21/10/2019
महान अर्थशास्त्री मनमोहन सिंह की सरकार में, लालू की लड़की मीसा दिल्ली में एक ही कमरे में 21 कंपनी चलाती थी। सिर्फ कागजों पर 6000 करोड़ की मालकिन बन गई। तब देश में अर्थव्यवस्था बहुत मजबूत थी, अब वो मोदी सरकार ने बंद करा दिया तो मंदी आ गई? ??
जब गूंगे ने अटलजी से देश का चार्ज लिया,
तब GDP 8.4 %थी और जब उसने चार्ज छोड़ा तब GDP 4.2% , गुलामों को गूंगा महान अर्थशास्त्री लगता है जो धृतराष्ट्र बना मुल्क लुटते देखता रहा, लुटवाता रहा।
चीन की सीमा से सटा अपना सिक्किम, जहाँ डर से ढंग की सड़कें कांग्रेस नहीं बनवा पाती थी, मोदीजी ने वहां एयरपोर्ट बनवा दिया...!!
GDPपर ज्ञान पेलने वाले बन्धुओं :-
पिछले 3 महीने से देश के 65% हिस्से में बाढ़ की स्थिति थी...!!!
कॉमन सेंस की बात है,!!
GDP घटेगी, बढ़ेगी नहीं!!
पूरी दुनिया ये देखकर हैरान है कि विश्व महाशक्ति चीन से हांगकांग नहीं संभल रहा
और भारत के कश्मीर में शांति है!!
किस किस को याद है??
जब मनमोहन सिंह ने एक साधु के कहने पर क़ि यहां 1000 टन सोना दबा हुआ है, खुदवाना शुरू कर दिया था???
गजब का अर्थशास्त्र??
मूर्खता की हद...देखो!!
जिस धारा 370 के कारण SC का आदेश कश्मीर में लागू नहीं होता था...!!
उसी धारा को बहाल करने की याचिका SC ने स्वीकार कर ली??
है न, गजब न्याय प्रक्रिया?
GDP गिरने को लेकर ज्यादा चिंता न करें, जो शख़्स 72 साल पुरानी बीमारी कश्मीर को एक झटके में ठीक कर सकता है, वो GDP भी संभाल ही लेगा!!! उसकी नीयत साफ है। वो चोरों को उनकी गर्दन से पकड़ रहा है, उनके हलक में हाथ डालके लूट का पैसा वापस ला रहा है।
चिंतित न हो!! कांग्रेस और दूसरे भी हारे हुए चोरों के नैरेटिव से परेशान ना हों। रवीश और इस जैसे अन्य पाखंडी पत्तलकार और द वायर और इस जैसे अन्य बिकाऊ मीडिया के प्रौपेगैण्डा को समझें।
काली कमाई बंद हो जाने से लोगों की क्रय शक्ति घटी है। इसी परिवर्तन को अर्थशास्त्र की भाषा में आर्थिक मंदी कहते हैं।
जिस जमाने में एक प्रधानमंत्री ने कहा था " रुपये पेड़ पर नहीं उगते"...!!
उसी जमाने में उसका चहेता वित्त मंत्री गमलों में रुपये उगा रहा था...!!
देश केवल बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है, देश का ट्रांसफॉरमेशन हो रहा है। चोरों डकैतों की बनाई कुव्यवस्था से बाहर निकल एक ईमानदार, पारदर्शी व्यवस्था को अपना रहा है। काले धन की पोषित अर्थव्यवस्था को ठोकर मार देश नये भारत के निर्माण की ओर अग्रसर है। थोड़ा सा कंपन स्वाभाविक है और ये थोड़ा सा कंपन ही अपने आप में दृढ़ अर्थव्यवस्था की आहट का द्योतक है।
आपका अपना साथी
विपिन कुमार शर्मा
संस्थापक
जीव कल्याण संस्था
एक स्वंय सेवी लाभ-निरपेक्ष राष्ट्रीय संस्था
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