06/03/2025
Samir Aalam की पोस्ट काफ़ी अच्छी लगी फिजूलखर्ची से बचे 👍 आप भी पढ़े
*.गल्फ़ की ज़िन्दगी.और हमारे हालात*
एक 21 वर्षीय नौज़वान दौलत कमाने और अपनी जिम्मेदारियाँ निभाने के लिए गल्फ़ का रुख करता है.।
2 साल तक घर वालों को हर महिने पगार भेजने के बाद बाद 2-3 महिने की छुट्टी पर आता है और अपनी हैसियत एवं आमदनी के मुताबिक सबके लिए उपहार लाता है लेकिन फिर भी कोई ना कोई अपने लिए लाए गए उपहार से नाखुश होकर नाराज़ हो ही जाता है और लाखों रुपयों के उपहार लाने वाला नौजवान मायूस हो जाता है।अब इन छुट्टियों में सब रिश्तेदार उम्मीद करते हैं कि वह नौजवान उनसे मिलने आए और जाहिर सी बात है कि दो साल बाद आने वाला नौज़वान खाली हाथ तो आ नहीं सकता।
यार-दोस्त भी उम्मीद करते हैं कि कुछ उपहारों के साथ-साथ अपनी छुट्टियों में उन पर भी खुले हाथ से खर्च करने की जहमत करें।
यूँ ही मिलने-मिलाने और रिश्तेदारी निभाने में छुट्टियां पूरी हो जाती हैं और फिर से वही 2/3 साल की वतन से दूरी की घङी कब आ जाती है, पता ही नहीं चलता..
यूँ वह नौजवान कब अधेङ हो कर बुढ़ापे की जानिब पहुँच जाता है, पता ही नहीं चलता।
इस दौरान वह अपने मकान बनाता है, रिश्तेदारी निभाता है, शादी-ब्याह व दीगर रस्में निभाता है और अपनी 21 साल से 50-55 वर्ष की उम्र तक पहुँचते पहुंचते मुश्किल से कुल मिलाकर 3 से 5 साल अपने वतन में रह पाता है.
अपने बीवी -बच्चों की सेहत और पढ़ाई के लिए हमेशा दूसरों पर निर्भर रहता है..
अब खुद के बच्चे बङे हो जाते हैं..
बेटियाँ अपने ससुराल चली जाती हैं और बेटे अगर शिक्षित,समझदार एवं काबिल हैं तो कोई नौकरी हासिल कर लेते हैं या फिर खुद का व्यवसाय स्थापित कर लेते हैं.. ऐसे काबिल बेटे 5% से 10% तक ही होते हैं..!!
बाकी 90% नौज़वान जो अब तक फैशन, मौज-मस्ती, सैर-सपाटे, बाईक रेस आदि में व्यस्त रहते थे..
वह नौज़वान भी गल्फ़ का रुख करते हैं..
जो वालिद आज से 30 -35 साल पहले गल्फ़ में मजदूरी करने गया था, वह अब कुछ आरामदायक पद(फौरमैन, मैनेजर आदि) पर पहुँचा है तो उसी का बेटा अब मैशन, प्लम्बर, ड्राईवर बन कर वही ज़िन्दगी गुजारने आया है, जो उसका वालिद उससे पहले ही गुज़ार चुका है.।।
अब आप खुद अंदाजा लगाईये कि हमने कितनी तरक़्की कर ली है.!!
यह हमारे समुदाय के 80% से 90% तक लोगों की मौजूदा हालात की हकीकत है.।।
आईये..
हम फिज़ुल-खर्ची पर अंकुश लगायें..
शिक्षित, समझदार और फिक़्रमंद बनें..
अपनों की कुर्बानियों की अहमियत को समझे..
दीनी ज़िन्दगी के साथ दुनियावी ज़िन्दगी भी बेहतर बनायें..
आईये..
हम सब मिलकर कुछ बेहतर करने की कोशिश करें.
शुक्रिया..