10/11/2024
सम्राट अशोक का यह शहबाजगढी का अभिलेख है इसकी लिपि खरोष्ठी है| इनमे श ,ष,त्र,श्र अक्षर ये दो पालि में नही है | इसलिए पालि में ईश्वर के स्थान पर " ईस्सर " लिखा जाता है |
लेकिन संस्कृत में यह श,ष,स,श्र चारों होते है |
लेकिन आश्चर्य की बात है कि अशोक के शाहबाजगढ़ी और मानसेरा के शिलालेखो में श ष स,श्र आदि यह सभी वर्ण मिलते है | संस्कृत का ह्रास होकर प्राकृत में भी यह अक्षर विलुप्त हो गये| तो पालि में कैसे होंगे?जबकि अशोक के अभिलेखों में मिलते हैं| @ Fact Love JAI BHIM Jai Bhim Group #अंबेडकर