04/08/2016
जो ssp घटना की सूचना मिलते ही,,15 मिनट में घटनास्थल पर पंहुचा
तत्काल कार्यवाही शुरू की,,उसे सस्पेंड कैसे कर सकती है कोई सरकार
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बुलंदशहर ---
। हाईवे पर गैंगरेप मामले में एसएसपी वैभव कृष्ण भी मुख्यमंत्री के गुस्से का शिकार हुए हैं । मातहतों के साथ उन्हें भी निलंबित होना पड़ा हैं । हालांकि, उन पर कार्रवाई को खुद अब पीड़ित परिवार भी गलत ठहरा रहा है । परिवार का कहना है कि घटना सुनने के बाद एसएसपी वैभव कृष्ण हवाई चप्पल में ही मौके पर पहुंचे थे और उन्होंने पूरी बात सुनकर मदद की । केवल डॉक्टर ने जरूर मेडिकल मुआयना के दौरान दुर्व्यवहार किया ।
वैभव कृष्ण की छवि को देखते हुए उन पर गेहूं के साथ घुन पिसने की कहावत फिट बैठ रही । अब सरकार के सामने दिक्कत है सख्त संदेश दिया भी जाए तो कैसे । उधर आईपीएस लॉबी भी अपने युवा साथी वैभव की साफ-सुथरी छवि देखते हुए समर्थन में उतर रही है । एसोसिएशन के ग्रुप में बहस-मुबाहिसे का सिलसिला चल पड़ा है ।
घटना की सूचना मिलते ही वैभव कृष्ण 16 मिनट बाद ही मौके पर हवाई चप्पलों में पहुँच गए थे । पीड़ित परिवार से केस वर्कआउट करने के लिए दो दिन का समय मांगा था, लेकिन उससे पहले ही उन्हे निलंबित कर दिया । उनके निलंबन का व्यापार संगठन और समाजसेवी संगठनों ने विरोध किया है और मुख्यमंत्री को उन्हें बहाल किए जाने के लिए ज्ञापन भेजे है । पुलिस महकमे में भी उनके निलंबन से खासा रोष है ।
वैभव कृष्ण पश्चिमी यूपी के बागपत जिले के रहने वाले हैं । पिता केके शर्मा चिकित्सक हैं। रुड़की से पासआउट होने के बाद संघ लोकसेवा आयोग की परीक्षा में बैठे । 2009 में आइपीएस चुने गए । यूपी में 2010 कैडर मिला ।
32 साल के आईपीएस वैभव कृष्ण को हाईवे गैंगरेप की घटना ने आज हालात का मारा बना दिया । छह साल की पुलिस सर्विस में अब तक उनके दामन पर कोई दाग नहीं रह । मगर निचले स्तर के दारोगा व कोतवाल के रात में गश्त के बजाए सोने की लापरवाही ने इस अफसर की छवि पर भी दाग लगा दिया । चूंकि बॉस हैं तो मातहतों की लापरवाही की सजा तो झेलनी ही पड़ेगी, इस नाते वे भी इसमें पीसे गए।
गाजीपुर में जब पहली बार एसपी की पोस्टिंग मिली तो वैभव कृष्ण ने जीरो टालरेंस का परिचय दिया । मंत्री कैलाश यादव के करीबी अमरनाथ यादव को मर्डर केस में जेल भिजवा दिया । पिछले साल जून और जुलाई में जिले के सभी वारंटियों को अंदर भेजा । तब गाजीपुर जैसे जिले में अपराध का ग्राफ नीचे आ गया ।
करीबियों पर कार्रवाई से खफा मंत्री कैलाश यादव ने जब पिछले साल जुलाई में वैभव का ट्रांसफर करा दिया तो गाजीपुर की जनता सड़क पर उतर गई । यहां तक कि ट्रांसफर रोके जाने के विरोध में जनता हाईकोर्ट भी गई । यह दीगर बात है कि ट्रांसफर-पोस्टिंग सरकार के क्षेत्राधिकार का मामला होने के कारण कोई राहत नहीं मिली।
सरकार की भी अपनी मजबूरी है
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साफ-सुथरी छवि के आईपीएस वैभव कृष्ण पर कार्रवाई करने को लेकर सरकार के सूत्र अपनी मजबूरी बता रहे हैं । कहना है कि जिस तरह से हाईवे पर मां-बेटी के साथ गैंगरेप की घटना हुई उसने पूरे देश में खलबली मचा दी है । ऐसे में टॉप टू बॉटम अगर पुलिस अफसरों को सरकार नहीं नापेगी तो फिर सरकार की सख्ती का संदेश कैसे दिया जा सकता है।
जीआरपी रहे तो ट्रेनों में अपराध रोकने को चलाए कई अभियान
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यूपी कैडर 2010 बैच के आईपीएस वैभव पहले मुरादाबाद में एसपी जीआरपी रहे । इस दौरान दिल्ली-लखनऊ रूट की ट्रेनों में अपराध रोकने के लिए उन्होंने कई चर्चित अभियान चलाए । जहरखुरानियों का बयौरा हर थाने में फोटों सहित मुहैयया कराया ।