27/12/2025
सानिध्य_Vlog #सुविचार ।।भगवद्गीता अध्याय 2 श्लोक 66.
नास्ति बुद्धिरयुक्तस्य न च युक्तस्य भावना।
न चाभावयतः शान्तिरशान्तस्य कुतः सुखम्॥
अर्थ:जो मन और इंद्रियों को वश में नहीं करता, उसकी बुद्धि स्थिर नहीं होती; ऐसे अनियंत्रित मन वाले में भावना नहीं होती, भावनाहीन को शांति नहीं मिलती, और अशांत व्यक्ति को सुख कैसे मिल सकता है,
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