23/03/2012
नोएडा एक्सटेंशन का
विवाद सुलझने के आसार
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अमर उजाला ब्यूरो
ग्रेटर नोएडा। नोएडा एक्सटेंशन और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण क्षेत्र के निवेशकों के लिए राहत भरी खबर है। नोएडा एक्सटेंशन को लेकर चल रहा विवाद जल्द सुलझने का आसार बन रहे हैं।
बृहस्पतिवार को हुई एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की बैठक में मास्टर प्लान-2021 को जल्द मंजूरी के संकेत मिले हैं। बैठक में प्राधिकरण के मास्टर प्लान-2021 के नियम-कायदों को काफी हद तक सही बताया गया। इस पर बोर्ड ने प्रदेश सरकार से 15 दिन में टिप्पणी मांगी है।
बोर्ड ने एक कमेटी को अधिकृत किया है कि वह 15 दिन में होने वाली बैठक में औपचारिकताएं पूरी करे। बैठक में शहरी विकास मंत्री कमलनाथ, हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से प्रोटोकॉल मंत्री अभिषेक मिश्रा, सचिव आलोक कुमार, प्रदेश के चीफ टाउन प्लानर एनके वर्मा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के चेयरमैन/सीईओ रमा रमन मौजूद थे।
तीन महीने से जारी थीं कोशिशें
प्राधिकरण के मास्टर प्लान पर काफी दिन से माथापच्ची चल रही थी। बृहस्पतिवार को प्रदेश सरकार और प्राधिकरण के अधिकारी शामिल हुए, तभी मंथन हो सका। प्लानिंग बोर्ड तक पहुंचाने के लिए प्राधिकरण तीन माह से प्रयास कर रहा था। अब बैठक 26 मार्च को प्रस्तावित है। इसमें कुछ फैसला होने की उम्मीद जताई जा रही है।
देनी होगी लिखित सहमति
मास्टर प्लान 2021 में एक पेंच फंस गया है। यह तैयार पिछली सरकार ने किया था, लेकिन मंजूरी की नौबत नई सरकार में आई है। इसलिए बोर्ड ने साफ कहा कि प्लान मंजूर होने से पहले सरकार को लिखकर देना होगा कि हम सहमत हैं। इसलिए 15 दिन का समय भी दिया गया है।
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•कमेटी ही दे देगी प्लान को मंजूरी
सूत्रों के मुताबिक, प्राधिकरण के लिए सबसे अच्छी बात यह रही कि अब अलग से गठित कमेटी ही मास्टर प्लान को मंजूर कर देगी। इस कमेटी की एक माह में दो बार बैठक होती है, जबकि एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की बैठक करीब छह माह में एक बार होती है। गौरतलब है कि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण क्षेत्र के 39 गांवों के किसान इलाहाबाद हाईकोर्ट गए थे। सभी गांवों की सुनवाई के बाद 21 अक्तूबर 2011 को कोर्ट ने फैसला दिया था कि किसानों को 64 फीसदी अतिरिक्त मुआवजा और 10 फीसदी जमीन दी जाए। साथ ही आदेश था कि मास्टर प्लान-2021 के तहत आवंटन और विकास को एनसीआर बोर्ड से मंजूरी के बाद ही आगे बढ़ाया जाए। इसके बाद ग्रेटर नोएडा और नोएडा एक्सटेंशन क्षेत्र में तमाम विकास कार्य रोक दिए गए थे।