Mantra Happy Homes

Mantra Happy Homes Mantra Happy Homes, Ready to Move-in Flats, HRDA Approved, Free Hold Land Title, Sidcul, Haridwar...

27/12/2025

सानिध्य_Vlog #सुविचार ।।भगवद्गीता अध्याय 2 श्लोक 66.
नास्ति बुद्धिरयुक्तस्य न च युक्तस्य भावना।
न चाभावयतः शान्तिरशान्तस्य कुतः सुखम्॥
अर्थ:जो मन और इंद्रियों को वश में नहीं करता, उसकी बुद्धि स्थिर नहीं होती; ऐसे अनियंत्रित मन वाले में भावना नहीं होती, भावनाहीन को शांति नहीं मिलती, और अशांत व्यक्ति को सुख कैसे मिल सकता है,
#अध्यात्म #भगवतगीता #आध्यात्मिकयात्रा #विचारधारा #उपदेशात्मक #संस्कृति #उपनिषद #शुभ #संस्कार

26/12/2025

सानिध्य_Vlog #सुविचार ।।भगवद्गीता अध्याय 2 श्लोक 65.

प्रसादे सर्वदुःखानां हानिरस्योपजायते।
प्रसन्नचेतसो ह्याशु बुद्धिः पर्यवतिष्ठते॥

अर्थ:भगवान की कृपा से (या अंतःकरण की प्रसन्नता से) सभी दुखों का नाश हो जाता है, और उस प्रसन्न चित्त वाले व्यक्ति की बुद्धि शीघ्र ही (सब ओर से हटकर) परमात्मा में अच्छी तरह स्थिर हो जाती है।
#अध्यात्म #भगवतगीता #आध्यात्मिकयात्रा #विचारधारा #उपदेशात्मक #संस्कृति #उपनिषद #शुभ #संस्कार

25/12/2025

सानिध्य_Vlog #सुविचार ।।भगवद्गीता अध्याय 2 श्लोक 64.

रागद्वेषवियुक्तैस्तु विषयानिन्द्रियैश्चरन्।
आत्मवश्यैर्विधेयात्मा प्रसादमधिगच्छति॥

अर्थ:जो व्यक्ति मन और इंद्रियों को वश में रखता है, और राग (आसक्ति) व द्वेष (घृणा) से मुक्त होकर इंद्रियों के विषयों (भोगों) में विचरण करता है, वह आंतरिक प्रसन्नता (शांति) को प्राप्त करता है
#अध्यात्म #भगवतगीता #आध्यात्मिकयात्रा #विचारधारा #उपदेशात्मक #संस्कृति #उपनिषद #शुभ #संस्कार

24/12/2025

सानिध्य_Vlog #सुविचार ।।भगवद्गीता अध्याय 2 श्लोक 63.

क्रोधाद्भवति सम्मोहः सम्मोहात्स्मृतिविभ्रमः।
स्मृतिभ्रंशाद् बुद्धिनाशो बुद्धिनाशात्प्रणश्यति॥

अर्थ:क्रोध से मूढ़ता (सम्मोह) आती है, मूढ़ता से स्मृति में भ्रम (स्मृतिविभ्रम) होता है, स्मृति में भ्रम होने से बुद्धि (ज्ञानशक्ति) का नाश होता है, और बुद्धि के नाश होने पर मनुष्य का पतन (प्रणश्यति) हो जाता है
#भगवतगीता #अध्यात्म #विचारधारा

23/12/2025

सानिध्य_Vlog #सुविचार ।।भगवद्गीता अध्याय 2 श्लोक 62.

ध्यायतो विषयान्पुंसः सङ्गस्तेषूपजायते।
सङ्गात्सञ्जायते कामः कामात्क्रोधोऽभिजायते॥

अर्थ:विषयों का चिन्तन करने वाले पुरुष की उन विषयों में आसक्ति हो जाती है, आसक्ति से उन विषयों की कामना उत्पन्न होती है और कामना में विघ्न पड़ने से क्रोध उत्पन्न होता है।

#अध्यात्म #भगवतगीता #आध्यात्मिकयात्रा

22/12/2025

सानिध्य_Vlog #सुविचार ।।भगवद्गीता अध्याय 2 श्लोक 61.
तानि सर्वाणि संयम्य युक्त आसीत मत्परः।
वशे हि यस्येन्द्रियाणि तस्य प्रज्ञा प्रतिष्ठिता।।

अर्थ:इसलिए, साधक को चाहिए कि वह उन सभी इंद्रियों को वश में करके, मुझमें (भगवान/परमात्मा में) एकाग्रचित्त होकर बैठे, क्योंकि जिस पुरुष की इंद्रियाँ वश में होती हैं, उसी की बुद्धि स्थिर (स्थिरप्रज्ञ) होती है।
#अध्यात्म #भगवतगीता #आध्यात्मिकयात्रा #विचारधारा #उपदेशात्मक #संस्कृति #उपनिषद #शुभ #संस्कार

21/12/2025

सानिध्य_Vlog #सुविचार ।।भगवद्गीता अध्याय 2 श्लोक 60.
यततो ह्यपि कौन्तेय पुरुषस्य विपश्चितः।
इन्द्रियाणि प्रमाथीनि हरन्ति प्रसभं मनः॥

अर्थ:हे कुन्तीपुत्र! बुद्धिमान (विवेकशील) पुरुष के भी, जो इंद्रियों को वश में करने का प्रयत्न करता है, मन को ये चंचल और बलवान इंद्रियां बलपूर्वक हर लेती हैं (अपनी ओर खींच लेती हैं).
#अध्यात्म #भगवतगीता #आध्यात्मिकयात्रा #विचारधारा #उपदेशात्मक #संस्कृति #उपनिषद #शुभ #संस्कार

20/12/2025

सानिध्य_Vlog #सुविचार ।।भगवद्गीता अध्याय 2 श्लोक 59.
विषया विनिवर्तन्ते निराहारस्य देहिनः।
रसवर्जं रसोऽप्यस्य परं दृष्ट्वा निवर्तते॥
अर्थ:यह श्लोक स्थितप्रज्ञ (स्थिर बुद्धि वाले) व्यक्ति के लक्षणों का वर्णन करता है, जहाँ इंद्रिय-संयम से आसक्ति खत्म नहीं होती, बल्कि परम ज्ञान से होती है।
#अध्यात्म #भगवतगीता #आध्यात्मिकयात्रा #विचारधारा #उपदेशात्मक #संस्कृति #उपनिषद #शुभ #संस्कार

19/12/2025

सानिध्य_Vlog #सुविचार ।।भगवद्गीता अध्याय 2 श्लोक 58.
यदा संहरते चायं कूर्मोऽङ्गानि इव सर्वशः।
इन्द्रियाणि इन्द्रियार्थेभ्यः तस्य प्रज्ञा प्रतिष्ठिता॥
अर्थ:जिस प्रकार कछुआ अपने सभी अंगों को अपने खोल के अंदर समेट लेता है, उसी प्रकार जब कोई व्यक्ति अपनी इंद्रियों को इंद्रियों के विषयों (बाहरी दुनिया की वस्तुओं) से पूरी तरह हटा लेता है, तब उसकी बुद्धि (दिव्य चेतना/ज्ञान) स्थिर हो जाती है और वह आत्मज्ञान प्राप्त करता है
#अध्यात्म #भगवतगीता #आध्यात्मिकयात्रा #विचारधारा #उपदेशात्मक #संस्कृति #उपनिषद #शुभ #संस्कार

18/12/2025

सानिध्य_Vlog #सुविचार ।।भगवद्गीता अध्याय 2 श्लोक 57.
यः सर्वत्रानभिस्नेहस्तत्तत्प्राप्य शुभाशुभम्।
नाभिनन्दति न द्वेष्टि तस्य प्रज्ञा प्रतिष्ठिता ॥
अर्थ:जो व्यक्ति हर स्थिति में अनासक्त रहता है, न तो शुभ फल मिलने पर खुश होता है और न ही अशुभ मिलने पर दुखी, उसकी बुद्धि स्थिर (स्थितप्रज्ञ) होती है;
#अध्यात्म #भगवतगीता #आत्मज्ञान #सच्चाई #शांति #सुख #मोहमाया #सच्चामार्ग #अनुभूति #आध्यात्मिकयात्रा #विचारधारा #उपदेशात्मक #संस्कृति #उपनिषद #शुभ #सानिध्य #संस्कार

17/12/2025

सानिध्य_Vlog #सुविचार ।।भगवद्गीता अध्याय 2 श्लोक 56.
दुःखेष्वनुद्विग्नमनाः सुखेषु विगतस्पृहः।
वीतरागभयक्रोधः स्थितधीर्मुनिरुच्यते ॥

अर्थ:जो व्यक्ति दुखों में विचलित नहीं होता, सुखों में आसक्ति (लालसा) नहीं रखता, और जो राग (आसक्ति), भय और क्रोध से मुक्त है, उसे स्थिर बुद्धि वाला मुनि या साधक कहा जाता है. यह श्लोक मन की समता और इंद्रियों पर नियंत्रण के महत्व को दर्शाता है, जो ज्ञान प्राप्ति के लिए आवश्यक है.

#अध्यात्म #भगवतगीता #आत्मज्ञान #सच्चाई #शांति #सुख #जीवनकाअर्थ #मोहमाया #आध्यात्मिकयात्रा #विचारधारा #उपदेशात्मक #संस्कृति #उपनिषद #शुभ #सानिध्य #संस्कार #सानिध्य

Address

Mantra Happy Homes, SIDCUL, Haridwar(Near Raja Biscuit Chowk)
Haridwar
249403

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Mantra Happy Homes posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Business

Send a message to Mantra Happy Homes:

Share