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“ईशान कोण आकाश का द्वार है…और नैऋत्य पृथ्वी का आधार। इन दोनों के संतुलन का नाम ही वास्तु है।” वास्तुशास्त्र केवल दिशाओं ...
09/05/2026

“ईशान कोण आकाश का द्वार है…और नैऋत्य पृथ्वी का आधार। इन दोनों के संतुलन का नाम ही वास्तु है।”

वास्तुशास्त्र केवल दिशाओं का साधारण ज्ञान नहीं है, बल्कि यह पृथ्वी, ब्रह्मांड और ऊर्जा के बीच चलने वाले अदृश्य संतुलन को समझने का दिव्य विज्ञान है। जब हम किसी भवन, भूमि या घर को देखते हैं, तो वास्तव में हम केवल ईंट, पत्थर और दीवारें नहीं देख रहे होते, बल्कि एक ऐसे ऊर्जा-पात्र को देख रहे होते हैं जो ब्रह्मांडीय शक्तियों को ग्रहण भी करता है और धारण भी करता है। इसी गूढ़ सत्य को यदि एक सरल उदाहरण में समझना हो, तो एक “मटका” वास्तु का सबसे सुंदर प्रतीक बन जाता है।

कल्पना कीजिए कि यह पूरी पृथ्वी एक मटके के समान है। मटके का जो निचला भाग होता है — उसकी पेंदी — वही उसका आधार, उसका भार और उसकी स्थिरता होती है। यदि यही पेंदी कमजोर हो जाए, कट जाए या उसमें छेद हो जाए, तो पूरा मटका अस्थिर हो जाता है। वास्तु में यही स्थान S/W दक्षिण-पश्चिम अर्थात नैऋत्य दिशा का है। यह दिशा पृथ्वी तत्व की दिशा मानी गई है। स्थायित्व, सुरक्षा, नियंत्रण, परिपक्वता, धन की स्थिरता, परिवार और रिश्तों की मजबूती — ये सभी बातें नैऋत्य दिशा से संचालित होती हैं। इसलिए वास्तु में नैऋत्य दिशा अर्थात दक्षिण-पश्चिम, S/W को भारी, ऊँचा और स्थिर रखने का विधान बनाया गया है। यह केवल परंपरा नहीं, बल्कि ऊर्जा के संरक्षण का गहरा विज्ञान है।

अब मटके के ऊपरी खुले भाग को देखिए। वहीं से वर्षा का जल उसमें प्रवेश करता है। आकाश से आने वाली प्रत्येक बूंद उसी मुख से भीतर समाती है। वास्तु में यही स्थान उत्तर-पूर्व अर्थात ईशान कोण का है। यह दिशा जल तत्व, दिव्यता, प्रेरणा, ज्ञान और ब्रह्मांडीय ऊर्जा का प्रवेश द्वार मानी गई है। सूर्योदय की पहली किरण, चुंबकीय प्रवाह, सकारात्मक कंपन और सूक्ष्म ऊर्जाएँ उत्तर और पूर्व दिशा से ही पृथ्वी पर अधिक प्रभावी रूप में प्रवेश करती हैं। यही कारण है कि वास्तु में उत्तर और पूर्व दिशाओं को खुला, स्वच्छ, हल्का और पवित्र रखने की सलाह दी जाती है। वैसे तो सभी दिशाएं शुभ होती हैं पर हमारे पूर्वज पूर्व मुखी मकान और उत्तर मुखी मकान को अत्यधिक शुभ मानते थे और हम भी यही मानते हैं, अगर आप पोस्ट मे दिए चित्र के हिसाब से समझें तो पूर्व मे या उत्तर मे दरवाजा बनाया जाए तो मटका कम छतिग्रस्त होगा, अर्थात शुभता धारण करने की छमता मटके मे अधिक होगी।

यदि मटके का मुख सही दिशा में खुला हो, तो उसमें अमृत समान जल भरता रहता है। लेकिन यदि उसी मटके में नीचे की ओर छेद कर दिया जाए, तो चाहे ऊपर से कितना भी जल आए, वह टिक नहीं पाएगा। यही सिद्धांत वास्तु में दक्षिण और पश्चिम दिशाओं पर लागू होता है। यदि दक्षिण-पश्चिम में गड्ढा बना दिया जाए, अत्यधिक खुलापन रखा जाए, पानी रखा जाए या मुख्य द्वार बना दिया जाए, तो घर की ऊर्जा स्थिर नहीं रह पाती। धन आता है लेकिन टिकता नहीं, अवसर मिलते हैं लेकिन स्थायित्व नहीं आता, संबंध बनते हैं लेकिन उनमें मजबूती नहीं रहती। क्योंकि जिस दिशा का कार्य ऊर्जा को संभालना था, वहीं से ऊर्जा का रिसाव प्रारंभ हो जाता है।

वास्तु का वास्तविक रहस्य यही है कि उत्तर और पूर्व दिशाएँ ऊर्जा को ग्रहण करती हैं, जबकि दक्षिण और पश्चिम दिशाएँ उस ऊर्जा को स्थिर और सुरक्षित रखती हैं। और इन दोनों के संतुलन का केंद्र है नैऋत्य — दक्षिण-पश्चिम। यही कारण है कि वास्तुशास्त्र में दक्षिण-पश्चिम को घर का “ऊर्जा-आधार” कहा गया है। जैसे पृथ्वी अपनी धुरी पर संतुलित होकर पूरे सौरमंडल में स्थिरता बनाए रखती है, वैसे ही घर का नैऋत्य कोण पूरे भवन की ऊर्जा को स्थिर बनाए रखता है।

आज आधुनिक विज्ञान भी यह स्वीकार कर चुका है कि पृथ्वी पर चुंबकीय तरंगें, गुरुत्वीय प्रभाव और कॉस्मिक रेडिएशन निरंतर कार्य कर रहे हैं। हजारों वर्षों पहले हमारे ऋषियों ने इन्हीं शक्तियों को अनुभव करके वास्तुशास्त्र की रचना की थी। इसलिए वास्तु अंधविश्वास नहीं, बल्कि प्रकृति और ब्रह्मांड के नियमों के साथ सामंजस्य स्थापित करने का विज्ञान है।

जब घर का उत्तर-पूर्व खुला होता है और दक्षिण-पश्चिम मजबूत होता है, तब वह भवन केवल रहने की जगह नहीं रह जाता, बल्कि वह ऊर्जा, समृद्धि, शांति और स्थिरता का जीवंत केंद्र बन जाता है। यही वास्तु का सार है…
ऊर्जा को सही दिशा से ग्रहण करना और सही स्थान पर स्थिर करना।

आप इस पोस्ट को पढ़िए और देखिए अपने घर में और अपने जीवन में इनका प्रभाव अगर कहीं प्रॉब्लम है तो उसको ठीक कीजिए।

राजवीर सैनी
एस्ट्रोलॉजर एंड वास्तु एक्सपर्ट




अपने घर की सुरक्षा के लिए करें उपाय सीधे और सरल।
08/05/2026

अपने घर की सुरक्षा के लिए करें उपाय सीधे और सरल।

गृह निर्माण में मुहूर्त का बहुत बड़ा रोल होता है अगर आप महीने के अनुसार अपना मुहूर्त करें तो महीने की रिजल्ट भी आपको उसम...
05/05/2026

गृह निर्माण में मुहूर्त का बहुत बड़ा रोल होता है अगर आप महीने के अनुसार अपना मुहूर्त करें तो महीने की रिजल्ट भी आपको उसमें मिलते हैं अगर आपको मुहूर्त में किसी भी तरीके की परेशानी है तब संपर्क कर सकते हैं जय आप करें निर्माण कर रहे हो या किसी ऑफिस या कमर्शियल जगह पर निर्माण कर रहे हो शुभ मुहूर्त आपके जीवन में उसे काम को आसान कर देता है सरल कर देता है आने वाले समय में उसके रिजल्ट आपको अच्छे मिलते हैं बहुत सारे फायदे मिलते हैं तो अच्छे मुहूर्त का उपयोग करना बहुत जरूरी है।

वैसे तो बहुत सारे लोग मुहूर्त निकालते हैं पंडित लोग लेकिन फिर भी मैं कहूंगा की बहुत अच्छा मुहूर्त है ना बहुत कम रियल एंड रियल लगी निकाल पाते हैं। इसलिए आप इसमें सावधानी बरतें और बहुत अच्छे विद्वान किसी एक्सपर्ट से ही अपने मकान का मुहूर्त निकलवाए।
हमसे मुहूर्त निकलवाने के लिए संपर्क करें।

राजवीर सैनी
एस्ट्रोलॉजर एंड वास्तु एक्सपर्ट
9887394349

20/03/2026

Social सर्कल कैसे डेवलप करें।

06/02/2026

Hotel and restaurant vastu
Vastu for hotel business

#रत्न #अनुष्ठान

18/01/2026

वास्तु से करे सभी समस्याओं का समाधान। इच्छा होनी चाहिए काम सभी होते हैं। बीमार इंसान डॉक्टर के पास जाने से ठीक होता है उसी तरीके से घर की बीमारियां भी वास्तु शास्त्री के पास जाने से ठीक होगी। यह एक पूरी तरीके से साइंस है यह ऊर्जाओं का विज्ञान है ऊर्जाओं के विज्ञान से पॉजिटिव नेगेटिव ऊर्जाओं को पहचाना जा सकता है जितनी ज्यादा पॉजिटिव एनर्जी होंगे आपके जीवन में उतनी ज्यादा सफलता होगी आपकी जीवन में

#अनुष्ठान #रत्न

16/01/2026

Rajasthani music and fog dg dance

#अनुष्ठान #रत्न

फैक्टरी किसी भी   कर रहा हो मगर अग्नि तत्व हर हाल में महत्वपूर्ण होता है। 👉 प्लॉट साइज से ही डिफॉल्ट आग्नेय एरिया पूरा  ...
15/01/2026

फैक्टरी किसी भी कर रहा हो मगर अग्नि तत्व हर हाल में महत्वपूर्ण होता है। 👉 प्लॉट साइज से ही डिफॉल्ट आग्नेय एरिया पूरा हो तो केवल केवल #रत्न **ra ही कुछ कर सकता है। बाकी #अनुष्ठान से कुछ समय के लिए फायदा मिल सकता है।


🩺 Do You Know? Where You Keep Medicines at Home Matters More Than You Think 🩺Many families wonder why illnesses repeat a...
05/01/2026

🩺 Do You Know? Where You Keep Medicines at Home Matters More Than You Think 🩺

Many families wonder why illnesses repeat again and again, even after proper treatment.

Medicines are important — but their placement inside the house also influences healing, as per Vastu Shastra.

🌿 Best Direction to Keep First Aid Box & Medicines

✔️ North-East (Ishanya zone)
This zone carries pure, life-supporting energy. Medicines kept here support faster recovery and better response to treatment.
✔️ Second Best: East Direction
Helpful for daily-use medicines and mental balance.

❌ Avoid These Common Mistakes
🚫 Keeping medicines in the South-West (can delay recovery)
🚫 Storing near bathrooms or sinks (moisture damages both medicine and energy)
🚫 Mixing medicines with cosmetics or chemicals
🚫 Keeping expired medicines “just in case”

✨ Simple Correction = Big Relief
Just shifting the medicine box to the right direction and keeping it clean, organized, and light can reduce health disturbances at home.
Health problems don’t always need complicated remedies —
sometimes, directional correction is enough.

💬 Where do you currently keep medicines at your home?
Comment NE / E / Other below 👇












वास्तु के परिणाम और प्रमाण।दो भाइयों ने मिलकर दो फ्लैट एक साथ लिए, परिवार में प्रेम है तो एक साथ लेकर बीच की दीवार को हट...
23/12/2025

वास्तु के परिणाम और प्रमाण।

दो भाइयों ने मिलकर दो फ्लैट एक साथ लिए, परिवार में प्रेम है तो एक साथ लेकर बीच की दीवार को हटाकर एक फ्लैट कर दिया गया। नतीजा पूरे परिसर का वास्तु बदल गया, अच्छा खासा बिजनेस नुकसान देने लगा, वास्तु के दोषों ने अपना काम करना प्रारंभ कर दिया था। हुआ ये कि दोनों फ्लैट एक करते ही ब्रह्म बिंदु बदला, जिस पर बीच में एक डक्ट आ गया। ब्रह्म स्थान पर चार बाथरूम आ गए बस फिर क्या दिमाग का दही, कर्ज़ा, बीमारी, हॉस्पिटल का खर्च सब एक साथ। कानूनी विवाद अलग से।

20 दिन पहले इस फ्लैट में। जाकर जियो सर्जरी के माध्यम से दोनों फ्लैट को अलग किया गया। दो अलग सेंटर बनाए गए वहां इस प्रकार की ग्रिड बनाई गई ताकि कॉस्मिक और अर्थ एनर्जीज़ का प्रवाह एक विशेष प्रकार से हो।

वास्तु हर स्थान को एक मानव शरीर के रूप में जानकर, बहुत ही सटीकता और सूक्ष्म ऊर्जाओं के प्रवाह का ज्ञान है जिसे एक समय के बाद, साधना के बाद ही अनुभव किया जा सकता है।

वास्तु को ज्योतिष एक दिशा देता है, अंक शास्त्र एक सहारा, साधना शक्ति देती है और विधि विधान उसे प्रशस्त करवाता है इसलिए एक वास्तु कंसल्टेंट और वास्तु विद में फर्क होता है।

वास्तु मैप 098873 94349

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