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09/01/2021

मकान मालिक और किरायेदारों के विवाद को कम करने के लिए बनाए गए उ.प्र. नगरीय किरायेदारी विनियमन अध्यादेश-2021 को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। इस अध्यादेश में किरायेदारी अनुबंध के आधार पर करने का प्राविधान है। इस अध्यादेश में ऐसी व्यवस्था है कि मकान मालिक मनमाने तरीके से किराया नहीं बढ़ा सकेगा। आवासीय पर पांच फीसदी और गैर आवासीय पर सात फीसदी सालाना किराया बढ़ाया जा सकेगा।

किराएदार को भी किराये वाले स्थल की देखभाल करनी होगी। दो महीने तक किराया नहीं देने पर मकान मालिक किराएदार को हटा सकेगा। किराएदार घर में बिना पूछे तोड़फोड़ भी नहीं कर पाएगा। पहले से रखे गए किराएदारों के मामले में यदि लिखित नहीं है तो अनुबंध पत्र लिखित कराने के लिए तीन माह का मौका दिया जाएगा। किराया वृद्धि की गणना चक्रवृद्धि आधार पर होगी। किराया बढ़ाने के विवाद पर किराया प्राधिकरण संशोधित किराया और किराएदार द्वारा देय अन्य शुल्क निर्धारित कर सकता है। एडवांस के मामले में आवासीय परिसर के लिए सिक्योरिटी डिपाजिट दो महीने से अधिक नहीं होगा और गैर आवासीय परिसर के लिए छह माह का एडवांस लिया जा सकेगा।



वर्तमान में लागू उ.प्र शहरी भवन (किराये पर देने, किराया तथा बेदखली विनियमन) अधिनियम-1972 लागू है। इस अधिनियम के लागू होने के बाद से भवन स्वामी और किरायेदारों के बीच के विवाद बढ़ गए हैं। बड़ी संख्या में अदालतों में मुकदमे चल रहे हैं। भवन स्वामियों को उनकी संपत्ति का उचित किराया नहीं मिल रहा है। उच्चतम न्यायालय के निर्देश और भारत सरकार द्वारा तैयार किए गए माडल टेनेंसी एक्ट के आधार पर नगरीय परिसरों की किरायेदारी विनियमन अध्यादेश 2021 तैयार किया गया है। केंद्र या राज्य या केंद्र शासित प्रदेश या भारत सरकार के उपक्रम या स्थानीय निकाय या छावनी परिषद में यह कानून लागू नहीं होगा। कंपनी, विश्वविद्यालय या कोई संगठन, सेवा अनुबंध के रूप में अपने कर्मचारियों को किराए पर दिए गए हो उस पर यह लागू नहीं होगा। धार्मिक या धार्मिक संस्थान, लोक न्याय अधिनियम के तहत पंजीकृत ट्रस्ट, वक्फ के स्वामित्व वाला परिसर, पर किराएदारी कानून प्रभावी नहीं होगा।

मकान मालिक और किराएदार के दायित्व
किराएदारी अनुबंध पत्र की मूलप्रति का एक सेट दोनों के पास रहेगा। अनुबंध पत्र की शर्तों के अनुसार समय पर किराया देना होगा।

05/09/2020

💐💐💐💐💐💐💐💐
सही क्या है,
गलत क्या है,
ये सबक पढ़ाते हैं आप,
सच क्या है, झूठ क्या है,
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जब सूझता नहीं कुछ तो
राहों को सरल बनाते हैं आप।
आपने बनाया है मुझे इस योग्य
कि प्राप्त करूं मैं अपना लक्ष्य
दिया है हर समय आपने सहारा
जब भी लगा मुझे, कि मैं हारा!
🌹शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं!!🌹

06/05/2020

कोरोना काल के बाद की दुनिया की कल्पना अभी से होने लगी है। हालांकि, यह किसी को नहीं पता कि यह संकट भारत सहित दुनिया में कब खत्म होगा? खैर, इस संकट का भारतीय रियल एस्टेट बाजार कितना गंभीर असर होगा इसका आकलन करते हैं। मेरा मानना है कि इस महामारी के बाद सबसे प्रभावित सेक्टरों में शीर्ष पर रियल एस्टेट होगा। मैं ऐसा क्यों मानता हूं इस पोस्ट के जरिये आप सभी से साझा कर रहा हूं। पोस्ट थोड़ा लंबा है सब्र रखना होगा…

प्रॉपर्टी बाजार में संकट क्यों बढ़ेगा

1. लोग बड़ा वित्तीय फैसला टालेंगे: घर, दुकान या गाड़ी की खरीददारी आम इंसान के जीवन का सबसे बड़ा वित्तीय फैसला होता हैं। कोरोना काल के बाद जॉब मार्केट से लेकर कारोबारी दिक्कते बढ़ेंगी। ऐसे में लोग घर की खरीदारी करेंगे यह सोचना भी गलत होगा। ऑटो कंपनियां इस बात को मान चुकी है कि 2020 में सुधार मुश्किल है लेकिन डेवलपर्स इस हकीकत को नहीं मानेंगे क्योंकि उन्हें बले पीआर मानने नहीं देंगे।

2. कॉमर्शियल बाजार भी सहारा नहीं देगा: बीते कई सालों से सुस्ती की चपेट में चल रहा रियल एस्टेट को अभी तक कॉमर्शियल सेगमेंट से सहारा मिल रहा था। देश में ऑफिस स्पेस से लेकर मॉल औैर दुकान की मांग थी जो कोरोना के बाद ठप होने वाली है। कंपनियों को वर्क फ्रॉम होम कल्चर रास आने लगा है। यह ट्रेंड आने वाले समय में और जोर पकड़ेगा। इससे ऑफिस सहित रिटेल स्पेस की मांग घटेगी। कई ऑफिसे खाली भी होंगे।

3. प्रोजेक्ट पूरा करने को मजदूर नहीं मिलेंगे: कोरोना खत्म होने के बाद भी रियल एस्टेट साइट पर काम करने के लिए मजदूर मिलना मुश्किल होगा। जिस हाल में प्रवासी मजदूर अभी घर लौट रहे हैं उनको फिर से इस महानगर में काम करने के लिए लाना बड़ी चुनौती होने वाली है। ऐसे में प्रोजेक्ट का पजेशन देने में देरी होती चली जाएगी। यह घर खरीदारों में विश्वास बहाली को और कमजोर करेगा।

4. फंड जुटाना मुश्किल होगा: अगले छह से एक साल तक रियल एस्टेट डेवलपर्स को फंड जुटाना और प्रोजेक्ट का काम पूरा और मुश्किल होगा। ऐसा घर की बिक्री बिल्कुल ठप होने से होगी। यह छोटे और कमजोर डेवलपर्स की वित्तीय स्थिति को और कमजोर करने का काम करेगा। इससे कई डेवलपर्स दिवालिया होंगे या होने के कागार पर पहुचेंगे।

छोटे शहरों के मुकाबले महानगरों में स्थिति गंभीर होगी

01/07/2019

Yummy

11/03/2019
28/02/2019

450000 bigha.

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