इकश

इकश कविता

15/05/2025

कुछ ही लोग/प्रभात
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जब उन्हें लगता है कि आपको उनकी ज़रूरत है
वे खदान से निकल कर आते है
खेत छोड़ कर आते है
भैंस का दूध किसी और को
दुह लेने के लिए कहकर आते है
दुकान बंद करके आते है
दफ़्तर से छुट्टी लेकर आते है

सबके ही जीवन में बहुत नहीं
कुछ ही लोग होते है
जो आते है
वक्त ज़रूरत...

15/05/2025

तुम्हारी दृष्टि में मैं विद्रोही हूँ, क्योंकि मेरे सवाल तुम्हारी मान्यताओं का उल्लंघन करते हैं🌼

- कुँवर नारायण🍁

19/09/2024

ये क्या जगह है दोस्तो ये कौन सा दयार है
हद-ए-निगाह तक जहाँ ग़ुबार ही ग़ुबार है

हर एक जिस्म रूह के अज़ाब से निढाल है
हर एक आँख शबनमी हर एक दिल फ़िगार है

हमें तो अपने दिल की धड़कनों पे भी यक़ीं नहीं
ख़ोशा वो लोग जिन को दूसरों पे ए'तिबार है

न जिस का नाम है कोई न जिस की शक्ल है कोई
इक ऐसी शय का क्यूँ हमें अज़ल से इंतिज़ार है

शहरयार

08/07/2024

मिरे ठहराव को कुछ और भी वुसअत दी जाए
अब मुझे ख़ुद से निकलने की इजाज़त दी जाए

:- सालिम सलीम

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