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यह शायद अट्ठारहवीं शताब्दी के आख़िर की बात है जब फ्रांस मे एक स्टेज ड्रामे मे नबी(स.अ.व.) की शान मे नाज़ेबा कलमात कहे गये...
06/06/2022

यह शायद अट्ठारहवीं शताब्दी के आख़िर की बात है जब फ्रांस मे एक स्टेज ड्रामे मे नबी(स.अ.व.) की शान मे नाज़ेबा कलमात कहे गये और मज़ाक उड़ाया जा रहा था.!

ख़बर तुर्की पहुंची तो बेचैनी फैल गयी , ख़िलाफ़त की जानिब से ख़लिफ़ा अब्दुल हमीद II ने एहतिजाज के लिये सिफ़ारती ज़रिया चुना तो फ्रांस सरकार को ड्रामा बंद करने को कहा औऱ जवाब मे ना सिर्फ़ ड्रामे वाली जगह को उजाड़ा गया बलके ड्रामाबाज़ लोगों को फ्रांस से तड़ीपार कर इंगलैंड भेजा दिया गया..

कुछ दिन बाद ख़लिफ़ा अब्दुल हमीद II को फिर पता चला के ये ड्रामेबाज़ लोग अब लंदन मे इस तरह के तौहीनी ड्रामे कर रहे हैं तो उन्होने एहतिजाज के लिये फिर से सिफ़ारती ज़रिया चुना जैसा फ्रांस सरकार के लिए किया तो इंगलैंड की जानिब से जवाब आया :- के हम फ़्रांस नही हैं, हम ड्रामा नही रोक सकते..क्योंकि हमारे यहां बोलने की पूरी आज़ादी है..

ख़िलाफत़ उस्मानिया के ख़लिफ़ा अब्दुल हमीद II की दीनी ग़ैरत जोश मे आयी और उन्होने पैग़ाम भेजा कि------- हमारे बुज़ुर्गों ने इस्लाम की ग़ैरत के लिए अपनी जाने दीं हैं और हमारी फ़ौजें इस तरह के ड्रामे को रोकने का हुनर अच्छी तरह जानती हैं इसलिए लंदन मे उनके स्वागत की तैयारी करो , इंगलैंड मे दह़शत छा गयी , आनन फानन ड्रामा वाली जगह को उजाड़ दिया गया..।

सिफ़ारती ज़बान जब नाकाम हो जाये तो तलवार ही आख़री रास्ता होता है..

अहमद शाह ने तमाम जंगें जीतकर एक विशाल बादशाहत क़ायम की. इतिहासकार इसे दुर्रानी साम्राज्य कहते हैं.अहमद शाह अब्दाली के वि...
05/06/2022

अहमद शाह ने तमाम जंगें जीतकर एक विशाल बादशाहत क़ायम की. इतिहासकार इसे दुर्रानी साम्राज्य कहते हैं.
अहमद शाह अब्दाली के विशाल साम्राज्य का दायरा पश्चिम में ईरान से लेकर पूरब में हिंदुस्तान के सरहिंद तक था.
उनकी बादशाहत उत्तर में मध्य एशिया के अमू दरिया के किनारे से लेकर दक्षिण में हिंद महासागर के तट तक फैली हुई थी.
मोटे अनुमान के मुताबिक़, अहमद शाह अब्दाली की सल्तनत क़रीब बीस लाख वर्ग किलोमीटर में फैली हुई थी.
अहमद शाह अब्दाली ने अपने देश के लोगों को एक नई पहचान और एक आज़ाद मुल्क दिया. आज हम अब्दाली के क़ायम किए हुए मुल्क को ही अफ़ग़ानिस्तान के नाम से जानते हैं.

9वीं व 10वीं सदी ईसवीं में शुमाली हिंद में एक ही वंश के महाराजा गुज़रे हैं जिन्हें सम्राट कहा जा सकता है ,वो हैं महाराजा...
04/06/2022

9वीं व 10वीं सदी ईसवीं में शुमाली हिंद में एक ही वंश के महाराजा गुज़रे हैं जिन्हें सम्राट कहा जा सकता है ,वो हैं महाराजा जयपाल और उनके बेटे आंनद पाल ,इनका हिंदूशाही किंगडम (ये नाम अंग्रेज़ों का दिया हुआ है ) की सीमा क़ाबुल से लेकर सरहिंद तक फैली हुई थीं ,इस बड़े साम्राज्य का अंत इसलिए हो गया कि महाराजा जयपाल पूरे सेंट्रल एशिया को जीतना चाहते थे इसलिए उन्होंने मज़बूत गज़नी सल्तनत पर हमला कर दिया पंजाब के मैदानी इलाक़े के सिपाही और हाथी कड़ी ठंड का सामना नहीं कर पाये और जयपाल की फ़ौज तबाह हो गयी ,उस वक्त गज़नी के सुल्तान सुबक्तग़ीन थे फिर उनके बेटे सुल्तान महमूद गज़नवी‌ ने महाराजा जयपाल को पेशावर की जंग में हराया जिसके बाद हिंदू शाही साम्राज्य का पतन शुरू हो गया महाराजा आंनद पाल ने सुल्तान महमूद को रोकने की कोशिश की लेकिन नाकाम रहे और धीरे धीरे हिंदू शाही साम्राज्य खत्म हो गया..

28/05/2022
Babri dohrane nahi Denge
28/05/2022

Babri dohrane nahi Denge

इतिहासकार Francis Robinson अपनी किताब The Mughal Emperors में लिखते हैं।अलाउद्दीन ख़िलजी की जुर्रत ऐसी थी की जब एक बार म...
28/05/2022

इतिहासकार Francis Robinson अपनी किताब The Mughal Emperors में लिखते हैं।

अलाउद्दीन ख़िलजी की जुर्रत ऐसी थी की जब एक बार मंगोल सरदार ओलजेतू खान ने अलाउद्दीन ख़िलजी के दरबार में एक मंगोलो का समूह भेजा उनकी मांग थी कि अलाउद्दीन ख़िलजी अपनी शहज़ादी को उनके साथ कर दें, क्योंकी मंगोल सरदार उनकी शहज़ादी को अपनी बीवी बनाना चाहता है तब अलाउद्दीन खिल्जी ने जवाब कुछ इस तरह जवाब दिया की उसके दरबार में आए सभी 18 मंगोलो के सर हाथियो के पांवो से कुचलवा दिये और ये पैग़ाम मंगोलो तक पहुंचा दिया गया की यह अलाउद्दीन खिलजी का जवाब है।

इसके बाद कभी मंगोलो ने भारत की तरफ़ पलटने की हिम्मत नहीं की। यह बात सही है कि उस दौर में मंगोलो से ज़्यादा बर्बर कोई नहीं था उन्होने संपूर्ण एशिया को रौंद दिया था लेकिन हिंदोस्तान आने पर उनका मुक़ाबला अलाउद्दीन ख़िलजी और उनके बहादुर सिपहसालार ज़फर से मुक़ाबला हुआ और यही वो सिपहसालार जो अपनी तमाम ज़िंदगी मंगोलो से लड़ते रहे अगर इन्होने मंगोलो को ना खदेड़ा होता तो आज यहां का इतिहास और भूगोल कुछ और होता। अलाउद्दीन खिलजी 21 अक्टूबर 1296 को गद्दीनशीन हुए।

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