ज्ञापन||*
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भोपाल,11 सितम्बर 2025
ए.पी.सी.आर *. (APCR)* भोपाल यूनिट ने आज पुलिस महानिदेशक कार्यालय पहुँचकर एक सशक्त ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कहा गया कि दिनांक 08 सितम्बर 2025 की रात अरीफ़ नगर क्षेत्र से गणेश प्रतिमा विसर्जन के दौरान कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा सुनियोजित षड्यंत्र के तहत पत्थरबाज़ी कर प्रतिमा को क्षतिग्रस्त करने की कोशिश की गई।यह घटना सामान्य धार्मिक आयोजन को साम्प्रदायिक रंग देने और भोपाल का अमन-चैन बिगाड़ने की साजिश का हिस्सा है।
ज्ञापन में बताया गया कि इसके बाद घटना को भ्रामक रूप से पूरे शहर में फैलाया गया और उत्सव समिति के अध्यक्ष *चंद्रशेखर तिवारी* एवं चरण सिंह कुशवाहा ने जानबूझकर शांति भंग करने का कार्य किया। दोनों ने न केवल वीडियो वायरल कर माहौल को और अधिक भड़काने का काम किया बल्कि वीडियो में खुलेआम अल्पसंख्यक मुस्लिम समाज को *“जिहादी”* कहकर संबोधित किया। यह सीधे तौर पर समाज को बांटने और साम्प्रदायिक दंगा भड़काने का प्रयास है।
*ए.पी.सी.आर.* ने स्पष्ट किया कि यह कृत्य केवल साम्प्रदायिक माहौल बिगाड़ने तक सीमित नहीं है बल्कि यह कानून-व्यवस्था को चुनौती और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सीधा हमला है। *चंद्रशेखर तिवारी* द्वारा वीडियो में दिया गया बयान – “हम ऐसा माहौल बना देंगे कि पुलिस को कर्फ्यू लगाना पड़ेगा” – यह असंवैधानिक, उकसाने वाला और पूरी तरह आपराधिक श्रेणी का बयान है।
ज्ञापन में मांग की गई है कि *चंद्रशेखर तिवारी* एवं चरण सिंह कुशवाहा पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की साम्प्रदायिकता फैलाने, सांप्रदायिक दंगा भड़काने, नफ़रत फैलाने और शांति व्यवस्था को बाधित करने से जुड़ी धाराओं के अंतर्गत कड़ी कार्यवाही की जाए। साथ ही इनके विरुद्ध राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत भी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसे तत्व शहर और प्रदेश के माहौल को बिगाड़ने का दुस्साहस न कर सकें।
*ए.पी.सी.आर.* भोपाल संभाग के जिला अध्यक्ष जुबेर इलाही, उपाध्यक्ष डॉ. फजल और जिला सचिव अशरफ अली, सोहेल हाशमी ने कहा कि यदि ऐसे भड़काऊ तत्वों पर समय रहते कठोर कार्रवाई नहीं हुई तो यह लोग पूरे प्रदेश में हिंसा, अशांति और अविश्वास का माहौल बना देंगे। प्रशासन का दायित्व है कि वह ऐसे तत्वों को कानून के शिकंजे में लाए और गंगा-जमुनी तहज़ीब की राजधानी भोपाल की शांति व सौहार्द को सुरक्षित रखे।
*मोहम्मद नसीम*
*प्रेस रिपोर्टर RH NEWS 24*
9893941212

बेगमगंज संवाददाता सईद नादां के अनुसार ,,,,बेगमगंज अस्पताल की बदहाल तस्वीरबेगमगंज, जिला रायसेन का बड़ा नगर… जहाँ तहसील, थ...
03/09/2025

बेगमगंज संवाददाता सईद नादां के अनुसार ,,,,बेगमगंज अस्पताल की बदहाल तस्वीर

बेगमगंज, जिला रायसेन का बड़ा नगर… जहाँ तहसील, थाना और नगर पालिका सब कुछ है, लेकिन अस्पताल की हालत बेहद खराब है।

शासकीय सिविल अस्पताल में मरीज और खासकर नवजात बच्चों की ज़िंदगी खतरे में है। अस्पताल के गलियारों और वार्डों में आवारा कुत्ते घूमते और आराम फरमाते नज़र आते हैं। हाल ही में कोर्ट ने कुत्तों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उन्हें खुला छोड़ने का आदेश दिया है, लेकिन अगर यही कुत्ते अपनी “कुत्तों वाली हरकतों” पर उतर आएं, तो उन मासूम नवजातों और उनकी माताओं का क्या होगा, जो अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती रहते हैं?

डॉक्टर जितने हैं, वे पूरी मेहनत कर रहे हैं, लेकिन डॉक्टर और स्टाफ की कमी साफ़ दिखती है। सफाईकर्मी और गार्ड जैसे कर्मचारी ड्यूटी पर समय से नहीं रहते। आउटसोर्सिंग से रखे गए कर्मचारियों की जवाबदेही तय ही नहीं है।

अब सवाल उठता है कि जब मध्य प्रदेश की मोहन सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र में नए-नए आयाम जोड़ने के दावे कर रही है, तो ज़मीनी स्तर पर यह लापरवाही क्यों?
क्या ज़िम्मेदारी जिला प्रशासन की है या फिर तहसील स्तर पर बैठा अस्पताल स्टाफ ही नाकाम है?
अगर स्टाफ की कमी है तो भर्ती क्यों नहीं की जा रही? और अगर गार्ड की ज़रूरत है तो सुरक्षा क्यों नहीं बढ़ाई जा रही? मोहम्मद नसीम भोपाल मेट्रो न्यूज

"बरेली की कचरा गाड़ी में मिली माँ की कोख का टुकड़ा"रायसेन ज़िले के बरेली नगर परिषद से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई...
29/08/2025

"बरेली की कचरा गाड़ी में मिली माँ की कोख का टुकड़ा"

रायसेन ज़िले के बरेली नगर परिषद से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। जुमे की सुबह नगर परिषद की कचरा गाड़ी जब वार्ड 13 और 14 से कचरा जमा कर रही थी, तभी अचानक एक औरत को गाड़ी के अंदर से मासूम के रोने की आवाज़ सुनाई दी। ड्राइवर को बताया गया, गाड़ी रोकी गई, और देखा गया कि कचरे के अंबार में एक ज़िंदा नवजात बच्ची पड़ी हुई है। यह मंज़र देखते ही पूरे बरेली नगर में सनसनी फैल गई। फ़ौरन पुलिस मौक़े पर पहुँची और बच्ची को सिविल अस्पताल बरेली में भर्ती कराया गया, जहाँ डॉक्टरों ने कहा कि जिस्म पर कुछ खरोंचों के निशान हैं लेकिन हालत अभी खतरे से बाहर है।

मगर असल सवाल यह है कि यह वाक़िया महज़ एक हादसा है या फिर हमारे समाज का आइना?

माँ ने अपनी कोख से उसे जनम दिया, उसे ज़िंदगी बख़्शी, लेकिन सहारे का दरवाज़ा बंद कर दिया। यह सच है कि कुदरत की दी हुई नियामत की क़दर न की गई, मगर इतना रहम ज़रूर किया गया कि उसे मौत के हवाले नहीं किया गया, बल्कि ज़िंदा छोड़ दिया।

अब हमें समाज के तौर पर सोचना होगा—
कुछ घराने ऐसे हैं जहाँ दौलत के ढेर हैं, मगर औलाद की नेमत नहीं।
कुछ के आंगन बेटियों से महकते हैं, लेकिन बेटे की तमन्ना बाकी है।
और कुछ घरों में बेटे हैं, मगर बेटियों की कमी चुभती रहती है।

इंसान की ख्वाहिशें अधूरी रह सकती हैं, मगर ऊपरवाले की अता की हुई नियामत को ठुकराना इंसानियत से इनकार है।

कानून का काम है तफ्तीश करना, गुनहगार को पकड़ना, अदालती दफ़ा लगाना। पुलिस अपनी जाँच करेगी, सीसीटीवी खंगालेगी, केस दर्ज होगा। लेकिन असल मक़सद क्या है? क्या महज़ गुनाह साबित कर देना ही इंसाफ़ है?

अगर उस माँ को बेनक़ाब कर दिया गया, समाज में घसीट लिया गया, उसकी इज़्ज़त उतार दी गई—तो क्या इससे इस मसले का हल निकलेगा? या फिर एक और ज़िंदगी बर्बाद होगी?

असल फ़र्ज़ तो हमारे बुज़ुर्गों, समाज सुधारकों और रहनुमाओं का है कि वो लोगों को समझाएँ:
औलाद ऊपरवाले की सबसे बड़ी नेमत है, उसकी क़दर करो।

हम अदालत और पुलिस से भी यही गुज़ारिश करेंगे कि उस माँ की पहचान छुपाई जाए, ताकि वो ज़लील होने से, औरत होने की सज़ा से बच सके। यही उसकी सज़ा भी होगी और सुधार का रास्ता भी।

यह वाक़िया सिर्फ़ बरेली की कचरा गाड़ी का नहीं, बल्कि हमारी रूह को झकझोरने वाला आईना है। Mohammed Naseem Bhopal metro news

रायसेन के बेगमगंज में noरायसेन ज़िले की तहसील बेगमगंज से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहाँ छोटे दुकानदारों से लेक...
27/08/2025

रायसेन के बेगमगंज में no
रायसेन ज़िले की तहसील बेगमगंज से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहाँ छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े व्यापारियों तक ने भारत सरकार द्वारा जारी सिक्के लेने से इंकार करना शुरू कर दिया है।

लोगों का कहना है कि दुकानदार सीधे-सीधे ₹1–2 के सिक्के या छोटे सिक्के लेने से मना कर देते हैं। यदि किसी वस्तु का दाम ₹36 बनता है तो ग्राहकों से ₹40 वसूले जाते हैं। इसी तरह अगर ₹10–12 का हिसाब बनता है तो सीधा ₹15 लिया जाता है। इससे आम उपभोक्ताओं को रोज़ाना ₹10 से ₹25 तक का नुकसान उठाना पड़ रहा है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह सिर्फ़ खुल्ले पैसों की समस्या नहीं है, बल्कि यह भारत सरकार की मुद्रा नीति और नियमों का सीधा उल्लंघन है। इतना ही नहीं, सिक्कों को ठुकराना क़ानूनी तौर पर अपराध भी है।

हैरानी की बात है कि अब तक न पुलिस की नज़र इस पर गई है और न ही प्रशासन ने कोई कार्रवाई की है। मीडिया ने भी इस गंभीर मुद्दे को नज़रअंदाज़ कर रखा है।

ग्राहकों का कहना है कि छोटे सिक्कों को न लेने की यह प्रथा धीरे-धीरे लूट का रूप ले चुकी है। उपभोक्ताओं ने वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की है कि इस मामले में तुरंत संज्ञान लिया जाए और उन दुकानदारों के खिलाफ़ कार्रवाई की जाए जो खुलेआम सरकार की मुद्रा का अपमान कर रहे हैं। Mohammed Naseem Bhopal metro news

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