Bhuvalpur Kila Pratapgarh

Bhuvalpur Kila Pratapgarh This page is regarding activities happening in the village & sharing views of people from Bhuvalpur Kila.

Bhuvalpur Kila is a large village located in Pratapgarh Tehsil of Pratapgarh district, Uttar Pradesh with a total of 320 families residing. The Bhuvalpur Kila village has a population of 2115 of which 1098 are males while 1017 are females as per Population Census 2011. In Bhuvalpur Kila village population of children, age 0-6 is 204 which makes up 9.65 % of the total population of the village. The

average S*x Ratio of Bhuvalpur Kila village is 926 which is higher than the Uttar Pradesh state average of 912. Child S*x Ratio for the Bhuvalpur Kila as per census is 1082, higher than Uttar Pradesh average of 902. Bhuvalpur Kila village has a higher literacy rate compared to Uttar Pradesh. In 2011, the literacy rate of Bhuvalpur Kila village was 79.33 % compared to 67.68 % of Uttar Pradesh. In Bhuvalpur Kila Male literacy stands at 91.90 % while the female literacy rate was 65.53 %. As per the constitution of India and the Panchyati Raaj Act, Bhuvalpur Kila village is administrated by the Sarpanch (Head of Village) who is elected representative of the village. Our website, don't have information about schools and hospital in Bhuvalpur Kila village.

12/03/2026

यूं ही तो नहीं , हवाओं ने मेरी आरती उतारी है
मैं दिया हूं तो क्या हुआ मेरी आंधियों से जंग जारी है

09/02/2026

ठाकुर हूँ, बकचो|दी मत करना, पूरा मामला देखे।👇
यह #आस्था_सिंह है, जो बैंक में एक कर्मचारी है, एक ग्राहक बैंक की सेवाओं को लेकर पहले बहस करने लगा, और बाद में बातचीत का स्तर गिराते हुए अभद्रता पर उतर आया।
जब ग्राहक लगातार बदतमीज़ी करता रहा, तो #आस्था_सिंह ने उसे जवाब देते हुए सख़्त लहजे में अपनी बात रखी, उसी बातचीत का एक छोटा सा क्लिप अब सोशल मीडिया पर संदर्भ से अलग करके फैलाया जा रहा है।
इसके बाद लोगों को जैसे एक नया #क्षत्रिय विरोध में कंटेंट मिल गया हो, रीच और लाइक्स के चक्कर में बिना पूरी सच्चाई जाने तरह तरह की बातें लिखी जा रही है, सच यह है कि हर कर्मचारी भी एक इंसान होता है।
लगातार अपमान और दुर्व्यवहार के बाद संयम टूट जाना कोई #अपराध नहीं है, लेकिन अधूरी क्लिप के आधार पर किसी को कटघरे में खड़ा करना भी सही नहीं, सोशल मीडिया पर जज बनने से पहले तथ्यों को समझना और दोनों पक्षों को सुनना ज़रूरी है।

https://youtu.be/mf0XnUZ4glY
25/01/2026

https://youtu.be/mf0XnUZ4glY

Watch the beautiful 4-lane highway from Lucknow to Ayodhya, popularly known as Ayodhya Road.The road is surrounded by lush green trees on both sides, with a ...

28/12/2025

जिनकी माँ नहीं रहती
उन लड़कों के बारे में क्या कहा जाए!
पिता नहीं रहते
तो चेहरा नहीं बताता कि पिता नहीं रहे
लेकिन माँ नहीं रहती
तो चेहरा बता देता है कि माँ नहीं रही!
---
जिनकी माँ नहीं रहती
उन लड़कों का
रसोई से रिश्ता लगभग ख़त्म हो जाता है
उनकी जीभ
लगभग पत्थर की हो जाती है
जो पसंदीदा सब्ज़ी के लिए
माँ से लड़ लेते थे
वे अब
पानी और नमक तक के साथ रोटी खा सकते हैं
मीठा तो उन्हें भाता ही नहीं
चीनी खारी हो जाती है
उनका जी करता है कि ज़हर फांक लेवें
लेकिन दिल के भीतर से आवाज़ आती है :
"मैं मर गई तो क्या हुआ बेटा / तुझे तो जीना है"
---
कभी बड़ी बहन में
कभी छोटी बहन में
कभी अपनी दोस्त में
कभी अपनी प्रेमिका में माँ ढूंढ़ते हैं वे लड़के
जिनकी माँ नहीं रहती
लेकिन हर बार नाक़ाम हो जाते हैं
क्योंकि माँ
माँ के अलावा कहीं नहीं हो सकती
और विडंबना यह है
कि माँ अब कहीं नहीं है
---
याद आती है माँ
जब अकेले में चाय बनाते हैं लड़के
जब मैगी उबालते हैं
सोचते हैं :
ऐसी ही किसी आग में झोंक आए थे माँ को
फिर पूछते हैं अपने आप से
कहीं माँ को जलते समय दर्द तो नहीं हुआ था
प्याज़ काटते हुए
उन लड़कों का जी करता है
अपनी नस काट लेवें
फिर वे ख़ुद पर हँसते हैं
जब नहीं काट पाते नस
और इस हंसने में पहले से ज़्यादा आँसू आते हैं
---
दोस्तों की माँओं को
जिन्हें वे लड़के
केवल दोस्तों की मम्मियां समझते रहे
अचानक माँ समझने लगते हैं
दोस्तों की माँएँ
जब ज़िक्र करती हैं उनकी माँओं का
तो वे लड़के उन आंटियों के गले लगना चाहते हैं
लेकिन लग नहीं पाते
इतने भावुक होते हैं वे लड़के
जिनकी माँ नहीं रहती
कि किसी की भी माँ का शरीर शांत हो जाए
तो सबसे पहले पहुँचते हैं दाह संस्कार में
---
शादी भी करते हैं वे लड़के
जिनकी माँ नहीं रहती
लेकिन वह दहलीज़ सूनी होती है
जहाँ आरती का थाल लिए खड़ी रहती माँ
तिलक तो फिर भी लगता है
कोई काकी-ताई करती है नेगचार
लेकिन वह बात कहाँ रहती है
जो माँ के तिलक में होती है
क्योंकि तिलक लगाने के बाद
माँ की तरह
गाल नहीं खींच सकती कोई काकी या ताई
---
सारे त्योहार
मिट्टी में मिल जाते हैं
होली पर फिर जाता है काला रंग
दीवाली पानी में भीग कर सीली हो जाती है
मकर संक्रांति पर दिल में इतनी तेज़ हवा चलती है
कि टूट जाती है धागे से पतंग
मांझा छील देता है उम्मीदों की अंगुलियां
रक्षाबंधन पर
बहनें जब घर आती हैं
तो माँ की तस्वीर के आगे रोती हैं
भाई लाचार-सा खड़ा देखता है चुपचाप!
---
वे लड़के
जिनकी माँ नहीं रहती
उन्हें सौपना चाहता हूँ अपनी जीवित माँ
उसके नंबर इनबॉक्स करना चाहता हूँ उन्हें
और कहना चाहता हूँ :
जब तक मेरी माँ ज़िंदा है
यह मत समझना कि नहीं रही तुम्हारी माँ!
---
मेरी माँ!
तुम मुझे कितना भी डांटो पीटो झगड़ो
लेकिन मुझे छोड़कर नहीं जाना
कि मैं तेरा जवान लड़का
अब भी तेरे आँचल से पौंछना चाहता हूँ
अपने हाथ पैर मुँह और खाने की थाली
मेरी माँ!
मेरी इस कविता में
जिन लड़कों का ज़िक्र है
तू उन्हें अपना आशीष दे
कि अपनी माँओं के बिना भी
वे ख़ुश रह सकें
मेरी माँ!
आज से तेरे दो बेटे नहीं
हज़ारों लाखों बेटे हैं
क्योंकि एक सौ चालीस करोड़ लोगों का
यदि कोई एक प्रधानमंत्री हो सकता है
तो फिर तू उन लड़कों की माँ क्यों नहीं हो सकती
जिनकी माँ नहीं रही
मेरी माँ!
इतने सारे सरों पर
अपने दोनों हाथ रख
और उनके आँसू पौंछ
जो अब तक विश्वास नहीं कर पा रहे -
कि इन्हीं दुर्भाग्यशाली हाथों से
उन्होंने दी
नदी जैसी माँओं को आग..
कि इन्हीं हाथों से
उन्होंने फोड़ा कपाल
पंडित के कहने पर
उसमें गाय का देसी घी डाला..
अपनी गाय जैसी
सीधी-सरल माँ को राख करने के लिए!
---
मेरी माँ!
आज तुझे
मेरी निजी माँ से
इस जगत की जगतमाता करता हूँ -
यही है
वह सत्रहवां हिन्दू संस्कार
जिसका किसी शास्त्र में कहीं कोई वर्णन नहीं!
_________________________
Manmeet Soni Writes
कविता : "उन लड़कों के नाम जिनकी माँ नहीं रहती"

“वो भी एक दौर था… भाईचारा था, भरोसा था… हर हाथ में अपनापन था। अब तस्वीरें ही गवाही देती हैं उस दौर की। 🙏
31/10/2025

“वो भी एक दौर था… भाईचारा था, भरोसा था… हर हाथ में अपनापन था। अब तस्वीरें ही गवाही देती हैं उस दौर की। 🙏

29/08/2025

आज दिनांक 29 अगस्त 2025 को प्रतापगढ़ दौरे के दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी जी ने बेल्हा देवी जी पर पूजा-अर्चना की।

#प्रतापगढ़ #दिनांक

प्रतापगढ़ – उत्तर प्रदेश का सबसे गरीब जिलाआज उत्तर प्रदेश के Directorate of Economics and Statistics की रिपोर्ट प्रकाशित...
17/08/2025

प्रतापगढ़ – उत्तर प्रदेश का सबसे गरीब जिला
आज उत्तर प्रदेश के Directorate of Economics and Statistics की रिपोर्ट प्रकाशित हुई है जिसने हमारे जनपद की एक कड़वी हकीकत सामने ला रखी है।
वित्त वर्ष 2023-24 में प्रतापगढ़ की प्रति व्यक्ति आय केवल ₹44,544 रही। जिससे प्रतापगढ़ जनपद पूरे सूबे के सबसे गरीब जिला बनकर उभरा है। बड़े शर्म की बात है।
इस ज़िले से बड़े-बड़े महाराजा निकले, मंत्री और केन्द्रीय मंत्री बने, लेकिन अफसोस यह है कि कोई भी इस ज़िले की तकदीर नहीं बदल सका।
आज भी यहां न कोई उद्योग है, न रोज़गार के अवसर। युवा पढ़-लिखकर शहरों और दूसरे राज्यों का रुख करने को मजबूर हैं।
सोचिए, जब लोग अपनी जमीन छोड़कर पलायन करेंगे तो ज़िला कैसे आगे बढ़ेगा?
क्या प्रतापगढ़ हमेशा गरीबी के आंकड़ों में ही गिना जाएगा, या कभी विकास की मिसाल बनेगा? #प्रतापगढ़

प्रतापगढ़ – उत्तर प्रदेश का सबसे गरीब जिला

आज उत्तर प्रदेश के Directorate of Economics and Statistics की रिपोर्ट प्रकाशित हुई है जिसने हमारे जनपद की एक कड़वी हकीकत सामने ला रखी है।

वित्त वर्ष 2023-24 में प्रतापगढ़ की प्रति व्यक्ति आय केवल ₹44,544 रही। जिससे प्रतापगढ़ जनपद पूरे सूबे के सबसे गरीब जिला बनकर उभरा है। बड़े शर्म की बात है।

इस ज़िले से बड़े-बड़े महाराजा निकले, मंत्री और केन्द्रीय मंत्री बने, लेकिन अफसोस यह है कि कोई भी इस ज़िले की तकदीर नहीं बदल सका।

आज भी यहां न कोई उद्योग है, न रोज़गार के अवसर। युवा पढ़-लिखकर शहरों और दूसरे राज्यों का रुख करने को मजबूर हैं।

सोचिए, जब लोग अपनी जमीन छोड़कर पलायन करेंगे तो ज़िला कैसे आगे बढ़ेगा?
क्या प्रतापगढ़ हमेशा गरीबी के आंकड़ों में ही गिना जाएगा, या कभी विकास की मिसाल बनेगा?

ना लगने पर भी साथ जाने वाले मित्र, तुम्हे भी मित्रता दिवस की शुभकामनाएं !
04/08/2025

ना लगने पर भी साथ जाने वाले मित्र, तुम्हे भी मित्रता दिवस की शुभकामनाएं !

बचपन का सबसे प्यारा ट्रिप — ना कोई मनाली, ना कोई गोवा…सिर्फ़ मामा का घर।जहाँ पहुँचते ही सब अपने लगते थे —दरवाज़े पर मामी...
04/07/2025

बचपन का सबसे प्यारा ट्रिप — ना कोई मनाली, ना कोई गोवा…
सिर्फ़ मामा का घर।
जहाँ पहुँचते ही सब अपने लगते थे —
दरवाज़े पर मामी की मुस्कान,
मामा की गोद, मौसी के बच्चों की शरारतें…
ना होमवर्क की टेंशन, ना स्कूल की घंटी —
बस हर सुबह नए खेल, नई शरारत।
दिन में मौसी के बच्चों संग, पेड़ से आम-इमली तोड़ना,
गली में साइकल रेस, तालाब किनारे पैर भिगोना,
फिर सब थक कर आँगन में बैठ जाना —
मामी बार-बार पूछती, ‘कुछ खाओगे?’
और हम हर बार ‘हाँ!’ कह देते थे।
रात में सब एक चारपाई पर —
किसी के पैर कहीं, किसी का सिर कहीं,
फिर भी सबको नींद सबसे मीठी वहीँ आती थी।
और हँसी-ठिठोली करते-करते पता ही नहीं चलता कब नींद आ गई।
फिर एक दिन वो स्टेशन आ जाता था —
मामा का हाथ पकड़कर वापस लौटना मुश्किल लगता था।
मौसी के बच्चे भी साथ में थोड़े रो लेते थे —
क्योंकि अगले साल तक का वादा करना पड़ता था।
अब बड़े हो गए हैं —
कभी फुर्सत नहीं मिलती, कभी मन।
पर दिल के किसी कोने में अब भी वो गली, वो आँगन हैं।
मामा-मामी, मौसी के बच्चे — सब वहीँ हैं।
बस हम बड़े होकर थोड़ा दूर हो गए हैं।
कभी-कभी जब जिम्मेदारियाँ थकाएँ —
तो वो पुराना बचपन आवाज़ देता है —
‘चल ना… एक बार फिर मामा घर चलते हैं…
फिर से वहीं चारपाई पे सब साथ बैठेंगे…
फिर से बिना वजह हँसेंगे।’
क्योंकि असली छुट्टियाँ तो वहीं होती थीं —
जहाँ दिल का बचपन आज भी ठहरा है।

अवध ओझा : AAP नेता ने केजरीवाल को कहा कृष्ण, UPSC Aspirant ने बताई असलियत https://youtu.be/hnrd6evfZkc
29/12/2024

अवध ओझा : AAP नेता ने केजरीवाल को कहा कृष्ण, UPSC Aspirant ने बताई असलियत
https://youtu.be/hnrd6evfZkc

Episode No.121 दिल्ली विधासभा चुनाव को लेकर सियासी पारा चढ़ने लग गया है। आम आदमी पार्टी (आप) नेता अवध ओझा ने पार्टी के राष्ट्....

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