30/07/2026
संजू वर्मा जी, जामसांवली हनुमान मंदिर मध्य प्रदेश के पांढुर्णा क्षेत्र में स्थित एक बहुत प्रसिद्ध और चमत्कारी धार्मिक स्थल है। यह मंदिर पहले छिंदवाड़ा जिले में माना जाता था, लेकिन अब पांढुर्णा जिला बनने के बाद यह पांढुर्णा जिले में आता है। पांढुर्णा से इसकी दूरी लगभग 25 किमी बताई जाती है।
मंदिर के बारे में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हनुमान जी की प्रतिमा को स्वयंभू यानी स्वयं प्रकट हुई प्रतिमा माना जाता है। इस प्रतिमा को किस व्यक्ति ने बनाया या स्थापित किया, इसका कोई प्रमाणित ऐतिहासिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। इसलिए यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता कि मंदिर “किसने बनवाया” या “किसने चालू किया।” मंदिर की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, 100 वर्ष से अधिक पुराने राजस्व अभिलेखों में पीपल के पेड़ के नीचे श्री महावीर हनुमान जी के विराजमान होने का उल्लेख मिलता है।
स्थानीय मान्यता के अनुसार, पहले हनुमान जी की प्रतिमा खड़ी अवस्था में थी। कुछ लोगों ने प्रतिमा के नीचे धन या खजाना होने के संदेह में उसे हटाने का प्रयास किया। कहा जाता है कि प्रतिमा स्वयं शयन अवस्था में आ गई और बैलों तथा अन्य साधनों से भी उसे हटाया नहीं जा सका। तभी से यहां हनुमान जी की लेटे हुए या शयन मुद्रा में पूजा की जाती है। यह धार्मिक जनश्रुति है, जिसका स्वतंत्र ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है।
रामायण काल से जुड़ी एक मान्यता भी प्रचलित है कि जब हनुमान जी संजीवनी बूटी लेकर जा रहे थे, तब उन्होंने जामसांवली के पीपल वृक्ष के नीचे कुछ समय विश्राम किया था। इसी कारण इस स्थान को अत्यंत पवित्र माना जाता है।
मंदिर की एक विशेष मान्यता यह भी है कि हनुमान जी की प्रतिमा की नाभि से जल निकलता है, जिसे श्रद्धालु पवित्र प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। मंगलवार, शनिवार, हनुमान जयंती और अन्य बड़े धार्मिक अवसरों पर यहां बड़ी संख्या में भक्त पहुंचते हैं।
संक्षेप में: जामसांवली हनुमान मंदिर की कोई निश्चित स्थापना तिथि और संस्थापक का प्रमाण उपलब्ध नहीं है। सरकारी रिकॉर्ड इसे लगभग 100 वर्ष से अधिक पुराना बताते हैं, जबकि भक्तों की मान्यता है कि हनुमान जी यहां स्वयं प्रकट हुए थे और यह स्थान रामायण काल से जुड़ा हुआ है।