Commercial Real Estate India

Commercial Real Estate India Contact information, map and directions, contact form, opening hours, services, ratings, photos, videos and announcements from Commercial Real Estate India, Estate agent, Delhi.

क्या आप 14000 करोड़ के बिज़नेस का हिस्सा बनना चाहेंगे? Will Brokers Survive opposite to Online Platforms ??पहले एक सवाल, ...
13/06/2023

क्या आप 14000 करोड़ के बिज़नेस का हिस्सा बनना चाहेंगे?

Will Brokers Survive opposite to Online Platforms ??
पहले एक सवाल, ये ब्रोकिंग बिज़नेस का साइज क्या होगा? कुल इंडियन हाउसहोल्ड एसेट्स होंगी तक़रीबन 11 ट्रिलियन डॉलर, जिसकी आधी बोले तो सिर्फ़ 5+ ट्रिलियन डॉलर रियल एस्टेट में है। आप इसे कमेंट में भारतीय रुपये में कन्वर्ट करके बताना। अब सोचिये अगर गोल्ड+ बैंक FD+ PPF+ इन्शुरन्स+ शेयर्स+ म्यूच्यूअल फण्ड+ कैश इत्यादि सब मिलकर रियल एस्टेट के बराबर होते है(Check Last Post)। ऐसे में अगर कोई रियल एस्टेट के ख़रीदने बेचने से जुड़ा हो तो क्या संभावना है उसकी किसी बीमा एजेंट, या म्यूच्यूअल फण्ड एडवाइज़र, या शेयर सब-ब्रोकर्स जैसे बिज़नेस के आगे। रियल एस्टेट ब्रोकरेज का मार्केट डिवाइडेड है, ऑर्गनाइज्ड नही है, इसमें फ़ोन कम्पनियों, बैंकिंग, बीमा कम्पनीज़ या टैक्सी कंपनियों (OLA-UBER) जैसा कंसोलिडेशन नहीं है, तो इसके आधिकारिक आँकड़े उपलब्ध नही है। अगर टॉप 10 सिटीज़ का एक अनुमान लगाये तो क़रीब 2 लाख ब्रोकर्स है, जिनकी कमायी क़रीब 14000 करोड़ सालाना है। नये प्रोजेक्ट, रीसेल, रेंटल्स, कमर्शियल, PG, प्लॉट्स, एग्रीकल्चर लैंड इत्यादि अलग अलग सेग्मेंट में अलग अलग ब्रोकर्स ऑपरेट करते है। ब्रोकर्स बनने के लिये पहले कोई लाइसेंस या क्वालिफिकेशन नही थी। कहीं भी बोर्ड लगाकर चार कुर्सियाँ डालिये व काम स्टार्ट। मगर अब RERA आने के बाद से इस फील्ड में अमूल चूल परिवर्तन हो रहे है। जीरो ब्रोकिंग फ़ीस के नाम से मार्केटिंग नौटंकी करने वाली कम्पनियाँ हज़ार करोड़ के क्लब में पहुँच गई है। मैजिक ब्रिक्स, 99 एकड़, हाउसिंग.कॉम इत्यादि कम्पनियाँ टेक्नोलॉजी फ्रंट पर मार्केट शेयर हथिया कर सैंकड़ों करोड़ का टर्न ओवर कर रही है क्या ऐसे में व्यक्तिगत ब्रोकर्स ज़िंदा रहेंगे या OLA-UBER की तरह बीच के माध्यम को हटाकर ये हज़ारों करोड़ का धंधा चंद हाथों में सिमट जायेगा?

इस सवाल का जवाब ढूँढने से पहले आइये जानते है ब्रोकर मुख्यतः करता क्या है?

1. प्रॉपर्टी ढूँढना : ग्राहक की ज़रूरत अनुसार सही प्रॉपर्टियाँ चुनना एक मुख्य काम है। ब्रोकर के अपने डेटाबेस में अगर वो प्रॉपर्टी नहीं है तो ब्रोकर्स अपने जैसे ब्रोकर्स के नेटवर्क से उपयुक्त प्रॉपर्टी निकालता है।

2. सलाहकार : प्रॉपर्टी ख़रीदना एक बड़ा फाइनेंसियल डिसिशन है जो ग़लत होने पर ग्राहक के जीवन पर गहरा प्रभाव डालता है। भविष्य में दाम बढ़ने की सम्भावनाएँ, संभावित रेंटल रिटर्न्स, प्रॉपर्टी/लोकेशन से जुड़ी नेगेटिव जानकारियाँ मार्केट कॉस्ट कुछ ऐसे क्षेत्र है जहां सिर्फ़ “एक्सपर्ट” सलाह मूल्यवान होती है। दो आपस में मिली हुई प्रॉपर्टीज़ में रेंटल रिटर्न्स का दुगना अंतर हो सकता है। CP के इनर सर्किल उससे जुड़े मिडल सर्किल के प्रॉपर्टी दाम दो-तिहाई है, जबकि मिडल सर्किल से जुड़े आउटर सर्किल के दाम मिडल सर्किल से ज़्यादा है सब एक ही रिटेल मार्केट के हिस्से है, एक लगातार बिल्डिंग जैसा मार्केट है। यहाँ तक की इनर सर्किल में भी अलग अलग ब्लॉक का प्रॉपर्टी के दाम/रेंटल्स अलग है। कारण है अलग अलग सर्किल/ब्लॉक में अलग अलग ग्राहकों की संख्या। ये माइक्रो मार्केट के अंदर माइक्रो-माइक्रो लोकेशंस का एक्सपर्ट ज्ञान उस लोकेशन के ब्रोकर्स को होता है मगर किसी अलाने-फलाने डॉट कॉम के प्रॉपर्टी एक्सपर्ट इस अल्ट्रा माइक्रो लोकेशन (Hyper Locational) बेस्ड नॉलेज में ग्राहक को सही एक्सपर्ट एडवाइज़ देने में सक्षम नही हो सकते। ग्राहक अपनी रिसर्च के बावजूद ब्रोकर्स की राय पर निर्भर करता है।

3. बार्गेनिंग : बेचने वाला जिस प्रॉपर्टी को मार्केट रेट से ऊपर बेचना चाहता है, उसी प्रॉपर्टी को ख़रीदार मार्केट से नीचे दाम पर ख़रीदना चाहता है। ऐसी स्थितियों में ब्रोकर्स की अनुपस्थिति में दोनों एक्चुअल वैल्यू के बजाये perceived प्राइस की बार्गेन करते है। बहुत बार दोनों का अहम टकराता है, ट्रांजेक्शन नही होती। इसके अलावा मार्केट वैल्यू के अलावा बहुत बार अन्य डेटेल्स जैसे पेमेंट टर्म्स, क़ानूनी पक्ष, प्रॉपर्टी की क्वालिटी, मेंटेनेंस इत्यादि फ़ैक्ट्स होते है जो किसी ट्रांजेक्शन को बनाने-बिगाड़ने के लिये उत्तरदायी है। ब्रोकर्स इन सब के बीच मैच मेकिंग करा पाता है तो ट्रांजेक्शन होती है।

4. Logistics support - साईट विजिट, बिल्डर से पेपर वर्क, सरकार से रजिस्ट्रेशन, मेंटेनेंस, इंटीरियर इत्यादि से लेकर बैंक लोन तक बहुत सारे लोजिस्टिक्स इश्यू हैंडल करना एक अच्छे ब्रोकर की एक्सपर्टीज़ होती है। एक सर्वे के अनुसार घर ख़रीदने वाले 85% ग्राहक उसके रजिस्ट्रार ke दफ़्तर तक को नहीं जानते। इन सब के बिना ख़रीदार असुरक्षित महसूस करता है व कई बार ट्रांज़ेक्शंस नही हो पाती।

आइये अब देखते है कौन कौन सा काम टेक्नोलॉजी कर सकती है व कौनसा नहीं जिससे तय होगा की ब्रोकर्स मार्केट में रहेंगे या सब ऑनलाइन हो जायेगा!!

मेरे अनुसार प्रॉपर्टी ढूँढने का काम कोई भी ऑनलाइन कर सकता है। हालाँकि भारत में प्रॉपर्टी ख़रीदने वाले 60% निर्णायक लोग पचास-साठ साल की उम्र से ऊपर वाले होते है तो उनके लिये ऑनलाइन सर्चिंग-प्रोफ़ाइलिंग एक चैलेंज रहता है, मगर परिवार-मित्रों की सहायता से इसका समाधान किया जा सकता है। लोजिस्टिक्स भी काफ़ी हद तक ऑनलाइन थर्ड पार्टी vendors डिप्लॉय करके कराया जा सकता है। पर ध्यान से देखा जाये तो उल्टे ये दोनों काम ऑनलाइन होने का फ़ायदा ब्रोकर्स ग्राहकों से ज़्यादा इफ़ेक्टिवली कर सकता है, जिस कारण उसके काम का बौझ कम होगा व वो अन्य काम बेहतर कर सकेंगे।

जहां तक सलाह व बार्गेन करके मैच मेकिंग का काम है वो अधिकतर ब्रोकर्स के ही डोमेन में रहने वाला है। ऑनलाइन प्लेटफार्म ब्रोकर्स को इस क्षेत्र में चैलेंज नहीं कर सकेंगे। पर ब्रोकर्स को आधुनिक टेक्नोलॉजी का यूज़ सीख कर अपनी कॉम्पिटेंस बढ़ानी होगी। चूँकि ब्रोकर्स हायपर लोकल नॉलेज का सुपर एक्सपर्ट होता है तो ग्राहक का हित भी ब्रोकर्स के साथ डील करने में है। उधर, तकनीक कितनी भी उपयोगी हो जाये मगर सेकेंडरी मार्केट में फेस टु फेस बैठकर बार्गेन करने का अल्टरनेट अभी संभावित नही दिखता। हाँ RERA की नयी नॉर्म्स के अनुसार ब्रोकिंग बिज़नेस कंसोलिडेट होगा। मौक़ा मिलने पर एक-आध डील करने वाले पार्ट टाइमर लोग लाइसेंस लेने व बार बार लाइसेंस फ़ीस (जो कई जगह लाखों में है) जमा करने के बजाये अच्छे स्थापित ब्रोकिंग हाउस को जॉइन करते दिखायी देंगे।

जो ब्रोकर्स नयी तकनीक यूज़ करेंगे, नॉलेज अपडेट रखेंगे, विश्वास बनायेंगे व उस विश्वास को क़ायम रखेंगे, नेटवर्किंग सही करेंगे वो आने वाले समय में पहले से बेहतर बिज़नेस ना कर सके ऐसा कोई कारण नहीं है।

अगर आप इस काम को ना सिर्फ़ सीखना बल्कि एक कामयाब नेटवर्क का हिस्सा बनना चाहते है तो इस पेज को लाइक कर लीजिये व आगे आने वाली पोस्ट चेक करते रहे।

अकेला रियल एस्टेट = शेयर्स + कैश + बीमा + प्रोविडेंट फण्ड + पेंशन फण्ड + बैंक FD + सोना etc की सारी इन्वेस्टमेंट के बराब...
10/05/2023

अकेला रियल एस्टेट = शेयर्स + कैश + बीमा + प्रोविडेंट फण्ड + पेंशन फण्ड + बैंक FD + सोना etc की सारी इन्वेस्टमेंट के बराबर है।

लास्ट दो साल के तजुर्बों ने कुछ नया ही सिखाया। हम भारतीयों ने कुल इन्वेस्टमेंट में से रियल एस्टेट में चार सौ लाख करोड़ की इन्वेस्टमेंट की है। ज़रा लिख कर देखिये चार सौ लाख करोड़, कुल कितनी जीरो आती है 4 के बाद !! बाक़ी सारी इन्वेस्टमेंट मिलकर एक तरफ़ व रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट एक तरफ़।

कोरोनाकाल में लोगो ने रियल एस्टेट को अगले 5-10 साल के लिये ख़त्म घोषित कर दिया था। घरों की क़ीमत 18-30% तक घटने के बावजूद कोई घर नही ख़रीद रहा था। होम लोन इतिहास के सबसे कम रेट पर थे पर लोग होम लोन लेने से डर रहे थे। हम भी इसके दोबारा सही चालू होने में 3-4 साल लगने का समय मान रहे थे। पर जो हुआ वो तजुर्बा चौंकाने वाला रहा।

—-> इण्डियन रियल एस्टेट मार्केट सालाना 9%+ चक्रवर्धी दर से बढ़ रहा है। 2028 तक ये दर 10% पार करने की उम्मीद है।

—-> ये फ़िलहाल कृषि के बाद जीडीपी में सबसे बड़ा सेक्टर है व कृषि की ही तरह अन्य सब उद्योगो से ज़्यादा रोज़गार देता है।

—-> मुंबई मार्केट में लास्ट ईयर अब तक की सबसे ज़्यादा सेल हुई। महाराष्ट्र सरकार जो 490 करोड़ प्रति-महीने से कम स्टाम्प ड्यूटी राजस्व कमाती थी उसने पिछले साल(2022) में 700+ करोड़ प्रति-महीने का राजस्व कमाया।

—-> 2022 के सेकंड क्वार्टर तक सेल्स कोविड से पहले के लेवल को पार कर चुकी थी।

—-> पिछले साल रेपो रेट ढाई सौ bps ऊपर गये। होम लोन से लेकर कंस्ट्रक्शन लोन तक सब 15% तक बढ़े। मगर रियल एस्टेट के क्रेडिट ऑफ़्टेक (लोन लेने) में तगड़ा मोमेंटम दर्ज किया गया।

—-> लोगो ने जो घर 18-30% गिरे दाम पर नहीं ख़रीदे थे अब उसी दाम से 20-33% ऊपर दाम में ख़रीद रहे है।

इससे RE में क्या सीखा, RE का क्या भविष्य है etc टेक्निकल बातें तो कभी बाद में करेंगे पर मेरी कुछ जनरल सीख बदली है
===============================

—-> जैसे लोग कहते है “मार्केट में मंदी है” वो मंदी दिमाग़ में होती है, मार्केट में नहीं।

—-> जैसे लोग कहते है “मार्केट में पैसा नहीं है” तो पैसा मार्केट में नहीं लोगो की जेब में होता है।

—-> जैसे लोग कहते है “मार्केट ख़राब है” तो जनाब मार्केट नही बल्कि आपकी मार्केटिंग ख़राब है।

इसी मार्केट में DLF ने गुड़गाँव में 7-7 करोड़ के 11 सौ से ज़्यादा होम यूनिट निकाले। प्रोजेक्ट बड़ा व महंगा था तो उम्मीद थी बिकने में समय लगेगा। मगर उनके पास तीन हज़ार से ज़्यादा एप्लीकेशन आयी। लोगो को एडवांस पैसे देकर भी घर नहीं मिले। मध्य दिल्ली में गोदरेज 14 करोड़ से 25 करोड़ के फ्लैट बेच रहा है वो भी सलेक्टेड प्रिविलेज्ड लोगो को बाय इनविटेशन। गुरुग्राम की स्मार्ट वर्ल्ड कंपनी ने लास्ट साल में रिकॉर्ड तोड़ सेल की है, फिर भी वो इसे इसबार दुगना करने का दावा कर रहे है।

=============================

The lesson I learned is 👇👇👇
—-> Nothing is expensive, it’s all about affordability.
—-> Affordability isn’t only about money, it’s readiness of mind to acquire something.
—-> The best investment on earth is earth.

रियल एस्टेट ट्रेंड रिव्यू:- 5 वर्षों की सबसे ज़्यादा बिक्री के 37% बढ़ने के मायने !!मार्च 2020 व मई 2021 की महामारी के स...
13/04/2023

रियल एस्टेट ट्रेंड रिव्यू:- 5 वर्षों की सबसे ज़्यादा बिक्री के 37% बढ़ने के मायने !!

मार्च 2020 व मई 2021 की महामारी के समय लगे लॉकडॉउन ने रियल एस्टेट सेक्टर को बहुत बुरी तरह प्रभावित किया। लाखों को संख्या में पैदल अपने घरों को लौटते मज़दूरों में सबसे अधिक संख्या रियल एस्टेट कंस्ट्रक्शन गतिविधियों में लगे मज़दूरों की थी। 2021 में घरों की क़ीमत में 15-25% की कमी देखी गई। 2022 में लोग काम पर लौटे मगर पूरी संख्या ना होने के कारण बिल्डर्स को तनख़्वाएँ 20-35% तक बढ़ानी पड़ी। वही दूसरी तरफ़ सीमेंट, स्टील जैसे अन्य कच्चे माल में सालाना 12-27% तक की बढ़त देखी गई। होम लोन दरों में बढ़त से घर ख़रीदने वालों का जेब खर्च 10-12% बढ़ा। दूसरी तरफ़ नयी इनकम टैक्स प्रणाली में होम लोन व ब्याज पर मिलने वाले टैक्स बेनिफ़िट हटाना हो या PM आवास योजना में शहरी क्षेत्र में मिलने वाली अतिरिक्त ब्याज माफ़ी का 31 March 2022 से हटाया जाना हो, या सारे निर्णय घर ख़रीदने वाले ग्राहक के विपरीत गये है। बावजूद इन सब फ़ैक्टर्स के, जहां एक तरफ़ घरों की क़ीमत कोरोना काल से पहले रेट से ऊपर जा चुकी है वहीं दूसरी तरफ़ 2022 में घरों की बिक्री 2016 के बाद आज तक की सर्वोच्च रही जो कोरोना के बाद 2021 की बिक्री से 37% ज़्यादा रही है।

इसका जवाब ढूँढने के लिये भी हमे डेटा की शरण में जाना होगा। नब्बे के दशक में फ़ोर्ब्स की अमीरों की लिस्ट में एक भी भारतीय नहीं होता था। 2009 में उस लिस्ट में 9 भारतीयों ने जगह बनायी तो 2022 की सूची में 122 भारतीय है। मात्र कोविड-19 के दौरान 84% भारतीयों की आमदनी घटी तो उसी काल में अरबपतियों की संख्या 40% बढ़कर 102 से 142 हो गयी। जहां पिछले तीन दशकों में ग़रीबी घटी है वहीं पूँजी वितरण की असमानता नापने के गिनी इंडेक्स में बढ़ोतरी हुई है। अमीर और ज़्यादा तेज़ी से अमीर हो रहा है जबकि ग़रीबी में मध्यवर्ग से नये लोग जुड़ते जा रहे है।

2022 में मुंबई में नये लॉंच की 46,900 यूनिट्स आयी जबकि बिक्री के आँकड़े 51390 से अधिक रहे। पारंपरिक तौर पर मार्केट में मिड साइज घरों (1-2 करोड़) की संख्या सबसे ज़्यादा होती है, जबकि अफोर्डेबल व लक्ज़री सेगमेंट चौथे हिस्से के क़रीब रहता है। मुंबई मार्केट के आँकड़े बताते है की 2022 में अफोर्डेबल मार्केट का शेयर 27% रहे तो लक्ज़री मार्केट का शेयर 28% था। वही अगर गुड़गाँव में DLF के नये प्रोजेक्ट Arbour की बात करें तो 7 करोड़ से ज़्यादा क़ीमत वाली 1137 यूनिट्स के लिये 3000 लोगो ने अप्लाई किया। जबकि गोदरेज अपने कनॉट वन प्रोजेक्ट के 25 करोड़ मूल्य वाली यूनिट्स पर्सनल इनविटेशन से बेच रहा है। रुटर्स के सर्वे अनुसार हैदराबाद, दिल्ली व मुंबई में पिछले साल कुल 65,700 यूनिट्स बेची गई जो 2021 से तीन गुणा है। 2021 को अगर 2020 में आये कोरोना के चलते बेंचमार्क ना भी माना जाये तो 2019 में बेची गई लक्ज़री यूनिट्स की संख्या मात्र 18500 थी। देश के टॉप 7 रियल एस्टेट मार्केट में लक्ज़री सेगमेंट में 18% बढ़ोतरी दर्ज की गई।

आगे भी इन्ही ट्रेंड के मज़बूत होने की उम्मीद रखनी चाहिये। आगे मध्यम वर्ग कुछ हद तक सिकुड़ कर ब्रॉड बेस्ड अफोर्डेबल वर्ग के लिये जगह छोड़ेगा तो दूसरी तरफ़ पूँजी शिफ्ट से बड़े महानगरों में लक्ज़री मार्केट का सेगमेंट बढ़ना तय है। अब आगे बेहतर कमाने के लिये प्रॉपर्टी एडवाइज़र्स को अपनी मार्केटिंग इन नये ट्रेंड के साथ प्लान करनी होगी।

Real Estate's core reality:-If the world is surreal, Real Estate is "REAL".Around 30,000 years ago man started to move f...
26/03/2023

Real Estate's core reality:-

If the world is surreal, Real Estate is "REAL".

Around 30,000 years ago man started to move from caves to agriculture and this transition marked the beginning of the most original form of investments - Real Estate Ownership. Since then the man has been recognised by his real estate holding. Be it either holy books like Bible, Quran, upanishad, vedas or law books from different civilisations, real estate has numerous references. Present day practice of witnessing real estate transfer was deed adopted from The Holy Quran.

Real Estate importance further can be understood from the war fought for and over, to acquire it. If something couldn't be purchased, it was invaded. Bigger was the real estate potential like ports, forts greater would be the war. When Britishers entered India as traders they also started to buy large swathes of real estate from Mumbai to large tea plantations on most of the major hills. One can find how astute they were about real estate through Parliament House or Presidential Palace, Connaught Place etc..

When the area around India Gate in Delhi was being developed almost all the princely states in India participated to acquire large plots surrounding it. Today you can check yourself how the most prominent real estate of India, opposite to the Presidential palace, were purchased as Patiala house, Bikaner House, Baroda house, Jodhpur house, Jamnagar house, Hyderabad house etc.

Every kingdom, king, Nawab or position holder had the ultimate desire of owning maximum real estate. Be it yesteryear's Taj Mahal or today's Burg Khalifa, all are glowing tributes to the finest Real Estates. Same can be said about innumerable forts, palaces, minarets, Mosques, Temples, Churches or Disney World... Everything is Real Estate. More than 1/3 tourism happens because people go out to see the real estate marvels created on diffrent places on earth. In fact all these real estates went through and survived the greatest of wars, recessions, plagues and famines which signify that "real estate is real."

Ask a homeless man the value of a home, a roof over the head and you will instantly know that love, hope and dreams all start with a home, again a piece of real estate. Real Estate is integral to mankind.

After all, Real Estate is the first and foremost original investment man has ever made for himself and his generations to come.

रियल इस्टेट इन्वेस्टमेंट रिस्क :रियल इस्टेट रियल भौतिक ऐसेट होती है जिसे अन्य इन्वेस्टमेंट के बनिस्बत सबसे सुरक्षित इन्व...
25/09/2022

रियल इस्टेट इन्वेस्टमेंट रिस्क :
रियल इस्टेट रियल भौतिक ऐसेट होती है जिसे अन्य इन्वेस्टमेंट के बनिस्बत सबसे सुरक्षित इन्वेस्टमेंट समझा जाता है। फिर भी सभी तरह की इन्वेस्टमेंट में कम या ज़्यादा रिस्क जुड़ा होता है।
आजकल रियल इस्टेट डेवलपर्स व उनके प्रतिनिधि ब्रोकर्स ने ज़्यादा से ज़्यादा इन्वेस्टर्स को लुभाने के लिये “जितना ज़्यादा रिस्क, उतना ज़्यादा फ़ायदा” जैसी ग़लत अवधारणा ही बना डाली है।। ऐसी कहावतें छोटी मोटी टेम्परेरी इन्वेस्टमेंट या 100-200 Rs के लॉटरी के टिकट सरीखे रिस्क को अनदेखा करने में भले उचित लगे मगर रियल इस्टेट जैसे बड़े इन्वेस्टमेंट के मामले में ये जीवन की बरबादी का सबब बन जाती है।

अधिकतर भारतीय प्रॉपर्टी ख़रीदने में जीवन भर की जमा पूँजी लगाते है। अगर उनका रिस्क किसी भी कारण से वास्तविकता में बदल जाये तो उससे उबरना उनके लिये असम्भव हो सकता है। इसलिये किसी भी इन्वेस्टमेंट में उससे रिस्क को समझे बिना ब्रोक के कहने से इन्वेस्टमेंट करना बेहद ख़तरनाक हो सकता है। जानिये क्या है प्रॉपर्टी में मुख्य रिस्क….

1. लीगल रिस्क : प्रॉपर्टी ख़रीदने से पहले उसके टाइटल डीड, ज़ोन प्लानिंग, जुरिस्डिक्शन अथॉरिटीज़, इशूअन्स ऑफ़ रेस्ट्रिक्टिंग सर्क्यलर्स बाई गवर्नमेंट, इम्पेंडिंग लिटिगेशन, वन भूमि, रक्षा भूमि इत्यादि क़ानूनी अड़चनें समझना अत्यावश्यक होता है। ये रिस्क कृषि भूमि, ग़ैर वर्गीकृत कालोनी आदि me कई गुणा बढ़ जाता है। क़ानूनी बाधाओ से आपकी सारी पूँजी एक साथ डूबने का रिस्क रहता है। इन्वेस्टर्ज़ RERA अप्रूव्ड प्राजेक्ट्स में इन्वेस्टमेंट करके इस रिस्क को लगभग ख़त्म कर सकते है।

2. डिवलप्मेंट रिस्क : आरम्भिक RERA अप्रूवल के बाद अगर डिवेलपर अपने प्रोजेक्ट को अभीष्ट मात्रा में ना बेच पाये, किसी कारण पूँजी ना जुटा पाये, समय पर डिवेलप ना कर सके, डिवेलपर का दिवाला निकल जाये, उसकी मौत हो जाये या डिवेलपर इच्छित प्लान अनुसार निर्माण ना करे जैसा अभी NOIDA में दो बड़े टावर गिराने के दौरान देखा गया तो ऐसे सारे रिस्क प्रोजेक्ट के जेस्टेशन पिरीयड से जुड़े रिस्क है जो आपके इन्वेस्टमेंट को बड़ी हद तक नुक़सान करते है।

3. उपयोगिता रिस्क : अगर प्रॉपर्टी डिवेलपर समय से निर्माण पूरा करके आपको प्रॉपर्टी का स्वामित्व भी दे दे तो भी प्रॉपर्टी का ऐच्छिक/प्रामाणिक प्रयोग ना होने की अवस्था में आपका उस प्रॉपर्टी में इन्वेस्टमेंट नुक़सानदायक हो सकता है। आज आप नॉएडा जैसी मार्केट में गगनचुंबी टावर्ज़ में बहुत से फ़्लैट ख़ाली देख सकते है या NCR के दर्जनो मॉल में दुकाने ख़ाली देखते है। चीन में पूरे के पूरे नये बने शहर ही ख़ाली देखने को मिलते है जिन्हें “Ghost Town” के नाम से जाना जाता है। अगर कोई व्यावसायिक बिल्डिंग बनती है मगर वहाँ अच्छे किरायेदारो का ईकोसिस्टम नही बनता तो आपकी इन्वेस्टमेंट नुक़सान दायक बन जाती है।

4. अन्य रिस्क : ब्रेक इन्वेस्टमेंट की तरह प्रॉपर्टी इन्वेस्टमेंट भी जेनरल मार्केट साइकल रिस्क, लोकल ईकोसिस्टम रिस्क, लिक्विडिटी रिस्क, लार्ज कैपिटल रेक्वायअर्मेंट रिस्क, स्ट्रक्चरल रिस्क, ख़राब मेंट्नेन्स रिस्क, RE-Leasing रिस्क इत्यादि अन्य छोटे मोटे रिस्क से जुड़ी होती है।

अगर आप ध्यान से देखे तो पहले से अच्छे किरायेदार को किराये पर लगी हुई व्यावसायिक प्रॉपर्टी में लीगल रिस्क, डिवेलप्मेंट रिस्क, उपयोगिता रिस्क इत्यादि बड़े रिस्क सम्पूर्ण रूप से ख़त्म हो चुके होते है इसलिये बड़े व दक्ष इन्वेस्टर्ज़ बहुधा Pre Leased Commercial Properties में इन्वेस्ट करते है। इन्वेस्टमेंट करते हुए एक निपुण प्रॉपर्टी अड्वाइज़र का होना आपके रिस्क को काफ़ी हद तक कम कर देता है। वही एक ख़राब एडवाइज़र आपकी सारी पूँजी डुबो सकता है।

Address

Delhi
110015

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Commercial Real Estate India posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Share

Category