Osty Mewati

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केवल हाँ या ना में अपनी कीमती राय जरूर दीजिए.....🤔🇮🇳👇👇      The Punjab Kings dugout was filled with raw emotion on Tuesd...
16/02/2026

केवल हाँ या ना में अपनी कीमती राय जरूर दीजिए.....🤔🇮🇳👇👇


The Punjab Kings dugout was filled with raw emotion on Tuesday evening as 24-year-old Priyansh Arya lit up the Mullanpur stadium with a breathtaking century against Chennai Super Kings (CSK) in IPL 2025. Yet, it was team co-owner Preity Zinta’s jubilant reaction that truly stole the spotlight—she jumped in celebration, her joy palpable as Arya scripted history.
Arya, a left-handed batter hailing from Delhi, announced his arrival in grand fashion, smashing 103 runs off just 42 deliveries—a knock decorated with seven fours and nine massive sixes.
His blistering innings made him the second-fastest Indian to reach a century in IPL history, achieving the milestone in just 39 balls. Only Yusuf Pathan’s iconic 37-ball ton from 2010 remains ahead. As Arya raised his bat after clearing long-on for a six to complete his century, cameras zoomed in on the Punjab Kings camp, where an elated Preity Zinta leapt to her feet, clapping and cheering along with the roaring crowd.
Following Punjab Kings’ 18-run win, Preity Zinta caught up with the young star for a post-match interview.
"Aapko mai ek din pehle mili thi to aapne ek shabd nahi bola tha, ekdum silent the aur aapne itni zabardast game kheli, so how is it? [I met you a day before and you didn’t say a single word—you were completely silent. And then you played such an incredible game, so how does it feel?]" Preity asked Priyansh.
To which Arya replied with a smile: "Jab hum mile they to mujhe aapki baatein sunne mein maza aa rha tha isliye mai kuch bol nahi rha tha. Aur game ke baat karein to bahot achi feeling hai, out of the world feeling hai, top of the world feeling hai [When we met, I was really enjoying listening to you, that’s why I wasn’t saying much. And if we talk about the game, it feels amazing—like an out of the world feeling, a top of the world feeling]."
Arya’s innings wasn’t just another power-hitting show—it was the result of a rising journey th

"Egyptian Museum"Unveiling History: The 4,500-Year-Old Tunic at the Egyptian 🤯👀🎁👇                                       ...
16/02/2026

"Egyptian Museum"Unveiling History: The 4,500-Year-Old Tunic at the Egyptian 🤯👀🎁👇

Museum" Museum

Treasures

Through the MGNREGA Bachao SangramThe Congress party demands 👇
11/01/2026

Through the MGNREGA Bachao Sangram

The Congress party demands 👇

कांग्रेस ✋
20/12/2025

कांग्रेस ✋

🗳️ फैसला आपका: सशक्त भारत या मजबूर भारत? 🇮🇳मित्रों, यह तस्वीर एक कड़वा सच बयां करती है। लिखा है, "डरो मत यहाँ चोरी नहीं ह...
19/12/2025

🗳️ फैसला आपका: सशक्त भारत या मजबूर भारत? 🇮🇳

मित्रों, यह तस्वीर एक कड़वा सच बयां करती है। लिखा है, "डरो मत यहाँ चोरी नहीं होगी।" और यह भरोसा आज पूरा देश सिर्फ एक ही शख्स पर करता है—श्री नरेंद्र मोदी। 💪

यह चुनाव सिर्फ दो पार्टियों या दो चेहरों के बीच का नहीं है, यह चुनाव भारत के भविष्य की दिशा तय करने का है। पिछले 10 वर्षों में हमने देखा है कि जब नीयत साफ़ हो और नेतृत्व मजबूत हो, तो क्या कुछ मुमकिन है। 🔥

एक तरफ भाजपा (BJP) है, जिसका मतलब है—विकास, राष्ट्रवाद और अंत्योदय। मोदी जी के नेतृत्व में भारत आज विश्व पटल पर गर्व से सिर ऊंचा करके खड़ा है। 🌏 गरीबों को पक्के मकान, हर घर जल, उज्ज्वला योजना, जन-धन खाते और डिजिटल इंडिया जैसी क्रांतियों ने आम आदमी का जीवन बदला है। आज देश का खजाना सुरक्षित हाथों में है, और भ्रष्टाचारियों में डर का माहौल है। 🚫💰

दूसरी तरफ कांग्रेस है, जिनका इतिहास घोटालों, तुष्टिकरण और परिवारवाद से भरा है। क्या हम फिर से उस दौर में लौटना चाहते हैं जहाँ देश के संसाधनों पर पहला हक किसी खास वर्ग का बताया जाता था? 🤔

आज भारत एक निर्णायक मोड़ पर है। आपका एक वोट यह तय करेगा कि हम 'विकसित भारत' की ओर तेज गति से बढ़ेंगे या फिर से भ्रष्टाचार और कुशासन के अंधेरे में खो जाएंगे।

इसलिए, डरें नहीं, बल्कि गर्व से अपना कर्तव्य निभाएं। विकास को चुनें, सुरक्षा को चुनें, और एक मजबूत सरकार को चुनें।

कमल का बटन दबाएं, भाजपा को जिताएं! 🙏🪷
🇮🇳🪷🗳️

18/12/2025

मैंने पहले ही कहा था - “ट्रंप के टैरिफ़ एक आर्थिक तूफ़ान बनकर आने वाले हैं, जिससे करोड़ों लोगों को नुक़सान होगा - मगर नरेंद्र मोदी छुप कर बैठे हैं।” आज भदोही के बुनकर उसी चेतावनी की ज़मीनी सच्चाई बयान कर रहे हैं।

जनसंसद में भदोही के बुनकरों से मुलाक़ात हुई - उन्होंने अपने हाथों से बनाई हुई एक सुंदर कालीन भेंट की, जिसमें उनके हुनर, मेहनत और सदियों पुरानी कला की झलक साफ़ दिखाई देती है। उन्होंने बताया कि कभी ‘कार्पेट सिटी’ कहलाने वाला भदोही आज बदहाली का शिकार है।

अमेरिका की भारत-विरोधी टैरिफ़ नीति का भयंकर असर देश के कई उद्योगों पर पड़ा है, और भदोही का कार्पेट व्यापार भी उससे लगभग तबाह हो गया है। दुर्भाग्य यह है कि सरकार ने इस उद्योग को संभालने या पुनर्जीवित करने के लिए - न विदेश नीति द्वारा, न किसी राष्ट्रीय योजना से - कोई ठोस क़दम नहीं उठाया।

नतीजा यह है कि निर्यात लगातार घट रहा है और कारोबार बांग्लादेश, पाकिस्तान और नेपाल जैसे देशों की ओर शिफ्ट हो रहा है।

यह सब प्रधानमंत्री की ही संसदीय क्षेत्र की सच्चाई है - जहाँ बुनकर आज कह रहे हैं “चिराग़ तले अंधेरा”, क्योंकि मोदी जी ने उनकी तकलीफ़ों से आँखें मूँद ली हैं।

सदियों पुरानी यह कला, जो उनके व्यापार का आधार है, भारत की पहचान है और लाखों लोगों की रोज़ी-रोटी का साधन है, आज शोषण और सरकारी उपेक्षा का शिकार है। हालात इतने खराब हैं कि इन मेहनतकश परिवारों को सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सुविधाएँ तक उपलब्ध नहीं हैं।

यही वे छोटे उद्योग और छोटे व्यवसाय हैं जिनकी मैं लगातार बात करता हूँ - जो रोज़गार पैदा करते हैं, अर्थव्यवस्था को मज़बूत करते हैं और देश को आगे बढ़ाते हैं।

अब ज़रूरत है कि नीतियों और आर्थिक सहयोग के ज़रिए शक्ति इन लोगों के हाथों में लौटाई जाए, ताकि ये कारीगर फिर से भारत का नाम रोशन कर सकें और देश की अर्थव्यवस्था का पहिया आगे बढ़ा सकें। Part 13

18/12/2025

मैंने पहले ही कहा था - “ट्रंप के टैरिफ़ एक आर्थिक तूफ़ान बनकर आने वाले हैं, जिससे करोड़ों लोगों को नुक़सान होगा - मगर नरेंद्र मोदी छुप कर बैठे हैं।” आज भदोही के बुनकर उसी चेतावनी की ज़मीनी सच्चाई बयान कर रहे हैं।

जनसंसद में भदोही के बुनकरों से मुलाक़ात हुई - उन्होंने अपने हाथों से बनाई हुई एक सुंदर कालीन भेंट की, जिसमें उनके हुनर, मेहनत और सदियों पुरानी कला की झलक साफ़ दिखाई देती है। उन्होंने बताया कि कभी ‘कार्पेट सिटी’ कहलाने वाला भदोही आज बदहाली का शिकार है।

अमेरिका की भारत-विरोधी टैरिफ़ नीति का भयंकर असर देश के कई उद्योगों पर पड़ा है, और भदोही का कार्पेट व्यापार भी उससे लगभग तबाह हो गया है। दुर्भाग्य यह है कि सरकार ने इस उद्योग को संभालने या पुनर्जीवित करने के लिए - न विदेश नीति द्वारा, न किसी राष्ट्रीय योजना से - कोई ठोस क़दम नहीं उठाया।

नतीजा यह है कि निर्यात लगातार घट रहा है और कारोबार बांग्लादेश, पाकिस्तान और नेपाल जैसे देशों की ओर शिफ्ट हो रहा है।

यह सब प्रधानमंत्री की ही संसदीय क्षेत्र की सच्चाई है - जहाँ बुनकर आज कह रहे हैं “चिराग़ तले अंधेरा”, क्योंकि मोदी जी ने उनकी तकलीफ़ों से आँखें मूँद ली हैं।

सदियों पुरानी यह कला, जो उनके व्यापार का आधार है, भारत की पहचान है और लाखों लोगों की रोज़ी-रोटी का साधन है, आज शोषण और सरकारी उपेक्षा का शिकार है। हालात इतने खराब हैं कि इन मेहनतकश परिवारों को सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सुविधाएँ तक उपलब्ध नहीं हैं।

यही वे छोटे उद्योग और छोटे व्यवसाय हैं जिनकी मैं लगातार बात करता हूँ - जो रोज़गार पैदा करते हैं, अर्थव्यवस्था को मज़बूत करते हैं और देश को आगे बढ़ाते हैं।

अब ज़रूरत है कि नीतियों और आर्थिक सहयोग के ज़रिए शक्ति इन लोगों के हाथों में लौटाई जाए, ताकि ये कारीगर फिर से भारत का नाम रोशन कर सकें और देश की अर्थव्यवस्था का पहिया आगे बढ़ा सकें। Part 12

18/12/2025

मैंने पहले ही कहा था - “ट्रंप के टैरिफ़ एक आर्थिक तूफ़ान बनकर आने वाले हैं, जिससे करोड़ों लोगों को नुक़सान होगा - मगर नरेंद्र मोदी छुप कर बैठे हैं।” आज भदोही के बुनकर उसी चेतावनी की ज़मीनी सच्चाई बयान कर रहे हैं।

जनसंसद में भदोही के बुनकरों से मुलाक़ात हुई - उन्होंने अपने हाथों से बनाई हुई एक सुंदर कालीन भेंट की, जिसमें उनके हुनर, मेहनत और सदियों पुरानी कला की झलक साफ़ दिखाई देती है। उन्होंने बताया कि कभी ‘कार्पेट सिटी’ कहलाने वाला भदोही आज बदहाली का शिकार है।

अमेरिका की भारत-विरोधी टैरिफ़ नीति का भयंकर असर देश के कई उद्योगों पर पड़ा है, और भदोही का कार्पेट व्यापार भी उससे लगभग तबाह हो गया है। दुर्भाग्य यह है कि सरकार ने इस उद्योग को संभालने या पुनर्जीवित करने के लिए - न विदेश नीति द्वारा, न किसी राष्ट्रीय योजना से - कोई ठोस क़दम नहीं उठाया।

नतीजा यह है कि निर्यात लगातार घट रहा है और कारोबार बांग्लादेश, पाकिस्तान और नेपाल जैसे देशों की ओर शिफ्ट हो रहा है।

यह सब प्रधानमंत्री की ही संसदीय क्षेत्र की सच्चाई है - जहाँ बुनकर आज कह रहे हैं “चिराग़ तले अंधेरा”, क्योंकि मोदी जी ने उनकी तकलीफ़ों से आँखें मूँद ली हैं।

सदियों पुरानी यह कला, जो उनके व्यापार का आधार है, भारत की पहचान है और लाखों लोगों की रोज़ी-रोटी का साधन है, आज शोषण और सरकारी उपेक्षा का शिकार है। हालात इतने खराब हैं कि इन मेहनतकश परिवारों को सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सुविधाएँ तक उपलब्ध नहीं हैं।

यही वे छोटे उद्योग और छोटे व्यवसाय हैं जिनकी मैं लगातार बात करता हूँ - जो रोज़गार पैदा करते हैं, अर्थव्यवस्था को मज़बूत करते हैं और देश को आगे बढ़ाते हैं।

अब ज़रूरत है कि नीतियों और आर्थिक सहयोग के ज़रिए शक्ति इन लोगों के हाथों में लौटाई जाए, ताकि ये कारीगर फिर से भारत का नाम रोशन कर सकें और देश की अर्थव्यवस्था का पहिया आगे बढ़ा सकें। Part 11

18/12/2025

मैंने पहले ही कहा था - “ट्रंप के टैरिफ़ एक आर्थिक तूफ़ान बनकर आने वाले हैं, जिससे करोड़ों लोगों को नुक़सान होगा - मगर नरेंद्र मोदी छुप कर बैठे हैं।” आज भदोही के बुनकर उसी चेतावनी की ज़मीनी सच्चाई बयान कर रहे हैं।

जनसंसद में भदोही के बुनकरों से मुलाक़ात हुई - उन्होंने अपने हाथों से बनाई हुई एक सुंदर कालीन भेंट की, जिसमें उनके हुनर, मेहनत और सदियों पुरानी कला की झलक साफ़ दिखाई देती है। उन्होंने बताया कि कभी ‘कार्पेट सिटी’ कहलाने वाला भदोही आज बदहाली का शिकार है।

अमेरिका की भारत-विरोधी टैरिफ़ नीति का भयंकर असर देश के कई उद्योगों पर पड़ा है, और भदोही का कार्पेट व्यापार भी उससे लगभग तबाह हो गया है। दुर्भाग्य यह है कि सरकार ने इस उद्योग को संभालने या पुनर्जीवित करने के लिए - न विदेश नीति द्वारा, न किसी राष्ट्रीय योजना से - कोई ठोस क़दम नहीं उठाया।

नतीजा यह है कि निर्यात लगातार घट रहा है और कारोबार बांग्लादेश, पाकिस्तान और नेपाल जैसे देशों की ओर शिफ्ट हो रहा है।

यह सब प्रधानमंत्री की ही संसदीय क्षेत्र की सच्चाई है - जहाँ बुनकर आज कह रहे हैं “चिराग़ तले अंधेरा”, क्योंकि मोदी जी ने उनकी तकलीफ़ों से आँखें मूँद ली हैं।

सदियों पुरानी यह कला, जो उनके व्यापार का आधार है, भारत की पहचान है और लाखों लोगों की रोज़ी-रोटी का साधन है, आज शोषण और सरकारी उपेक्षा का शिकार है। हालात इतने खराब हैं कि इन मेहनतकश परिवारों को सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सुविधाएँ तक उपलब्ध नहीं हैं।

यही वे छोटे उद्योग और छोटे व्यवसाय हैं जिनकी मैं लगातार बात करता हूँ - जो रोज़गार पैदा करते हैं, अर्थव्यवस्था को मज़बूत करते हैं और देश को आगे बढ़ाते हैं।

अब ज़रूरत है कि नीतियों और आर्थिक सहयोग के ज़रिए शक्ति इन लोगों के हाथों में लौटाई जाए, ताकि ये कारीगर फिर से भारत का नाम रोशन कर सकें और देश की अर्थव्यवस्था का पहिया आगे बढ़ा सकें। Part 10

18/12/2025

मैंने पहले ही कहा था - “ट्रंप के टैरिफ़ एक आर्थिक तूफ़ान बनकर आने वाले हैं, जिससे करोड़ों लोगों को नुक़सान होगा - मगर नरेंद्र मोदी छुप कर बैठे हैं।” आज भदोही के बुनकर उसी चेतावनी की ज़मीनी सच्चाई बयान कर रहे हैं।

जनसंसद में भदोही के बुनकरों से मुलाक़ात हुई - उन्होंने अपने हाथों से बनाई हुई एक सुंदर कालीन भेंट की, जिसमें उनके हुनर, मेहनत और सदियों पुरानी कला की झलक साफ़ दिखाई देती है। उन्होंने बताया कि कभी ‘कार्पेट सिटी’ कहलाने वाला भदोही आज बदहाली का शिकार है।

अमेरिका की भारत-विरोधी टैरिफ़ नीति का भयंकर असर देश के कई उद्योगों पर पड़ा है, और भदोही का कार्पेट व्यापार भी उससे लगभग तबाह हो गया है। दुर्भाग्य यह है कि सरकार ने इस उद्योग को संभालने या पुनर्जीवित करने के लिए - न विदेश नीति द्वारा, न किसी राष्ट्रीय योजना से - कोई ठोस क़दम नहीं उठाया।

नतीजा यह है कि निर्यात लगातार घट रहा है और कारोबार बांग्लादेश, पाकिस्तान और नेपाल जैसे देशों की ओर शिफ्ट हो रहा है।

यह सब प्रधानमंत्री की ही संसदीय क्षेत्र की सच्चाई है - जहाँ बुनकर आज कह रहे हैं “चिराग़ तले अंधेरा”, क्योंकि मोदी जी ने उनकी तकलीफ़ों से आँखें मूँद ली हैं।

सदियों पुरानी यह कला, जो उनके व्यापार का आधार है, भारत की पहचान है और लाखों लोगों की रोज़ी-रोटी का साधन है, आज शोषण और सरकारी उपेक्षा का शिकार है। हालात इतने खराब हैं कि इन मेहनतकश परिवारों को सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सुविधाएँ तक उपलब्ध नहीं हैं।

यही वे छोटे उद्योग और छोटे व्यवसाय हैं जिनकी मैं लगातार बात करता हूँ - जो रोज़गार पैदा करते हैं, अर्थव्यवस्था को मज़बूत करते हैं और देश को आगे बढ़ाते हैं।

अब ज़रूरत है कि नीतियों और आर्थिक सहयोग के ज़रिए शक्ति इन लोगों के हाथों में लौटाई जाए, ताकि ये कारीगर फिर से भारत का नाम रोशन कर सकें और देश की अर्थव्यवस्था का पहिया आगे बढ़ा सकें। Part 9

18/12/2025

मैंने पहले ही कहा था - “ट्रंप के टैरिफ़ एक आर्थिक तूफ़ान बनकर आने वाले हैं, जिससे करोड़ों लोगों को नुक़सान होगा - मगर नरेंद्र मोदी छुप कर बैठे हैं।” आज भदोही के बुनकर उसी चेतावनी की ज़मीनी सच्चाई बयान कर रहे हैं।

जनसंसद में भदोही के बुनकरों से मुलाक़ात हुई - उन्होंने अपने हाथों से बनाई हुई एक सुंदर कालीन भेंट की, जिसमें उनके हुनर, मेहनत और सदियों पुरानी कला की झलक साफ़ दिखाई देती है। उन्होंने बताया कि कभी ‘कार्पेट सिटी’ कहलाने वाला भदोही आज बदहाली का शिकार है।

अमेरिका की भारत-विरोधी टैरिफ़ नीति का भयंकर असर देश के कई उद्योगों पर पड़ा है, और भदोही का कार्पेट व्यापार भी उससे लगभग तबाह हो गया है। दुर्भाग्य यह है कि सरकार ने इस उद्योग को संभालने या पुनर्जीवित करने के लिए - न विदेश नीति द्वारा, न किसी राष्ट्रीय योजना से - कोई ठोस क़दम नहीं उठाया।

नतीजा यह है कि निर्यात लगातार घट रहा है और कारोबार बांग्लादेश, पाकिस्तान और नेपाल जैसे देशों की ओर शिफ्ट हो रहा है।

यह सब प्रधानमंत्री की ही संसदीय क्षेत्र की सच्चाई है - जहाँ बुनकर आज कह रहे हैं “चिराग़ तले अंधेरा”, क्योंकि मोदी जी ने उनकी तकलीफ़ों से आँखें मूँद ली हैं।

सदियों पुरानी यह कला, जो उनके व्यापार का आधार है, भारत की पहचान है और लाखों लोगों की रोज़ी-रोटी का साधन है, आज शोषण और सरकारी उपेक्षा का शिकार है। हालात इतने खराब हैं कि इन मेहनतकश परिवारों को सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सुविधाएँ तक उपलब्ध नहीं हैं।

यही वे छोटे उद्योग और छोटे व्यवसाय हैं जिनकी मैं लगातार बात करता हूँ - जो रोज़गार पैदा करते हैं, अर्थव्यवस्था को मज़बूत करते हैं और देश को आगे बढ़ाते हैं।

अब ज़रूरत है कि नीतियों और आर्थिक सहयोग के ज़रिए शक्ति इन लोगों के हाथों में लौटाई जाए, ताकि ये कारीगर फिर से भारत का नाम रोशन कर सकें और देश की अर्थव्यवस्था का पहिया आगे बढ़ा सकें। Part 8

18/12/2025

मैंने पहले ही कहा था - “ट्रंप के टैरिफ़ एक आर्थिक तूफ़ान बनकर आने वाले हैं, जिससे करोड़ों लोगों को नुक़सान होगा - मगर नरेंद्र मोदी छुप कर बैठे हैं।” आज भदोही के बुनकर उसी चेतावनी की ज़मीनी सच्चाई बयान कर रहे हैं।

जनसंसद में भदोही के बुनकरों से मुलाक़ात हुई - उन्होंने अपने हाथों से बनाई हुई एक सुंदर कालीन भेंट की, जिसमें उनके हुनर, मेहनत और सदियों पुरानी कला की झलक साफ़ दिखाई देती है। उन्होंने बताया कि कभी ‘कार्पेट सिटी’ कहलाने वाला भदोही आज बदहाली का शिकार है।

अमेरिका की भारत-विरोधी टैरिफ़ नीति का भयंकर असर देश के कई उद्योगों पर पड़ा है, और भदोही का कार्पेट व्यापार भी उससे लगभग तबाह हो गया है। दुर्भाग्य यह है कि सरकार ने इस उद्योग को संभालने या पुनर्जीवित करने के लिए - न विदेश नीति द्वारा, न किसी राष्ट्रीय योजना से - कोई ठोस क़दम नहीं उठाया।

नतीजा यह है कि निर्यात लगातार घट रहा है और कारोबार बांग्लादेश, पाकिस्तान और नेपाल जैसे देशों की ओर शिफ्ट हो रहा है।

यह सब प्रधानमंत्री की ही संसदीय क्षेत्र की सच्चाई है - जहाँ बुनकर आज कह रहे हैं “चिराग़ तले अंधेरा”, क्योंकि मोदी जी ने उनकी तकलीफ़ों से आँखें मूँद ली हैं।

सदियों पुरानी यह कला, जो उनके व्यापार का आधार है, भारत की पहचान है और लाखों लोगों की रोज़ी-रोटी का साधन है, आज शोषण और सरकारी उपेक्षा का शिकार है। हालात इतने खराब हैं कि इन मेहनतकश परिवारों को सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सुविधाएँ तक उपलब्ध नहीं हैं।

यही वे छोटे उद्योग और छोटे व्यवसाय हैं जिनकी मैं लगातार बात करता हूँ - जो रोज़गार पैदा करते हैं, अर्थव्यवस्था को मज़बूत करते हैं और देश को आगे बढ़ाते हैं।

अब ज़रूरत है कि नीतियों और आर्थिक सहयोग के ज़रिए शक्ति इन लोगों के हाथों में लौटाई जाए, ताकि ये कारीगर फिर से भारत का नाम रोशन कर सकें और देश की अर्थव्यवस्था का पहिया आगे बढ़ा सकें। Part 7

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