03/01/2023
हिंदुओं का पतन तब तक नही रुकेगा जब तक हम अपने धर्म के साथ खिलवाड़ करना और उसके साथ प्रयोग करना बंद नहीं करते
जिनकी आस्था साई बाबा में है वो बिल्कुल रखें, जिन्हें साई को भगवान मानना है वो मानें ! हाईवे के डिवाइडर या रेलवे प्लेटफॉर्म पर बनी मजार से लेकर बहराइच के सालार ग़ाज़ी तक हमारे देश में तो लोगों ने न जाने किस-किस को भगवान मान लिया और उनके आगे सर पटक रहे चढ़ावा चढ़ा रहे। लेकिन ये बहुत ही ज़्यादा आपत्तिजनक है कि साईं को सनातन धर्म के ऊपर इस तरह से थोपा जाए आप जिस रूप में साईं को जानते थे आज भी उसी रूप में साईं को क्यूँ नहीं पूजते?
जिस सुदर्शन चक्र को भगवान श्रीकृष्ण ने अपने प्रिय पुत्र प्रद्युम्न को नहीं दिया, जिसे अश्वत्थामा जैसा श्रेष्ठ योद्धा भी धारण न कर सका उसे उठाने तक में असमर्थ हो गया।आपने उस सुदर्शन चक्र को साई के हाथ में थमा दिया गया है! आख़िर क्या है ये ?हनुमान जी प्रभु श्री राम के सर्वश्रेष्ठ एवं परम भक्त जो प्रभु राम के चरणो में समर्पित हैं उन्हें आपने साईं के पैरों में बिठा दिया!
साई बाबा से उन्हें ‘ॐ साईं राम’ बना दिया। वही पवित्र ‘ॐ’ शब्द जिसमें पूरी सृष्टि समायी है!
गणपति भगवान को माता पार्वती की गोद से हटा साईं की गोद में बिठा दिया!
भगवान श्री गणेश जिनका पूजन सनातन धर्म में हर शुभ कार्य के पूर्व होता उन्हें और माता लक्ष्मी को आपने साई के चरणो में बिठा दिया! और यहाँ तक की अब साईं “ॐ साईं माँ” भी हो गए
क्यूँ और क्या ज़रूरत हुई इसक़ी कभी सोचा है आपने ? प्रतिदिन साईं को एक नया पहनावा क्यूँ, एक नया नाम क्यूँ दिया जा रहा। निश्चित है कि ये सब बिना किसी मतलब के यूँ ही तो नहीं हो रहा होगा
मुझे इस बहस में नहीं जाना की साई बाबा का असली नाम चांद मियाँ था या हरिबाबू भूसारी था या वो किनके अवतार थे
पर आप अगर साईं को फ़क़ीर याकिसी भी अन्य रूप में रूप जानते हैं तो उन्हें उसी रूप में स्वीकारिए आपकी आस्था उनके बाहरी रंग रूप को बदलने में क्यूँ इक्षित है कौन सा प्रयोग हो रहा ये हिंदू भावनाओं के साथ और इसका प्रयोजन क्या है!
साईं की पुष्तक “साईं सत् चरित्र” जो शिर्डी से ही प्रकाशित होती है
उसके अनेक अध्यायों में आपको साई ‘अल् - लाह’ को पुकारते मिल जाएँगे
असल में एक पूरी योजना के साथ झूठ का प्रचार करके साईं को मंदिरों में बिठाने का षड्यंत्र 1992 में श्री रामजन्मभूमि के बाद शुरू हुआ,
जिसका उद्देश्य था श्री राम के नाम पर जाग्रत हो चुके हिन्दुओ के जोश को ठंडा करके एक ऐसा विकल्प देना जिसके पीछे भाग कर हिन्दू राम और उस जोश उस कट्टरता के भाव को भूल जाए
आज जितने देश में राम मंदिर है उतने ही साईं रूपी मंदिर भी बन चुके है, अधिकतर साईं के मंदिर 1998 के बाद ही बने है तब Eस्लामिक संगठनो द्वारा साईं के प्रचार के लिए बहुत अधिक धन लगाया गया। साईं के सुन्दर सुन्दर भजन, गाने, मूर्तियाँ, चमत्कारिक कहानियां बनाई गयी,
और हिन्दुओ में sick-ularism का बीज साईं के रूप में अंकुरित किया गया,
साईं बाबा की ये मूर्ति असली रूप में है क्या आपको इसमें साईं सनातनी रूप में नज़र आ में रहे हैं??
उन्हें देखने के बाद आपके मन में क्या भाव आया! देवी देवता के किसी भी रूप का आपको दूर दूर तक भी दर्शन हुआ ? नहीं!
पर साईं को सनातन धर्म में बिठाने वालो ने साईं का भगवाकरण कर डाला उनके ख़ाली माथे को त्रिपुंड और तिलक से सजा डाला उनकी मार्केटिंग शुरू कर दी
ख़ैर जो भी हो हमें ये बिलकुल भी स्वीकार्य नहीं कि हमारे धर्म और हिंदुओं की भावनाओं से कोई ऐसा खिलवाड़ करे सनातन धर्म में पूजित देवी देवताओं के चित्रों साथ खिलवाड़ करे
इसलिए सभी सनातन भक्तों से निवेदन है की पोस्ट मे दिखाये गये चित्र अगर आपको कहीं भी दिखाई दे तो आप उसका विरोध अवश्य करे उसके विरुद्ध आवाज़ उठाएँ और इस बात को ज़्यादा से ज़्यादा हिंदुओं तक पहुँचा कर उन्हें धर्म के प्रति जाग्रत करें
हिंदुओं को सही ग़लत का भेद बताना यही हमारा संकल्प है यही हमारा उद्देश्य है और यही हमारा धर्म के प्रति कर्तव्य है ये याद रखें 🙏🏻🚩