27/08/2025
उत्तराखंड हाई कोर्ट ने मदरसों को बिना नोटिस बंद करने के मामले में मंगलवार को पुष्कर सिंह धामी सरकार को नोटिस जारी किया.
हाई कोर्ट ने उत्तराखंड की बीजेपी सरकार को छह हफ़्तों के भीतर जवाब दाखि़ल करने के निर्देश दिए हैं.
यह निर्देश जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी की उस याचिका पर आया है, जिसमें मदरसों को बिना नोटिस दिए बंद किए जाने की कार्रवाई को चुनौती दी गई थी.
जमीयत की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगड़े अदालत में ऑनलाइन जुड़े थे.
उन्होंने दलील दी कि उत्तराखंड मदरसा एजुकेशन बोर्ड एक्ट 2016 के तहत मदरसों का पंजीकरण अनिवार्य नहीं है और गैर-रजिस्टर्ड मदरसों को गैर-क़ानूनी नहीं ठहराया गया है.
उन्होंने कहा कि धार्मिक अल्पसंख्यकों को संविधान से अपने शैक्षणिक संस्थान चलाने का अधिकार प्राप्त है.
राज्य सरकार की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि जमीयत सीधे प्रभावित पक्ष नहीं है. लेकिन अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार को जवाब देने का निर्देश दिया.
जमीयत के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने इस कार्रवाई को मुसलमानों के संवैधानिक अधिकारों पर हमला बताया.
उन्होंने कहा कि, “मदरसों को गैर-क़ानूनी ठहराकर बंद करना जीवन रेखा को समाप्त करने की साज़िश है और जमीयत इस लड़ाई को क़ानूनी और लोकतांत्रिक मोर्चे पर जारी रखेगी.”
यह मामला अब छह हफ़्ते बाद फिर सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है.