05/08/2026
उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों से रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के कारण बड़े पैमाने पर पलायन हो रहा है, जिसके परिणामस्वरूप कई गाँव खाली होकर 'भूतिया गाँव' (घोस्ट विलेज) बन चुके हैं। मुख्य कारणों में आजीविका के सीमित साधन, कृषि का पिछड़ना और बुनियादी सुविधाओं का अभाव शामिल हैं।पलायन के मुख्य कारणरोजगार की कमी: पर्वतीय इलाकों में उद्योगों और नियमित आय के अवसरों का अभाव।शिक्षा और स्वास्थ्य: गांवों में अच्छे स्कूलों और अस्पतालों की भारी कमी, जिससे लोग शहरों का रुख कर रहे हैं।कृषि की समस्याएं: जंगली जानवरों का आतंक, पानी की कमी और सीढ़ीदार खेतों पर कम होती पैदावार।राज्य पर प्रभावखाली होते गाँव: हजारों गाँव वीरान हो चुके हैं, और केवल बुजुर्ग या महिलाएं ही वहां रह रहे हैं।सीमा सुरक्षा पर असर: चीन और नेपाल की सीमा से लगे जिलों (जैसे पिथौरागढ़, चमोली, उत्तरकाशी) से पलायन सामरिक दृष्टि से चिंता का विषय है।सांस्कृतिक क्षति: पारंपरिक संस्कृति, मेले और स्थानीय त्योहारों का रंग फीका पड़ना।सरकार के प्रयासपलायन आयोग: सरकार ने स्थिति का अध्ययन करने के लिए ग्रामीण विकास एवं पलायन आयोग का गठन किया है।मुख्यमंत्री पलायन रोकथाम योजना: प्रभावित गांवों में युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं।रिवर्स पलायन: कोरोना और अन्य समय में कुछ युवाओं द्वारा गांवों की ओर लौटकर कृषि व पर्यटन से जुड़ने के प्रयास शुरू हुए हैं।