16/04/2026
⚠️ सोचने वाली बात — जागो और समझो ⚠️
दोस्तों, 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद एक बहुत बड़ा नैरेटिव खड़ा किया गया — और वो था मीडिया के जरिए समाज को बांटने का खेल।
आपने देखा होगा कि अलग-अलग पार्टियों को किस तरह नाम दिए गए:
समाजवादी पार्टी को “मुल्लों की पार्टी” कहा गया,
कांग्रेस को “मुल्लों की पार्टी” कहा गया,
बीएसपी को “मुल्लों की पार्टी” कहा गया,
टीएमसी को “मुल्लों की पार्टी” कहा गया,
आरजेडी को भी वही कहा गया।
यानी जो भी पार्टी विपक्ष में है — उसे एक ही रंग में रंगने की कोशिश की गई।
अब ज़रा सोचिए 🤔
अगर हर पार्टी “मुल्लों की पार्टी” है,
तो फिर मुसलमान किसके साथ है…?
सच ये है कि मुसलमान खुद ही अलग-अलग पार्टियों में बंटा हुआ है।
👉 असली खेल यही है —
आपको उलझाकर, बांटकर, कमजोर करना।
इसलिए अब वक्त है सोचने का:
✔️ हमें किसके साथ खड़ा होना है
✔️ हमें अपनी ताकत को कैसे बचाना है
✔️ हमें बिखरना है या एक होना है
याद रखिए —
जब तक हम बंटे रहेंगे, हम कमजोर रहेंगे।
जिस दिन हम एक हो गए, तस्वीर बदल जाएगी।
✊ अब फैसला हमारे हाथ में है…