Anant Organic Farming

Anant Organic Farming Provide The service of Organic Fertilizer & Pesticides

क्या आपके खेत मे निम्मं मे से कोई समस्या है ?▫️ कीड और रोगो का बढणा ▫️उत्पादन घटना ▫️मिटटी सख्त होना बंजर होना▫️उत्पादन ...
19/10/2024

क्या आपके खेत मे निम्मं मे से कोई समस्या है ?
▫️ कीड और रोगो का बढणा
▫️उत्पादन घटना
▫️मिटटी सख्त होना बंजर होना
▫️उत्पादन खर्च बढना
▫️फसल के लिये कम पाणी उपलब्ध होना
▫️किसी कारण से फसल का न बढना
▫️तुफान,बाढ,बे मौसम बारिश,ओले गिरणा आदी से नुकसान होना
क्या आप इन समष्या ओ से मुक्ति चाहते हैं ?
तो फिर हम आपकी मदम कर सकते हैं

आप हमारे मिशन जैविक भारत के कार्य को जानने के लिये नीचे दिये गये लिंक को क्लिक कर के सारी जाणकारी ले सकते हैं.

https://1porgm.flexifunnels.com/tg8bkvil

अधिक जाणकारी हेतू सम्पर्क करे.
प्रा.अनंत तागडे
एम.एसी.कृषी.नेट
7972247976
7030544063

क्या आप इन समस्याओं से मुक्ति चाहते है?तो फिर हम आप की मदत कर सकते है ।

16/10/2024
क्या आपके खेत मे निम्मं मे से कोई समस्या है ?▫️ कीड और रोगो का बढणा ▫️उत्पादन घटना ▫️मिटटी सख्त होना बंजर होना▫️उत्पादन ...
16/10/2024

क्या आपके खेत मे निम्मं मे से कोई समस्या है ?
▫️ कीड और रोगो का बढणा
▫️उत्पादन घटना
▫️मिटटी सख्त होना बंजर होना
▫️उत्पादन खर्च बढना
▫️फसल के लिये कम पाणी उपलब्ध होना
▫️किसी कारण से फसल का न बढना
▫️तुफान,बाढ,बे मौसम बारिश,ओले गिरणा आदी से नुकसान होना
क्या आप इन समष्या ओ से मुक्ति चाहते हैं ?
तो फिर हम आपकी मदम कर सकते हैं

आप हमारे मिशन जैविक भारतके कार्य को जानने के लिये नीचे दिये गये लिंक को क्लिक कर के सारी जाणकारी ले सकते हैं.

https://1porgm.flexifunnels.com/tg8bkvilhttps://1porgm.flexifunnels.com/tg8bkvil

अधिक जाणकारी हेतू सम्पर्क करे.
प्रा.अनंत तागडे
एम.एसी.कृषी.नेट
7972247976
7030544033

प्राकृतिक खेती - नैसर्गिक खेती  ======================================== १) जबसे रासायनिक खादों के इस्तेमाल से मिटटी ख़र...
29/07/2024

प्राकृतिक खेती - नैसर्गिक खेती
========================================
१) जबसे रासायनिक खादों के इस्तेमाल से मिटटी ख़राब होनेवाली बात का पता चला है, तब से खेती करने की अलग-अलग प्रणालियां सामने आ रही है, बहोत बड़ी संख्या में किसान भाई आर्गनिक की तरफ आकर्षित हुए, आर्गनिक खेती की, परन्तु, ना तो उत्पादन को साइज मिला, ना टनेज मिला, साल भर घर चलाना मुश्किल हो गया, कुछ लोगों ने इतनी ज्यादा प्रोसेस बताई की उसे करने में मानवीय श्रम का खर्च ज्यादा हो गया, खेती का सारा बजेट बिघड गया, जितने सलाहकार उतने मत सामने आने से किसान भाई दुविधा में फंस गया क्या करें क्या नहीं |
२) कुछ लोगों का कहना है की, खेती में बाहर से कुछ भी नहीं डालना है, क्योंकि हमारे पूर्वज कुछ भी नहीं डालते थे, ये भी बात सही दिखती है, जब हमारे पूर्वज बाहर से कुछ नहीं डालते थे तो हम भी नहीं डालेंगे, यहाँ एक फरक आपको समझना पड़ेगा की, आपके पूर्वजों की मिटटी पूरी तरह से प्राकृतिक थी, फसलों को भोजन प्रदान करनेवाली प्रणाली वहां कार्यरत थी, एक ग्राम मिटटी में कम से कम १० करोड़ सूक्ष्म जीवाणु कार्यरत थे, एक एकर क्षेत्र में कम से कम ४०,००० केंचुए ( गांडूल,अड़सिया ) कार्यरत थे, ४०० किलो केंचुए का खाद एक एकर खेत में रोज तैयार होता था |
३) आज हमारी एक ग्राम मिटटी में जीवाणु संख्या १ करोड़ से कम रह गयी है, एक भी केंचुआ देखने को नहीं मिलता, केंचुए मिटटी में २ से ३ मीटर नीचे जाकर समाधी ले चुके है, हमारी मिटटी हार्ड हो गयी है, मिटटी में आक्सीजन का प्रमाण बहोत कम हो गया है, जीवाणुओं की संख्या में भयानक कमी आ जाने के कारण मिटटी में उपलब्ध, अल्प प्रमाण में लगनेवाले घटक उपलब्ध फाम में बदलनेवाले जीवाणुओं की कमतरता के कारण मिटटी से घटक नहीं मिल पा रहे है, ऐसी विषम परिस्तिथि में भी क्या आप पूर्वजों का ही अनुकरण करेंगे |
४) जिनका कहना है की, हाँ हम पूर्वजों का ही अनुकरण करेंगे, में उनसे पूछना चाहता हूँ की आपके पूर्वज बैलगाड़ी में सफर करते थे ५०० किलो मीटर दूर जाने के लिए उनको १० दिन लगते थे, तो क्या आप भी बैलगाड़ी में ही सफर करेंगे, विज्ञानं ने प्रगति की कार, बस, रेलगाड़ी और हवाई जहाज बनाये क्या आप उस सुविधा का इस्तेमाल नहीं करते ? करते हो, आप में से जैन मुनि छोड़कर सभी लोग अत्याधुनिक विज्ञानं की सुविधाओं का इस्तेमाल कर रहे है, खुद के लिए आधुनिक विज्ञानं के फायदे इस्तेमाल करने में रस्सी खेंच चला रखी है, और खेती की बात आएगी तो कहते है की, हमारे पूर्वज कुछ नहीं डालते थे इसलिए में भी कुछ नहीं डालूँगा |
५) आपके पूर्वज एक दूसरे का समाचार जानने के लिए पत्र भेजते थे, आठ से दस दिन में पत्र इच्छित व्यक्ति को मिलता था, फिर वो जब उत्तर भेजता था तब आठ से दस दिन बाद आपको मिलता था, मतलब किसी परिचित के विषय में वो कैसे है, ये जानने के लिए हमें १५ से २० दिन लगते थे, अगर आपको पूर्वजों की कार्यशैली से इतना प्रेम है, तो जेब में मोबाईल लेकर क्यों घूम रहे हो, नहीं आप मोबाईल का इस्तेमाल बंद नहीं कर सकते यहाँ आपको आधुनिक विज्ञानं का सहारा चाहिए, परन्तु बात खेती की आएगी तो कहेंगे की, हम बाहर से कुछ नहीं डालते, क्योंकि हमारे पूर्वज बाहर से कुछ नहीं डालते थे, क्या पूर्वज कह कर गए थे की, आधुनिक विज्ञानं के सब फायदे लेना पर खेती में कुछ नहीं डालना |
६) हमारे पूर्वज जब खेती करते थे तब जनसँख्या बहोत कम थी, इसलिए खेती का क्षेत्र भी कम था, हर गाव में शेकडो एकर जमीन जंगल थी, प्रत्येक किसान भाई के पास कम से कम २०० तक गाय बैल होते थे, घर के छोटे बच्चे चराकर लाते थे, २०० जानवर का गोबर खाद खेतों में हमारे पूर्वज डाला करते थे, क्या आपके पास गोबर का खाद है, क्या आप २०० जानवर रख सकते है, उनको चराने के लिए जंगल आपके पास है, अब सोचो क्या आपके पूर्वज जैसी खेती करते थे वैसी आप कर रहे हो, पूर्वजों का अनुकरण करना है तो पूरा करों, आधा अधूरा सब कुछ नुकसान दायक होता है |
७) हमारा भी यही कहना है की, खेती के लिए किसी खाद या जहरीली दवा की जरुरत नहीं है, परन्तु प्राकृतिक मिटटी में ये संभव है, मिटटी को प्राकृतिक बनाने के लिए अगर हम आधुनिक विज्ञानं का सहारा लें तो इसमें बुराई क्या है, आधुनिक विज्ञानं की मदत से हमारी मिटटी ५ से ७ साल में पूरी तरह प्राकृतिक बन जाती है, हमारी १ ग्राम मिटटी में कम से कम १० लाख सूक्ष्म जीवाणु कार्यरत हो जाते है, एक एकर क्षेत्र में कम से कम ४०,००० हजार केंचुए कार्यरत हो जाते है, हर दिन ४०० किलो केंचुआ खाद मिलने लगता है, तब हमें बाहर से कुछ भी डालने की आवश्यकता नहीं रहती |
८) रासायनिक खादों से ख़राब हुई मिटटी को फिर से कार्यरत करनेवाला आधुनिक अनुसन्धान है "मल्टीप्लायर" इस मल्टीप्लायर की मदत से पहले दिन से रासायनिक खाद डालना बंद करने के बावजूद आपका उत्पादन ५० प्रतिसत तक या उससे ज्यादा बढ़कर आता है, ५ से ७ साल में आपकी १ ग्राम मिटटी में १० करोड़ से ज्यादा जीवाणु कार्यरत हो जाते है, १ एकर खेत में कम से कम ४०,००० केंचुए काम करने लगते है, हर दिन ४०० किलो से ज्यादा केंचुए का खाद मिलने लगता है, तब आपकी मिटटी पूरी तरह से प्राकृतिक बन जाती है, हमारे पूर्वज जिस मिटटी पर खेती करते थे वैसी बन जाती है, आपका उत्पादन किटक रोग मुक्त तथा बढ़कर मिलता है | मिटटी प्राकृतिक होने के बाद आपको मल्टीप्लायर भी डालने की कोई आवश्यकता नहीं है, इसलिए में इतना ही कहूँगा की आपको जो भी सिखाया जा रहा है क्या वह बरोबर है, इसका निर्णय आपको ही लेना है |

अधिक जाणकारी हेतू सम्पर्क करे.
प्रा.अनंत तागडे
एम.एसी.कृषी.नेट
7972247976
7030544033

31/05/2024
31/05/2024

*रासायनिक शेती का नको*
______________________
1) रासायनिक खतांचा अधिक व सातत्याने वापर केल्याने जमिनीचा पोत बिघडतो परिणामी जमिनीची उत्पादकता कमी होते.
2) रासायनिक खतांचा अधिक वापर केल्याने पिकांना पाणी ही मोठ्या प्रमाणात द्यावे लागते.
3) रासायनिक खतांच्या अधिक वापराने जमिनीतील क्षारांचे प्रमाण वाढते.
4) रासायनिक खतांच्या अधिक वापराने माती कठोर बनते आणि कठोर जमीनित गांडूळ सक्रिय नसतात.
5) जमिनीची सुपीकता कमी होते.
6) जल प्रदूषनात वाढ होऊन जल जीवनात समस्या तयार होतात.
7) वायू प्रदूषणात वाढ झाली आहे.
8) रासायनिक खतांच्या वापरामुळे मातीतील सूक्ष्म जंतू नष्ट झाले आहेत.
9) जमिनीतील ऑक्सिजन चे प्रमाण कमी होऊन कार्बन डायऑक्साइडच्या प्रमाणात वाढ झाली आहे.
10) जमिनीतील सेंद्रिय कर्बाचे प्रमाण घटले आहे.
11) रासायनिक खतांच्या अधिक वापराने उत्पादनात मोठी घट दिसून येत आहे पिकांची वाढ खुंटते.
12) मानवी आरोग्यावर गंभीर परिणाम दिसून येत आहे ज्यात मुख्यतः
हृदयरोग,उच्चरक्तदाब,कॅन्सर, नपुंसकता,आंधडेपणा,किडनीचे रोग,पोटाचे आजार इत्यादी तसेच जनावरांना देखील मोठे आजार उद्भवतात.
13) रासायनिक शेतीतून मिळालेल्या उत्पादनाला योग्य तो बाजारभाव मिळत नाही.
14) जमिनीचा वरचा 6 इंच भाग हा शेतीसाठी उत्तम समजला जातो मात्र रासायनिक खतांच्या अती वापराने जमिनी वरचा 6 इंचचा भाग हा घटून 1.5 इंच वर आलेला आहे त्यामुळे जमिनीत लावलेले पिके फक्त वरील 1.5 इंच भागातूनच जमिनीतील अन्न्द्रव्य घेतात.
15) पिकांना जमिनीतील अन्नद्रव्य कमी मिळाल्याने पिके कुपोषित होतात आणि कुपोषित पिकांवर कीड व रोंगाचा प्रादुर्भाव मोठ्या प्रमाणात वाढतो.
16) कीड व रोगांचा प्रादुर्भाव कमी करण्यासाठी शेतकरी मोठ्या प्रमाणात रासायनिक कीड व बुरशीनाशक फवारणी करतो ज्यामुळे शेतकऱ्यांचा उत्पादन कमी आणि उत्पादन खर्चात वाढ होते.

*सेंद्रिय शेती का करावी*
______________________
1) जमिनीमध्ये जिवाणूंची संख्या वाढते.
2) जमीन भुसभुशीत होते.
3) पिकांची वाढ जोमदार होते.
4) जमिनीचा पोत सुधारतो.
5) जमिनीची पाणी धरून ठेवण्याची क्षमता वाढते.
6) जमिनीत ऑक्सिजनचा प्रमाण वाढतो.
7) उत्पादनात वाढ होते.
8) रसायन मुक्त अन्न मिळतो.
9) जल प्रदूषण आणि वायू प्रदूषण रोखण्यास मदत होते.
10) शेतकऱ्यांच्या उत्पादनाला चांगला बाजारभाव मिळतो.
11) मानवी तथा जनावराच्या आजाराच्या समस्या कमी होतात.

*रासायनिक खतांवर काय आहे उपाय*
______________________
शेती पद्धती बदल हा एवढा सोपा विषय नाही पण शेतकऱ्यांनी टप्याटप्याने का होईना शेतकऱ्यांनी सेंद्रिय शेतीचा वापर करणे गरजेचं आहे.
शिवाय जर जमिनीला सेंद्रिय खताबरोबर रासायनिक खतांची जर जोड दिली तर उत्पादनात वाढ होऊन जमिनीचा पोत देखील सुधारणार आहे.
यासाठी कृषी विभागाकडून शेणखत,गांडूळ खत,कंपोस्ट,नाडेप इत्यादी बद्दलची माहिती पुरवली जाते शिवाय नाडेप टाके बांधण्यासाठी अनुदान पण पुरविले जात आहे.
1) शेतीसाठी उत्तम सेंद्रिय खत म्हणून शेणखत,गांडूळ खत,कंपोस्ट खत उत्तम मानले जाते मात्र ही सगळी खते जनावरांच्या मलमूत्र आणि विष्ठे वर अवलंबून आहेत.
2) पिकांच्या उत्तम वाढीसाठी आणि भरघोस उत्पादनासाठी साधारण 8-10 टन देशी गाईचे शेणखत प्रत्येक वर्षाला जमिनीत देणे गरजेचं आहे.
3) आज बहुतांश शेतकऱ्यांकडे देशी गाईचा अभाव आहे आणि संकरित गाईचा शेणखत हा निकृष्ट दर्जाचा असल्याने शेतात हवा तो फायदा शेण खतामुळे मिळत नाही शिवाय शेणखत शेतात टाकल्याने पिकाला 8-12 महिन्यांनी सेंद्रिय कर्ब मन्हून उपलब्ध होतो.

*सॉईल मल्टीप्लायर का?*
____________________
(Soil multiplier poto)
1) सॉईल मल्टीप्लायर 13 वर्षाचं अनुसंधान आहे.
2) सॉईल मल्टीप्लायर मद्ये 100 टक्के पोटॅशियम ह्यूमेट आहे.
3) एक किलो सॉईल मल्टीप्लायर मद्ये एक ट्रॉली शेणखता मद्ये जितका सेंद्रिय कर्ब असतो तितका आहे.
4) सॉईल मल्टीप्लायर सर्व प्रकारच्या पिकांना जमिनीतून देता यतो, बीज प्रक्रिया करून देता यतो,पिकांना फवारणी मधून देता यतो,रासायनिक खतांसोबत मिक्स करून देता यतो,ड्रीप द्वारे देता यतो, माती रेती सोबत मिक्स करून सुद्धा देता यतो.
5) सॉईल मल्टीप्लायर च्या वापराने रासानिक खतांच्या वापरामुळे खराब झालेली जमीन दुरुस्त करता यतो.
6) सॉईल मल्टीप्लायर चा वापर करून पिकांचा कुपोषण भरून काढता यतो.
7) पिकांची रोग प्रतिकारक शक्ती वाढते.
8) उत्पादन खर्च कमी होतो.
9) कीड व रोग कमी यतात.
10) पाने गडद हिरवी आणि मोठ्या आकाराची यतात.
11) पिकामध्ये सफेद मुळांची संख्या वाढते त्यामुळे मोठ्या पीक मोठ्या प्रमाणात जमिनीतील अन्न द्रव्य उपलब्ध करून घेतात.
12) फुलगळ,फळगळ कमी होते.
13) पहिल्याच वर्षा पासून 20-30 टक्के उत्पदात वाढ होते.
14) 5-7 वर्षात जमिनीत पूर्णपणे नैसर्गिक कार्यप्रणाली काम करायला सुरवात होते.
15) सॉईल मल्टीप्लायर 1 किलो, 5 कीलो बॉक्स, आणि 10 किलो बॉक्स मद्ये उपलब्ध आहे.
*किंमत*
*1 किलो -950 रुपये* (पोस्टल चार्ज वेगळा लागेल फक्त १ किलो साठी)
*5 किलो बॉक्स -4100 रुपये*
*10 किलो बॉक्स -7500 रुपये*
मटेरियल संपूर्ण भारतात कुठेही पुरवला जाईल

*अधिक माहितीसाठी संपर्क साधा*
( फोटो)
प्रा.अनंत तागडे
एम.एसी.कृषी.नेट.
7972247976
7030544033

Address

Gondia
441807

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Anant Organic Farming posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Share

Category