जीना है तो बचना सीखो

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जीना है तो बचना सीखो जीना है तो बचना बहुत जरूरी है
बचने हित ?

21/06/2026

सच्चा मित्र
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क्यों क्यों क्यों करता है ऐसा, जो आंसू छलका जाए।
अकस्मात् डी एम बन करके, अपना दोस्त वो आ जाए।
भाई ! नीचे की जमीन तो खिसकेगी ही,बोलो ना।
अंदर, कितने भेद छुपे हैं, उन सारों को खोलो ना।
परजाई, स्तब्ध हो गयी, न जाने, क्या हुआ अरे!
डी एम आ कर खड़ा सामने, करे तो क्या वह और करे।
बोली, सर जी क्या गलती हो गयी, बताएं, बोलूँगी।
ठेला मत हटवाना सर जी, सर पर बोझा ढो लुंगी।
डी एम बोले हर्ष कहाँ है, उसे भेज देना निज लीक।
उससे बात हमें करनी है, मिल कर कर दूंगा सब ठीक।
अंतराल में हर्ष आ गया, बीबी बोली, क्या अपराध।
डी एम साहब कुटेंगे अब, जैसे कूटा करता व्याध।
शीघ्र बुलाए हैं साहब ने, जाओ मिल कर बात करो।
उनसे जा कर सब कुछ बोलो, अपना सब इंसाफ करो।
शायद तुझसे हुई है गलती, क्यों साहब खुद आये बोल।
अपने भीतर जो की गलती उसकी, धर कर जरा टटोल।
हुआ अचंभित हर्ष आ गया डी एम साहब् की कोठी।
सोच रहा था चलते चलते अब तो गयी बड़ी मोटी।
ऑफिस आ कर हुआ अचंभित डी एम उसका गौरव था।
बचपन का वह मित्र जो ठहरा, दस बर्ष का जब वह, था।
लगा गले से बड़े भाव से दुख को बाँट लिया था वो।
मित्र भाव से भाव निभाया दिया आज माँगा जो जो।
अंतिम बात सिहरने की थी जब डी एम साहब बोले।
अब, तक सुधि नहीं ली मेरी, भेद भाभी से न खोले।
घोंचू है, तू रहेगा घोंचू, जा, भाभी से कह, आया।
तूने बचपन जीत लिया है, सच्चा मित्र आज पाया।

टी के
8789193985

01/12/2025

समझो तो जानें

उबासी__"लिखने का मकसद कुछ और था किंतु  कुछ और ही लिखा गया, उबासी तो आयेगा ही न सर"।  देखते हैं_______न जाने क्यों है अगा...
01/12/2025

उबासी
__
"लिखने का मकसद कुछ और था किंतु कुछ और ही लिखा गया, उबासी तो आयेगा ही न सर"।
देखते हैं
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न जाने क्यों है अगाध, यह प्रेम सबों से,

या सब ने मुझमें अगाध ये स्नेह भरी है।

जो भी हो, इन्हें बुरा या भला कहें, क्यों ?

ईश्वर के घर से निकला, यह तत्व सही है।

भारत को जाने दो, भ्रमण करो दुनियाँ में,
यह सम्मान अन्यत्र दिखेगा, कहीं नहीं है।
और से ढूंढोगे अगर यहीं, कुनबे में,

तुझे दिखेगा , वही प्रेम, जो यहीं, कहीं है

अच्छा छोड़ो ,जाने दो, इस प्रेम - फ्रेम को,
कुछ ऐसा होता पदार्थ, जो भारत में है।
अलबत्ता, ढूंढोगे तो मिल ही जायेगा,

यही प्रेम का जड़ जन जन में जम करके है।

कहाँ फंसे, हम प्रेम - वेम की उस चक्कर में,
अरे, प्रेम कुछ भी तो नहीं, बस केवल भ्रम है।

जो जितना करता है प्रेम, दिखता है सबको,
अरे, यही है तत्व, यहाँ दिखता कम - कम है।

टी के

*नेताजी सुभाचाचन्द्र बोस जी के भाव_____नेता जी अखण्ड भारत के सर्वश्रेष्ठ भाव युक्त समर्पित और साधक स्वरूप, सबों के हृदय ...
23/01/2025

*नेताजी सुभाचाचन्द्र बोस जी के भाव
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नेता जी अखण्ड भारत के सर्वश्रेष्ठ भाव युक्त समर्पित और साधक स्वरूप, सबों के हृदय में रहने और सबों को समझने वाले युग पुरुष थे। उनकी धारणा, उनका भाव, समर्पण को संक्षेप में हम, समझने का प्रयास करते हैं।

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सुभाष चंद्र बोस जी के भाव
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बापू का सपना, साकार करेगे,
दुश्मन को अपने से दमन करेंगे।
नेता जी को याद करेंगे, हवन करेंगे हवन करेंगे हवन करेंगे।

पूज्य बापू धारक थे, आखंडता के,
चल पड़े सुभाष आगे, उन्हें बता के।

जापान में आजाद सेना का ग्राफ बनाया,
भारत को पूर्ण स्वराज का राह दिखाया।
पर विधि ने अलग कुंड रख छोड़ा,
शायद नेताजी को पता चल गया थोड़ा।

"अब उन्हें और ऊँचा पद धरना होगा,
भारत की आजादी हित मरना होगा।"
देना होगा बलिदान देश को निज का,
उत्तर देना होगा अपने खीज का।, "

शायद इसलिए उन्होंने दे दी कुर्वानी,
आजादी हित गढ़ ली नई कहानी।
छोड़ गए रोते, बिलखाते जन को,
पर दिया तसल्ली, अपने भाव, मनन को।

बोलो, नेताजी की जय, भारत के सारे,
जिंहोंनें खोल दी नूतन भाग्य हमारे।
यह प्रतिफल पाया उनके जीवन से,
अर्पण कर दिया सबों में, यहाँ लगन से।

उसी लग्नता को यह फूल समर्पित,
पूरी जीवन अपने सुभाष को अर्पित।
जय जय भारत, जय जय हम भारत बासी,
जिनके वर से बनते जो भी प्रत्यासी।

सबमें शक्ति का पुनः सृजन है करना,
यह फिजूल कर रहा नेता रख कर धरना।
सच्चा होता, हम, सारे सच्चे ,होते,
चाहे "कुर्बानी" देने हित हो मरना।

आसान नहीं है कहना, पूरा करना,
खून बहा कर दुश्मन से हो लड़ना।
पर सच्चा अर्पण और भला क्या होगा,
भारत को सुसज्जित करना और संवरना ।

त्रिपुरारी कुमार पांडेय ( स्टाफ , )
वर्तमान पता
११२ ए, पॉकेट ए
डी डी ए सुखदेव विहार दिल्ली
मो ८७८९१९३९८५*

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