10/03/2021
[{((((((((((((सीरवीयों में विरोधाभासिता))))))))))))}]
मत भिन्नता,मतैक्य का अभाव,पूर्वाग्रहिता,व्यक्तिगत खुन्नसता,वैचारिक दुर्भावना👈 ये सभी मानवीय स्वभाव की प्रथकतावादी कमजोरियां हम सब में कम या अधिकता के रूप में विद्यमान रहती है।जो कि स्वाभाविक भी है।मानव का इनसे जुदा होना संभव भी नहीं है।
परंतु कुछ सीरवीयों के रहन_सहन,व्यवहार और जीवन शैली में विपरीतता व वामपंथीता कुछ ज्यादा ही झलकती है। जैसे~
1)एक छोटे से गांव की सीरवी समिति का पदाधिकारी~सचिव,,कोषाध्यक्ष,अध्यक्ष अपने आप को " अखिल भारतीय महासभा"शब्द से संबोधित करता है।अरे भाई महासभा एक समिति का पर्याय है, जो राष्ट्रीय स्तर पर बनी है।या तो उसे "अखिल"शब्द का अर्थ मालूम नहीं है या फिर वह अपने_आप को ग्रामीण /तहसील/जिला/राज्य स्तर का पदाधिकारी न मानते हुए सीधा राष्ट्रीय स्तर का मानकर झूठी शान बघारता है।हास्यापद बात यह है कि जब इस प्रकार की बनावटी_दिखावटी लिखावट अन्य समाजी देखता_सुनता_पड़ता है तो उनके समक्ष हमें शर्मसार होना पड़ता है।
2) कुछैक वर्षों से नई परिपाटी 👉अंतिम क्रिया के कार्यक्रमों ,बडेरों_मंदिरों,सामाजिक भंडारों,मंदिरों के भोजनालयों में बड़_चढ़ कर दान दिया जा रहा है और ऐसे दान दाताओं के पक्ष में सोशल मीडिया एवम् मंचों द्वारा जमकर बखान किया जाता है तथा उसके पक्ष में कसीदें पड़े जाते है। जो सर्वथा व्यक्तिगत सामर्थ्यानुसार ठीक हो सकता है।
पर मजाल है किसी सीरवी बन्दे ने, किसी आर्थिक रूप से विपन्न विद्यार्थियों/कृषकों/मजदूरों/भूमिहीनों/जरूरतमंदों को दी जाने वाली मदद का सार्वजनिक रूप से बखान किया हो या तारीफ कर उत्साह वर्धन किया हो।
हालाकि ऐसे मौकों पर जिस क्षेत्र में सीरवी स्कूल बने है,वहां पर भी दान दिया जाने लगा है , जो काबिले तारीफ है।
3)सोशल मीडिया पर जन्म दिन,वर्ष गांठ,सालगिरह पर बधाइयों का तांता और मृत्यु पर श्रद्धांजलियों का अंबार लगा रहता है । जो अच्छा भी है, पर खेद है की उन्हीं बंदों के रचनात्मक कार्यों की तारीफ नहीं की जाती है।
4)किसी बन्धु द्वारा गैर जरूरी, अनावश्यक व out of date रीति _रिवाजों के परिपालन पर प्रश्न उठाने पर, 👉सीरवी जाति की प्रण_प्रतिष्ठा,महान इतिहास व मान_मर्यादा की दुहाई देकर जबरदस्त विरोध किया जाता है।
5) अंधा_धुंध मंदिर निर्माणों के विरुद्ध एक भी लफ्ज़ कांटे की तरह चुभता है।तथापि शिक्षा_चिकित्सा के मंदिरों को व्यावसायिक मानकर,व्यक्तिगत लाभ की श्रेणी में गिना कर दोयम दर्जे पर धकेल दिया है।
6)जातीय प्रतीक चिन्ह और जातीय ध्वज _पताका की रचना पर प्रति प्रश्न उछाल कर, महासभा की अनुमति के बगैर उठाया गया कदम बताकर, बाहें चढ़ाई जा रही है।
7)सामाजिक रूप से छपने वाली मासिक पत्र_पत्रिकाओं में "विरोधियों" की रचना न छापकर, एकाधिकार रूपी कुंडली मारकर, समाज को डसा जा रहा है।
8) पत्र_पत्रिकाओं के संपादकों की सनक और जिद देखिए कि जो जातीय प्रतीक चिन्ह पिछले 15वर्षों से सीरवीयों की आन_बान_शान का प्रतीक बना हुआ है,उसे अपनी व्यक्तिगत जागीर मानकर, पत्रिकाओं में न छापकर➡️ सम्पूर्ण सीरवी समाज की तौहीन,सार्वजनिक बेइज्जती और पर
समाजों में जग हंसाई के पात्र सिद्ध हो रहे है।
9)धार्मिक कार्यक्रमों की बोलियों में शिक्षा के उन्नयन व प्रतिभाओं के प्रोत्साहन पर स्कॉलरशिप के लिए प्राप्त धन राशि का जरूरत मंद तक सहायता का लाभ, न के बराबर पहुंच पाता है।दूसरी ओर भोजन_भंडारों,प्राण_प्रतिष्ठानों,भजन मंडलियों, फूहड़ नृत्यांगनाओं को प्राथमिकता में उच्च क्रम पर रखा जाता है।
10)परंपरागत जीवन शैली,आदि कालीन रीति _रिवाजों तथा पुरातन पंथी ढकोसलों के विरुद्ध नवीनता व आधुनिक अन्वेषणता को दबाने का प्रयास किया जाता है।
11) मां आई माता जी ने धार्मिक विधि_विधानों को संपन्न करने के लिए पूजा_अर्चना हेतु जिन्हें पुजारी(दीवान) के रूप में प्रतिष्ठित किया था,उन्होंने अपने आप को हर बडेर में फ्रंट लाइन में सबसे आगे विराजित कर लिया और ज्योति स्वरूप माताजी को एक कोने या पीछे कर दिया है। जबकि हमारे लिए माताजी का स्थान सर्वोच्च,सर्व प्रथम व सर्व अव्वल होने से अखंड ज्योति सबसे आगे प्रथम पंक्ति एवम् गादी पाट(दीवान) का स्थान पीछे होना चाहिए।
12)सामाजिक रूप से कम रसूखदार,अप्रसिध्द या सामान्य बन्धु यदि कोई नूतन रूप में👉 जन गणना (पारिवारिक डायरेक्टरी), मेट्रिमोनियल वैवाहिक साइट, सीरवी हेल्प लाइन या सम्पूर्ण सीरवीयों को एक प्लेटफार्म पर लाने संबंध ऑनलाइन ऐप/पोर्टल/पेज/वेब साइट बनाता है, तो उसका प्राइवेसी के खतरे, डाटा की चोरी,बैंकिंग खाते की हैकिंग का डर बताकर एवम् सीरवी महासभा की अनुमति न लेने का खौफ दिखाकर,तबीयत से विरोध किया जाता है।
तात्पर्य यह कि न तो कोई सामाजिक कार्य करना हैऔर न ही करने देना है।इस प्रकार की अकर्मण्यता,जड़ बद्धता और ऐसी विरोधितापूर्ण नकारात्मकता से समाज को रसातल में ले जाने से बचाने के लिए💪 युवा शक्ति, ऊर्जावान युवा एवम नव युवकों को आगे आकर, स्वयं सारथी की बागडोर थामकर, पहल के रूप में चालन(driving) करने से ही मंजिल प्राप्ति रूपी युगानुकुल परिवर्तन हो सकेगा।
[{भगवान सिंह परिहार,व्याख्याता(भौतिकी),इंदौर,MP,📞9926877105}]