03/08/2026
माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी,
आपकी यह बात बिल्कुल सही है कि किसी भी व्यक्ति, विशेषकर किसी की स्वर्गवासी माता के बारे में अपमानजनक या अभद्र भाषा का प्रयोग करना पूरी तरह अनुचित है। आपकी माताजी के लिए जिस प्रकार की आपत्तिजनक बातें कही गईं, वह न केवल निंदनीय है बल्कि हमारे सामाजिक और नैतिक मूल्यों के भी विरुद्ध है। किसी भी व्यक्ति के लिए ऐसी भाषा का प्रयोग नहीं होना चाहिए, और देश के प्रधानमंत्री के लिए तो बिल्कुल भी नहीं।
इसी संदर्भ में मैं आपसे एक प्रश्न पूछना चाहती हूँ।
आपने भी उन वीडियो और तस्वीरों को देखा होगा, जिनमें छात्रों पर पुलिस द्वारा लाठीचार्ज किया गया। कई जगह छात्रों को गंभीर रूप से पीटा गया, उनके सिर फूट गए, आँसू गैस के गोले छोड़े गए और अन्य बल प्रयोग भी किया गया। अनेक छात्र अस्पतालों में भर्ती हुए और कुछ घटनाओं में जान जाने की खबरें भी सामने आईं।
यदि यह सब हुआ, तो स्वाभाविक रूप से लोगों के मन में यह प्रश्न उठता है कि इसकी जिम्मेदारी किसकी थी? यदि सुरक्षा बलों ने बल प्रयोग किया, तो क्या इस पूरे मामले की निष्पक्ष जाँच हुई? क्या जिन अधिकारियों या कर्मचारियों पर आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग करने के आरोप लगे, उनके खिलाफ कोई कार्रवाई की गई?
सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो भी सामने आए, जिनमें कुछ पुलिसकर्मियों का व्यवहार छात्रों के प्रति अत्यंत कठोर और अपमानजनक दिखाई दिया। यदि वे छात्र निहत्थे थे, तो उनके साथ ऐसा व्यवहार क्यों किया गया? वे देश के छात्र थे, कोई आतंकवादी या दुश्मन नहीं।
मैं केवल यह जानना चाहती हूँ कि जिस प्रकार आपने अपनी माताजी के प्रति हुई अभद्र टिप्पणी पर अपनी पीड़ा व्यक्त की, उसी प्रकार छात्रों के साथ हुई कथित हिंसा और दुर्व्यवहार को लेकर आपकी क्या राय है? क्या आपको नहीं लगता कि यदि कहीं भी आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग हुआ है, तो उसकी निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए और दोषियों के विरुद्ध उचित कार्रवाई होनी चाहिए?
लोकतंत्र में हर नागरिक की गरिमा और अधिकार समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। इसलिए यह प्रश्न किसी विरोध या समर्थन का नहीं, बल्कि न्याय, संवेदनशीलता और जवाबदेही का है।