09/03/2026
बिहार में रजिस्ट्री से पहले मिलेगी जमीन की पूरी जानकारी, 1 अप्रैल से नया नियम लागू
बिहार में जमीन की रजिस्ट्री अब 'अंधेरे में तीर चलाने' जैसी नहीं रहेगी। 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाला यह नया नियम उन लाखों खरीदारों के लिए एक 'सुरक्षा कवच' की तरह है, जो अक्सर धोखाधड़ी या विवादित जमीन के जाल में फंस जाते हैं।
मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग और राजस्व विभाग की यह जुगलबंदी जमीन के 'खेला' को रोकने की एक बड़ी कोशिश है। यहाँ इस नई व्यवस्था की पूरी जन्मकुंडली दी गई है:
🛡️ 'चेक' करें फिर 'रजिस्ट्री' कराएं: कैसे काम करेगा सिस्टम?
अब खरीदार के पास यह ताकत होगी कि वह पैसे देने और अंगूठा लगाने से पहले सरकारी रिकॉर्ड में जमीन की असलियत जान सके।
चरण प्रक्रिया
1. लॉगिन ई-निबंधन (e-Nibanchan) पोर्टल पर अपना अकाउंट बनाकर लॉगिन करें।
2. डेटा एंट्री जमीन का पूरा विवरण (खाता, खेसरा, थाना, मौजा, रकबा) दर्ज करें।
3. जादुई बटन पोर्टल पर 'भूमि के बारे में पूरी जानकारी' का विकल्प चुनें।
4. अंचल जांच आपकी रिक्वेस्ट सीधे CO (अंचलाधिकारी) के पास जाएगी।
5. 10 दिन की डेडलाइन CO और राजस्व कर्मचारी को 10 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड करनी होगी।
📝 क्या-क्या जानकारी मिलेगी?
अंचल कार्यालय से आने वाली रिपोर्ट में इन महत्वपूर्ण बिंदुओं का खुलासा होगा:
क्या जमीन बेचने वाले के नाम पर जमाबंदी कायम है?
क्या जमीन पर पहले से कोई कानूनी विवाद या स्टे (Stay Order) है?
क्या जमीन 'खास महाल' या सरकारी तो नहीं है?
जमीन का प्रकार (आवासीय, कृषि या व्यावसायिक) क्या है?
⚖️ चुनौतियां: अंचल कार्यालयों पर 'ओवरलोड'
बिहार में रोजाना 6,000 से 8,000 दस्तावेजों की रजिस्ट्री होती है। अगर 50% लोग भी इस सुविधा का उपयोग करते हैं, तो अंचल कार्यालयों को हर महीने लाखों जमीनों की रिपोर्ट तैयार करनी होगी।
चिंता: क्या हमारे अंचल कार्यालय 10 दिन की समय सीमा का पालन कर पाएंगे?
असर: अगर देरी हुई, तो रजिस्ट्री की प्रक्रिया लंबी खिंच सकती है।